बुधवार, 15 अप्रैल 2009

राहू और केतु का पृथ्‍वी के जड चेतन पर कोई प्रभाव नहीं पडता

शीर्षक देखकर आप सब तो चौंक ही गए होंगे , क्‍योंकि जब भी किसी की कुंडली में बुरे ग्रहों के प्रभाव की चर्चा होती है तो मंगल और शनि के साथ ही साथ राहू और केतु का नाम भी आना स्‍वाभाविक होता है। यह अचरज की ही बात है कि मंगल और शनि जैसे भीमकाय ग्रहों और राहू केतु जैसे अस्त्तिवहीन ग्रहों के प्रभाव को परंपरागत ज्‍योतिष एक ही रूप में कैसे देखता आया है ? इस विराट ब्रह्मांड में पृथ्‍वी को स्थिर रखने पर सूर्य का बन रहा काल्‍पनिक पथ और सूर्य की परिक्रमा करता चंद्रमा का पथ दोनो ही राहू और केतु नाम के इन दो संपात विंदूओं पर एक दूसरे को काटते हैं । गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष की माने तो सूर्यग्रहण और चंद्रग्रहण के दिन सूर्य , पृथ्‍वी और चंद्रमा के साथ ही साथ ये दोनो विंदू भी एक ही सीध में आ जाते हैं। हो सकता है , जब यह खोज नहीं हुई हो कि एक पिंड की छाया दूसरे पर पडने से सूर्यग्रहण या चंद्रग्रहण होता है , तब सूर्यग्रहण और चंद्रग्रहण में इन दोनो संपात विंदुओं की ही भूमिका को मान लिया गया हो और इन्‍हें इतना महत्‍वपूर्ण दर्जा दे दिया गया हो।

पर भौतिक विज्ञान में विद्युत चुंबकीय या गुरूत्‍वाकर्षण या फिर कोई और शक्ति क्‍यों न हो , किसी की भी उत्‍पत्ति पदार्थ के बिना संभव नहीं है और हमलोग ग्रह की जिस भी उर्जा से प्रभावित हों , राहू और केतु उनमें से किसी का भी उत्‍सर्जन नहीं कर पाते , इसलिए राहू और केतु से प्रभावित होने का कोई प्रश्‍न ही नहीं उठता। अपने 40 वर्षीय अध्‍ययन मनन में ‘गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष’ ने सूर्य , चंद्रमा और अन्‍य ग्रहों की भिन्‍न भिन्‍न स्थिति के अनुसार उनकी शक्ति को पृथ्‍वी के जड चेतन पर महसूस किया है , पर राहू और केतु की विभिन्‍न स्थिति से जातक पर कोई प्रभाव नहीं देखा , इसलिए ‘गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष’ में इसकी चर्चा नहीं की गयी है। राहू और केतु को छोडकर इनकी जगह यूरेनस , नेप्‍च्‍यून और प्‍लूटो के आंशिक प्रभाव को देखते हुए इसे अवश्‍य शामिल किया गया है। इस प्रकार गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष के अनुसार हमें प्रभावित करनेवाले ग्रहों की कुल संख्‍या नौ की जगह दस हो गयी है , जो इस प्रकार हैं ...... चंद्र , बुध , मंगल , शुक्र , सूर्य , बृहस्‍पति , शनि , यूरेनस , नेप्‍च्‍यून एवं प्‍लूटो।

6 टिप्‍पणियां:

आलोक सिंह ने कहा…

बहुत अच्छी जानकरी मिली .
हमने कई लोगो से सुना है की उनके ऊपर राहू की दशा चल रही है इसलिए काम नहीं हो रहा , मतलब कारण कोई और है , और इल्जाम राहू -केतु पर लग रहा है .

Arvind Mishra ने कहा…

देखिये राहू केतु का कोई भौतिक वजूद तो है नहीं ! ए इसलिए छाया ग्रह ही माने गए हैं ! दरअसल ज्योतिषीय गणनाओं को सटीक बनाने के लिए इन ग्रहों के वजूद की कल्पना करनी पडी और इनसे जुड़े मिथक भी रचे गए !

विष्णु बैरागी ने कहा…

राहु-केतु यदि अस्तित्‍वहीन हैं तो उनकी चर्चा क्‍यों।

सिद्धार्थ जोशी Sidharth Joshi ने कहा…

आप तो परम्‍परागत भारतीय ज्‍योतिष को ही नहीं मानती है फिर आपको इन ग्रहों की गणना करने, इनको मानने या इनको नकारने की आवश्‍यकता ही नहीं है।

आपके सामने मुश्किल तो तब आती होगी जब गत्‍यात्‍मक से कहीं अधिक प्रसिद्ध राहू केतू से जुड़े सवालों को आपको झेलना पड़ता होगा। :)

आपकी पद्धति अलग है इससे राहू केतू का नगेशन नहीं हो जाता। जैसे इसाईयों के लिए गणेश जी का भाई कार्तिकेय हो या ना हो हिन्‍दू की बला से... :)

रंजना [रंजू भाटिया] ने कहा…

पढ़ रहे हैं आपका लिखा ..अधिक जानकारी तो इस विषय की है नहीं ..पर पढना अच्छा लगता है ...इन विषयों पर

भारतीय नागरिक - Indian Citizen ने कहा…

मुझे तो अधिक जानकारी है नहीं.