मंगलवार, 18 नवंबर 2008

कमजोर चंद्रमाःअसाधारण व्यक्तित्व ( Astrology )


गत्यात्मक ज्योतिष में सूर्य से 40 डिग्री तक की दूरीवाले चांद को कमजोर माना जाता है , जिसके कारण बाल्यावस्था के वातावरण में किसी प्रकार की कमी रह जाती है , जिसे बच्चा मन ही मन महसूस करता है और बाद के जीवन में यदि अन्य ग्रह उसकी मदद करते हैं तो वह अपनी कमजोरी को दूर करने के लिए असाधारण कार्य कर डालता है और असाधारण व्यक्तित्व का स्वामी बन जाता है। इस प्रकार किसी महान व्यक्ति के व्यक्तित्व निर्माण में कमजोर चंद्रमा की बहुत बड़ी पृष्ठभूमि होती है—-.



झांसी की महारानी लख्मीबाई का जन्म संवत्1891 में कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष कह चतुर्दशी तिथि को तुला लग्न में हुआ था। इनका चंद्रमा दशम भावाधिपति कमजोर होकर लग्न में स्थित है , इसलिए उन्होनें बाल्यावस्था में शरीर और पिता के सुख में कमी का अहसास किया और इसकी क्षतिपूर्ति के लिए ऐसा असाधारण कार्य कर बैठी कि पूरी दुनिया उनके व्यक्तित्व का लोहा मानती है और प्रतिष्ठा देती है।



महात्मा गांधी का जन्म 02.10.1869 को तुला लग्न में ही हुआ था , चंद्रमा दशम भावाधिपति एकादश भाव में स्थित है , इस कारण बचपन में लाभ और प्रतिष्ठा की कमी महसूस की आर ऐसा असाधारण कार्य कर डाला कि पूरी दुनिया इनके लाभ प्राप्ति के तरीके की इज्जत करती है।



पं रविन्द्र नाथ टैगोर का जन्म 07.05.1861 में मीन लग्न में हुआ था , कमजोर चंद्रमा बुद्धि का अधिपति लग्न में स्थित है , इसलिए बाल्यावस्था की शारीरिक और बौद्धिक कमजोरी को दूर करने के लिए बाद में असाधारण पुस्तकें लिखकर असाधारण व्यक्तित्व के स्वामी बन गए।



हैदर अली शाह ने दिसम्बर 1772 में तुला लग्न और वृश्चिक राशि में जन्म लिया था , यानि कमजोर चंद्रमा दशम भावाधिपति द्वितीय भाव में स्थित था। इन्होनें बाल्यावस्था में पिता , प्रतिष्ठा और धन तीनों की कमी को महसूस किया और बाद के जीवन में तीनों को ही मजबूती दे सकें।



श्री आदि शंकराचार्य ने कर्क लग्न में जन्म लिया था , इनका लग्नाधिपति कमजोर चंद्रमा लाभ स्थान में स्थित था , जिसके कारण बाल्यावस्था में शारीरिक कष्ट और लाभ की कमी को महसूस किया और बाद में शरीर लाभ का असाधारण कार्य कर बैठे।



स्वर्गीय देवकी नारायण खत्रीजी का जन्म संवत् 1924 पौष कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को मिथुन लग्न में हुआ था , द्वितीय भावाधिपति चंद्रमा कमजोर होकर षष्ठ भाव में स्थित है, जिसके कारण इन्होनें बाल्यावस्था में झंझटों , पेचीदगियों जैसी समस्याओं के कारण आर्थिक कमजोरी महसूस की और बाद में अनेक जासूसी और तिलिस्मी उपन्यास लिखे , जिनसे उन्हें आर्थिक लाभ हुआ।



रामकृष्ण परमहंसजी का जन्म 18.02.1836 को कुंभ लग्न में हुआ था , इनका षष्ठ भावाधिपति चंद्रमा कमजोर होकर लग्न में स्थित है , जिसके कारण बाल्यावस्था में इन्होनें शारीरिक और अन्य जटिलताओं को महसूस किया और बाद में मोक्ष की प्राप्ति हेतु असाधारण कार्य कर बैठे।



मथुरा के प्रसिद्ध सुख संचारक कंपनी के मालिक पं क्षेत्रपाल शर्माजी ने कुंभ लग्न और मकर राशि के अंतर्गत जन्म लिया था , षष्ठ भावाधिपति चंद्रमा द्वादश भाव में स्थित था , जिसके कारण बाल्यावस्था में रोगों की उपस्थिति और क्रयशक्ति की कमजोरी का अनुभव किया और बाद में विश्व स्तर पर लोकप्रिय होनेवाली असाधारण दवाइयां निकाली।



भगवान रजनीश का जन्म 11.12.1931 को कुंभ लग्न में हुआ था , इनका भी षष्ठ भावाधिपति चंद्रमा एकादश भाव में स्थित है , इस कारण बाल्यावस्था में अनेक प्रकार के झंझटों के कारण लाभप्राप्ति के लिए अपने को कमजोर पाया और बाद में लाभप्राप्ति के अनोखे मार्ग को चुना तथा असाधारण व्यक्तित्व के स्वामी बनें।



फिल्म स्टार अमिताभ बच्चन का जन्म 10.10.1942 को मीन लग्न मे हुआ था , पंचम भावाधिपति चंद्रमा कमजोर होकर अष्टम भाव में स्थित है , जिसके कारण बाल्यावस्था में बौद्धिक और जीवनशैली की कमजोरी महसूस की और उसे दूर करने के लिए असाधारण कार्य कर असाधारण व्यक्तित्व के स्वामी बनें।

18 टिप्‍पणियां:

mehek ने कहा…

waah bahut hi achhi jankari rahi,itana gehra asar hota hai chandrama ka jeevan par,bahut khub

Shastri ने कहा…

यदि गत्यात्मक ज्योतिष के बारे में कुछ कोर्स अपने चिट्ठे पर दे सकें तो पाठकों को विषय सीखने में मदद मिलेगी. स्वाध्यायी कोर्स सबसे अच्छा रहेगा.

अन्तर सोहिल ने कहा…

संगीता जी नमस्ते
झांसी की रानी का जन्म 19-11-1835 को हुआ था।

अन्तर सोहिल ने कहा…

झांसी की रानी का जन्म 19-11-1835 को हुआ था। आपने 1891 में लिखा है।

संगीता पुरी ने कहा…

महक जी , शास्‍त्री जी , अंतर सोहिलजी,
मेरे ब्‍लाग में आने और टिप्‍पणी देने के लिए धन्‍यवाद। रानी लक्ष्‍मीबाई का जन्‍म सन नहीं , वरन संवत 1891 में हुआ था। यह हिन्‍दी पंचांगों का वर्ष होता है और अंग्रेजी कैलेण्‍डर से 56 या 57 वर्ष आगे चलता है।

कुन्नू सिंह ने कहा…

बहुत बढीया जानकारी।
गांधी जी ने आसाधारण कार्य कीये।

यानी चंद्रमा का असर लाभदायक है।

Gyan Dutt Pandey ने कहा…

चलिये, आपका ब्लॉग पढ़ते पढ़ते कुछ समझने लगेंगे!

बेनामी ने कहा…

aapka lekh achhchha hai par neech ke chandra ke vishay me jaankaari nahi hai. kripya yeh batye ki yadi chandrama neech ka athva vargottam neech ka ho to kya prabhav hoga? dhanyavad

संगीता पुरी ने कहा…

कुन्‍नु सिंह जी , ज्ञानदत्‍तजी और बेनामी जी , मेरे ब्‍लाग में आने और टिप्‍पणी करने के लिए बहुत बहुत धन्‍यवाद। गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष के अनुसार सभी ग्रहों की शक्ति का रहस्‍य उसकी सूर्य से कोणत्‍मक दूरी और ग्रहों की अपनी गति में ही छुपा हुआ है। किसी भी स्‍थान में उसकी स्थिति से कोई प्रभाव नहीं पडता है। गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष के अनुसार ग्रह नीच और उंच के भी नहीं होते हैं।

पुष्प कुलश्रेष्ठ ने कहा…

संगीता जी ,
सभी जन्म पत्रिकाओ में लगन व लग्नेश की स्तिथी अच्छी है

राज भाटिय़ा ने कहा…

संगीता जी बहुत ही सुन्दर जानकारी दी आप ने , बहुत ही सुन्दर लगता है आप को पढना .
धन्यवाद

राहुल सि‍द्धार्थ ने कहा…

इतनी सार्गर्भित जानकारी के लिए बहुत-बहुत शुक्रिया.आगे भी इस प्रकार की जानकारी की आपसे उम्मीद

Zakir Ali 'Rajneesh' ने कहा…

इस पोस्‍ट के बहाने रोचक जानकारियॉं भी मिलीं, शुक्रिया।

योगेन्द्र मौदगिल ने कहा…

आदरणीया नमस्कार
शास्त्री जी की बात पर ध्यान अवश्य दें
मेरी भी रुचि है
शेष शुभ

संगीता पुरी ने कहा…

पुष्‍प कुलश्रेष्‍ठजी , राज भाटियाजी ,राहूल सिद्धार्थ जी , जाकिर अली रजनीश जी और योगेन्‍द्र मौदगिल जी ,
मेरे ब्‍लाग में आने मेरे विचारों को पढने और टिप्‍पणी करने के लिए बहुत बहुत धन्‍यवाद। शास्‍त्रीजी की कही बातें मेरे मन में पहले से है ,पर वे मेरे दो वर्ष बाद के कार्यक्रम हैं। मैने उन्‍हे जो पत्र लिखा है , आज ब्‍लाग पर भी वही बातें लिख रही हूं ---

नमस्‍कार शास्‍त्रीजी ,
वास्‍तव में गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष मेरे पिताजी के चालीस पचास वर्षों के निरंतर अघ्‍ययन , मनन और चिंतन का प्रतिफल है और उसको कुछ लेखों से नहीं समझाया जा सकता है। दो वर्ष तक मै अपने पारिवारिक जिम्‍मेदारियों में व्‍यस्‍त हूं । किन्‍तु उसके शीघ्र बाद लोगों में ज्‍योतिष के इस वैज्ञानिक स्‍वरूप का सिर्फ प्रचार प्रसार और ज्ञान बांटने का काम ही करना है।
संगीता पुरी

अशोक पाण्डेय ने कहा…

बहुत दिनों बाद आपसे ज्‍योतिष के बारे में कुछ जानने का अवसर मिला। धन्‍यवाद।

प्रदीप मानोरिया ने कहा…

मेरी रूचि अब ज्योतिष मैं बढ़ने लगी है

SANJAY SINGH ने कहा…

वास्तव में आपका लेखन अद्वितेएय है। लेकिन मुझे तो रोमन मे पढना पढत है। मेरे सिस्टम पर न जाने क्यो बस आपका ब्लोग हिन्दि मे नही दिखता है।