शनिवार, 11 अप्रैल 2009

आखिर निकलते निकलते समीर लाल जी ने मेरे फोन की घंटी बजा ही दी

जिस बात की उम्‍मीद लगाए बैठे हो वह मिल भी जाए तो उतनी खुशी नहीं होती , जितनी उस बात के पूरे होने में , जिसकी उम्‍मीद आप छोड चुके हों। ऐसी ही खुशी मुझे कल तब मिली , जब अपना फोन उठाने पर मुझे मालूम हुआ कि यह फोन समीर लाल जी ने किया है। दरअसल उन्‍होने भारत आने से पहले ही मेरा फोन नं लिया था , पर आने के बाद इतनी व्‍यस्‍तता ही थी कि फोन नहीं कर सके थे , पर जाते जाते उन्‍हें याद आ ही गया कि कोई काम बाकी रह गया है और मुझे फोन कर ही लिया। हिन्‍दी ब्‍लाग जगत के सभी सदस्‍य अब एक दूसरे से इतने परिचित हो गए हैं कि महसूस ही नहीं होता कि हम पहली बार बात कर रहे हों , उनसे बातें करने का अनुभव बहुत अच्‍छा रहा।


मैने चिट्ठा पढने से पहले लिखना ही शुरू किया था , इसीलिए कौन कौन से लोग हिन्‍दी चिट्ठाकारिता से जुडे हैं , इसका कोई आइडिया नहीं था , जब मैने अपने चिट्ठे पर कमेंट करनेवालों का प्रोफाइल देखा , तब चिट्ठाकारों से परिचय आरंभ हुआ। फिर दूसरों के चिट्ठों को खोलने और उनकी टिप्‍पणियों में औरों के प्रोफाइल से धीरे धीरे सबको जानने लगी थी। इस प्रकार ब्‍लोगों की टिप्‍पणियों से ही हिन्‍दी ब्‍लाग जगत के लोगों से मेरा परिचय बढना शुरू हुआ , तो यह कहना गलत न होगा कि मैने चिट्ठाजगत के दो चार लोगों को भी पहचानना आरंभ किया हो तो उसमें समीर लाल जी थे। यह भी कहा जा सकता है कि हिन्‍दी चिट्ठा जगत से जुडे किसी भी ब्‍लागर के लिए समीर लाल जी के परिचय में दो चार सप्‍ताह से अधिक समय नहीं लगता होगा। इसका मुख्‍य कारण सभी ब्‍लोगों मे नियमित तौर पर की जाने वाली उनकी टिप्‍पणी ही है , इसमें भी शक नहीं। हिन्‍दी ब्‍लाग जगत को प्रतिदिन दो चार घंटों का समय देकर ब्‍लोगरों को प्रोत्‍साहित करने का उनका प्रयास सराहनीय है। कोई छोटा हो या बडा हो , अच्‍छा लिखता हो या बुरा लिखता हो , किसी भी विषय को किसी भी रूप में लिखता हो , सबकी पढते हैं , सबमें टिप्‍पणी करते हैं , इसके एवज में उनको लोकप्रियता मिली है , तो यह बिल्‍कुल सामान्‍य बात है ।


समीर लाल जी का भारत मे रहना भले ही उनके लिए या जबलपुर वालों के लिए खुशी की बात हो , पर हिन्‍दी ब्‍लाग जगत में एक खालीपन नजर आता रहता है। कुछ महत्‍वपूर्ण ब्‍लोगों को छोड दिया जाए , क्‍योंकि उसमें टिप्‍पणी करनेवालों की तो कमी नहीं रहती , पर समीर जी की इंटरनेट में कम समय देने से सामान्‍य ब्‍लोगों में टिप्‍पणी की कमी साफ तौर पर नजर आती है। मैने नवम्‍बर से समीर लाल जी की वजह से हुए इस खालीपन को भरने का पूरा प्रयास किया है , नए ब्‍लोगरों को भी मै नियमित तौर पर प्रोत्‍साहित कर रही हूं, पर उनके जैसी सटीक टिप्‍पणी कर पाना मेरे वश की बात नहीं है। इसके बावजूद मेरे पास सभी ब्‍लोगरों के धन्‍यवाद भरे मेल आते हैं , तो मुझे बहुत खुशी होती है। पर अब समीर लाल जी जैसे ही कनाडा पहुंच जाएंगे और अपना बहुमूल्‍य समय यहां देना शुरू करेंगे , मेरा भार कुछ हल्‍का हो जाएगा। अंत में , मुझे याद रखने के लिए समीर लाल जी को बहुत बहुत धन्‍यवाद।

13 टिप्‍पणियां:

P.N. Subramanian ने कहा…

समीरलाल जी का तो कोई जवाब नहीं. हमें आज पता चला कि वे वापस जा रहे हैं.

Arvind Mishra ने कहा…

अरे घंटी तो मेरी भी बजी -मैं उनका बनारस इन्तज़ार करता रह गया -उनकी विनम्रता देखिये उन्होंने न पहुँच पाने की क्षमां याचना की -ऐसा विरला इंसान कहाँ मिलेगा ?

डॉ. मनोज मिश्र ने कहा…

वाकई आप ने सही लिखा है ,समीर जी प्रेरक ब्यक्तित्व के धनी हैं .ब्लॉग जगत के नवरत्नों में से एक .

आलोक सिंह ने कहा…

समीर जी के बारे में मैं बस इतना ही कहना चाहता हूँ
सब धरती कागद करूँ, लेखन सब बनराय, सात समुद्र की मसि करुँ, समीर जी का गुन लिखा न जाये.

परमजीत बाली ने कहा…

समीर जी सही मे सभी को प्रोत्साहन देते हैं।उन के बारे में शायद ही कोई हो जो ना जानता हो।

लवली कुमारी / Lovely kumari ने कहा…

आपने कोशिस तो की खालीपन भरने की ..बाकि जल्द ही टिप्पणी सम्राट वापस ड्यूटी पर आ जायेंगे

अविनाश वाचस्पति ने कहा…

समीर एक भीनी खुशबू है
जो टिप्‍पणियों के रूप में
महकती है और आपकी
टिप्‍पणियां संगीत की
तरह झनकती हैं।

Shikha Deepak ने कहा…

सही कहा आपने. मैंने जब अपना ब्लोग लिखा तो मुझे प्रोत्साहित करने वालों में आप दोनों भी सम्मिलित हैं.

cmpershad ने कहा…

दीपक से दीपक जलता है ...इसी प्रकार ब्लाग जगत में हम एक दूसरे से परिचित होते रहते हैं भले ही न पहचानते हों न मिले हों। और इस प्रकार एक कुटुम्ब बन जाता है।

समयचक्र - महेन्द्र मिश्र ने कहा…

समीर जी प्रेरक ब्यक्तित्व के धनी हैं...

नीरज गोस्वामी ने कहा…

आप खुश किस्मत हैं हमें तो मुंबई आने का वादा करके टरका दिए और चल दिए कनाडा...अब उन्हें वहीँ जा कर पकडेंगे...वैसे वो नहीं आये कोई बात नहीं पर वो हैं कमाल के इंसान...
नीरज

हरि ने कहा…

इस घंटी में समीर जी के व्‍यक्तित्‍व की एक झलक मिलती है।

विष्णु बैरागी ने कहा…

सच कहा आपने। मैं आपसे सहमत हूं।