शुक्रवार, 5 सितंबर 2008

गत्यात्मक ज्योतिष की खोज astrology, jyotish , rashifal, forecast, 2014

विभिन्न ज्योतिषियों के भविष्यवाणी में एकरुपता के अभाव , जिसके कारण फलित ज्योतिष को अंधविश्वास की श्रेणी में रखा जाता है , के कारणों को ढूंढ़ने के क्रम में श्री विद्यासागर महथाजी के वैज्ञानिक मस्तिष्क को ज्योतिष की दोनों कमजोरियॉ दृष्टिगत हुई।
फलित ज्योतिष की पहली कमजोरी ग्रहों के शक्ति आकलण की थी। हजारो कुंडलियों का अध्ययन करने के पश्चात् 1981 में इन्होनें ग्रहों की गत्यात्मक शक्ति को ढूंढ निकाला। 
सूर्य और पृथ्वी से किसी ग्रह की कोणिक दूरी से उस ग्रह की गत्यात्मक शक्ति को प्रतिशत में निकाल पाने के सूत्र मिल जाने के बाद उन्होनें परंपरागत ज्योतिष को एक कमजोरी से छुटकारा दिलाया।
फलित ज्योतिष की दूसरा कमजोरी दशाकाल निर्धारण की पारंपरिक पद्धतियों में थी। अपने अध्ययन क्रम में उन्होने पाया कि ज्योतिष के प्राचीन ग्रंथों में वर्णित ग्रहों की अवस्था के अनुसार ही मानव जीवन पर उसका प्रभाव 12-12 वर्षों तक पड़ता है। जन्म से 12 वर्ष की उम्र तक चंद्रमा , 12 से 24 वर्ष की उम्र तक बुध , 24 से 36 वर्ष की उम्र तक मंगल , 36 से 48वर्ष की उम्र तक शुक्र , 48 से 60 वर्ष की उम्र तक सूर्य , 60 से 72 वर्ष की उम्र तक बृहस्पति , 72 से 84 वर्ष की उम्र तक शनि , 84 से 96 वर्ष की उम्र तक यूरेनस , 96 से 108 वर्ष की उम्र तक नेप्च्यून और 108 से 120 वर्ष की उम्र तक प्लूटो का प्रभाव मनुष्य पर पड़ता है। विभिन्न ग्रहों की एक खास अवधि में निश्चित भूमिका को देखते हुए ही `गत्यात्मक दशा पद्धति´ की नींव रखी गयी। अपने दशाकाल में सभी ग्रह अपने गत्यात्मक और स्थैतिक शक्ति के अनुसार ही फल दिया करते हैं।
उपरोक्त दोनों वैज्ञानिक आधार प्राप्त हो जाने के बाद भविष्यवाणी करना काफी सरल होता चला गया। `गत्यात्मक दशा पद्धति में नए-नए अनुभव जुड़ते चल गए और शीघ्र ही ऐसा समय आया , जब किसी व्यक्ति की मात्र जन्मतिथि , जन्मसमय और जन्मस्थान की जानकारी से उसके पूरे जीवन के सुख-दुख , और स्तर के उतार-चढ़ाव का लेखाचित्र खींच पाना संभव हो गया।धनात्मक और ऋणात्मक समय की जानकारी के लिए ग्रहों की सापेक्षिक शक्ति का आकलण सहयोगी सिद्ध हुआ।
 
 

9 टिप्‍पणियां:

राज भाटिय़ा ने कहा…

धन्यवाद सुन्दर जानकारी के लिये

parikshit ने कहा…

sangeeta ji mai pahali bar aapke blog ko pad raha hoon is liye sabse pahle 1 sawal aapse kya karam se badhkar kuch hai jo hume safalta de sakta hai?

बेनामी ने कहा…

sangeeta ji mai pahali bar aapke blog ko pad raha hoon is liye sabse pahle 1 sawal aapse kya karam se badhkar kuch hai jo hume safalta de sakta hai?

बेनामी ने कहा…

sangeeta ji mai pahali bar aapke blog ko pad raha hoon is liye sabse pahle 1 sawal aapse kya karam se badhkar kuch hai jo hume safalta de sakta hai?

उमेश कुमार ने कहा…

कुछ ऐसा कीजिए जिससे मेरे जैसे लोग इस पर विश्वास कर सकें।
शेष फ़िर कभी.....
www.kamiyaa.com

अनुराग ने कहा…

एक नया अनुभव आपके ब्लॉग पर आकर ......

parikshit ने कहा…

sangeeta ji aapne mere sawal ka jabvab nahi diya.........

योगेन्द्र मौदगिल ने कहा…

Behtar Shrinkhla.

संगीता पुरी ने कहा…

राज भाटियाजी ,परिक्षितजी , उमेश कुमारजी, अनुरागजी,योगेन्द्र मोदगिलजी, आपलोगो को बहुत बहुत धन्यवाद। हम कर्म तो करते हैं , पर हर वक्त परिस्थितियां एक जैसी नहीं होती। कभी बहुत ही खराब हालात में हमें संघर्ष करना पड़ता है और कभी काम करने के लिए बिल्कुल ही समतल रास्ता मिलता है हमें। कठिनाइयों में किए गए काम में कभी कभी पर्याप्त सफलता नहीं मिलती है , इस कारण मन कभी कभी काफी घबड़ा जाता है। लेकिन अच्छी बात है कि जैसे ही आपका अच्छा समय आता है , आपके सारे कार्यों का फल एक साथ मिल जाता है। गत्यात्मक ज्योतिष की सहायता से हम इसकी पूरी जानकारी रखकर प्रकृति के रहस्यों को जानते हुए संयम से रह पाते हैं।