शुक्रवार, 28 नवंबर 2008

आज दो बजे से पांच बजे के मध्‍य आप कहां होंगे ? ( Astrology )

ज्‍योतिष सही है या गलत ? विज्ञान है या अंधविश्‍वास ? यह सिर्फ तर्कों से सि‍द्ध नहीं की जा सकती। हर मुददे में पक्ष और विपक्ष दोनो के पास बडे बडे तर्क होते हैं। ज्‍योतिष को विज्ञान न सिद्ध कर पाने में भी अभी तक विपक्ष के लोगों को कोई सफलता नहीं मिल पायी है। लोग उनकी बातें भला क्‍यों सुनेंगे ? ज्‍योतिष को विज्ञान सिद्ध कर पाने में भी अभी तक पक्ष के लोगों को सफलता नहीं मिल पायी है , इसलिए इनकी बात भी लोग नहीं सुनते। आज इस एक आलेख के द्वारा मै इसे विज्ञान सिद्ध करने की दिशा में एक छोटा सा कदम उठा रही हूं । मै मात्र यह दिखाना चाहती हूं कि ग्रहों का प्रभाव मानव जीवन पर पडता है, इसे आप स्‍वीकारे। आशा है, आप जैसे सुधी पाठकों का सहयोग मुझे अवश्‍य मिलेगा।


कई ग्रहों की खास स्थिति के गड़बड़ प्रभाव को देखते हुए गत्यात्मक दृष्टि से आज 28 नवम्‍बर 2008 को पूरे दिन का समय अच्छा नहीं माना जा रहा है , वैसे आज बहुत सारे शुभ कार्यों के बनने की भी संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता , पर उसका समय 6 बजे से 8 बजे शाम के लगभग का होगा।6 से 8 बजे के मध्‍य भी किसी को सफलता , तो किसी को असफलता का सामना करना पडेगा। फिर भी आज किसी भी शुभ काम को करने के क्रम में काफी चिड़चिड़ाहट महसूस हो सकती है , जिसके कारण दिनभर का वातावरण पूरे विश्व के लिए काफी सुखद नहीं होगा। चूंकि मेरे 90 प्रतिशत पाठक भारत से ही हैं इसलिए यदि भारत के लिए इस योग को देखा जाए , तो इसका खास प्रभाव आज 2 बजे से 5 बजे तक महसूस किया जा सकता है। इस समय आप किसी भी कार्य को करने का कार्यक्रम न ही बनाए , तो अच्छा है , क्योंकि इस अवधि में कई प्रकार की समस्याएं उपस्थित होकर वातावरण को दुखद बनाएगी , अपने.अपने जन्मकुंडली के हिसाब से हर व्यक्ति इस योग की तीव्रता में भिन्नता महसूस करेंगे , किसी को बड़े , तो किसी को छोटे रूप में संकट का सामना करना पड़ सकता है , पर जनसामान्य के लिए वातावरण में छोटी.मोटी निम्न प्रकार की समस्याएं आएंगी -----.




काम में बेवजह देरी होने से झुंझलाहट।
अपने वाहन का अचानक खराब हो जाना।
अपने वाहन के लिए लम्बा इंतजार करना।
महत्वपूर्ण कार्य के समय बिजली का चले जाना।
बच्चों की छोटी गल्ती का भी काफी बडा बन जाना।
किसी कार्य में अनिश्चितता की स्थिति का बना रहना।
किसी काम के लिए लंबे क्यू में लगने की बाध्यता।
अचानक कार्य की भीड़ से अस्तव्यस्तता महसूस करना।
बाजार या किसी प्रकार का काम करने के बाद पश्चाताप।
सामनेवाले से विचार के तालमेल के अभाव से निष्कर्ष पर न पहुंच पाना।