सोमवार, 13 अप्रैल 2009

गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष के जानकार को ‘समय विशेषज्ञ’ कहा जा सकता है

कल के पोस्‍ट पर टिप्‍पणियों के रूप में आप सभी पाठकों का साथ और आपके बहुमूल्‍य विचार मिले , उसके लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया । एक व्‍यर्थ के बाद विवाद में मेरा और आप सबों का बहुमूल्‍य समय नष्‍ट हुआ , पर एक बात साफ होकर अवश्‍य आई कि मैं सबों के पोस्‍ट पर अपनी टिप्‍पणियां देना जारी रखूं , चाहे वो छोटी हो या बडी , क्‍योंकि टिप्‍पणियां लेखकों को प्रोत्‍साहित करती हैं। अब बढते हैं , ज्‍योतिषीय मामलों की चर्चा लेकर।

यदि संभावनावाद की मानें , तो किसी भी आधार पर किए गए किसी भी भविष्‍यवाणी के सही या गलत होने की संभावना 50-50 प्रतिशत हो सकती है। इस कारण किसी भी विधा को लेकर की गयी भविष्‍यवाणियां कम से कम आधे मामलों में तो सही हो ही जाया करती हैं। इसलिए गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष ऐसी भविष्‍यवाणियों को अधिक महत्‍व नहीं देता। किसी व्‍यक्ति की कुंडली , हथेली या मस्‍तक की रेखा या अंगूठे के अनुसार किसी के लिए बहुत धनवान होने की भविष्‍यवाणी करना उतना महत्‍वपूर्ण नहीं , जितना महत्‍वपूर्ण इस बात को बताना कि वह अपनी उम्र के किस पडाव पर धनवान बनेगा। यदि भविष्‍यवाणी की कोई विधा समययुक्‍त भविष्‍यवाणी का दावा करे , तो हमें उस विधा को विज्ञान मानना ही पडेगा।


गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष की लोकप्रियता का सबसे बडा कारण इसकी भविष्‍यवाणियों का समययुक्‍त होना है। ज्‍योतिष की इस नई शाखा ने ‘परंपरागत ज्‍योतिष’ की व्‍यर्थ की लंबी चौडी गणनाओं में अपना समय जाया न करते हुए भविष्‍यवाणियों के लिए ‘गोचर’ को अपना आधार बनाया है। किसी खास समय में आसमान में स्थित ग्रहों की वास्‍तविक स्थिति को ही ज्‍योतिष में ‘गोचर’ कहा जाता है। यदि संदर्भों को छोड दिया जाए , तो सिर्फ किसी व्‍यक्ति के जन्‍म तिथि के ग्रहों को देखकर उसके जीवन के अच्‍छे और बुरे समय की जानकारी वर्षों में , महीनों में और तिथियों तक में दी जा सकती है। इसके लिए 40 वर्षों तक आसमान में ग्रहों की खास खास स्थिति को प्रत्‍यक्ष तौर पर जातको के सापेक्ष देखा जाता रहा है । गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष के आधार पर जो भविष्‍यवाणियां की जाती हों , वो भले ही सांकेतिक हों , पर उसमें समय का उल्‍लेख निश्चित तौर पर होता है। इस कारण गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष को जाननेवालों को ‘समय विशेषज्ञ’ कहा जा सकता है। पर ‘अच्‍छा’ या ‘बुरा’ किस संदर्भ में होगा , इसे जानने के लिए हमें जन्‍मसमय की आवश्‍यकता पडती है , ताकि जन्‍मकुंडली बनाकर ग्रहों के जातक पर पडनेवाले प्रभाव को और स्‍पष्‍ट किया जा सके।

4 टिप्‍पणियां:

डॉ. मनोज मिश्र ने कहा…

"गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष" को आपसे जानकर काफी जानकारी मिल रही है .

विष्णु बैरागी ने कहा…

अपनी विधा को स्‍थापित कर लोक स्‍वीकार दिलाने हेतु किया जा रहा आपका संघर्ष सचमुच में अनुकरणीय है।

hem pandey ने कहा…

गत्यात्मक ज्योतिष के आधार पर की गयी भविष्यवाणियाँ यदि बहुधा सत्य निकलीं तो इस विधा पर विश्वास करने वालों की संख्या बढ़ती जायेगी.

Nirmla Kapila ने कहा…

sangeetaji aaj hi apki pichhli post bhi padhi dukh hua ki ek blogger doosre ko aise galat kahe magar aap apna kam karen agar koi kuchh karega to hi koi alochna kar paayega ye alochna to aadmi ko agay badhne ki prerna deti hai aap jitna kaam kar rahi hain mai to kam se kam itni mehnat nahi kar sakti ap har blog pe jaati hain ye kya kam shramsadhya hai?
maine poochha tha ki aap gochar ko kitna mahatav deti hain
apki agli post ke intjar me