गुरुवार, 21 मई 2009

बोर्ड तथा अन्‍य परीक्षा परिणामों के इंतजार और तनाव में हैं विद्यार्थी

सालभर की मेहनत के बाद मार्च में परीक्षा देने के पश्‍चात 10वीं और 12वीं के विद्यार्थी अप्रैल भर ही शांति से बैठ पाते हैं कि तुरंत आ पहुंचता है मई का महीना यानि बोर्ड के साथ ही साथ अन्‍य कालेजों में प्रवेश पाने की परीक्षाओं के परिणामों का महीना। चाहे परीक्षा कितनी भी अच्‍छी क्‍यों न हुई हो , परीक्षा परिणामों का तनाव टीनएजर बच्‍चों की नींद ही उडा ही ले जाता है और अब तो मई का तीसरा सप्‍ताह आ पहुंचा है , जहां से मई के अंत अंत तक लगभग सभी बोर्डों के रिजल्‍ट आ जाएंगे ।

12 वर्ष की उम्र तक बच्‍चे चाहे जितनी मनमानी कर लें , प्राचीन काल से ही इस उम्र के बाद किशोरों और किशोरियों को किसी न किसी प्रकार का ज्ञान देने की शुरूआत होती रही है, ताकि उस ज्ञान के सहारे वे बडे होकर अपने परिवार का भरण पोषण कर सकें। ‘गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष’ की मान्‍यता है कि जीवन के इस कालखंड में विद्या बुद्धि और ज्ञान प्रदान करने वाले बुध ग्रह का प्रभाव सर्वाधिक देखा जाता है। गोचर यानि आसमान में बुध मजबूत हो, तो विद्यार्थियों के सामने सुखमय वातावरण और बुध कमजोर हो , तो उनके सामने कष्‍टमय वातावरण उपस्थित होता है।

मार्च या अप्रैल में जब सारी परीक्षाएं हो रही थी , तो आसमान में बुध ग्रह की स्थिति मजबूत बनी हुई थी , इस कारण इन्‍हें प्रश्‍नपत्र मनोनुकूल मिले होंगे और सभी विद्यार्थियों की अपनी अपनी प्रतिभा और मेहनत के हिसाब से संतोषजनक परीक्षा हुई होगी , पर अब जब परीक्षा परीणामों के निकलने की बारी है , आकाश में बुध ग्रह की स्थिति कमजोर हो चुकी है और इस कारण परीक्षा का परिणाम कुछ झटका देनेवाला हो सकता है यानि सामान्‍य तौर पर विद्यार्थियों को उम्‍मीद से कुछ कम प्रतिशत मिल सकता है। पर इससे घबडाने की कोई आवश्‍यकता नहीं , क्‍योंकि यह लगभग सभी विद्यार्थियों पर लागू होगा और इस कारण विभिन्‍न कालेजों में कट आफ कम होने की संभावना है।

वैसे तो इस बार परीक्षा के परिणामों में ग्रहों के प्रभाव की चर्चा करने के लिए विद्यार्थियों को कई भागों में विभक्‍त किया जा सकता है , उनमें मुख्‍य इन दो भागों मे विभक्‍त विद्यार्थी हैं , जिनके बारे में चर्चा आसानी से की जा सकती है...

1) 1991 में 20 फरवरी से 11 मार्च , 6 जून से 26 जून और 23 सितम्‍बर से 13 अक्‍तूबर , 1992 में 3 फरवरी से 23 फरवरी 17 मई से 7 जून और 5 सितम्‍बर से 25 सितम्‍बर , 1993 में 12 जनवरी से 2 फरवरी , 6 मई से 26 मई और 19 अगस्‍त से 9 सितम्‍बर , 1994 में 1 जनवरी से 15 जनवरी , 20 अप्रैल से 10 मई , 2 अगस्‍त से 22 अगस्‍त और 5 दिसम्‍बर से 25 दिसम्‍बर के आसपास जन्‍म लेनेवाले बच्‍चे ।

ये सारे बच्‍चे 12 वर्ष की उम्र के बाद ही काफी सहज वातावरण में अध्‍ययन प्राप्‍त कर रहे हैं , मनोनुकूल परीक्षा परिणामों से युक्‍त होते आ रहे हैं , इस बार भी परीणाम से ये संतुष्‍ट रहेंगे। अगर ये शनि और बृहस्‍पति के अच्‍छे प्रभाव में (जिसकी चर्चा नीचे की गयी है) भी आ रहे हों , तो उनसे अधिक अच्‍छी उम्‍मीद की जा सकती है , पर ये शनि और बृहस्‍पति के बुरे प्रभाव में (जिसकी चर्चा नीचे की गयी है) आ रहे हों , तो उन्‍हें इस बार कुछ झटका मिल सकता है।

2) 1991 में 9 अप्रैल से 19 अप्रैल , 15 अगस्‍त से 25 अगस्‍त और 4 दिसम्‍बर से 14 दिसम्‍बर , 1992 में 21 मार्च से 31 मार्च , 27 जुलाई से 7 अगस्‍त और 15 नवम्‍बर से 25 नवम्‍बर , 1993 में 4 मार्च से 14 मार्च , 9 जुलाई से 19 जुलाई , 2 नवम्‍बर से 12 नवम्‍बर , 1994 में 15 फरवरी से 25 फरवरी , 20 जून से 30 जून , 18 अक्‍तूबर से 28 अक्‍तूबर के आसपास जन्‍म लेनेवाले बच्‍चे।

ये सारे बच्‍चे 12 वर्ष की उम्र के बाद से ही पढाई लिखाई के वातावरण में कुछ कठिनाई महसूस कर रहे हैं और मेहनत से भी अपनी हालत को सुधार नहीं पाते , इस बार के परीक्षा परिणामों से असंतुष्‍ट रहेंगे। अगर ये शनि और बृहस्‍पति के अच्‍छे प्रभाव में (जिसकी चर्चा नीचे की गयी है) आ रहे हों , तो कुछ अच्‍छी उम्‍मीद की जा सकती है , पर ये शनि और बृहस्‍पति के बुरे प्रभाव में भी (जिसकी चर्चा नीचे की गयी है) आ रहे हों , तो उन्‍हें जोरों का झटका भी मिल सकता है।

3) इन दोनो वर्गो से इतर किशोरो के परिणामों के बारे में स्‍पष्‍ट तौर पर कह पाने में कुछ मुश्किलें आ रही है , वे नीचे देख लें कि कहीं वे बृहस्‍पति और शनि के अच्‍छे प्रभाव में आ रहे हैं या इनके बुरे प्रभाव में और तदनुसार ही परीक्षा परिणाम की उम्‍मीद रखें ...

बृहस्‍पति के अच्‍छे प्रभाव में आनेवाले बच्‍चे ... जिनका जन्‍म नवम्‍बर 1992 से नवम्‍बर 1993 के आसपास हुआ हो।

बृहस्‍पति के बुरे प्रभाव में आनेवाले बच्‍चे ... जिनका जन्‍म नवम्‍बर 1990 से अप्रैल 1991 के आसपास हुआ हो।

शनि के अच्‍छे प्रभाव में आनेवाले बच्‍चे ... जिनका जन्‍म अप्रैल 1996 से फरवरी 1999 के आसपास हुआ हो।

शनि के बुरे प्रभाव में आनेवाले बच्‍चे ... जिनका जन्‍म फरवरी 1991 से जनवरी 1994 के आसपास हुआ हो।

6 टिप्‍पणियां:

nor-e-haq ने कहा…

ji aaapka chitha bahut acha hai sach aisa hi hai ke tanav apne appp aprikcha ke nam se shuru hota hai aur result ke sath khatm hone ki bajaye badh jata hai karan chahe jo bhi ho laikain tanav to tanav hai aajta hai bina bulaye aur bina bataye jaise suraj ke stah dhunp jaise phol ke stah khushbu ham tanav ko khatm nahi kar sakte kiunke tanav to parikcha ka hissa hai han ham iso sakaratmak bana sakte hain jab tanav hame parikcha ke liye ache se tayyari karne ki himmat de aisa tanav mujhe chahiye meri zindgai main aise tanav ke liye bahut jagah hai aur har vidyarthi aise tanav ko api zindgai main chahega

समयचक्र - महेन्द्र मिश्र ने कहा…

किसी भी तरह का परिणाम आने के पूर्व तक हर कोई तनावग्रस्त तो रहता है यह तो मानव स्वभाव है .

वाणी गीत ने कहा…

सही बात यह है की आजकल बच्चों से ज्यादा अभिभावक तनावग्रस्त रहते हैं

Einstein ने कहा…

Apka har aalekh gyan-vardhan kar hi jata hai..apko aalekh ke liye dhanyavad..

Nirmla Kapila ने कहा…

saMgeeta ji vastav me apke upar mai hairan hoon ki itan samay aap kahan se latee hain apki kalam ko slam hai bahut bdiya post haimaine ek bar apse poochha tha ki ap gochar ka kitna yogdan falit me samjhati hain bata saken to kripa hogi

vinay ने कहा…

sangeeta ji result to kaisa bhi rahey,parntu pariksharti aur abhivavak chinta grast to rehtey hai.

aap ke prateyk lekh se gatayatmak jyotish ki pramnikata par vishwas hota hai.