सोमवार, 18 मई 2009

आखिर गुरू ने साबित कर ही दिया कि वे ही गुरू है .....


महीने दो महीने से चल रही चुनाव की गहमा गहमी समाप्‍त हुई और आखिर 16 मई को फैसला आ ही गया। कांग्रेस पूर्ण बहुमत में है , इसलिए इसका सरकार बनाना तय हो गया। देश में फिलहाल एक स्‍थायी सरकार आ गयी और परिणाम से पहले जितने भी विकल्‍प दिखाई पड रहे थे , उन सबसे इसे बुरा तो नहीं माना जा सकता , इसलिए देश और देशवासी बधाई के पात्र तो अवश्‍य हैं। मुझे तो विशेष बधाई इसलिए भी मिल रही है , क्‍योंकि मैने अपने ब्‍लाग के इस आलेखमें कांग्रेस के द्वारा ही सरकार बनाने की संभावना व्‍यक्‍त कर दी थी। सिर्फ यही नहीं , मेरे पूरे विश्‍लेषणात्‍मक आलेख में लगभग जिन नेताओं के बारे में जैसी बातें कही गयी , एक दो को छोडकर सब सटीक रही है। इसलिए मुझे बधाई देनेवालों का मानना है कि इतनी अनिश्चितता की स्थिति में इतना बतलाना कम नहीं। पर इसका श्रेय जहां कुछ हद तक ‘गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष’ के सिद्धांतों को दिया जा सकता है (क्‍योंकि ये इतने पर्याप्‍त हैं कि किसी भी जन्‍म विवरण से जातक के बारे में भविष्‍यवाणी कर पाना कठिन नहीं होता) , तो कुछ हद तक इस विश्‍लेषण के लिए मै नेताओं का शुक्रगुजार भी हूं , क्‍यूंकि उन्‍होने धन और संपत्ति की तरह अपनी जन्‍मतिथि नहीं छुपायी और वह मेरे लिए सुलभ हो सका। मैने जिन नेताओं की चंद्रकुंडलियों का उपयोग किया था , वह डाटा विकिपीडीया से लिया था। वरना फिल्‍म इंडस्‍ट्री में इस आधार पर भविष्‍यवाणियां की जाती तो क्‍या खाक सही होती ? सरकार कांग्रेस की बनेगी और स्‍थायी होगी , यहां तक की चर्चा मैने की थी , पर मेरे पूरे आलेख में ‘किन्‍तु’ , ‘परंतु’ और ‘मशक्‍कत’ जैसे शब्‍दों ने जगह बना ही ली थी , जिसके कारण लोग माने या न माने , पर मै मान रही हूं कि मेरी भविष्‍यवाणियां खरी नहीं मानी जाएंगी।

वास्‍तव में, मन में किसी तरह का पूर्वाग्रह हो तो , हम सामने बैठे व्‍यक्ति के व्‍यवहार को पूर्ण तौर पर समझ नहीं पाते तो फिर उतने दूर स्थित ग्रहों के स्‍पष्‍ट प्रभाव को समझने में चूक होनी ही है। राजनीति से संबंधित पहले आलेख की शुरूआत करने के वक्‍त ही मेरे मन में राजनीतिक अनिश्चितता का अंधकार था। इसलिए उस आलेख में मैने ग्रह को देखकर उसके प्रभाव का राजनीति पर असर न दिखाकर राजनीतिक अंधकारपूर्ण माहौल के कारणों को आसमान में ढूंढते हुए यह आलेखलिखा था कि आखिर क्‍यूं ये चुनाव इतना जोड तोड वाला होगा ? बस यहीं से गल्‍ती की शुरूआत हुई और फिर यह जारी ही रही। तीन चार ग्रहों की विशेष स्थिति के कारण उत्‍पन्‍न होने वाले इसी अनिश्चितता को मन में बनाए हुए मै 20 मई के बाद ही किसी समझौते के होने या सरकार के गठन होने के लिए तिथियां ढूंढनी शुरू की तो वह कहीं नहीं दिखाई पडी , इसलिए मुझे इतनी दूर यानि 15 जून तक चले जाना पडा। मन में उठी इस अनिश्चितता के कारण ही शेयर बाजार , मौसम हर जगह ही मुझे विषम परिस्थितियां दिखाई पडने लगी। बहुत अव्‍यवाहारिक होते हुए भी मै जून के मध्‍य में ही सब कुछ ठीक होने के बारे में बिल्‍कुल निश्चिंत थी और इसलिए ही दिमाग में कांग्रेस के लिए काफी माथापच्‍ची की बात आ गयी थी। सिर्फ इतना ही नहीं , मैने नेपाल और श्रीलंका की समस्‍याओं के भी जून के मध्‍य में ही सुलझने की संभावना व्‍यक्‍त की थी।

जब 11 मई को मैने राजनीति से संबंधित अपने आलेख को पोस्‍ट कर दिया और बिल्‍कुल शांत दिमाग से अगला पोस्‍ट लिखने के लिए आसमान पर गौर किया तो मुझे निकट यानि 16 मई को आनेवाली बृहस्‍पति और चंद्र की खास युति समझ में आयी। अष्‍टमी के चंद्रमा के साथ बृहस्‍पति की यह युति खास होती है और 13 मई को इसका महत्‍व दिखाते हुए मैने यह पोस्‍टलिखा , जिसमें 16 मई से 18 मई तक धर्म और न्‍याय के प्रतीक ग्रह बृहस्‍पति के कारण भारत और उसके पडोसी देशों पर शुभ प्रभाव पडने की चर्चा की गयी। यहां तक की गर्मी के चिलचिलाते मौसम तक पर इसके शुभ प्रभाव को लिखा गया , पर राजनीति और शेयर बाजार के बारे में तो मै पोस्‍ट कर चुकी थी। और सिर्फ बृहस्‍पति और चंद्र मिलकर अन्‍य ग्रहों पर काबू पा लेंगे , इसपर भी पूरा भरोसा नहीं था , इसलिए उसे भाग्‍य भरोसे ही छोड दिया। पर धर्मगुरू बृहस्‍पति ने किसी भी क्षेत्र को अपने प्रभाव से अछूता नहीं रहने दिया और 16 से 19 मई के मध्‍य भारतवर्ष को एक स्‍थायी सरकार देकर , मौसम को सुहावना बनाकर , शेयर बाजार में उल्‍लेखनीय उंचाई देकर खुद के प्रभाव को तो साबित कर ही दिया है। मेरे कहे अनुसार इसी दो तीन दिन की अवधि में सिर्फ भारत में ही नहीं , नेपाल में भी सरकार के गठन की उम्‍मीद बन गयी है और श्रीलंका में भी लडाई थमने के कगार पर है। चलिए , अच्‍छा ही हुआ , लोग एक महीने की अनिश्चितता झेलने से बच गए।

मेरे कहे अनुसार भले ही केन्‍द्र में कांग्रेस की सरकार बन रही हो , पर राजनीतिक क्षेत्र में भविष्‍यवाणी करने में व्‍यावहारिकता की कमी या फिर मेरी हल्‍की सी चूक, जो भी कह दें , ’गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष’ द्वारा किए जानेवाले अपनी तिथियुक्‍त भविष्‍यवाणियों के दावे की कसौटी पर मै खरी नहीं उतर पायी , इसका दुख ही है मुझे , क्‍योंकि कमजोरी को स्‍वीकारे बिना खुद को तो सुधारा नहीं जा सकता। पर आप माने या न माने , इन तीन दिनों के भीतर भारत , नेपाल और पाकिस्‍तान सबों की समस्‍या को समाप्‍त कर ग्रहों के प्रभाव को और ज्‍योतिष के महत्‍व को साबित करने में बृहस्‍पति चंद्र युति (16 से 19 मई 2009) ने ही मेरी मदद कर दी है और साबित कर दिया कि वास्‍तव में वे गुरू हैं और बाकी ग्रहों के प्रभाव को कम करने में सक्षम भी। इसके आगे ज्‍योतिष के महत्‍व को भी नकारा नहीं जा सकता , शोध करने से इस क्षेत्र में भी संभावनाएं अनंत हैं। और चूंकि मेरा ब्‍लाग लिखने का उद्देश्‍य अपनी प्रतिभा को दिखाना नहीं , ग्रहों के प्रभाव और ज्‍योतिष के महत्‍व को साबित करना है , इसलिए इससे मुझे खुशी होनी ही है।

11 टिप्‍पणियां:

AlbelaKhatri.com ने कहा…

is vishesh aalekh k liye aapko khas badhai.....
VAKAI GURU ....GURU HAI

ज्ञानदत्त पाण्डेय | Gyandutt Pandey ने कहा…

मैं तो विभ्रम में हूं जी पूरे प्रकरण में। लग रहा था कि नतीजे चौंकाने वाले होंगे - मूक जनता मुखर वोट देगी और वह दिया।
पर क्या होना था, वह तो शायद कांग्रेस वालों को भी अन्दाज न था! :)

योगेन्द्र मौदगिल ने कहा…

मुझे तो शुरू से ही यक़ीन था संगीता जी .....

कमल शर्मा ने कहा…

गुरु के आगे सब चेले होते हैं।

vani Geet ने कहा…

Ab kya kahen...In rajnetaon ke aage to grahon ki chal bhi badal jati hai...hahahaha

Abhishek Mishra ने कहा…

नई सरकार धरती के राहु-केतुओं के प्रभाव से भी मुक्त रहे यही शुभकामना है.

कंचन सिंह चौहान ने कहा…

आपकी पोस्ट पढ़ने के बाद मैने तो अपने पत्रकार भांजे से कह भी दिया था कि " भईया पी० चिदंबरम को प्रधानमंत्री बना दो तो कुछ ठीक ठाक सरकार चल सकती है :) :) । मगर अचानक पी० चिदंबरम की हार की खबर आ जाने से थोड़ा मन विचलित हुआ...! मगर थोड़ी हि देर में पुनर्गणना और जीत की सूचना से संतुष्टि मिली।

जो भी हो आपने इतनी बार यह स्पष्ट कर दिया था कि इसे भविष्यवाणी न समझ कर संभावनाएं समझा जाये कि कांग्रेस के सत्ता में आने से ही हम लोग आपकी भविष्यवाणी को सही मान रहे थे १० प्रतिशत के लिये तो आप स्वयं हर बार कह देती हैं।

मगर जिस तरह से आपने अपनी ही कमियों को उजागर कर के ये पोस्ट लिखी है, वो दर्शाता है कि आप ज्योतिषी के साथ साथ एक अच्छी मानवी भी हैं।

काजल कुमार Kajal Kumar ने कहा…

बहुत बहुत बधाई.

Science Bloggers Association ने कहा…

Gambhir vivechan.

-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

इष्ट देव सांकृत्यायन ने कहा…

यूं तो जो भी होता बुरा ही होता, पर यह ज़्यादा बुरा हुआ. पिछले 5 सालों में महंगाई कहां से कहां गई है और जनजीवन कितना मुश्किल हुआ है, यह सबके सामने है. आगे क्या होगा, इस बारे में आपका गत्यात्मक ज्योतिष क्या कहता है? मैं नेताओं के बारे में नहीं, आम जनता के बारे में पूछ रहा हूं.

आदर्श राठौर ने कहा…

आपका आकलन काफी हद तक सटीक रहा....