गुरुवार, 12 मार्च 2009

ज्योतिष में राजयोग ( Astrology )

राजयोगों की विवेचना या उल्लेख करते हुए सामान्यतया ज्योतिषी या ज्योतिषप्रेमी अपने मस्तिष्क मे भावी उपलब्धियों की बहुत बड़ी तस्वीर खींच लेने की भूल करते हैं। चूंकि आज का युग राजतंत्र का नहीं है , कई लोग इसकी व्याख्या करते हुए कहते हैं कि राजयोग का जातक मंत्री , राज्यपाल , राष्ट्रपति , कमांडर , जनप्रतिनिधि या टाटा ,बिड़ला जैसी कम्पनियों का मालिक होना है। लेकिन जब इस प्रकार के योगों की प्राप्ति बहुत अधिक दिखलाई पड़ने लगी , यानि राजयोगवाली बहुत सारी कुंडलियॉ देखने को मिलने लगीं , तो ज्योतिषी फलित कहते वक्त कुछ समझौता करने लगे और राजयोग का अर्थ गजेटेड अफसरो से जोड़ने लगें हैं।


पर जिस राजयोग में एक राजा को पैदा होना चाहिए , उसमें एक मामूली दुकानदार पैदा हो जाता है और जब श्रीमती इंदिरा गॉधी जैसे सर्वगुणसंपन्न प्रधानमंत्री की कुंडली की व्याख्या करने का अवसर मिलता है , तो बड़े से बड़े ज्योतिषी उनकी कुंडली में बुधादित्य राजयोग ही उनके प्रघानमंत्री बनने का कारण बताते हैं , जबकि संभावनावाद के अनुसार 50 प्रतिशत से अधिक लोगों की कुंडली में बुधादित्य योग के होने की संभावना होती है। एक महान ज्योतिषी ने अपनी पुस्तक में लिखा है , बुधादित्य योग यद्यपि प्राय: सभी कुंडलियों में पाया जाता है , फिर भी इसे कम महत्वपूर्ण नहीं समझना चाहिए। इस तरह राजयोगों का विश्लेषण क्या असमंजस में डालनेवाला पेचीदा , अस्पष्ट और भ्रामक नहीं है ? इस तरह के पेचीदे वाक्य राजयोग के विषय में ही नहीं , वरन् ज्योतिष के समस्त नियमों के प्रति बुिद्धजीवी वर्ग की जो धारणा बनती है , उससे फलित ज्योतिष का भविष्य उज्जवल नहीं दिखाई पड़ता है।


आज कम्प्यूटर का जमाना है , अपने समस्त ज्योतिषीय नियमों , सिद्धांतो को कम्प्यूटर में डालकर देखा जाए , कुंडली निर्माण से संबंधित गणित भाग का काम संतोषजनक है , परंतु फलित भाग बिल्कुल ही स्थूल पड़ जाता है , इससे किसी को संतुष्टि नहीं मिल पाती है। एक मामूली प्रथमिक स्कूल के शिक्षक और बसचालक की कुंडली में अनेक राजयोग निकल आते हैं और अमेरिका के राष्ट्रपति बिल क्लिंटन की कुंडली में एक दरिद्र योग का उल्लेख इस तरह होता है , मानो वह अति विशिष्ट व्यक्ति न होकर भिखारी हो। ऐसी स्थिति में आवश्‍यक है कि विभिन्‍न ग्रहों की स्थिति को देखते हुए आज के युग के अनुरूप राजयोगों की अलग से व्‍याख्‍या की जाए।

2 टिप्‍पणियां:

राज भाटिय़ा ने कहा…

आप को आप की शादी की साल गिरह की बहुत बहुत बधाई, आप दोनो बहुत खुश रहे, ओर युही हंसते खेलते रहे.
धन्यवाद

विष्णु बैरागी ने कहा…

वर्तमान के सराकारों और सन्‍दर्भों से जुड्कर ही कोई भी विषय अपनी उपयोगिता,प्रासंगिमका, सार्थकता और औचित्‍य प्रमाणित कर सकता है। आपकी यह पोस्‍ट इसी धारणा को बलवती करती है और इसीलिए अनुकूल अनुभव होती है।