शनिवार, 16 अगस्त 2008

फलित ज्योतिष : विज्ञान या अंधविश्वास astrology, jyotish , rashifal,forecast, 2014



फलित ज्योतिष विज्ञान है या अंधविश्वास ? इस बात का उत्तर दे पाना किसी भी विचारधारा के व्यक्ति के लिए कठिन है। परंपरावादी और अंधविश्वासी विचारधारा के लोग , जो आगे बढ़ने की होड़ में अपनी कमजोरियों को दूर करने के लिए चमत्कारों की अंधी गलियों और सुरंगों में चलकर यानि कई स्थान पर ज्योतिष में विश्वास करने के कारण धोखा खा चुके हैं , भी इस शास्त्र पर संदेह नहीं करते ,सारा दोषारोपण ज्योतिषी पर ही होता है। वैज्ञानिकता से संयुक्त विचारधारा से ओत-प्रोत व्यक्ति भी किसी मुसीबत में पड़ते ही समाज से छुपकर ज्योतिषियों के शरण में जाते देखे जाते हैं।

ज्योतिष की इस विवादास्पद स्थिति के लिए मै सरकार शैक्षणिक संस्थानों और पत्रकारिता विभाग को दोषी मानती हूं। इन्होनें आजतक ज्योतिष को न तो विज्ञान ही सिद्ध किया और न ही अंधविश्वास। सरकार यदि ज्योतिष को अंधविश्वास समझती , तो जन्मकुंडली बनवाने या जन्मपत्री मिलवाने के काम में लगे ज्योतिषियों पर कानूनी अड़चनें आ सकती थीं। यज्ञ हवन करवाने तथा तंत्र-मंत्र का प्रयोग करनेवाले ज्योतिषियों के कार्यों में बाधा उपस्थित हो सकती थी। सभी पत्रिकाओं में राfशफल के प्रकाशन में रोक लगाया जा सकता था। आखिर हर प्रकार की कुरीतियों और अंधविश्वासों , जैसे जुआ , मद्यपान , बालविवाह , सती प्रथा , आदि को समाप्त करने में सरकार ने कोई कसर नहीं छोड़ी , पर ज्योतिष पर विश्वास करनेवालों पर कोई कड़ाई नहीं हो सकी। आखिर क्यो ?

क्या सरकार ज्योतिष को विज्ञान समझती है ? नहीं , अगर वह इसे विज्ञान समझती , तो इस क्षेत्र में कार्य करनेवालों के लिए कभी-कभी किसी प्रतियोगिता , सेमिनार आदि का आयोजन होता तथा विद्वानों को पुरस्कारों से सम्मानित कर पोत्साहित किया जाता। परंतु आजतक ऐसा कुछ भी नहीं किया गया। पत्रकारिता के क्षेत्र में देखा जाए , तो लगभग सभी पत्रिकाएँ यदा-कदा ज्योतिष से संबंधित लेख इंटरव्यू भविष्यवाणियॉ आदि निकालती रहती है , पर जब आजतक इसकी वैज्ञानिकता के बारे में कोई निष्कर्ष ही नहीं निकाला जा सका , जनता को कोई संदेश ही नहीं मिल पाया , तो ऐसे लेखों का क्या औचित्य ?इस तरह मूल तथ्य की परिचर्चा के अभाव में फलित ज्योतिष को जाने-अनजाने काफी नुकसान हो रहा है।

वास्‍तव में 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' प्रकृति के ही एक रहस्‍य से आपको परिचित करवाती है, प्रकृति के नियमों को समझकर विभिन्‍न संदर्भों में विभिन्‍न समयांतरालों में आपको कठिन और सुखमय परिस्थितियों की जानकारी देता है। उससे जो तालमेल बिठाएगा , उसकी जीत होगी क्‍योंकि उसको किसी भी परिस्थिति से विपत्ति से भय नहीं होगा। प्रकृति के विरोध में रहने वाले , तालमेल न रखने वाले और अहंकार भयभीत और हारे हुए होते हैं । कहा भी गया है ..... 

दुख में सुमिरन सब करे सुख में करे ना कोई। 
जो सुख में सुमिरन करे दुख काहे को होई।।

11 टिप्‍पणियां:

मिथिलेश श्रीवास्तव ने कहा…

संगीता जी, क्या मेरे बारे में कोई भविष्यवाणी कर सकती हैं,गत्यात्मक ज्योतिष के आधार पर ? मेरी जन्म तिथि है- 14 जनवरी 1983 समय है- सुबह 5 बजकर 25 मिनट, स्थान- दोहरीघाट, मऊ, उ.प्र.

शहरोज़ ने कहा…

khoob aap jamkar kaam kar rahi hain.aapka blog nisandeh zara hatkar hai.

http://shahroz-ka-rachna-sansaar.blogspot.com/
http://hamzabaan.blogspot.com/
http://saajha-sarokaar.blogspot.com/

Amit Pachauri (अमित पचौरी) ने कहा…

आप यदि ज्योतिष से सम्बंधित कुछ तथ्य, प्रमाण प्रस्तुत कर सकें तो निस्संदेह इससे आपके उद्देश्य को सफलता प्राप्त होगी, एवं हमारे संदेह भी दूर हो सकेंगे ।

GIRISH BILLORE MUKUL ने कहा…

vah naya kuchh milaa
badhai or abhar

राज भाटिय़ा ने कहा…

संगीता जी आप हे तो ग्याणी,फ़िर भी मे एक बात आप से कहना चाहूगा की, आप ने जॊ कन्हॆया लाल जी की फ़ोटो साईट मे लगाई हे बहुत सुन्दर हे, उस के लिये धन्यवाद, लेकिन जो उस के नीचे
लिखा हे **आप भी इस का इस्तेमाल करे** यह शव्द कुछ गलत लगता हे ,इस की जगह आप लिख सकते हे इसे अपने ब्लाग पर स्थान दे,या फ़िर कोई सम्मान युक्त शव्द ..
आप बुरा ना माने , धन्यवाद

संगीता पुरी ने कहा…

राज भाटिय़ा जी ,मुझे एक साईट पर कोड मिला। मैने वह कापी पेस्ट कर दी। जब रिजल्ट देखना चाहा तो कुछ दिखला रहा था , मैने यूं ही छोड़ दी। आज जब ब्लाग को खोला , तो मुझे रिजल्ट के रूप में फोटो भी दिखाई पड़ी और साथ ही साथ आपकी टिप्पणी भी। मै तुरंत इसे ठीक करने की कोशिश करती हूं।

sangeeta ने कहा…

sangeeta puri ji,
aapne mera blog dekha achchha laga. aapka blog dekh kar ek utsukta jaag gayi hai. main aapka blog tasalli se padhoongi. mere blog par aane ka shukriya.
aapke gyan se kuchh zaroor seekhna chaahoongi.
aabhaar

G M Rajesh ने कहा…

pratibandh koi avdharanaa nahi hai

ek baar ki baat hai raja ne pratibandh lagu kiya aur arth-dand dene ki vyavasthaa ki yah theek prakaar lagu hua par pratibandhit-karm satat chalte rahe.

usne jooth kahne wale ko fansi chadhaane ka aadesh lagu kiya.
ek sadhu ne kaha rajaa kal fansi ke takht ke paas milte hain.
raja pahuncha to sadhu bola raaja tum muze fansi de rahe ho, agar tum nahi doge to meri baat jhoothi ho jaayegi aur doge to sachchi.
ab bataao esa kanoon banakar kya tum khud uljhan men nahi?

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन ने कहा…

संगीता जी, बहुत अच्छा और संतुलित लेख है!

संगीता पुरी ने कहा…

मिथिलेश श्रीवास्तवजी , शहरोजजी , अमित पचौरीजी , गिरीश बिल्लौरेजी , राज भाटियाजी , संगीताजी , जी एम राजेशजी , स्मार्ट इंडियनजी ,मेरे ब्लाग में आने और टिप्पणी करने का आपको बहुत बहुत शुक्रिया। मिथिलेश श्रीवास्तवजी , आपके बारे में भविष्यवाणी कहां भेजी जाए।

मिथिलेश श्रीवास्तव ने कहा…

बहुत दिनों बाद आपके ब्लॉग पर आया इसके लिए माफी चाहूंगा...मेरा ई-मेल है - mithilesh.srivastava@gmail.com इसी पर भेज दीजिए! बहुत बहुत शुक्रिया!