रविवार, 21 सितंबर 2008

माता, चल-अचल संपत्ति, वाहन और ज्योतिष ( Astrology )



मानव जीवन के चौथे पक्ष के रुप में माता, मातृभूमि, चल-अचल संपत्ति, मकान, वाहन आदि संदर्भों को महत्वपूर्ण माना गया है । इन सबकी भी परिमाणात्मक विशेषताओं की चर्चा कर पाना फलित ज्योतिष में संभव नहीं है। किसी व्यक्ति का मकान कितना मंजिला होगा ? माता कैसी कद-काठी या रुप-रंग की होगी ? वाहन कौन सा होगा ? फैक्टरी किससे संबंधित होगी ? कोई खास भूमि या मकान जातक के लिए सुखद या दुखद होगी ? इन सब प्रश्नों का उत्तर कदापि नहीं दिया जा सकता । वास्तव में इस चौथे भाव से किसी व्यक्ति की स्थायित्व की स्थिति बतलायी जा सकती है, जो जातक के लिए सुखद या दुखद हो सकती है। किसी युग में एक ऐसी गुफा ही जातक को भरपूर स्थायित्व प्रदान करती थी, जिसमें जाड़े,गरमी और बरसात सभी ऋतुओं में वह आराम से रह पाता था और उसे गुफा को बदलने की जरुरत नहीं पड़ती थी, जबकि अन्यो को हर ऋतु में अपने रहने की जगह को बदलना पड़ जाता था। न सिर्फ गुफा को ही, वरन् किन्ही-किन्ही जातियों को तो हर ऋतु में अपने क्षेत्र को ही छोड़ने को मजबूर होना पड़ता था। इसी प्रकार यदि माता अपनी ही हो और उनसे विचारों का तालमेल न हो, तो कष्ट हो सकता है, जबकि सौतेली माता भी सुख प्रदान करनेवाली हो सकती है, इस हालत की एक ज्योतिषी भला किस प्रकार व्याख्या कर सकता है ? एक सामान्य किसान को एक कार पेट्रोल न भरा पाने का कष्ट प्रदान करेगी, जबकि एक बैलगाड़ी हर प्रकार का सुख, इसलिए उसके वाहन का अच्छा योग उसे बैलगाड़ी ही प्रदान करेगा । इस प्रकार हम उपरोक्त पक्षों के गुणात्मक पहलू की ही चर्चा कर सकते हैं।
फलित ज्योतिष के द्वारा हम यह बतला सकते हैं कि जातक को माता का भरपूर प्यार प्राप्त हो रहा है या फिर उसके हिस्से में माता की नफरत ही लिखी है ? उसकी माता और हर प्रकार की संपत्ति उसके जरुरत की पूर्तिकरनेवाले गुणों से युक्त है या वंचित ? उसे कदम-कदम पर माता या हर प्रकार की संपत्ति का सहयोग मिल पाता है या नहीं ? अपनी माता या हर प्रकार की संपत्ति से संबंधित मुद्दों को लेकर वह गंभीर है या नहीं ? हर प्रकार की संपत्ति उसके स्थायित्व को मजबूत बना रहीं हैं या फिर वे सब तनाव का ही कारण हैं ? वाहन उसकी समस्याओं को बढ़ानेवाली हैं या फिर आवश्यकताओं की पूर्ति करती हैं ? मकान आज की आवश्यकताओं के अनुरुप हैं या वह उसे विरासत की तरफ से मिले बोझ की तरह ढ़ोने को बाध्य है ? किसी प्रकार की संपत्ति को प्राप्त करने के लिए वह कितना महत्वाकांक्षी है ? इन बातों के अतिरिक्त फलित ज्योतिष के द्वारा यह भी बतलाया जा सकता है कि हर प्रकार की संपत्ति के कारण समाज में उसका क्या स्तर है तथा किस समयांतराल में संपत्ति से संबंधित मामले सुखद और किस समयांतराल में दुखद बनें रहेंगे ?
वास्तव में फलित ज्योतिष को एक सांकेतिक विज्ञान के रुप में परिभाषित किया जा सकता है। जैसे किसी जन्मकुंडली में मजबूत वाहन का योग प्राचीनकाल में हाथी, घोड़े आदि का संकेतक था, किन्तु आज वह मोटरसाइकिल, स्कूटर और कार का संकेत देता है। आज अमेरिका के हर व्यक्ति के पास मोटरगाड़ी है। क्या उनमें से सबका जन्म दुनिया के पिछड़े देशों में जन्म लेनेवाले मनुष्यों से अलग समय में हुआ है ?

11 टिप्‍पणियां:

सुमित प्रताप सिंह ने कहा…

सादर नमस्कार!

कृपया निमंत्रण स्वीकारें व अपुन के ब्लॉग सुमित के तडके (गद्य) पर पधारें। "एक पत्र आतंकवादियों के नाम" आपकी अमूल्य टिप्पणी हेतु प्रतीक्षारत है।

राज भाटिय़ा ने कहा…

धन्यवाद

कुन्नू सिंह ने कहा…

’आज अमेरिका के हर व्यक्ति के पास मोटरगाड़ी है। क्या उनमें से सबका जन्म दुनिया के पिछड़े देशों में जन्म लेनेवाले मनुष्यों से अलग समय में हुआ है ?"

पहले अमेरिका भी खूब पिछडा देश था। उनसे चालाक हमारी "हडप्पा" जाती के लोग अभी के लोग ईतना चालाक थे।(अभी भी भारत मे उनके कई कार्यों की नकल की जाती है)

बहुत अच्छा लेख।

कुन्नू सिंह ने कहा…

’आज अमेरिका के हर व्यक्ति के पास मोटरगाड़ी है। क्या उनमें से सबका जन्म दुनिया के पिछड़े देशों में जन्म लेनेवाले मनुष्यों से अलग समय में हुआ है ?"

पहले अमेरिका भी खूब पिछडा देश था। उनसे चालाक हमारी "हडप्पा" जाती के लोग अभी के लोग ईतना चालाक थे।(अभी भी भारत मे उनके कई कार्यों की नकल की जाती है)

बहुत अच्छा लेख।

अशोक पाण्डेय ने कहा…

फलित ज्‍योतिष के बारे में अच्‍छा जानकारी दे रही हैं, संगीता जी। आपके आलेखों को पढ़कर शायद हमें भी ज्‍योतिष का कुछ ज्ञान हो जाए :)

shama ने कहा…

Maine is vidyake baareme sahee jankaaree lenekee shayadhee kabhee koshish kee. Jin, jin, jyotishyon ne kabhee kuchh batayabhee to auronka nikala hoga sahee meraa nahee. Lekin aapke blogpe ab zyada gaur karungee..Koyi bhawishya jaanke use badal sakta hai??Ye prashn mujhe laga rehta hai...gar han, to phir uskaa badlaa huaa bhawishyahee dikhna chahiye...aise vichar aksar manme aate hain...inkaa jawab kaise mile??

वर्षा ने कहा…

आपका ब्लॉग कईयों को ज्योतिषी भी बना सकता है।

sachin ने कहा…

very nice blog...
http://shayrionline.blogspot.com/

Sanjeev ने कहा…

सार परक लेख है। यह भी उल्लेख करें कि ज्योतिष में फल विवेचन देश काल परिस्थिति को ध्यान में रखकर किया जाता है। गंभीर विषय पर अगंभीर टिप्पणियों से प्रभावित न हों। कृपया लिखना जारी रखें।

रश्मि प्रभा ने कहा…

is lekh ke maadhyam se jyotishi ki sahi tasweer lane ke liye badhaai

प्रदीप मानोरिया ने कहा…

सुंदर रचना धन्यबाद आपका हिन्दी ब्लॉग जगत में स्वागत है
आपको मेरे ब्लॉग पर पधारने का स्नेहिल आमंत्रण है