शुक्रवार, 6 मार्च 2009

फेंगशुई के टोटके क्या कारगर होते हैं ? ( Astrology )

 (vidya sagar mahtha, petarbar, bokaro)बढ़ती आबादी के कारण गरीबी और भुखमरी से मरते हुए लोगों को भले ही रोटी की व्यवस्था में फेंग-शुई के सामान बनाने के कुटीर उद्योगों में बनाए जानेवाले सभी आइटमों की कुछ भूमिका हो सकती है, लेकिन चीन के लोगों के लिए फेंगशुई की वस्तुओं के जिन गुणों पर खुद चीन के लोगों को जितना विश्वास नहीं है, अंधाधुंध लाभ कमाने के लिए फैलाए गए इन प्रचारों पर भारतीयों को अंधविश्वास हो गया है कि मरीज के कमरे में कछुआ रखने से वह ठीक हो जाता है, लाल धागे से बंधे सिक्के घर में रखने से तिजोरी खाली नहीं होती, लॉफिंग बुद्धा रखने से घर के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं, विंडचाइम से घर की किस्मत बदलती है, एज्युकेशन टावर रखने से बच्चों का पढ़ाई पर ध्यान-संकेन्द्रण बढ़ता है, सुनहरी मछलियॉ धन के आवाजाही को बढ़ावा देती हैं।


यही कारण है कि आज सारे भारतवर्ष में लगभग छोटे-छोटे दुकानों से लेकर बड़े शॉपिंग मॉल तक सभी इन प्रकार के सामानों से भरे पड़े हैं। सजावट और कला की दृष्टि से देखा जाए, तो इन कलात्मक वस्तुओं को खरीदकर कलाकारों को सम्मान देनें या उससे अपने घर के सुंदरता की बढ़ोत्तरी करने में कोई हर्ज की कोई बात नहीं है, किन्तु धन-गुण-ज्ञान की बढ़ोत्तरी या फायदे की दृष्टि से जो भी चौगुना या पॉचगुना मूल्य चुकाकर इन्हें खरीदते हैं, उन्हें पछतावे के अलावा कुछ भी नहीं मिल पाता है, न तो बिना दवा के मरीज ठीक हो सकता है, न बिना व्यावसायिक और प्रबंधकीय ज्ञान के तिजोरी भरी रह सकती है, न बिना सुबुद्धि के घर का कष्ट दूर हो सकता है, न बिना पढ़े पढ़ाई पर ध्यान-संकेन्द्रण बनता है और न ही बिना मेहनत के घर की किस्मत बदल सकती है। यदि मात्र एक-दो इस प्रकार के सामान से इतना फायदा हो, तो जिन देशों में लाखो-लाख इस प्रकार के सामान बन रहे हैं, वे देश तुरंत ही धन-वैभव-सुख-शांति में नंबर 1 क्यो नहीं हो जाते हैं ? क्या इस बात का जबाब किसी के पास है ?

10 टिप्‍पणियां:

mehek ने कहा…

baat to bahut sahi kahi,aise kisi bhi vastu se kuch nahi hota,mann ka vaham hai bas,ghar ki shoba ke liye bahut achhe hai,magar hame windchimes pe bahut bharosa hai,jab bhi wo kin kin si bajti ha,mann khush hota hai,shayad positive energery.

sareetha ने कहा…

जिस तरह झाड़ - फ़ूँक एक मनोवैज्ञानिक चिकित्सा है , उसी तरह ये भी छोटे - मोटे टोटके हैं । जीवन में जो भी चीज़ आपको सकारात्मक की ओर ले जाए वो अच्छी है । सकारात्मक सोच जीने का नज़रिया बदलता है । चट्टानों में फ़ूल खिला सकता है , रेगिस्तान में चमन सजा सकता है । हाँ अँधविश्वास की हद तक विश्वास ठीक नहीं । वैसे दुनिया का शायद ही कोई कोना हो जहाँ अपने तरह के शगुन -अपशगुन ना मानें जाते हों ।

P.N. Subramanian ने कहा…

जैसे सरीता जी ने कहा सकारात्मक सोच होनी चाहिए. हमारी मानसिक कमजोरियों के शोषण के लिए ये सब ईजाद की गयी हैं. कोरी बकवास. आभार.

Udan Tashtari ने कहा…

सुना बहुत-कभी आजमाने की जरुरत नहीं महसूस हुई तो अनभिज्ञ हूँ इस विषय से. :)

ओस की बूँद ने कहा…

बहुत खूब कहा है। यहाँ भी नजरें इनायत करें।
पल भर

राज भाटिय़ा ने कहा…

संगीता जी, बहुत सुंदर लिखा आप ने, लेकिन लोगो को पता नही क्यो नही समझ मे आता,
धन्यवाद

ज्ञानदत्त । GD Pandey ने कहा…

आपने बताया तो इस पर सोचते हैं। अभी तक तो इस बारे में कभी पैसा या समय दिया नहीं!

रंजना [रंजू भाटिया] ने कहा…

सब अपने दिल और दिमाग को नकारत्मक दिशा से बहलाने का कोई माध्यम तलाश कर लेते हैं ..यह भी उन में से एक है :) सोच है सबकी अपनी अपनी ..विंड चाइम्स से किस्मत के बदलने का तो पता नहीं .पर इसकी आवाज़ बहुत पसंद है मुझे ..

Roopesh Singhare ने कहा…

Sangeeta ji,
Saadar abhivaadan. Aapne december me mujhe mere blog par aakar protsaahan ke shabd kahe the. Mujhe aapse kuch guidance ki aavashyakta hai. ummeed hai ki aapse disha nirdesh pa sakunga. Kipya mujhe apna mail id den taaki mai aapse sampark kar sakun.
roopeshsinghare@gmail.com.

vineet

Roopesh Singhare

विष्णु बैरागी ने कहा…

मेरी पत्‍नी अध्‍यापक है। उसके एक छात्र का परिवार मिट्टी के खिलौने बनाता है। एक दिन उस छात्र ने 'अपनी टीचरजी' को एक खिलौना भेंट किया। पत्‍नी वह खिलौना घर लाई और 'यूं ही' टेबल पर रख दिया।
कुछ दिनों बाद एक मित्र आए तो वे अप्रसन्‍न हुए। कहा-''यह 'लाफिंग बुध्‍दा' है। इसे व्‍यवस्थिति रखिए।'' कहकर वे खुद ही उसे 'व्‍यवस्थित' रख गए।
अब वह खिलौना 'व्‍यवस्थित' रखा हुआ है। हमें तो अपने काम से ही यह देखने/जानने की फुर्सत नहीं मिल पा रही कि 'लाफिग बुध्‍दा' के 'व्‍यवस्थित' रखे जाने के बाद कोई अन्‍तर आया या नहीं। हमें तो सब कुछ वैसा का वैसा ही लग रहा है।
हां, मेरी पत्‍नी मुग्‍ध भाव से उस खिलौने को यदा-कदा देख लेती है। मेरे घर में 'व्‍यवस्थित' रखा लाफिंग‍ बुध्‍दा 'अपनी टीचरजी के प्रति एक छात्र का प्रेम प्रतीक' बन कर घर की शोभा बढा रहा है।
आपकी इस पोस्‍ट पर यही मेरी टिप्‍पणी है।