मंगलवार, 24 फ़रवरी 2009

जन्मकुंडली बनाम् कर्मकुंडली ( Astrology )

लोगों के मन में ज्‍योतिष के प्रति गलत धारणाएं होती हैं। अक्‍सर लोग एक प्रश्‍न किया करते हैं कि आखिर जब ग्रह ही सब कुछ निर्धारित करते हैं , तो फिर कर्म का क्‍या महत्‍व है ? उन्‍हें मैं समझाना चाहूंगी कि मानव जीवन में ग्रहों का प्रभाव तो है , क्‍योंकि आपके सामने जो भी परिस्थितियां उत्‍पन्‍न होती हैं , वह इन्‍हीं ग्रहों के परिणामस्‍वरूप ,इसलिए उसे आपकी जन्‍मकुंडली के अनुसार प्राप्‍त फल कह सकते हें , पर इनसे लडकर खुद की या समाज के अन्‍य लोगों के मेहनत से जो उपलब्धियां आप हासिल करते हैं , वह आपकी कर्मकुंडली के अनुसार होता है। जन्‍मकुंडली और कर्मकुंडली के मुख्‍य अंतर को आपके समक्ष इस प्रकार रखा जा सकता है।

जहां जन्मकुंडली को निश्चित करने में जातक के जन्म के समय भचक्र के विभिन्न कोणों पर स्थित ग्रहों की भूमिका होती है , वहीं कर्मकुंडली को निश्चित करने में जातक के भौगोलिक परिवेश के साथ.साथ युग के परिवर्तन का भी प्रभाव होता है। जन्मकुंडली सांकेतिक तौर पर ही सही , पूरे जीवन की परिस्थितियों का विश्लेषण करती है , जबकि कर्मकुंडली वास्तविक तौर पर , लेकिन सिर्फ भूत और वर्तमान तक का। जातक के लिए जन्मकुंडली निश्चित् होती है , जबकि कर्मकुंडली अनिश्चित। जहां जन्मकुंडली को निश्चित करने में जातक की परिस्थितियां जिम्मेदार होता है , वहीं कर्मकुंडली को निश्चित करने में सामाजिक ,पारिवारिक , राजनीतिक , धार्मिक और आर्थिक वातावरण के साथ.साथ व्यक्ति खुद भी जिम्मेदार होता है। जन्मकुंडली के अनुसार जातक की रूचि होती है , जबकि कर्मकुंडली के अनुसार जातक का खान.पान और रहन.सहन। जन्मकुंडली से व्यक्ति के स्वभाव का पता चलता है , जबकि कर्मकुंडली से व्यवहार का।


जन्मकुंडली से स्वास्थ्य का पता चलता है , जबकि कर्मकुंडली से शरीर के वजन का। जन्मकुंडली से धन के प्रति दृष्टिकोण का पता चलता है , जबकि कर्मकुंडली से धन की मात्रा का। जन्मकुंडली से भाई.बहन ,बंधु.बांधव से संबंध का पता चलता है , जबकि कर्मकुंडली से भाई.बहन ,बंधु.बांधव की संख्या का। जन्मकुंडली से माता के सुख और उनसे मिलनेवाले सहयोग का पता चलता है , जबकि कर्मकुंडली से माता के पद और उनकी स्थिति का। जन्मकुंडली से हर प्रकार की संपत्ति से मिलनेवाले सुख या दुख का पता चलता है , जबकि कर्मकुंडली से हर प्रकार की संपत्ति के स्तर का। जन्मकुंडली से दिमाग की क्रियाशीलता और एकाग्रता का पता चलता है , जबकि कर्मकुंडली से दिमाग की मजबूती और विविध प्रकार की डिग्रियों का। जन्मकुंडली से विविध प्रकार के रोगों से लड़ने की शक्ति या रोगग्रस्तता का पता चलता है , जबकि कर्मकुंडली से बीमारियों के नाम का। जन्मकुंडली से ऋणग्रस्तता के होने या न होने का पता चलता है , जबकि कर्मकुंडली से ऋण की मात्रा का।

जन्मकुंडली से दाम्पत्य जीवन के सुखमय या दुखमय होने का पता चलता है , जबकि कर्मकुंडली से विवाह की उम्र या पार्टनर के कद.काठी और पद का। जन्मकुंडली से जीवनशैली के सुखमय या दुखमय होने या जीवनी शक्ति का पता चलता है , जबकि कर्मकुंडली से जीवन जीने के स्तर या जातक की उम्र का। जन्मकुंडली से भाग्य या धर्म के प्रति सोंच या नजरिए का पता चलता है , जबकि कर्मकुंडली से किसी धर्म को अपनाने का । जन्मकुंडली से रूचि और स्तर के अनुरूप कैरियर के होने या न होने का पता चलता है , जबकि कर्मकुंडली से कैरियर की शाखा या पद का । जन्मकुंडली से अपने लक्ष्य के प्रति एकाग्र रहने या न रहने का पता चलता है , जबकि कर्मकुंडली से लक्ष्य के स्तर का। जन्मकुंडली से अपने खर्च के प्रति दृष्टिकोण का पता चलता है , जबकि कर्मकुंडली से खर्च कर पाने की मात्रा का। जन्मकुंडली से बाहरी स्थान में सफलता मिलने या न मिलने का पता चलता है , जबकि कर्मकुंडली से बाहरी स्थान में जा पाने या न जा पाने का।

जन्मकुंडली से भविष्य के छोटे से छोटे समयांतराल के बारे में सांकेतिक ही सही ,जानकारी प्राप्त की जा सकती है , किन्तु कर्मकुंडली में भविष्य बिल्कुल अनिश्चित होता है , कहा जाए कि सामने अंधेरा सा छाया होता है , तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। जन्मकुंडली देखकर हम ज्योतिषी जन्मकुंडली पर आधारित प्रश्नों के सांकेतिक ही सही , पर भूत , वर्तमान और भविष्य के हर प्रश्न का उत्तर दे सकते हैं , कर्मकुंडली पर आधारित प्रश्न पूछकर एक ज्योतिषी की योग्यता या ज्योतिष-शास्त्र पर प्रश्नचिन्ह लगाना उचित नहीं है।

18 टिप्‍पणियां:

नारदमुनि ने कहा…

sahi hai dono me se kisi ka bhee mahtav kam nahi. narayan narayan

SWAPN ने कहा…

bahut uttam jankari di hai sangeeta ji. dhanyawaad

SANJEEV MISHRA ने कहा…

sangeeta ji, aaj pahlii baar jyotish ke sandarbh men 'karmkundali' shabd se parichay hua. yadi is krmkundali ke vishay men kuchh vistaar se bataayengi to paathkon ke liye gyanvardhak rahega.

संगीता पुरी ने कहा…

संजीव जी...कर्मकुंडली कोई ज्‍योतिषीय शब्‍द नहीं हैं...अनेक लोगों ने अपने प्रोफाइल में इस शब्‍द का इस्‍तेमाल किया है....उसी के आधार पर मैने कर्मकुंडली की परिभाषा खुद दी है।

परमजीत बाली ने कहा…

जानकारी के लिए आभार।

परमजीत बाली ने कहा…

जानकारी के लिए आभार।

ज्ञानदत्त । GD Pandey ने कहा…

यह सही लगा कि मानव के "फ्री-विल" के लिये ज्योतिष में जगह है। मानव के कर्म भविष्य निरधारण कर सकते हैं। सब कुछ प्रारब्ध के हाथ नहीं।

P.N. Subramanian ने कहा…

जन्मकुंडली और कर्म कुंडली के बहुत रोचकएवं महत्वपूर्ण जानकारी के लिए आभार.

राज भाटिय़ा ने कहा…

बहुत ही सुंदर जानकारी दी आप ने, ओर सारी बात विस्तार से समझाई. धन्यवाद

कमल शर्मा ने कहा…

अच्‍छी जानकारी। वाकई बेहतर लेख।

mehek ने कहा…

bahut vistar se achhi jankari di hai shukran

रंजना [रंजू भाटिया] ने कहा…

बहुत बढ़िया जानकारी दी है आपने शुक्रिया

कौशलेंद्र मिश्र ने कहा…

आपकी हौसला अफजाई के लिए शुक्रिया.ज्‍योतिष विज्ञान में अल्‍प समझ रखता हुं. लेकिन आम लोगों की तरह यह अपनी ओर आकर्षित करती है. यह कहना गलत होगा कि ज्‍योतिष के प्रति लोगों की रुचि नही है. मैने अखबार में ऑनलाइन ज्‍योतषि काउसेलिंग के दरम्‍यान पाया है कि फोन कॉल करके अपने बारें में जानकारी हासिल करने वालों की लाइन लगी रहती है. कई बार तो समय सीमा तय होने के बावजूद कॉल आते रहते है. आप निसंदेह भारतीय मनीषा को नई उचाईयां दे रही है.
कुंडलीय जानकारी प्रदान करने का कॉलम शुरू करे तो वह भी रुचिकर होगा.

Pratik Jain ने कहा…

बहुत सुंदर लेख है संगीताजी। कि‍ंतु कृपया कर्मकुंडली के वि‍षय में वि‍स्‍तार से बताएं कि‍ यह क्‍या होती है और कि‍स प्रकार बनती है।

Abhishek ने कहा…

kya Karmkundali bhi alag se banai jati hai, ya janmkundli se hi iska bhi nirdharan hota hai?

रंजना ने कहा…

Spasht aur Sundar vivechna ki hai aapne.

Ham grahon se mukt nahi hain,isliye yadi koi yah kahkar jyotish kokharij karta hai ki yah andhvishvash ya bekaar hai to yahi kaha ja sakta hai ki wah ek bhram me jeeta hai.

विष्णु बैरागी ने कहा…

'कर्म कुण्‍डली' शब्‍द ही पहली बार पढा।

महेन्द्र मिश्र ने कहा…

आलेख बढ़िया है पर कर्मकुंडली कर्म करने के बाद बनती है .