गुरुवार, 26 फ़रवरी 2009

हस्तरेखाओं से भविष्य का ज्ञान ( Astrology )

हस्‍तरेखा भविष्‍य कथन की एक बहुत ही प्राचीन और विश्‍वसनीय विधा मानी जाती है। चूंकि सभी लोगों के पास जन्‍म विवरण भी मौजूद नहीं होता है , इसलिए हर युग में हस्‍तरेखा की उपयोगिता बनी हुई है। हस्तरेखाओं से मनुष्य की चारित्रिक विशेषताओं और उसकी प्रवृत्तियों पर प्रकाश डाला जा सकता है। कुछ घटनाओं के संबंध में काफी हद तक सही भविष्यवाणी की जा सकती है, किन्तु हस्तरेखा के साथ सबसे बड़ी कमजोरी है, घटनाओं के साथ समय का उल्लेख न कर पाना। दरअसल ज्योतिषी समय विशेषज्ञ ही होते हैं। यदि घटनाओं के साथ घटित होनेवाले समय का उल्लेख नहीं कर सके, तो उस घटना को जानने का महत्व काफी कम हो जाता है। जीवनरेखा कटी हुई हो, दुर्घटना के संकेत मिल रहें हों, तो व्यक्ति किस उम्र में सावधानी बरते, कारण 10 सेमी की रेखा 100 वर्षों की कहानी कह रही है। विभिन्न रेखाएं कहॉ से शुरु हों और कहॉ पर खत्म हों, जिसके आधार पर समय का सही सही निर्धारण किया जा सके, इसका कोई निश्चित विश्वसनीय सूत्र नहीं निकल सका है। जीवन रेखा का प्रारंभ ऊपर से तथा भाग्य रेखा का प्रारंभ नीचे से ।


किसी भी रेखा को यदि कोई दूसरी रेखा काट रही हो, तो उसका अर्थ अच्छा नहीं है, इसकी भविष्यवाणी तो की जा सकती है, परंतु विश्वासपूर्वक घटना के काल का निर्धारण काफी कठिन काम होगा। हस्तरेखाओं में बड़ी रेखाओं से ज्यादा महत्व पैनी और सूक्ष्म रेखाओं का है, यहॉ तक कि कैपिलरीज का महत्व और अधिक है। पर्वत कितने ऊंचे हैं किधर झुकाव है, हथेली के विभिन्न भागों की ऊंचाई-निचाई को समझने के लिए कंटूरलाइन को समझना, हथेली की कठोरता और कोमलता को समझना, रेखाओं के रंग को समझना, इस तरह बहुत जटिलताएं हैं। इन जटिलताओं को सरल करने की दिशा में बहुत कम काम होने से जटिलताएं ज्यो की त्यों बनी हुई हैं। अत: विश्वासयुक्त तिथियुक्त भविष्यवाणियॉ कर पाना काफी कठिन काम है। आकाश की तरह ही ग्रहों से संबंधित फल-कथन कर पाने में फलित ज्योतिश की सीमाएं असीम है , जबकि हस्तरेखा से भविश्य-कथन बंद मुट्ठी की तरह ही सीमित हो जाती है। किसी प्रकार की सिद्धी प्राप्त करने के बाद हथेली देखकर जन्मकुंडली का निर्माण कर भले ही दूसरे को चमत्कृत किया जा सके, पर वैज्ञानिक विधि से हस्तरेखाओं का रुपांतरण कुंडली के रुप में बिल्कुल असंभव है।

14 टिप्‍पणियां:

Abhishek ने कहा…

हस्तरेखा पर एक संछिप्त और सचित्र बुनियादी पोस्ट भी प्रकाशित करने का प्रयास करें.

मुसाफिर जाट ने कहा…

संगीता जी,
काल का सही निर्धारण ना होने की वजह से ही लोग बाग़ हस्त रेखा को बकवास मानते हैं

परमजीत बाली ने कहा…

अच्छी जानकारी दी है।आभार।

bhawna ने कहा…

hast rekha par mujhe bhi jyada bharosa nahi lekin jab koi vyakti chutki baja kar aapke bhoot bhavishya ko aise bataye mano vo sakshi hai to dar jaoor lagta hai , ye kaun si vidhya hai jisme chutki baja kar kuch der ruk kar sab bata diya jata hai ?kripya is par kuch prakash dalein

ज्ञानदत्त । GD Pandey ने कहा…

हस्त रेखाओं की प्रेडिक्टेबिलिटी के बारे में तो नहीं कह सकता पर हाथ की बनावट, रेखायें और विभिन्न पर्वतों की रुक्षता-मांसलता व्यक्तित्व के बारे में कहती अवश्य है।
कलाकार के हाथ और बधिक के हाथ में अन्तर अवश्य होता है।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

माथे और हथेली की रेखाएँ,
वर्णन कर देतीं हैं।
मन्द व्यक्ति को भी अक्सर धन,
अर्पण कर देतीं हैं।।

mehek ने कहा…

bahut achhi jankari rahi,kuch log bata dete hai rekhaye dekh ,kya achha ya bura hoga,magar kab hoga ye nishchit nnahi bata sakte,bahut sahi baat,hamne suna hai ke haathon ke rakha har 6 mahine mein kuch badlav hota hai,kuch insaan ke karmo ke anusaar bhi badalti hai?

राज भाटिय़ा ने कहा…

संगीता जी, बहुत ही सुंदर जानकारी दी आप ने, अगली कडी का इंतजार है.
धन्यवाद

प्रकाश बादल ने कहा…

आपका ब्लॉग बहुत ही रोचक है कभी विस्तृत रूप से पढूँगा। हस्त रेखा के बारे में जानकर काफी ज्ञानवर्धन हुआ है

सतीश पंचम ने कहा…

यूं तो लगभग सभी लोगों की रूचि हाथों की लकीरों में होती है कि देखूं मेरे हाथ की लकीरों में क्या भविष्य छुपा है? या कि मेरा भविष्य क्या है ? लेकिन जिन लोगों के हाथ नहीं होते क्या उनका कोई भविष्य नहीं होता ?

मनुदीप यदुवंशी ने कहा…

संगीता जी, जानकारी तो बढिया है. आपका धन्यवाद. आशा करते है कि आगे भी हस्तरेखा विषय मॅ गहन जानकारी आपकी द्वारा प्राप्त करते रहॅगे.

रंजना [रंजू भाटिया] ने कहा…

चित्र सहित कुछ जानकारी दे ..अच्छी लगी यह जानकारी शुक्रिया

प्रेम सागर सिंह ने कहा…

संगीता जी,
हस्त रेखा के बारे में जानकारी काफी ज्ञानवर्धन है।

Sanjay Gulati Musafir ने कहा…

संगीता,
हस्तरेखा देखकर 15 दिन की सटीकता पर तो मैं भविष्यवाणी करता रहा। इससए अधिक क्या प्रमाणा दूँ।
काल्पनिक न हूकर धरातल से लिखा करें।
धन्यवाद
संजय गुलाटी मुसाफिर