शुक्रवार, 27 फ़रवरी 2009

वास्तुशास्त्र का महत्व ( Astrology )

 (vidya sagar padhdhati, petarbar, bokaro)इन दिनों वास्तुशास्त्र की अनुगूंज हर जगह सुनाई पड़ रही है। बड़े लोग जब लम्बे काल के लिए अपने कार्यक्रमों में विफल होते चले जाते हैं, तब वे अपने कार्यक्रमों, सूझ-बूझ, संगति, समय या संसाधनों के समन्वयन पर दृष्टिपात न कर अपने आवास को, अपने पहनावे को, अपने हस्ताक्षर को दोषपूर्ण समझना शुरु कर देते हैं और उन्हें सुधारने में लग जाते हैं। एक ओर बुरे समय की मार, तो दूसरी ओर इस प्रकार के सुधार का कार्यक्रम — व्यक्ति को लाखों का मूल्य चुकाना पड़ता है। वास्तुशास्त्र के जानकार की शुल्क भी अभियंता की तरह ही होती है। जो व्यक्ति अपने आवास की तोड़-फोड़ में लाखो का नुकसान कर रहे होते हैं, वे भला वास्तुशास्त्रवेत्ता को हजारो क्यों नहीं दे सकते हैं ? इस मनोविज्ञान की जानकारी भी उन्हें खूब होती है और इसका फायदा उठाने से वे नहीं चूकते।


वास्‍तुशास्‍त्र के नियम हर प्रकार से अनुकूलित मकान का नक्‍शा अवश्‍य तैयार कर देते हैं , जहां दिशा के अनुसार हर प्रकार की व्‍यवस्‍था रहती है , ताकि आपको घर में धूप , हवा , पानी आवश्‍यकता के अनुरूप मिल पाए और इससे आपका स्‍वास्‍थ्‍य अच्‍छा रहे , आप अनाज का संचय अधिक दिनों तक कर सके , किसी प्रकार के दुश्‍मन से बचे रह सकें। पर उसका भाग्‍य से भी संबंध होता है , यह भ्रम न पालें।

समय जब अच्छा होता है, तो लक्ष्मी का आगमन होता है, यश की वृद्धि होती है, घर का निर्माण हो जाता है, नौकरी मिल जाती है, समाज में पद-प्रतिष्ठा मिलती है, रत्न-जटित मुकुट सिर पर चढ़ जाता है, पत्नी, बाल-बच्चे सब सुख देनेवाले होते हैं, आत्मविश्वास की बढ़ोत्तरी होती है, व्यक्तित्व आकर्षक हो जाता हैं किन्तु जब समय बुरा होता है, तो लक्ष्मी रुठ जाती है, उसका आगमन अवरुद्ध हो जाता है, यश में कमी हो जाती है, घर गिरने लगता है, उसमें तोड़-फोड़ होने लगता है, उसका रख-रक्षाव ठीक से नहीं हो पाता, समाज से तिरस्कृत होना पड़ता है, रत्न-जटित मुकुट सिर से उतर जाता है, जिन रत्नों को आप शुभ या प्रगतिसूचक मानते हैं, वे स्वत: गिर जातेहैं ,गुम हो जाते हैं, पत्नी, बाल-बच्चे या सभी नजदीकी कष्ट के कारण बन जाते हैं। उत्साह के साथ मकान का निर्माण हो रहा हो, तो समझ लीजिए आपका समय अच्छा है, परंतु किसी प्रकार की विवशता में पड़कर आप मकान के नक्शे को बदलने के लिए तोड़-फोड़ कर रहे हों, तो इस अनावश्यक कार्यवाही को ही आप किसी बुरे ग्रह की प्रेरणा समझें।

11 टिप्‍पणियां:

EDHAR HAI ने कहा…

vastusastra se kya achha -bura hota hai . aapne btaya thanks....

विनय ने कहा…

मुझे ऐसी ही जानकारी की खोज थी, धन्यवाद!

---
गुलाबी कोंपलें

हरि ने कहा…

आपने गागर में सागर भर दिया।

sareetha ने कहा…

अपनी समझ में तो एक ही बात आई अब तक कि सब का रोज़गार है । कमाने खाने के लिए नई नई तरकीबें ईजाद की जाती हैं । कल तक ज्योतिष कहते नहीं थकते थे कि शनि न्याय के देवता हैं । झूठों ,मक्कारों पर ही वार करते हैं । लेकिन आज हर गली नुक्कड़ पर बने शनि मंदिरों में इन्हीं लोगों की भीड़ होती है । मंदिर के अधिष्ठाता भी शहर के गुंडागर्दी के नामी गिरामी किस्म के लोग होते हैं । भाजपा के एक बड़े पदाधिकारी हैं कुछ साल पहले तक सस्ती किस्म की चप्पल चटकाते घूमते थे । एक बार शनि मंदिर में अपना ही जयकारा लगवा बैठे समर्थकों से और वे विधायक का चुनाव हार गये । हमें लगा शनि महाराज ने न्याय कर दिया । लेकिन कुछ दिन बाद इन नेताजी ने मंदिर के बाहर पार्षद निधि से स्वागत द्वार बनवा दिया । वो दिन था और आज का दिन है पिछले पाँच सालों में नेताजी पर शनि महाराज की ऎसी कृपादृष्टि हुई कि पाँचों अँगुलियाँ घी में और सिर कड़ाही में । अब ये सब देख कर विश्वास सा उठ चला है ,इन सब बातों से ।

P.N. Subramanian ने कहा…

केरल के पारंपरिक बढ़ई और मिस्त्री भी वास्तु की जानकारी रखते हैं. इसलिए जो मकान बनते हैं प्रारंभ से ही दोषरहित ही होते हैं. फिर जैसा आपने कहा गृह योग के कारण विपत्तियाँ आ सकती है जिसका वास्तु से कोई सम्बन्ध नहीं होता.आपके अच्छे लेख के लिए आभार.

राज भाटिय़ा ने कहा…

बहुत ही सुंदर जानकारी दी आप ने, लेकिन कुछ लोग इसे वास्तु के पिछे दिवाने है, ओर अपने मकानो को, घर को किसी कबाड खाने की तरह से बना लेते है.
धन्यवाद

रंजना [रंजू भाटिया] ने कहा…

बहुत ही अच्छी बात बतायी है आपने कई संदेह दूर हो गए...शुक्रिया इस तरह के लेख और भी दे ताकि सही गलत हैं वाकिफ हो सकें

योगेन्द्र मौदगिल ने कहा…

बिल्कुल सही दिशा-बोध दिया है आपने संगीता जी....
पर अब भी कोई कूंए में गिरना चाहे तो गिरे...

मुसाफिर जाट ने कहा…

संगीता जी,
जैसा आपने लिखा है, मैं भी बिलकुल वैसा ही सोचता हूँ

वन्दना अवस्थी दुबे ने कहा…

बढिया आलेख...बधाई.

S B Tamare ने कहा…

Sangita ji!
You have well said just accordingly whatever I have been penetrating since 25 years.
As you said Vastu Shastra has no more than it provides the method to get one’s life applying in the appropriate method as what type of house should be for a healthy life but misfortunately some unsocial element has turned it down by elaborating the Shastra in their long term fiscal fevaure.
Last five or one week ago that I tried to bring the focus of people over this pigheadness but it seems to me in the dearth of organize stroke this type of bug-bear can not be uprooted. Here from I would like you to suggest that keep yourself ongoing with the same. Or if possible accelerate the bitterness against this corruption.
I become more disappointed when I find the people running after despite of claiming high literacy. Over the same subject if any body wish may read an article on my blog titled www.shashibhushantamare-jyotishbole.blogspot.com
Thanks a lot for a meaningful article.