बुधवार, 4 मार्च 2009

हस्ताक्षर विज्ञान ( Astrology )

विश्व के सभी व्यक्तियों के अंगूठे भिन्न-भिन्न तरह के होते हैं। जितने प्रकार के या जितने लोग हैं, उतने ही अंगूठे हैं। यही कारण है कि प्राचीन काल से अभी तक प्रमाण के लिए अंगूठे का छाप ही लिया जाता रहा है। संभावनाओं की दृष्टि से इन अंगूठों पर शोध करने की संभावनाएं असीमित हो सकती है। किन्तु पतली कैपिलरीज रेखाओं को ध्यान से देखा जाए, तो अंगूठे में बननेवाले चिन्ह शंख चक्र या सीपी ही होते हैं। इन मुख्य चिन्हों की बनावट विभिन्न हाथों में भिन्न-भिन्न प्रकार की होती है। इस कारण ही एक व्यक्ति के अंगूठे की छाप देखकर यह तय करना निश्चित होता है कि यह किस अंगूठे का चिन्ह है, किन्तु केवल अंगूठे के चिह्न को देखकर ही उसके संपूर्ण चरित्र को उद्घोषित करना बहुत ही कठिन काम है। जब पूरी हथेली के चिन्हों और रेखाओं से ही जीवन में घटित होनेवाली संपूर्ण घटनाओं की जानकारी प्राप्त कर पाना संभव नहीं है, तो सिर्फ अंगूठे से ही कितना कुछ बताया जा पाएगा, यह सोंचनेवाली बात हो सकती है।


हस्ताक्षर बनाने में भी अंगूठे की ही महत्वपूर्ण भूमिका होती है। अन्य कई उंगलियों का सहयोग भी प्राप्त करना होता है। किसी व्यक्ति का हस्ताक्षर भी दूसरे व्यक्ति से भिन्न ही होता है। किसी ऑफिस या बैंक में व्यक्ति से अधिक महत्वपूर्ण उसका हस्ताक्षर ही होता है। हस्ताक्षर के विशेषज्ञ किसी के मात्र हस्ताक्षर को देखकर ही उसके चरित्र का विश्लेषण करने का दावा करते हैं। जैसे- व्यक्ति कल्पनाशील है या व्यावहारिक ? यदि कल्पनाशील है, तो उसमें सृजनात्मक शक्ति है या नहीं ? व्यावहारिक है, तो उसमें संगठनात्मक शक्ति है या नहीं ? वह व्यक्ति महत्वपूर्ण है या उसके कार्यक्रम ? प्रारंभ से अंत तक विचारों का तालमेल है या बीच में कहीं भटकाव है ? आदि तथ्यों पर प्रकाश डालने के लिए, हो सकता है,किसी व्यक्ति का मात्र हस्ताक्षर ही काफी होता है, किन्तु केवल हस्ताक्षर से ही व्यक्ति के दशाकाल की चर्चा करना, किस वर्ष किस प्रकार की घटना घटेगी, किस समय धन की प्राप्ति होगी, संपत्ति की प्राप्ति होगी, किसी समस्या का अंत होगा, इन सब बातों की चर्चा कर पाना मुश्किल ही नहीं असंभव भी है। जीवन के बहुआयामी पहलू और व्यक्ति की सभी विशेषताओं पर प्रकाश डालना किसी हस्ताक्षर से संभव नहीं हो सकता। हस्ताक्षर विज्ञान की सीमाएं बहुत छोटी है। हस्ताक्षर विज्ञान से संबंधित किसी पुस्तक को पढ़ें, तो यह ज्ञात होगा कि इसके अद्यतन विकास के बावजूद किसी भी व्यक्ति के हस्ताक्षर के फल को लिखने के लिए कुछ पंक्तियॉ ही पर्याप्त होंगी। किसी के संबंध में कल्पना का सहारा लेकर दो-चार पृष्ठ भी लिखे जा सकते हैं, किन्तु अधिकांश बातें निरर्थक ज्योतिषीय धर्मसंपुष्टि के विरुद्ध होगी।

11 टिप्‍पणियां:

संदीप शर्मा Sandeep sharma ने कहा…

बहुत ही अच्छी जानकारी....
धन्यवाद...

PN Subramanian ने कहा…

हमारा भी यह मानना है कि हस्ताक्षरों को देख कर उस व्यक्ति विशेष के बारे में कुछ मोटी मोटी बातें बतायी जा सकती हैं.आभार.

राज भाटिय़ा ने कहा…

बहुत सही लिखा आप ने,भारत मे अंगुटे का निशान सदियो से चला आ रहा है जिसे अब अनपडो के लिये कहा जाता है, लेकिन युरोप ओर अमेरिका मे यह निशान अब शुरु हुआ है, यानि इन सब बातो से सिद्ध होता है हम इन लोगो से बहुत आगे थे.
धन्यवाद इस सुंदर पोस्ट ओर सुंदर जानकारी के लिये

Dr. Vijay Tiwari "Kislay" ने कहा…

संगीता जी
नमस्कार
"हस्ताक्षर विज्ञान" आलेख पढ़कर ऐसा लगा जैसे आपने एक दम सटीक बात कह दी हो कि अंगूठे या हस्ताक्षर अकेले से किसी भी व्यक्ति का भविष्य, प्रकृति या आचरण आदि कभी भी विस्तृत रूप से नहीं बताया जा सकता है और बताई जा रही है तो वह निश्चित रूप से कपोल कल्पित ही कही जायेगी या शाब्दिक जाल. //
यथार्थपरक आलेख के लिए बधाई.
- विजय

रंजना [रंजू भाटिया] ने कहा…

बढ़िया जानकारी दी है आपने संगीता जी ..शुक्रिया

विष्णु बैरागी ने कहा…

हस्‍ताक्षर के आधार पर किसी व्‍यक्ति के बारे में कुछ भी निर्धारण करना मुझे विश्‍वसनीय नहीं लगता। इसके पीछे कोई वैज्ञानिकता भी दिखाई नहीं देती। मानव व्‍यवहार के अध्‍येता, अपने अनुभव के आधार भले ही कोई निष्‍कर्ष निकाल लें, मुझे तो वे अनुमान से अधिक कुछ भी नहीं लगते।

भारतीय नागरिक - Indian Citizen ने कहा…

आपने अभी तक मेरी जिज्ञासा का अन्त अभी तक नहीं किया है.

bhawna ने कहा…

mujhe bhi hastakshar vigyaan par sandeh hai

Udan Tashtari ने कहा…

सही कहा और अच्छी जानकारी दी, आभार.

रवीन्द्र प्रभात ने कहा…

बढ़िया जानकारी दी है आपने संगीता जी ..आभार इस सुंदर पोस्ट के लिये....!

Vivek Rastogi ने कहा…

जी हाँ शायद केवल उतने गुण ही बताया जा सकते हैं जो कि लगभग सभी में समान या सामान्य होते हैं। हालांकि जब भी व्यक्ति किसी भी प्रकार के ज्योतिषी के पास जाता है तो वह मानसिक रुप से तैयार होकर जाता है और ज्योतिषी यह सब बातें जानता है और वह उस व्यक्ति की कुछ गूढ़ बातें बताकर उसे अपने विश्वास में ले लेता है, ये सब काम चलते हुए ज्योतिषियों के काम होते हैं, अगर वे १० बातें १० लोगों को बतायेंगे तो ७०% बातों पर वो १० लोग मान लेंगे क्योंकि ये मानवीय बातें कहीं न कहीं हर व्यक्ति में उपलब्ध होती हैं।