सोमवार, 22 सितंबर 2008

बुद्धि, ज्ञान और संतान और ज्योतिष ( Astrology )



मानव जीवन के पॉचवें पक्ष के रुप में फलित ज्योतिष बुद्धि, ज्ञान और संतान की चर्चा करता है। किन्तु इसके अंतर्गत किसी जातक को प्राप्त होने वाले ज्ञान या संतान पक्ष की व्याख्या नहीं की जा सकती। कोई व्यक्ति किस तरह के गुणों से युक्त है ? वह कितनी डिग्रियाँ प्राप्त कर चुका है ? वह किस क्षेत्र का विशेषज्ञ है ? उसके कितनी संताने हैं ? कितने लड़के या कितनी लड़कियॉ हैं ? संतान को कितनी डिग्रियाँ प्राप्त हो चुकी हैं ? संतान विवाहित हैं या अविवाहित ? इन सब प्रश्नो का जवाब कदापि नहीं दिया जा सकता, जिसका कारण स्पष्ट है। विकसित प्रदेशों या परिवारों में जहॉ बच्चे स्कूली पढ़ाई करते हैं, अविकसित प्रदेशों या परिवारों के बच्चे अभी भी परंपरागत शिक्षाएं ही ले रहे होते हैं, जबकि दोनो तरह के बच्चों की जन्मकुंडली एक सी हो सकती हैं। स्कूली पढ़ाई पूरी करने के बाद सामान्य परिवार के बच्चे किसी प्रकार की नौकरी या व्यवसाय में संलग्न होते हैं, जबकि अच्छे परिवार के बच्चे उच्चस्तरीय शिक्षा प्राप्त करने के लिए बाहर निकलते हैं। इस तरह युवावस्था में प्रवेश करते ही अपने-अपने परिवार के स्तर के हिसाब से ही सभी जातक रोजगार में संलग्न हो जाते हैं । वैसा ही पुन: उनके बच्चों के साथ भी होता है ? क्या वास्तव में जन्मकुंडली के हिसाब से ही उनका जन्म वैसे परिवारों में होता है ? नहीं । इसलिए किसी भी व्यक्ति की जन्मकुंडली से उसके क्षेत्र या उससे संबंधित डिग्री प्राप्त करने के बारे में कुछ नहीं बतलाया जा सकता। आज प्रोफेशनल डिग्रियों के बिना मल्टीनेशनल कंपनियों में उच्च पद प्राप्त नहीं किया जा सकता है, जो कि उच्चस्तरीय परिवारों के बच्चों को आराम से मिल जा रही है। क्या निम्न स्तर के परिवार के एक प्रतिशत बच्चे का जन्म उस अवधि में नहीं होता है, जो इन्हें इन डिग्रियों से युक्त करे ?
किन्तु बुद्धि, ज्ञान या संतान से संबंधित कुछ बातें ऐसी हैं, जो किसी भी परिस्थिति या परिवेश की मुहंताज नहीं, ये बातें हैं, जातक की आई क्यू या ध्यान संकेन्द्रण से संबंधित। हम अकसरहा किसी व्यक्ति के प्रकृतिप्रदत्त बुद्धि या प्रतिभा की बातें करते हैं, इसका पता जन्मकुंडली देखकर लगाया जा सकता है। कोई व्यक्ति बुद्धिमान है या नहीं ? उसमें सीखने की प्रवृत्ति है या नहीं ? अपनी बुद्धि का पूरा उपयोग कर रहा है या नहीं ? किसी ज्ञान को सीखने में वह आनंद का अनुभव करता है या कष्ट का ? अपने ज्ञान को प्राप्त करने में या संतान पक्ष के मामलों में उसका ध्यान संकेंद्रित है या नहीं ? अपने बुद्धि, ज्ञान या संतान पक्ष से संबंधित मामलों में वह कितना महत्वाकांक्षी है ? उसे ज्ञानप्राप्ति में सुविधाएं प्राप्त हो रही हैं या और बाधाएं आ रही हैं ? इन सबकी चर्चा जन्मकुंडली देखकर की जा सकती है। ये बात अलग है कि बुद्धि और आई क्यू की मजबूती के बावजूद कोई गरीब परिवार का बच्चा उतनी उंचाई हासिल न कर सके, जितना कि औसत दर्जे के बुिद्ध और आई क्यू से युक्त अमीर परिवार का बच्चा।में पहले भी एक लेख में बता चुकी हूँ कि किसी किसान या व्यवसायी का उत्तम संतान पक्ष लड़के की संख्या में बढ़ोत्तरी कर सकता है, ताकि वे बड़े होकर परिवार की आमदनी बढ़ाएं, किन्तु एक ऑफिसर के लिए उत्तम संतान का योग संतान के गुणात्मक पहलू को बढ़ाएगा। किसी जन्मपत्र में कमजोर संतान का योग एक किसान के लिए आलसी, बड़े व्यवसायी के लिए ऐयाश और एक ऑफिसर के लिए बेरोजगार बेटे का कारण बनेगा।

रविवार, 21 सितंबर 2008

माता, चल-अचल संपत्ति, वाहन और ज्योतिष ( Astrology )



मानव जीवन के चौथे पक्ष के रुप में माता, मातृभूमि, चल-अचल संपत्ति, मकान, वाहन आदि संदर्भों को महत्वपूर्ण माना गया है । इन सबकी भी परिमाणात्मक विशेषताओं की चर्चा कर पाना फलित ज्योतिष में संभव नहीं है। किसी व्यक्ति का मकान कितना मंजिला होगा ? माता कैसी कद-काठी या रुप-रंग की होगी ? वाहन कौन सा होगा ? फैक्टरी किससे संबंधित होगी ? कोई खास भूमि या मकान जातक के लिए सुखद या दुखद होगी ? इन सब प्रश्नों का उत्तर कदापि नहीं दिया जा सकता । वास्तव में इस चौथे भाव से किसी व्यक्ति की स्थायित्व की स्थिति बतलायी जा सकती है, जो जातक के लिए सुखद या दुखद हो सकती है। किसी युग में एक ऐसी गुफा ही जातक को भरपूर स्थायित्व प्रदान करती थी, जिसमें जाड़े,गरमी और बरसात सभी ऋतुओं में वह आराम से रह पाता था और उसे गुफा को बदलने की जरुरत नहीं पड़ती थी, जबकि अन्यो को हर ऋतु में अपने रहने की जगह को बदलना पड़ जाता था। न सिर्फ गुफा को ही, वरन् किन्ही-किन्ही जातियों को तो हर ऋतु में अपने क्षेत्र को ही छोड़ने को मजबूर होना पड़ता था। इसी प्रकार यदि माता अपनी ही हो और उनसे विचारों का तालमेल न हो, तो कष्ट हो सकता है, जबकि सौतेली माता भी सुख प्रदान करनेवाली हो सकती है, इस हालत की एक ज्योतिषी भला किस प्रकार व्याख्या कर सकता है ? एक सामान्य किसान को एक कार पेट्रोल न भरा पाने का कष्ट प्रदान करेगी, जबकि एक बैलगाड़ी हर प्रकार का सुख, इसलिए उसके वाहन का अच्छा योग उसे बैलगाड़ी ही प्रदान करेगा । इस प्रकार हम उपरोक्त पक्षों के गुणात्मक पहलू की ही चर्चा कर सकते हैं।
फलित ज्योतिष के द्वारा हम यह बतला सकते हैं कि जातक को माता का भरपूर प्यार प्राप्त हो रहा है या फिर उसके हिस्से में माता की नफरत ही लिखी है ? उसकी माता और हर प्रकार की संपत्ति उसके जरुरत की पूर्तिकरनेवाले गुणों से युक्त है या वंचित ? उसे कदम-कदम पर माता या हर प्रकार की संपत्ति का सहयोग मिल पाता है या नहीं ? अपनी माता या हर प्रकार की संपत्ति से संबंधित मुद्दों को लेकर वह गंभीर है या नहीं ? हर प्रकार की संपत्ति उसके स्थायित्व को मजबूत बना रहीं हैं या फिर वे सब तनाव का ही कारण हैं ? वाहन उसकी समस्याओं को बढ़ानेवाली हैं या फिर आवश्यकताओं की पूर्ति करती हैं ? मकान आज की आवश्यकताओं के अनुरुप हैं या वह उसे विरासत की तरफ से मिले बोझ की तरह ढ़ोने को बाध्य है ? किसी प्रकार की संपत्ति को प्राप्त करने के लिए वह कितना महत्वाकांक्षी है ? इन बातों के अतिरिक्त फलित ज्योतिष के द्वारा यह भी बतलाया जा सकता है कि हर प्रकार की संपत्ति के कारण समाज में उसका क्या स्तर है तथा किस समयांतराल में संपत्ति से संबंधित मामले सुखद और किस समयांतराल में दुखद बनें रहेंगे ?
वास्तव में फलित ज्योतिष को एक सांकेतिक विज्ञान के रुप में परिभाषित किया जा सकता है। जैसे किसी जन्मकुंडली में मजबूत वाहन का योग प्राचीनकाल में हाथी, घोड़े आदि का संकेतक था, किन्तु आज वह मोटरसाइकिल, स्कूटर और कार का संकेत देता है। आज अमेरिका के हर व्यक्ति के पास मोटरगाड़ी है। क्या उनमें से सबका जन्म दुनिया के पिछड़े देशों में जन्म लेनेवाले मनुष्यों से अलग समय में हुआ है ?