शुक्रवार, 5 सितंबर 2008

कुंडली मिलाने की वैज्ञानिकता astrology, jyotish , rashifal, forecast, 2014



परंपरागत ज्योतिष में किसी भी लड़के या लड़की की जन्मकुंडली में लग्न भाव , व्यय भाव , चतुर्थ भाव , सप्तम भाव या अष्टम भाव में मंगल स्थित हो , तो उन्हें मांगलिक कहा जाता है और ऐसे मंगल का प्रभाव बहुत ही खराब माना जाता है। यहॉ तक कि यदि पति मंगला हो , तो पत्नी का नाश तथा पत्नी मंगली हो , तो पति का नाश करती है। संभावनाबाद की दृष्टि से इस बात में कोई वैज्ञानिकता नहीं है। किसी कुंडली में बारह भाव होते हैं और पॉच भाव में मंगल की स्थिति को अनिष्टकर बताया गया है। इस तरह समूह का 5/12 भाग यानि लगभग 41 प्रतिशत लोग मांगलिक होते हैं। लेकिन यदि समाज में ऐसे लोगों पर ध्यान दिया जाए , जिनकी आपस में नहीं बनती या जिनकी पति या पत्नियाँ मर गयी हों , तो हम पाएंगे कि उनकी संख्या सैकड़ों या हजारों में भी एक नहीं है।
मंगला-मंगली के अतिरिक्त ज्योतिष की पुस्तकों में कुंडली मिलाने के लिए एक कुंडली मेलापक सारणी का उपयोग किया जाता है। इस सारणी से केवल चंद्रमा के नक्षत्र-चरण के आधार पर लड़के और लड़कियों के मिलनेवाले गुण को निकाला जाता है , जो पूर्णतया अवैज्ञानिक है , क्योंकि उनके स्वभाव , व्यक्तित्व , और भविष्य का निर्धारण सभी ग्रह करते हैं .
आज घर-घर में कम्प्यूटर और इंटरनेट के होने से मंगला-मंगली और कुंडली मेलापक की सुविधा से दो बायोडाटा को डालकर उनका मैच देखना काफी आसान हो जाने से यह और बड़ी समस्या बन गयी है। इसके चक्कर में अच्छे-अच्छे रिश्ते हाथ से निकलते देखे जाते हैं। उन दो बायोडाटा को डालकर देखने से , जिनकर बिना कुंडली मिलाए शादी हुई है और काफी अच्छी निभ रही है तथा जिनकी कुंछली मिलाकर शादी हुई है और नहीं निभ रही है , कम्प्यूटर और उसमें डाले गए प्रोग्राम की पोल खोली जा सकती है। इतने सारे जन्मकुंडली में किए गए रिसर्चों के बाद हमारा लोगों से अनुरोध है कि वे पुरानी मान्यताओं पर ध्यान दिए बिना , कुंडली मेलापक की चर्चा किए बिना अपने बच्चों का विवाह उपयुक्त पार्टनर ढूँढकर करें। किसी मंगला और मंगली की शादी भी सामान्य वर या कन्या से निश्चिंत होकर की जा सकती है।

3 टिप्‍पणियां:

shabd nirantar ने कहा…

aapke lekhon ko padhkar achha laga isi tarah likhte rahen

shabd nirantar ने कहा…

aapke lekhon ko padhkar achha laga isi tarah likhte rahen

नारायण प्रसाद ने कहा…

अच्छा होता यदि वक्तव्य की पुष्टि के लिए कुछ जीवन्त उदाहरण दिए जाते ।

एक शोधकर्ता के मतानुसार मांगलिक तभी माना जाय जब मंगल केवल सातवें और आठवें घर में हो ।

क्या आपने इस बात का शोध किया है कि जिन-जिन व्यक्तियों के केस में मेलापक गलत सिद्ध हुआ है, उन-उन लोगों के जीवन में मंगल की महादशा उचित उम्र में आई थी भी या नहीं ?