गुरुवार, 12 फ़रवरी 2009

मौसम की भविष्‍यवाणी की एक बडी विधा ( Astrology )

वसंत के मौसम में इस कोहरे ,ठंड,बारिशऔरबर्फबारीके कारण किसानों , यात्रियों और अन्‍य लोगों को जितना भी नुकसान हो रहा हो , पर आकस्मिक रूप से उत्‍पन्‍न हुए दो चार दिनों के मौसम पर और मौसम से संबंधित खबरों के कारण मेरी भविष्‍यवाणियों के सत्‍य होने से मुझे तो एक बार फिर गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष को विज्ञान साबित कर पाने में कामयाबी मिल गयी है , इससे इंकार नहीं किया जा सकता । इससे पहले 2 और 3 जनवरी के मौसम के बारे में की गयी मेरी भविष्‍यवाणीभी सटीक साबित हो चुकी है। 9 और 10 फरवरी के विशेष ग्रहीय योग के कारण मौसम में जो परिवर्तन की बात कही गयी थी , वह बोकारो में 9 फरवरी तक नहीं देखी जा सकी थी । यूं तो मेरे ईमेल में आए कई पत्र यत्र तत्र मौसम के बदलने की जानकारी दे रहे थे , पर मैंने 9 फरवरी को दिनभर बालकनी में आ आकर आसमान को देखते हुए और टी वी खोलकर मौसम की खबरे सुनते हुए व्‍यतीत कर दी थी , पर पूरे भारतवर्ष में मौसम का एक खास खबर बनकर न आ पाना मेरे गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष के साथ साथ मेरे आत्‍मविश्‍वास को भी कमजोर बना रहा था। मौसम के मामले में बोकारो का देर से प्रभावित होना भी अक्‍सर मुझे परेशान कर देता है। ऐसी स्थिति में हमेशा ही मेरे पति और बच्‍चे मुझे और तंग करना आरंभ कर देते हैं कि जिस बात पर मैं कन्‍फर्म रहूं , वैसी ही भविष्‍यवाणी करूं , क्‍यो मैं इतना रिस्‍क लेकर डेट देकर भविष्‍यवाणी किया करती हूं । अब मैं दूसरे को क्‍या समझा सकती हूं कि किसी भी सिद्धांत की प्रामाणिकता तो उससे संबंधित तिथि के साथ ही होने से हो सकती है और इसमें अपवाद की संभावना तो रहती ही है , हालांकि मौसम से संबंधित भविष्‍यवाणी की हमारी बहुत पुरानी खोज है और अभी तक इसमें अपवाद देखने को नहीं मिला है , पर फिर भी शब्‍दकोष में अपवाद शब्‍द होने का मतलब ही है कि यह कहीं भी किसी रूप में आ सकता है।


इसी स्थिति में मुझे याद आ गया वह दिन , जब मैने मौसम से संबंधित इस गत्‍यात्‍मक सिद्धांत की जानकारी प्राप्‍त की थी। शायद 2000 की बात थी , जब अप्रैल या मई में मेरे पिताजी बोकारो पहुंचे थे। उनके आने की खबर सुनकर यहां के कुछ पत्रकार उनसे मिलने आए , नजदीक में राजनीति का कोई बडा मुददा उपस्थित नहीं होनेवाला था , जबकि दो दिनों बाद भयंकर आंधी तूफान के आने की संभावना थी , इसलिए पिताजी ने उनके समक्ष यही भविष्‍यवाणी की थी । गर्मी के महीने में धूप की मौजूदगी में कोई ऐसी भविष्‍यवाणी करे , तो अचंभा तो होता ही है , पर मै उस बारे में आश्‍वस्‍त नहीं थी । दूसरे दिन रात काफी देर तक वे टी वी पर न्‍यूज देखते रहें , मौसम विभाग की ओर से भी ऐसी कोई भविष्‍यवाणी नहीं दी गयी थी। मध्‍य रात्रि में अचानक बडे जोर के आंधी , तूफान , बादलों के गरजने और पानी के बरसने से मेरी नींद टूटी , तो मैं टी वी का केबल हटाने टी वी वाले उसी कमरे में गयी , जहां मेरे पिताजी सोए हुए थे , क्‍योकि उस समय एंटीना से हमलोग टी वी देखते थे । पिताजी ने कहा कि उन्‍होने रात को ही केबल हटा दिया था , क्‍योंकि ग्रहों की यह स्थिति थी और इसके कारण रात मौसम में गडबडी आने की संभावना थी। यह मेरे लिए बहुत बडा आश्‍चर्य था , क्‍योकि गर्मी का दिन था इसलिए सामान्‍य स्थिति में टी वी का केबल हटाने का कोई प्रश्‍न ही नहीं था। इसके बाद तो मौसम से संबंधित सारे सिद्धांतों को सिखाए बिना मैने उन्‍हें बोकारों से जाने ही नहीं दिया और तब से ही मौसम से संबंधित मेरी भविष्‍यवाणियों में कभी अपवाद देखने को नहीं मिला।

उपर की घटना आपको अतिशयोक्ति भी लग सकती है , पर ऐसा नहीं है। एक ही साथ हम पूरे वर्ष की ऐसी तिथियों से अवगत करा सकते हैं। एक बात और , मौसम के बारे में भविष्‍यवाणी कर पाने का एक भी फार्मूला प्राचीन पुस्‍तकों से नहीं लिया गया है , क्‍योकि 2 और 3 जनवरी तथा 9 और 10 फरवरी के दिन आसमान में ग्रहों की स्थिति को किसी भी पारंपरिक पद्धति से एक जैसा नहीं कहा जा सकता है। इन तिथियों में समानता है , तो सिर्फ सारे ग्रहों की गत्‍यात्‍मक शक्ति की , जिसे सिर्फ और सिर्फ गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिषीय अनुसंधान केन्‍द्र द्वारा विकसीत किया गया है। अब आगे बढते हैं , 1 से 4 मई 2009 , गर्मियों का दिन है , पर गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष का दावा है कि उस समय लगभग पूरे भारतवर्ष में मौसम गडबड रहेगा । सरकार का अरबों रूपए खर्च करने के बावजूद मौसम विभाग तीन महीने पहले इस प्रकार की कोई भविष्‍यवाणी नहीं कर सकता , पर जहां भविष्‍यवाणी की एक बडी विधा विकसित की जा चुकी है ,उसे बुद्धिजीवी वर्ग अंधविश्‍वास कहकर देश का कितना बडा नुकसान कर रहे हें ,वे नहीं बता सकते।

13 टिप्‍पणियां:

इष्ट देव सांकृत्यायन ने कहा…

घाघ की कहावतों में भी मौसम विज्ञान की बडी बारीक बातें बताई गई हैं. हालांकि उन्होंने ग्रहों के बजाय प्रकृति के विभिन्न अवयवों और उनके सजग विश्लेषण को आधार बनाया है, पर बातें बहुत सटीक बैठती हैं.

धीरेन्द्र ने कहा…

आपका आत्मविश्वास आपकी ज्योतिषीय विधा की गहराई को स्पष्ट करता है। आपके लेख की प्रतीक्षा रहती है।

रंजना [रंजू भाटिया] ने कहा…

आपने जो मौसम के बारे में लिखा था वह सही हुआ ..इस विधा को समझने कि जरुरत है ..आप रोचक ढंग से लिखती है इस लिए जानने कि उत्सुकता रहती है ....शुक्रिया

Arvind Mishra ने कहा…

1 से 4 मई 2009 -इन्तजार रहेगा सगीता जी ! देखते हैं ! अभी तो लम्बा अन्तराल है !

Rahul kundra ने कहा…

" बेशक कुछ बदले या न बदले लेकिन हमें कोशिश तो करनी चहिये। एक दिया अगर ये सोच ले की उसके जलने से सारी दुनिया नही रोशन होगी तो यकीं मानिये दुनिया में बहुत अंधेरा हो जाएगा। "

राज भाटिय़ा ने कहा…

संगीता जी, बहुत सुंदर लगा आप का यह लेख, हमारे यहां जमीदार मोसम का हाल बता देते है, जो काफ़ी हद तक ठीक होता है, ओर मोसम विभाग वालो का की बार गलत भी हो जाता है, लेकिन मान गये आप कॊ .
धन्यवाद

कंचन सिंह चौहान ने कहा…

इतने विरोधों के बाद बी आपका जो आत्मविश्वास है, वो आपकी ईमानदारी का प्रतीक है...! आप यूँ ही आगे बढ़ती रहें..!

शुभकामनाए

योगेन्द्र मौदगिल ने कहा…

उत्कृष्ट जानकारी से भरे आलेख के लिये साधुवाद स्वीकारें........... अपवादों से ना घबरायें.......... शेष शुभ............

sareetha ने कहा…

तथ्य परक जा्नकारी देने का शुक्रिया । आप तो अपनी धुन में मगन काम करते रहिए । छोडे गये निशान खुद ही प्रमाण होते हैं । लिखा हुआ सफ़लता की कहानी का अमिट निशान है । जब बातें साबित होंगी ,तब आपको कुछ साबित करने की ज़रुरत नहीं होगी ।

Abhishek ने कहा…

Hamara paramparik gyan aaj bhi kafi sateek hai, aur aap to ismeiein apne anubhav aur shodh ko bhi jod le rahi hain.
1-4 mai ka reminder laga le raha hun. Shubhkaamnayein.

Poonam ने कहा…

आपका पिछला लेख पढ़ा था और घर पर किसी ने स्वेटर वगैरह रखने की बात कही तो मैंने आपका ज़िक्र किया की अभी नहीं. १० फरवरी की रात लखनऊ में बारिश हुई . यूँ ही हमारा ज्ञानवर्धन करती रहिये.

विष्णु बैरागी ने कहा…

आपका आत्‍म विश्‍वास, आपका ब्‍लाग पढने का अतिरिक्‍त कारण है।

वरुण अग्रवाल ने कहा…

सच बताऊँ तो मैं ज्योतिष में अधिक विश्वास नहीं रखता. लेकिन अगर आपका आलेख सही है, तो मैं काफी विस्मित हूँ! मुझे १ - ४ मई का इंतज़ार है..

आप रोचक लेख लिखती हैं ! अगर कल मेरा इंटरव्यू न होता तो पूरा ब्लॉग पढ़े न जाता. कभी मेरी वेबसाइट पे भी पधारें!