सोमवार, 23 मार्च 2009

क्‍या ज्‍योतिषियों का यह व्‍यवहार उचित है ? ( Astrology )

अभी दो चार माह पूर्व मेरे पास एक सज्‍जन आए। अभी पिछले वर्ष ही तो उन्‍होने बहुत ही अच्‍छे घर परिवार के अच्‍छे लडके से अपनी पुत्री का विवाह किया था। पर आज वे बहुत परेशान थे , परेशानी की वजह उनकी वही बेटी, जिसे ससुरालवालों ने विवाह के दस महीने बाद वापस मायके पहुंचा दिया है। पति मुंबई में ही किसी कंपनी में सर्विस करता है, पर अभी तक वह वहां पहुंच भी नहीं सकी थी कि अपनी घर गृहस्‍थी जमा पाती। विवाह के बाद के एक महीने ससुराल में वह बहुत ही अच्‍छी तरह रही । एक महीने बाद पति के वापस जाने पर भी दो चार महीने परिवार के लोगों का व्‍यवहार काफी अच्‍छा था , पर अचानक एक हादसा हो गया। उसके ससुर को भ्रष्‍टाचार के किसी आरोप पर नौकरी से निलंबित कर जेल भेज दिया गया। इतने दिनों से तनख्‍वाह और उपरी , दोनो ही तरह की आमदनी से रईसी का जीवन गुजारनेवाले ससुर जी के सामने अचानक बहुत बडी समस्‍या आ गयी थी। जैसा कि ऐसी स्थिति में अक्‍सर होता है , लोग मानते हैं कि किसी ग्रह के प्रभाव से ही ऐसा हो रहा है और रत्‍न धारण या पूजा पाठ के द्वारा ग्रहों को , भगवान को खुश किया जा सकता है। जमानत होने के बाद एक अच्‍छे ज्‍योतिषी को बुलाया गया। ज्‍योतिषी जी ने घर के सब सदस्‍यों की जन्‍मपत्री देखी , कुछ चिंतन किया और सीधा सारा इलजाम बहू के सर पर डाल दिया। 'आपने इस कन्‍या से विवाह क्‍यों किया , कन्‍या आपलोगों के लिए अशुभ है' भले ही उसने अपना प्रभाव बढाने के लिए ऐसा कहा हो , पर इसका बुरा प्रभाव बेचारी कन्‍या के जीवन पर भी पड सकता है , उसने यह नहीं सोंचा। अभी तो वह नवविवाहिता पूरी तरह ससुराल का अपनापन भी नहीं प्राप्‍त कर सकी थी। तभी तो उसके बारे में न सोंचकर परिवार के लोगों ने पंडितों की बात मान ली और परिवार मे गंभीर विचार विमर्श के बाद उसे वापस मायके पहुंचा दिया। वे लोग बुरे नहीं थे , पंडित के द्वारा कही गयी बातों से भयभीत थे। लडकी के माता पिता से मिलकर वे एक ही विनती किए जा रहे थे कि शादी में खर्च हुए सारे पैसे वे वापस कर देंगे ,वे चाहें तो और ले लें , पर वे कन्‍या को अपने घर पर नहीं रखेंगे , क्‍योंकि उनका संकट और बढ सकता है। वे चाह रहे थे कि जल्‍द से जल्‍द कन्‍या तलाक के पेपर पर साइन कर दे।


लडकी के माता पिता भी उनके इस व्‍यवहार से बिल्‍कुल हैरान परेशान थे ,उन्‍होने जन्‍मकुंडली मिलवाकर विवाह किया था , विवाह करने के बाद मां बाप एक जवाबदेही से मुक्‍त होना चाहते हें और विवाह के बाद ऐसी परेशानी उपस्थित हो गयी थी। अचानक उसके ससुराल में आयी विपत्ति उनको भी कुछ सोंचने को मजबूर कर रही थी। यदि ज्‍योतिषी की बात पर विश्‍वास करें , तो उन्‍हें भी लडकी को उनके घर भेजने पर भय हो रहा था। ऐसी स्थिति में मै तो जन्‍मकुंडली देखने के पक्ष में ही नहीं थी , क्‍योंकि विवाह से पहले विचार विमर्श होना और बात है , पर विवाह के बाद क्‍यों इसे देखा जाए ? यदि उस लडकी की जगह उनकी अपनी बेटी ने जन्‍म लिया होता तो क्‍या वे घर से निकाल देते ? इस दुनिया में हमलोग बहुत बातों के साथ समझौता कर लेते हैं , क्‍योंकि उसके सिवा हमारे पास कोई विकल्‍प नहीं होता। यहां भी ऐसा ही होना चाहिए क्‍योकि विवाह के बाद लडके या लडकी के लिए कोई विकल्‍प नहीं खुला रह जाता है। हमारे समाज में अभी तक तलाक को बहुत ही पेचीदा रखा गया है , तो कोई गलत नहीं है , कम से कम एक पक्ष की मनमानी तो नहीं चलती कि जल्‍दी ही तलाक देकर दूसरी शादी रचा ली जाए।


फिर भी उक्‍त सज्‍जन के अनुरोध पर मैने लडकी की जन्‍मकुंडली देखी ,वैवाहिक जीवन स्‍पष्‍ट तौर पर गडबड दिखाई दे रहा था ,उसके सामने परिस्थितियां तो कुछ न कुछ गडबड आनी ही थी , सो आयी । उसकी कुंडली के अनुसार ससुरालवालों पर भी समस्‍याएं आनी थी , पर उस कन्‍या का विवाह उनके समाज के इतने सारे घरों को और इतने लडकों को छोडकर उन्‍हीं के घर क्‍यों हुआ ? उक्‍त परिवार के ग्रहों में भी कोई गडबडी अवश्‍य रही होगी। चूंकि सबो को झेलना था , इसलिए ईश्‍वर ने उन्‍हें साथ साथ रख दिया। चूंकि विवाह के बाद यह सब हुआ तो यह एक बहाना मिल गया कि कन्‍या के कारण ही हुआ है। समस्‍याएं आगे छह वर्षों या बारह वर्षों तक बनी ही रहनी थी , चाहे कन्‍या उनके साथ रहे या न रहे। और जब झेलना ही है तो बेटे से कन्‍या को तलाक दिलवाने की क्‍या जरूरत ? लेकिन मेरे उपदेशों को सुनने के लिए लडकेवाले मेरे पास आने को तैयार न थे। वे अपने ही ज्‍योतिषी की बात को लकीर मानकर बैठे थे। मेरे पास तो एक ही सज्‍जन इस प्रकार की समस्‍या लेकर आए हैं , पर न जाने दुनिया के कितने परिवार की ऐसी कहानी होगी ? मैं बस यही सोंच रही थी कि क्‍या ज्‍योतिषियों का यह व्‍यवहार उचित है ?

14 टिप्‍पणियां:

रंजना [रंजू भाटिया] ने कहा…

नहीं यह व्यवहार किसी भी तरह से उचित नहीं है ..किसी की ज़िन्दगी से यूँ खेलना एक घिनोना मजाक है यह ..आपने सही कहा की यदि उनके घर में कोई अपनी लड़की जन्म लेती तो क्या वह उसको घर से बाहर निकाल देते ? और यदि उनकी सोच इतनी छोटी है तो लड़की को वहां भेजना भी सही नहीं लगता ..आँखे मूँद कर यूँ किसी के कहे को मानना सच में उनके दिमाग के किसी ग्रह दोष को बताता है

ज्ञानदत्त पाण्डेय | G.D.Pandey ने कहा…

शठता है ससुराल पक्ष की!

आलोक सिंह ने कहा…

लड़के के घरवालों ने एक अच्‍छे ज्‍योतिषी को बुलाया पर शायद ज्‍योतिषी ने अपने जजमान को खुश करने के लिए ये बता दिया की लड़की में दोष है किन्तु यदि वह एक व्यवहारिक और दूरदर्शी होते तो शायद ऐसा नहीं करते .
लड़के वालो को समझदारी के काम लेना चाहिए , ऐसा करना उचित नहीं है .

Abhishek Mishra ने कहा…

Jyotish ka ek yeh paksh bhi saamne aaya!

mehek ने कहा…

aisa vyavahar kadapi uchit nahi hai,janam kundali se mann ki kundali aur vishwas ke dhage ka milan jyada jaruri hai.soch ke mann kunthit hota hai,aisa bhi sochte hai log.

PN Subramanian ने कहा…

बड़ी दुखद स्थिति है. उस ज्योतिषी का व्यवहार अनुचित था. उसे लड़की की कुंडली में खोट नहीं निकालनी थी. कोई पारिवारिक आपदा कह कर निदान के लिए रास्ता सुझाता तो बेहतर होता.

मा पलायनम ! ने कहा…

ये तो पूरे समाज का हॉल है , हमारे यहाँ अवधी में एक कहावत है कि मीठा -मीठा गप्प ,तीता -तीता थू .

Vivek Rastogi ने कहा…

जी हाँ उस ज्योतिषी ने ज्योतिष के नियम विपरीत अपने यजमान को सही जानकारी दी, नियम के अनुसार और मानवता के नाते इस तरह की जानकारी नहीं दी जाती है।

Gagagn Sharma, Kuchh Alag sa ने कहा…

जवाब तो आप को ही देना है।

cmpershad ने कहा…

भाग्य का लेखा तो कोई मिटा नहीं सकता। यदि अपनी करनी का फल ससुर को मिल रहा है तो इसमें बहु का क्या दोष? अन्धविश्वास और दूसरों पर अपनी मुसीबतों को आरोपित करना शायद मानव चरित्र है और उस आग में घी का काम उस ज्योतिष जैसे लोग पैसे की लालच में करते है। यदि शास्त्र के हिसाब से भी ठीक था तो भी उन्हें यह बात नहीं ही बतानी चाहिए थी।

Sachi ने कहा…

jyotish ek aisa visay hai jisme sambhavnaaein anant hain.. nischit roop se koi na koi aisa vrat tyohar , pooja mantra hoga jo ladki ki samasya ko kam kar sakega...

agar we jyotish ko itna hi maante hain to yeh paksh bee sweekar karenge..

Prem Farrukhabadi ने कहा…

jyotish rishton ko jodne ka kaam karta hai.jo jude rishton ko todte hain, ve sahi maine mein jyotishi hain hi nahin.vo to jyotish ko apne hit ko saadhne ke liye istemaal karte hai.
jyotish raah dikhaati hai, bhatkati nahin.jyotish ko nahin jyotishi ko samjhne ki jaroorat hai.jisme akshar logon se chook ho jaati hai.

रंजना ने कहा…

चिकित्सक,ज्योतिषी इत्यादि की जिम्मेदारी बहुत बड़ी होती है....जब किसी के जीवन मरण का प्रश्न हो,इन्हें बहुत सोच समझ कर कुछ बोलना चाहिए...
हमारे तो धर्म में ही कहा गया है कि कटु सत्य को भी निर्ममता से नहीं बोलनी चाहिए....ऐसे सत्य का क्या लाभ जो किसी का घर उजाड़ दे...

मैं स्वयं भी बुक्त्भोगी हूँ ऐसे ही किसी ज्योतिषी की...क्या कहूँ....

RAJIV MAHESHWARI ने कहा…

उस ज्‍योतिषी की क्या गलती है.जब आप ही कुंडली देखकर बता रही है की लड़की की कुंडली में
कुछ खोट है. हा सुसराल वाले जो व्हावार कर रहे है
वो गलत है.