रविवार, 5 जुलाई 2009

चिंता की जाए या चिंतन किया जाए ????

जैसा कि मै पिछले पोस्‍ट में ही बता चुकी थी कि बारिश एक बडा ज्‍योतिषीय योग 29 जून से 4 जुलाई के मध्‍य है । ठीक इसी मध्‍य आसमान में बादल घिरे भी ,गरजे भी , बिजली भी चमकी , पर आषाढ महीने के अनुसार जितनी बारिश होनी चाहिए , नहीं हो सकी। इसकी थोडी संभावना तो मैने व्‍यक्‍त कर ही रखी थी , क्‍योंकि आसमान के सारे ग्रह पक्ष में नहीं दिखाई पड रहे थे और फिर आज यानि 5 जुलाई से ही गर्मी काफी बढ गयी है ,जुलाई के प्रथम सप्‍ताह तक इतने बडे ज्‍योतिषीय योग के बावजूद मानसून का न आना और इतनी कम बारिश का होना वाकई बहुत चिंता की बात है । इस आधार पर आनेवाले 11 , 12 , 18 , 19 , 24 ,25 जुलाई के मौसम को देखकर भले ही बारिश का मौसम मान लिया जाए , पर मैने जुलाई के तीसरे सप्‍ताह तक जो बारिश की संभावना बतलायी थी , वह भी बडे रूप में कारगर नहीं रहेगा। फिर भी जुलाई के तीसरे सप्‍ताह तक थोडी बहुत बारिश हो भी जाए , पर उसके बाद स्थिति और विकराल दिखती है। बडी चिंता की बात तो यह है कि लगभग मध्‍य अगस्‍त तक मानसून अधिक सक्रिय नहीं रह पाएगा और यत्र तत्र छिटपुट बारिश ही होगी । 15 अगस्‍त के बाद ही वर्षाऋतु के अनुरूप पर्याप्‍त वर्षा होती दिखेगी और यह क्रम पूरे सितम्‍बर तक बना रहेगा। इसलिए जिन जिन प्रदेशों में संभव हो , 15 अगस्‍त के पहले फसलों को बचाने के वैकल्पिक उपाय किए जाने चाहिए ।


इस वर्ष इतनी कम वर्षा होने का मौसम विशेषज्ञ या पर्यावरणविद जो भी कारण बताए , पर हम ज्‍योतिषी तो हर घटना के मूल में ग्रहों की चाल को ही देखते हैं और ग्रहों की चाल इस वर्ष बिगडी हुई है , लेकिन फिर भी 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' के अनुसार भी ग्रहों की चाल का भी पृथ्‍वी पर सांकेतिक प्रभाव ही पडता है । जहां तक हमारा मानना है , इतने बडे रूप में ग्रहों का प्रभाव पडने के पीछे मानवीय भूलों के फलरूवरूप पृथ्‍वी के स्‍वरूप में हुआ परिवर्तन ही है । आज पानी की कमी से सारे भारतवर्ष में हाहाकार मचा हुआ है , पीने के पानी की इतनी किल्‍लत हो गयी है , तो फसलों और सब्जियों के लिए पानी कहां से आए , इनकी कमी से कीमतों में बेतहाशा वृद्धि हो रही है । यदि हम जल्‍द ही अपनी भूलों को सुधारने के लिए चिंतन नहीं करें , तो आनेवाले समय में प्रकृति की ओर से हमें इससे भी बडी सजा झेलने को मजबूर होना पडेगा।

26 टिप्‍पणियां:

अनिल कान्त : ने कहा…

एक लाभकारी लेख

डॉ. मनोज मिश्र ने कहा…

अब क्या किया जाय, आज -अभी तक हम लोंगों के यहाँ बारिश नही हुई है ,स्थानीय पंडित जी लोग दावा कर रहें हैं की १० जुलाइ के आस-पास ही जम कर बारिश होगी ,आपकी क्या राय है? हम लोंगों की तरफ तो सारी भविष्यवाणी फेल हो रही है.

अर्चना तिवारी ने कहा…

जी हाँ यह लेख जानकारी देने वाला है, धन्यवाद !

P.N. Subramanian ने कहा…

सामयिक और ज्ञानवर्धक. आभार

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी ने कहा…

ज्योतिष से इतना कुछ जाना जा सकता है, यह जानकर खुशी हुई। आप अच्छा कार्य कर रही हैं। साधुवाद।

राज भाटिय़ा ने कहा…

आप की पिछली भविष्‍यवाणी सच हुयी, ओर मेने भी आप की भविष्‍यवाणी से सब को पहले ही कहना शुरु कर दिया था की इस दिन बरसात होगी, ओर सभि हेरान होते थे कि तुम्हे केसे पता.
इस लेख के लिये धन्यवाद

राज भाटिय़ा ने कहा…

ओर हां चिंता से अच्छा हम चिंतन करे उस का उपाय करे, बेहतर होगा, चिंता करने से कुछ नही बल्कि नुक्सान होगा.
धन्यवाद

Arvind Mishra ने कहा…

अभी सूखा पड़ेगा और सितम्बर माह में बाढ़ आयेगी

प्रसन्न वदन चतुर्वेदी ने कहा…

बहुत अच्छा लेख....बहुत बहुत बधाई....
गत्यात्मक ज्योतिष कोई अलग तरीके का है?

Einstein ने कहा…

आभार आपका और आपके आलेख का...सजग तो होना ही पड़ेगा अपने जिम्मेदारी के प्रति ...

Sanjay Gulati Musafir ने कहा…

चिंता न करें संगीता जी,
आप के लेख तो होते ही ऐसे हैं - कि पहले चंतन करके कुछ लिखती हैं फिर वह चिंता का विषय बन जाता है। क्योंकि उसमें चिंतन होता ही नहीं।

मैंने आपसे कई बार पहले भी यह कहा है कि कहें पर जिम्मेवारी से।

हमेशा ही पहले कुछ भे कह देना फिर चिंता या चिंतन करते रहना - यह उचित नहीं।

संजय गुलाटी मुसाफिर

विवेक सिंह ने कहा…

जानकारी भरा लेख , और प्रेरक भी !

vinay ने कहा…

bhavishya ki chetwani dene wala accha lekh.

Mahesh Sinha ने कहा…

चिंता चिता सामान होती है . बारिश का ये क्रम तो कई वर्षों से चल रहा है . हम अभी भी जून जुलाई में इन्तेजार करते हैं . ये जरूर हुआ है कि सारे देश में जून जुलाई में अजीब सी उमस भरी गर्म का नया मौसम

cartoonist anurag ने कहा…

bahut achhi jankaree di haih aapne dhanyawad......

hem pandey ने कहा…

मौसम विज्ञानियों की भविष्यवाणियाँ प्रायः गलत निकल जाती हैं.ज्योतिषियों की भी गलत निकल जाएँ तो आर्श्चय नहीं. वैसे पानी की समस्या से जूझने के लिए व्यक्तिगत और सामूहिक तौर पर चिंतन और प्रयास होने चाहिए.

भारतीय नागरिक - Indian Citizen ने कहा…

अब तो बारिश का बेसब्री से इन्तजार है.

संगीता पुरी ने कहा…

संजय गुलाटी जी और हेम पांडेय जी .. नियमित तौर पर मेरे आलेखों को नहीं पढने के कारण आपलोगों को गलत फहमी हुई है .. मौसम के बारे में मैने अबतक जो भी संभावनाएं व्‍यक्‍त की हैं .. वे सत्‍य साबित हुई हैं ।

Nirmla Kapila ने कहा…

बहुत ही सार्थक और ग्यान्वर्द्धक लेख है आपकी श्रमसाधना को सलाम आभार्

G M Rajesh ने कहा…

sangeeta ji
aap 22 july ko grahan ke daur me kya kar rahi hain?
likhen
tatha bataaye kis post par likhaa hai

Science Bloggers Association ने कहा…

आपने स्वयं ही अपनी भविष्वाणी के गलत होने की बात स्वीकार कर ली है। फिर आगे क्या कहा जाए।
-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन ने कहा…

पीने के पानी के समुचित भण्डारण और वितरण का योग कब बन रहा है संगीता जी? मेरा मतलब उस समय से है जब बांधों का काम सिर्फ बाढ़ लाना नहीं रह जाएगा. और अगर बाढ़ में किसी भी गाँव का एक व्यक्ति भी मरे तो बाँध के और उस गाँव/जिले के जिम्मेदार मोटी तनख्वाह लेने वाले लोगों पर ह्त्या का मुकदमा चले.

आशीष खण्डेलवाल (Ashish Khandelwal) ने कहा…

बढ़िया जानकारी.. आभार

Murari Pareek ने कहा…

राजस्थान मैं बरसात के क्या आसार हैं संगीताजी ?? हालाँकि लगाईं गई फसल का सत्यानाश हो चूका है !!

bhawna ने कहा…

sangeeta ji sach me bina barsaat ke is garmi me jeena mushkil kar diya hai .yahan bhi haridwar ke jis kshetra me main rahti hoon vahan gat 4-5 dino se baadal chha rahe hain lekin bin barse chale jaa rahe hain . aapka lekh bahut achha hai , nakaratmak tippaniyon par bilkool kaan mat dhariyega . aap bahut achha karya kar rahi hain .

Sanjay Gulati Musafir ने कहा…

मेरा लेख
http://sanjaygulatimusafir.blogspot.com/2009/07/blog-post.html

पढना संगीता। कोई ज्योतिषीय चुनौती नहीं है आपको, सिर्फ इतना ही फिर से समझाना चहता हूँ कि जो भी लिखा करो जिम्मेवारी के साथ। ताकि बार बार चंता या चंतन की समस्या ही न आए।

संजय गुलाटी मुसाफिर