गुरुवार, 7 अगस्त 2008

ज्योतिष में प्रवेश astrology, jyotish , rashifal,forecast, 2014



कोई व्यक्ति जन्म से ही मजबूत शरीर , व्यक्तित्व , धन , गुण , स्वभाव ,परिस्थितियॉ और साधन प्राप्त करता है और कोई जीवनभर यह सब प्राप्त करने के लिए आहें भरता है और कोई कई प्रकार की शारिरिक और मानसिक विकृतियों को लेकर ही जन्म लेता है। जरा सोंचिए , इसको किसका प्रभाव कहा जा सकता है ? जिसे वैज्ञानिक वर्ग संयोग या दुर्योग कहते हैं , वह प्रकृति की एक सोंची समझी हुई चाल होती है।आज कृत्रिम उपग्रहों ने यह सिद्ध कर दिया है कि संपूर्ण ब्रह्मांड में स्थित आकाशीय पिंडों से अनंत प्रकाश की किरणें का जाल बिछा होता है , और पृथ्वी पर ऐसी कोई चीज नहीं , जो इसके प्रभाव से अछूती रह जाए। फिर ग्रहों के प्रभाव से कोई अछूता कैसे रह सकता है ? समुद्र में लहरो का उतार चढ़ाव और अन्य कई प्राकृतिक घटनाएं चंद्रबल के सापेक्ष हुआ करती है।

मनोवैज्ञानिकों का यह कहना कि ज्योतिष पर विश्वास एक अंधविश्वास है , जो मानसिक दुर्बलता का लक्षण है , बिल्कुल गलत है। मेहनत से काम करनेवाला व्यक्ति अकस्मात् किसी दुर्घटना का fशकार क्यों हो जाता है ? कोई छोटा बालक क्यो अनाथ हो जाता है ? कोई व्यक्ति पागलपन या किसी असाध्य रोग से क्यों ग्रस्त हो जाता है ? मेरे हिसाब से इन सब प्रश्नों के उत्तर किसी मनोवैज्ञानिक के पास नहीं होंगे। हजारों वर्षों से विद्वानों द्वारा अध्ययन-मनन और चिंतन के फलस्वरुप मानव मन-मस्तिष्क एवं अन्य जड़-चेतनों पर ग्रहों के पड़नेवाले प्रभाव के रहस्य का खुलासा होता जा रहा है , हॉ यह सत्य अवश्य है कि पूर्णता मनुष्य की नियति में नहीं है , लेकिन पूर्णता की खोज मनुष्य के स्वभाव का अंग है , नहीं तो इतिहास आदिम काल से एक ही करवट बैठा होता। 

आज जरुरत है , धर्म , कर्मकांड और ज्योतिष का गंभीर अध्ययन-मनन करके सही तत्वों को जनता के सम्मुख लाने की। केवल पूर्वाग्रह से ग्रस्त होकर सारे नियमों को गलत मान लेना बेवकूफी ही होगी। भविष्य की थोड़ी भी जानकारी देने के लिए फलित ज्योतिष के सिवा दूसरी कोई विद्या सहायक नहीं हो सकती। जरूरी नहीं कि हमें शत प्रतिशत ही जानकारी हो , पर यदि किसी व्‍यक्ति के भविष्‍य के बारे में हम सटीक संकेत दे सकते हैं तो कम बडी बात नहीं , इसका फायदा अवश्‍य उठाएं । पर भविष्‍य को बदल देने का दावा करने वाले ज्‍योतिषियों के चंगुल में न फंसे , जानकारी के बाद सभी ग्रहों की चाल के हिसाब से अपनी जीवनशैली को ढाला जा सकता है , ग्रह के प्रभाव को बदला नहीं जा सकता, यह 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' का खास रिसर्च है, जिसे प्रमाणित किया जा सकता है। हम जल्‍द ही एक सर्वे लेकर आ रहे हैं , जिससे इस सिद्धांत की पुष्टि हो सकती है। अधिक से अधिक मित्र सर्वे में खुद भी भाग लेकर और अपने मित्रों को भी भाग दिलाकर हमारी मदद करेंगे , ऐसा हमें पूरा विश्‍वास है।