शनिवार, 7 मार्च 2009

न्यूमरोलोजी ( Astrology )

 (vidya sagar mahtha, petarbar, bokaro)अब हम कुछ देर के लिए न्यूमरोलॉजी या अंकविज्ञान की चर्चा करें। अंकविज्ञान के ज्ञाता विश्व के लोगों को 9 अंकों के आधार पर चारित्रिक विशेषताओं की दृष्टि से 9 भागों में बॉट देते हैं। ऐसा करने से प्रत्येक अंक में लगभग करोड़ों व्यक्तियों का प्रतिनिधित्व होता है । एक अंक के अंतर्गत आनेवाले इतने सारे लोगों के गुण-दोष कभी भी एक जैसे नहीं हो सकते हैं। स्मरण रहे , एक तिथि में जन्म लेनेवाले सभी व्यक्तियों का मूलांक एक ही होगा। न्यूमरोलॉजी के अनुसार उन सभी व्यक्तियों के गुण-दोष एक जैसे होंगे , किन्तु फलित ज्योतिष इस बात को स्वीकार नहीं कर सकता , क्योंकि लग्न बदलने के साथ ही भावाधिपत्य बदल जाने से ग्रहों के कार्य-कलाप के पहलू बदल जाते हैं , अत: भिन्न भिन्न लग्नों के सभी जातकों की चारित्रिक विशेषताएं बदल जाती हैं। एक दिन में बारह लग्न होते हैं। जब कोई व्यक्ति मूलांक के अनुसार उसके जीवन में घटित होनेवाली घटनाओं को मिलाना आरंभ करता है तो उसे लगता है कि उस व्यक्ति के साथ घटित होनेवाली सारी महत्वपूर्ण घटनाएं उसी मूलांक के समानांतर या सापेक्ष घटती चली गयी है , किन्तु बात वैसी नहीं होती । दरअसल मूलांक के अनुसार घटनेवाली किन्ही दस घटनाओं का चयन न्यूमरोलोजिस्ट अपनी सुविधानुसार कर देते हैं , जबकि महत्वपूर्ण घटनाओं की संख्या 90 के आसपास होती है। प्रत्येक अंक में घटित होनेवाली घटनाओं की संख्या दस के आसपास होती है।


अंक विज्ञान को आधार मानकर किसी के जीवन की विशेष घटना की भविष्यवाणी नहीं की जा सकती , बुद्धि-विलास या माथापच्ची की बात भले ही हो जाए। अंकों को ग्रहों के गुण-दोष का कोई वैज्ञानिक आधार प्राप्त नहीं है। न्यूमरोलॉजी में किसी खास तिथि का एक ही मूलांक होता है , जबकि फलित ज्योतिष मे एक तिथि में बारह लग्नों के अनुसार जातक की चारिति्रक विशेषताओं का उल्लेख किया जाता है। इसके बावजूद बुिद्धजीवी हम ज्योतिषियों से एक प्रश्न किया करते हैं- एक लग्न में हजारो लोग पैदा होते हैं , क्या सबकी मंजिल एक होती हैं ? तब इसके जवाब में ज्योतिषी नवमांश , षट्यांश या इससे भी सूक्ष्म नदीस्टोलॉजी की चर्चा करने का प्रयास करते हैं , चाहे सच्चाई जो भी हो या सुननेवाले को संतुष्टि हो या न हो। इतना तो मानना ही पड़ेगा कि फलित ज्योतिष में लग्न पर आधारित चर्चा काफी वैज्ञानिक है , फिर भी इससे सूक्ष्म फलित की तलाश है । इसकी तुलना में न्यूमरोलॉजी काफी स्थूल है और एक तिथि पर आधारित मूलांक का वैज्ञानिक पक्ष कितना मजबूत हो सकता है , यह निस्संदेह विचारणीय है।

11 टिप्‍पणियां:

arun prakash ने कहा…

सही कथन है आपका मै इस विधा को पूरी तरह सत्य नहीं मानता क्योंकि चाहे कोई अंक लीजिये उसका फल सभी पर घटित नजर आता है
इसी प्रकार क्या नाम के हिज्जे अंग्रेजी के अक्षरों को आगे पीछे करने से भाग्य परिवर्तन हो जायेगा यह भी अविश्वश्निय लगता है | कभी इस पर भी चर्चा करें
एक बात खटकती है आपके लेखों से कि सही क्या है यह प्रश्न हमेशा अंनुतरित रह जाता है

कमल शर्मा ने कहा…

यह बेहद मजेदार विषय है। अंकों से भाग्‍य और कर्म नहीं बदले जा सकते। यदि ऐसा ही होता तो हर कोई अपनी मनमानी कर लेता। मैं अपने अंक बदलकर देश का प्रधानमंत्री बन जाता। कर्म प्रधान है। बगैर कुछ करे धरे वाले लोग नाम में कुछ अंक बदलकर किस्‍मत चमकाने के धंधे से जुड़े हुए हैं।

राज भाटिय़ा ने कहा…

संगीता जी, बहुत मुश्किल है, यह हिसाब किताब तो बहुत कठीन है, लेकिन है बहुत रोचक.
धन्यवाद

mehek ने कहा…

sehmat hai,sirf anko ke aadahr par koi nishchit dharana nahi banayi ja sakti.

cmpershad ने कहा…

अंक गणित के आधार पर रेस के नम्बर लगाने वालों के लिए यह लेख आवश्यक। अच्छा सधा हुआ और निष्पक्ष लेख।

प्रेम सागर सिंह ने कहा…

संगीता जी,
सही कथन है आपका .....

Dr. Vijay Tiwari "Kislay" ने कहा…

संगीता जी मैं आपसे १००% सहमत हूँ.
-विजय

Pratik Jain ने कहा…

संगीताजी आपकी बात से मैं सहमत हूं। इसी प्रकार मुझे सूर्य राशि‍ पर आधारि‍त पाश्‍चात्‍य ज्‍योति‍ष भी उचि‍त नहीं लगता।

ज्ञानदत्त । GD Pandey ने कहा…

न्यूमरॉलॉजी समय पास करने के लिये काम की चीज है।

विष्णु बैरागी ने कहा…

आपकी इस पोस्‍ट का बडा अंश मेरी मानसिकता की ही पुष्टि करता है। जाहिर है, आपकी यह पोस्‍अ मुझे अत्‍यधिक अनुकूल लगी है

कौतुक ने कहा…

आपने मेरी दुविधा एक हद तक हल कर दी.

धन्यवाद.