सोमवार, 12 जनवरी 2009

किशोरावस्‍था में आप बहिर्मुखी व्‍यक्तित्‍व वाले थे या नहीं ? ( Astrology )

यूं तो सीखने के लिए सारी उम्र कम पड जाती है , नित्‍य नए नए अनुभव जीवन भर हमारी योग्‍यता को बढाते रहते हैं , पर इसके बावजूद मानव जीवन में किशोरावस्‍था यानि 12 वर्ष से 24 वर्ष की उम्र को ही ज्ञानार्जन का प्रमुख काल माना जा सकता है , क्‍योंकि भविष्‍य में जीवनयापन के लिए जिस पेशे का चुनाव हमें करना पडता है , उसकी नींव किसी न किसी तरह इसी काल में पड जाती है। इस समय विद्दार्थियों को जैसा माहौल मिलता है , उसी के अनुरूप उनका स्‍वभाव अंतर्मुखी , बहिर्मुखी या संतुलित बन जाता है। इसे निश्चित करने में ग्रहों की खास भूमिका को हमने महसूस किया है।


कभी कभी कुछ ग्रहों की खास स्थिति ऐसी बन जाती है कि उस समय जन्‍म लेनेवाले सभी बच्‍चों की जन्‍मकुडली में उनके बहिर्मुखी होने का योग उत्‍पन्‍न हो जाता है। इस योग के कारण ही कुछ किशोरों के समक्ष किशोरावस्‍था में यानि 12 वर्ष की उम्र से 24 वर्ष की उम्र तक , खासकर 12 वर्ष से 18 वर्ष की उम्र तक की पूरी परिस्थितियां सुखद और आरामदायक बनी होती हैं । यदि न भी हो , तो ये अपने आराम की व्‍यवस्‍था कर ही लेते हैं।किसी भी प्रकार की शिक्षा , विद्दा या बौद्धिक विकास को बहुत ही सहज भाव में खेल खेल में ही अर्जित करने के पक्षधर होते हैं। परीक्षा का परिणाम जो भी मिले , इससे वे संतुष्‍ट रहते हैं। कभी दिन रात परिश्रम की बात ये सोंच भी नहीं पाते। बुद्धि के तीक्ष्‍ण होने से हाजिरजवाब होने के कारण ये किसी भी समस्‍या का हल तुरंत ढूंढ पाने में समर्थ होते हैं। अपने बुद्धि-बल या सूझ-बूझ के प्रति इतने आत्‍मविश्‍वासी और इस हद तक स्‍पष्‍टवादी होते हैं कि कहीं भी अपनी बात रखने से नहीं चूकते। ये भीड के आगे ही आगे रहनेवाले , अपने बाल साथियों के नेता , मिलनसार , साहसी , मनोरंजनप्रिय और आधुनिकता की नकल करने में काफी तेज होते हैं। कर्तब्‍यों और नियमों के प्रति बेरूखी रखनेवाले ये लोग मनमौजी होते हैं , पर अपने अधिकारों के प्रति वे काफी सजग होते हैं। 18 वर्ष की उम्र तक यह स्‍वभाव बहुत अधिक देखा जाता है , पर उसके बाद धीरे धीरे अधिकांश किशोरों में यह स्‍वभाव परिवर्तित होने लगता है , जबकि कुछ किशोरों में यह प्रवृत्ति बढ भी जाती है ।



गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष द्वारा विकसित किए गए एक विशेष सिद्धांत के आधार पर 1950 से 1994 तक की खास खास तिथियों को पाठको के लिए प्रस्‍तुत किया जा रहा है ,जिस दिन जन्‍म लेने वाले न सिर्फ सारे लोगों में किशोरावस्‍था में ही बहिर्मुखी व्‍यक्तित्‍व शत प्रतिशत दिखाई पडा रहा होगा , बल्कि उसके पंद्रह दिन पहले से लेकर पंद्रह दिन बाद तक जन्‍म लेनेवालों में भी ये गुण बडे प्रतिशत में अवश्‍य देखने को मिलेगा। इन तिथियों से जितने ही दूर लोगों का जन्‍म हुआ होगा , उनमें बहिर्मुखी होने का स्‍वभाव क्रमश: कम होता चला जाएगा। ये तिथियां निम्‍न हैं………



1950 में 28 मार्च , 8 जुलाई और 1 नवम्‍बर ,
1951 में 11 मार्च , 26 जून और 13 अक्‍तूबर ,
1952 में 23 फरवरी , 9 जून और 23 सितम्‍बर ,
1953 में 3 फरवरी , 27 मई और 7 सितम्‍बर ,
1954 में 9 जनवरी , 8 मई , 21 अगस्‍त और 29 दिसम्‍बर,
1955 में 22 अप्रैल , 6 अगस्‍त और 5 दिसम्‍बर ,
1956 में 6 अप्रैल , 20 जुलाई और 12 नवम्‍बर ,
1957 में 20 मार्च , 4 जुलाई और 23 अक्‍तूबर ,
1958 में 4 मार्च , 18 जून और 4 अक्‍तूबर ,
1959 में 7 फरवरी , 3 जून और 16 सितम्‍बर ,
1960 में 26 जनवरी , 17 मई और 31 अगस्‍त ,
1961 में 5 जनवरी , 2 मई , 14 अगस्‍त और 15 दिसम्‍बर ,
1962 में 16 अप्रैल , 30 जुलाई और 23 नवम्‍बर ,
1963 में 31 मार्च 15 जुलाई और 5 नवम्‍बर ,
1964 में 11 मार्च , 27 जून और 16 अक्‍तूबर ,
1965 में 24 फरवरी , 11 जून और 27 सितम्‍बर ,
1966 में 5 फरवरी , 27 मई और 10 सितम्‍बर ,
1967 में 17 जनवरी , 12 मई और 24 अगस्‍त ,
1968 में 1 जनवरी , 25 अप्रैल , 7 अगस्‍त और 6 दिसम्‍बर,
1969 में 8 अप्रैल , 1 अगस्‍त , और 16 नवम्‍बर ,
1970 में 22 मार्च , 7 जुलाई और 27 अक्‍तूबर ,
1971 में 6 मार्च , 20 जून और 8 अक्‍तूबर ,
1972 में 16 फरवरी , 5 जून और 19 सितम्‍बर ,
1973 में 27 जनवरी , 20 मई और 2 सितम्‍बर ,
1974 में 7 जनवरी , 4 मई , 17 अगस्‍त और 20 दिसम्‍बर ,
1975 में 18 अप्रैल , 1 अगस्‍त और 28 नवम्‍बर ,
1976 में 1 अप्रैल , 15 जुलाई और 8 नवम्‍बर ,
1977 में 14 मार्च , 29 जून और 18 अक्‍तूबर,
1978 में 26 फरवरी , 14 जून और 30 सितम्‍बर,
1979 में 9 फरवरी , 29 मई और 13 सितम्‍बर ,
1980 में 19 जनवरी , 12 मई , 26 अगस्‍त और 26 दिसम्‍बर,
1981 में 28 अप्रैल , 10 अगस्‍त और 11 दिसम्‍बर ,
1982 में 12 अप्रैल , 26 जुलाई और 18 नवम्‍बर ,
1983 में 26 मार्च , 9 जुलाई और 31 अक्‍तूबर,
1984 में 9 मार्च , 23 जून और 11 अक्‍तूबर,
1985 में 19 फरवरी , 7 जून और 22 सितम्‍बर,
1986 में 2 फरवरी , 21 मई और 5 सितम्‍बर,
1987 में 9 जनवरी , 7 मई , 20 अगस्‍त और 22 दिसम्‍बर,
1988 में 20 अप्रैल , 3 अगस्‍त और 1 दिसम्‍बर,
1989 में 4 अप्रैल , 18 जुलाई और 30 अक्‍तूबर ,
1990 में 13 मार्च , 2 जुलाई और 21 अक्‍तूबर,
1991 में 1 मार्च , 16 जून और 3 अक्‍तूबर ,
1992 में 13 फरवरी , 27 मई और 15 सितम्‍बर ,
1993 में 22 जनवरी , 16 मई और 29 अगस्‍त,
1994 में 4 जनवरी , 30 अप्रैल , 12 अगस्‍त , 15 दिसम्‍बर,



उपरोक्‍त लोगों में से जहां 1984 से पहले जन्‍म लेनेवालों में अब ऐसा स्‍वभाव बहुत कम (क्‍योंकि ये 24 वर्ष की उम्र व्‍यतीत कर चुके) और 1990 के पहले जन्‍म लेनेवालों में धीरे धीरे कम हो रहा होगा (क्‍योंकि ये 18 वर्ष की उम्र व्‍यतीत कर चुके) , वहीं 1990 में जन्‍म लेनेवाले सभी‍ किशोरों में अभी ये स्‍वभाव अपनी चरम सीमा पर दिखाई देगा(क्‍योंकि ये 18 वर्ष की उम्र के हैं)। 1991 से लेकर 1994 तक वालों में उपरोक्‍त स्‍वभाव धीरे धीरे बढता हुआ दिखाई पडेगा (क्‍योंकि ये 18 वर्ष से कम उम्र के हैं)।


पाठको से निवेदन है कि वे इस लेख को मात्र एक आलेख के रूप में न लेकर गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष के द्वारा किए जानेवाले सर्वे के रूप में लेंगे और अपने अपने मित्रों और परिवार के अन्‍य सदस्‍यों की जन्‍मतिथि को देखते हुए हमारे परिणामों के साथ मिलाकर हमें सूचना अवश्‍य देंगे। इसके लिए ‘गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिषीय अनुसंधान केन्‍द्र’ उनका आभारी रहेगा।



(अगले आलेख में जातक के अंतर्मुखी होने के योग की चर्चा की जाएगी)

19 टिप्‍पणियां:

dhiru singh {धीरू सिंह} ने कहा…

मैं ६ सितम्बर १९७१ को ११.३० बजे हुआ . मै बहिर्मुखी हूँ पर कभी कभी अन्तर्मुखी स्वभाव हावी हो जाता है मेरी सहयता करें

Dr.Parveen Chopra ने कहा…

अच्छा लगा. लेख को सहेज लिया है।

जितेन्द़ भगत ने कहा…

वि‍स्‍तृत और अच्‍छी जानकारी दी आपने। आभार।

सुशील कुमार ने कहा…

कम से कम मेरे जन्म-तिथि के अनुसार आपका आकलन सही है।

hem pandey ने कहा…

रोचक जानकारी. साधुवाद.

Dr. Vijay Tiwari "Kislay" ने कहा…

"किशोरावस्‍था में आप बहिर्मुखी व्‍यक्तित्‍व वाले थे या नहीं ?" आलेख की भाषा ने मुझे प्रभावित किया
इस आलेख को पढ़ कर लोग निश्चित रूप से स्वयं को पहचान के ज्योतिष पर विशवास भी करेंगे , ऐसा मैं सोचता हूँ
फिलहाल मेरी पत्नी के अलावा कोई भी नही है जो तिथि के निकट हो, शायद यही कारण है कि वो ज्यादा बहिर्मुखी नहीं है .
- विजय

"अर्श" ने कहा…

( 26 feb )itna to ab tay hai ke main bhi ab bahirmukhi me shamil hun.....dhanywad aapka ...




regards
arsh

राज भाटिय़ा ने कहा…

बहुत सुंदर जानकारी, इसे दोबारा आज रात को फ़ुरसत मै ध्यान से पढुगां.
धन्यवाद

loving soul ने कहा…

मेरी रचना पर आपकी टिपण्णी के लिए धन्यवाद्। कृपया पुनः पधारें

seema gupta ने कहा…

वि‍स्‍तृत और अच्‍छी जानकारी दी आपने।

regards

कंचन सिंह चौहान ने कहा…

आपका शीर्षक ही मुझे आकर्षित कर गया। क्यों कि हम पाँचों भाई बहनो बहिर्मुखी, मिलनसार और नेतृत्व के गुण वाले हैं। लेकिन हाँ एक बात थी अधिकार बोध अधिक और कर्तव्य बोध कम वाली बात के प्रतिशत कम और ज्यादा था। और अब तो दूसरी पीढ़ी के भी १२ लोग शामिल हो गए हैं। इसलिये मुझे विश्लेषण करने में यूँ भी बहुत आराम रहता है। इस हिसाब से मै कह सकती हूँ कि ८० प्रतिशत आँकड़े सही ही थे आपके ।

Gyan Dutt Pandey ने कहा…

हम तो न बहिर्मुखी थे और न उक्त तिथियों में आते हैं!

vinay ने कहा…

kishoravastha main bhairmukhi tha,par baad main antarmukhi hota chala gya mera janam ki tarikh 6 august 1952 hai.
meri baty ki janam ki tarikh 23 may 1979 hai woh bhairmukhi hai.

रंजना [रंजू भाटिया] ने कहा…

बहुत बढ़िया जानकारी दी है आपने .बहुत रोचक है यह शुक्रिया

डुबेजी ने कहा…

sangeeta puri ji sadar namaskar , sabse pehle mere cartoons par tippaniyon ke liye dhanyawad , apka blog dekha aur usme kho gaya , sach kahoon to ye mera favourite subject hai aur bahoot kuch janna samajhna hai mujhe , apke dwara di gayee jankariyan rochak lagi . regards

महेंद्र मिश्रा ने कहा…

bahut badhiya janakari jyotishtis ke haisab se . abhaar.

SWAPN ने कहा…

sangeeta ji namaskaar bahut achchi jaankari di.dhanyawad

समयचक्र - महेद्र मिश्रा ने कहा…

सुन्दर
आपके मकर संक्रन्ति पर्व की बहुत बहुत शुभ कामनाऍं

संगीता पुरी ने कहा…

आप सबों को टिप्‍पणी करने के लिए बहुत बहुत धन्‍यवाद।