मंगलवार, 26 अगस्त 2008

ज्योतिष पर युग का प्रभाव astrology, jyotish , rashifal,forecast, 2014


पृथ्वी के स्वरुप , वायुमंडल , तापमान एवं इसमें स्थित पर्वतों , नदियों , चट्टानों , वनों सभी में कुछ न कुछ परिवर्तन देखा जा रहा है। मनुष्य में तो यह परिवर्तन अन्य प्राणियों की तुलना में और तेजी से हुआ है , इसलिए ही यह सर्वाधिक विकसित प्राणी है। पर्यावरण् के हजारों , लाखों वर्षों के इतिहास के अध्ययन में यह बात पाया गया है कि प्रकृति में होनेवाले परिवर्तन और वातावरण में होनेवाले परिवर्तन के अनुरुप जो जड़-चेतन अपने स्वरुप और स्वभाव में परिवर्तन ले आते हैं , उनका अस्तित्व बना रह जाता है। विपरीत स्थिति में उनका विनाश निfश्चत है।करोड़ों वर्ष पूर्व डायनासोर के विनाश का मुख्य कारण पर्यावरणवेत्ता यह बताते हैं कि वे पृथ्वी के तापमान के अनुसार अपना समायोजन नहीं कर सकें।

इस प्रकार सभी शास्त्रों और विभिन्न भाषाओं के साहित्य पर युग का प्रभाव पड़ते देखा गया है। नीतिशास्त्र युग के साथ परिवर्तित नीतियों की चर्चा करता है। राजनीतिशास्त्र में भी अलग युग और परिस्थिति में भिन्न भिन्न सरकारों केमहत्व की चर्चा की जाती है। औषधि-शास्त्र भी अपनी औषधियों में हमेशा परिवर्तन लाता रहा है। जमाने और आर्थिक स्थिति की भिन्नता के साथसाथ अलग प्रकार की पैथी लोकप्रिय होती रहीं। आर्थिक नीतियॉ भी समय और वातावरण के अनुरुप अपने आपको परिवर्तत करती रहीं। किन्तु आज हजारों वर्ष व्यतीत होने तथा ज्योतिष के क्षेत्र में हजारो लोगों के समर्पित होने के बावजूद ज्योतिष शास्त्र की जितनी भी पत्रिकाएँ आ रही हैं , वे पुराने श्लोकों , उनके अनुवादों और पुराने अनुभवों पर आधारित होती हैं। हजारो वर्ष पूर्व और अभी के लोगों की मानसिकता में जमीन आसमान का फर्क आया है। हर क्षेत्र में लोगों का दृfष्टकोण बदला है , तो क्या ज्योतिष के नियमों में कोई परिवर्तन नहीं होना चाहिए ? जिस प्रकार हर विज्ञान के इतिहास का महत्व है , उसी प्रकार ज्योतिष शास्त्र के इतिहास का भी महत्व होना चाहिए , पर यदि हम हजारों वर्ष पूर्व के ग्रंथों के हिन्दी अनुवाद पढ़ते रहें , तो आज के युग के अनुसार सही भविष्यवाणी नहीं कर सकते। समाज और वातावरण के अनुसार अपने को न ढाल पाने से जब डायनासोर का अस्तित्व नहीं रहा , तो क्या ज्योतिष विज्ञान का रह पाएगा।

2 टिप्‍पणियां:

Manoshi ने कहा…

अच्छे ज्योतिषी देश काल पात्र के सिद्धांत को हमेशा याद रखते हैं।

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

पर यदि हम हजारों वर्ष पूर्व के ग्रंथों के हिन्दी अनुवाद पढ़ते रहें , तो आज के युग के अनुसार सही भविष्यवाणी नहीं कर सकते

वक्त के साथ हर चीज़ में बदलाव ज़रूरी होता है ..अच्छी और सार्थक बात