शनिवार, 29 अगस्त 2009

क्‍या आपने भृगुसंहिता का नाम सुना है ?

ज्‍योतिष में थोडी भी रूचि रखनेवालों ने भृगुसंहिता का नाम अवश्‍य सुना होगा। जैसा कि नाम से ही स्‍पष्‍ट है , यह ज्‍योतिष के क्षेत्र में महर्षि भृगु द्वारा रचित एक ऐसीकालजयी पुस्‍तकमानी जाती है , जिसमें हर काल में जन्‍मलेनेवालों का भविष्‍य लिखा हुआ है। आम लोगों की तरह मैं भी सोंचा करती थी कि जिनलोगों ने जन्‍म भी नहीं लिया है , उसके बारे में भी भविष्‍यवाणी कर पाना भला कैसे संभव है ? इस पुस्‍तक की मूल पांडुलिपि के बारे में अभी तक सही सही बता पाना मुश्किल है , पर गुरू शिष्‍य परंपरा के तहत् आज तक ढोए जा सके तथ्‍यों के आधार पर जब विभिन्‍न प्रकाशनों की भृगुसंहिताओं को पढा , तो भृगुसंहिता के मूल आधार के बारे में बात समझ में आयी।

वास्‍तव में , प्राचीन ज्‍योतिष में हमें प्रभावित करने वाले 7 आकाशीय पिंडों और दो महत्‍वपूर्ण विंदुओं ( राहू और केतु ) को मिलाकर 9 ग्रह माने गए है। इन 9 ग्रहों की 12 राशियों में स्थिति 9*12 = 108 तरह के फलादेश दे सकती है। यदि लग्‍न के आधार पर विभिन्‍न भावों को देखते हुए गणना की जाए , तो 12 लग्‍नवालों के लिए पुन: 108*12 = 1296 प्रकार के फलादेश होंगे। यदि इन फलादेशों को 1296 अनुच्‍छेदों में लिखकर रखा जाए , तो किसी भी बच्‍चे के जन्‍म के बाद उस बच्‍चे की जन्‍मकुंडली में नवों ग्रहों की स्थिति को देखते हुए भृगुसंहिता में से 9 अनुच्‍छेदो को चुनकर भविष्‍यवाणी के लिए निकाला जा सकता है।

प्राचीन ज्‍योतिष में आकाश का 30-30 डिग्रियों में विभाजन , उनका विभिन्‍न ग्रहों को आधिपत्‍य दिया जाना और लग्‍नसापेक्ष सभी भावों को जो विभाग सौंपे गए हैं , उस आधार को ‘गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष’ ने जस का तस स्‍वीकार किया है। पर जब विभिन्‍न प्रकाशनों की भृगुसंहिताओं को पढा , तो पाया कि सारे फलादेश ग्रह स्थिति के आधार पर लिखे गए हैं। यानि लगभग कोई भी ग्रह हों , लग्‍न से केन्‍द्र या त्रिकोण में हों तो उन्‍हें बलवान तथा षष्‍ठ , अष्‍टम या द्वादश भाव में हो तो उन्‍हें कमजोर मानकर फलादेश लिखा गया है ।

पर ‘गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष’ की मान्‍यता है कि जिस तरह राजमहल में दिखाई देनेवाले सभी राजा नहीं होते , न पुलिस स्‍टेशन कैम्‍पस में दिखाई देनेवाले सभी लोग अपराधी और न ही श्‍मशान में दिखाई पडनेवाला सारा शरीर लाश उसी तरह ग्रहों की स्थिति मात्र के आधार पर भविष्‍य का आकलन गलत है। भले ही अधिकांश समय ग्रह अपनी स्थिति के अनुसार ही फल देते हों , पर कभी कभी इसका उल्‍टा भी हो जाया करता है।‘गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष’ के द्वारा ग्रहों की गत्‍यात्‍मक और स्‍थैतिक शक्ति का खुलासा होने के बाद यह स्‍पष्‍ट हो गया कि धन स्‍थान में मौजूद ग्रहों के बावजूद जातक निर्धन , भाग्‍य स्‍थान में मौजूद ग्रहों के बावजूद जातक भाग्‍यहीन , बुद्धि स्‍थान में मौजूद ग्रहों के बावजूद जातक बुद्धिहीन और अष्‍टम भाव में मौजूद ग्रहों के बावजूद जातक अच्‍छे जीवन जीनेवाला क्‍यूं हो जाता है। इस आधार पर ‘भृगुसंहिता’ के नाम के साथ कोई छेडछाड न करते हुए कुछ वर्षों से एक ‘गत्‍यात्‍मक भृगुसंहिता’ तैयार करने की दिशा में काम किया गया , जिसमें क्‍या क्‍या खूबियां थी और उसे तैयार करने में क्‍या क्‍या परेशानियां आयी , उसे पढने के लिए अगले पोस्‍ट का इंतजार करें ।

24 टिप्‍पणियां:

kshitij ने कहा…

अच्छी जानकारी....लेकिन आपका आलेख तकनीकी ज्यादा लगता है....अगर कुछ उदाहरणों के साथ इसे सरल रुप में लिखा जाता तो शायद आम लोग भी इसका लाभ उठा पाते......

श्यामल सुमन ने कहा…

हाँ संगीता जी भृगु संहिता का नाम भी सुना है और किताब भी देखने का अवसर मिला, लेकिन पढ़ नहीं पाया और पढ़ूँगा कैसे? संस्कृत भाषा की उतनी जानकारी भी नहीं है। आपका विश्लेषण ठीक लगा। अगले पोस्ट का इन्तजार है।

Udan Tashtari ने कहा…

भृगु संहिता का नाम सुना है..अच्छी जानकारी.

कहते हैं पंजाब के किसी गांव में ओरिजनल भृगु संहिता रखी है. क्या पता..सुना बस है कि लोग वहाँ अपना भाग्य पढ़वाने जाते हैं.

संगीता पुरी ने कहा…

abhishek ranjan ji ईमेल में लिखते हैं ...
abhishekranjansingh: didi maine para bahut achacha aap ka lekh hum jaise log bhi samjh sakte hai
jaise kuch din pahele aapke lekh ke karan hume pata chala ki malmaas kyo lagta hai sun to 20-25 saal se sunte the but kabhi karan nahi jaan paye
6:41 PM ___
aapko bahut bahut DHANYAWAD ___________

Abhishek Mishra ने कहा…

गत्यात्मक भृगुसंहिता से संबंधित अगली पोस्ट का इंतजार रहेगा.

एकलव्य ने कहा…

भृगुसंहिता के बारे में सरगार्वित जानकरी देने के लिए आभार. सुना है पर पढ़ना अभी बाकी है.

एकलव्य ने कहा…

भृगुसंहिता के बारे में सरगार्वित जानकरी देने के लिए आभार. सुना है पर पढ़ना अभी बाकी है.

एकलव्य ने कहा…

भृगुसंहिता के बारे में सरगार्वित जानकरी देने के लिए आभार. सुना है पर पढ़ना अभी बाकी है.

ज्ञानदत्त पाण्डेय | Gyandutt Pandey ने कहा…

मैने श्री कन्हैयालाल माणिक लाल मुंशी को पढ़ा था कि भृगु संहिता से लोग भूतकाल तो सही सही बता पा रहे थे पर भविष्य के बारे में उतने सही नहीं थे।

Sudhir (सुधीर) ने कहा…

भृगुसंहिता के विषय में तो पहले भी पढ़ा था किन्तु भविष्यवक्ताओं के द्वारा प्रयुक्त पुस्तक हैं यहीं तक ज्ञान सिमित था. अच्छा विश्लेषण हैं हम अज्ञानियों के लिए...

हमने तो रावण-संहिता, लाल किताब और नीलकंठी पुस्तकों/विद्याओं का भी उपयोग सुना हैं भविष्यवाणियों के लिए... कबी उनके विषय में चर्चा करें.

सादर,

Dr. Mahesh Sinha ने कहा…

जी नाम सुना है और किवदंतियां भी सुनी हैं कि असली कहाँ है और कई टुकडों में है . उत्तर में जैसे भृगु संहिता का नाम है वैसे ही दक्षिण में नाडी ज्योतिष का . इसपर भी अपना विचार रखें क्योंकि आजकल बहुत सारे लोग नाडी ज्योतिष के बारे में क्लेम कर रहे हैं .

vinay ने कहा…

भ्रिगु सहिता की जैसा मुझे जानने मै आया,वोह पनजाब के होशियापुर मै है, और मेरे एक परिचित उसमे अपना भविश्य देख कर भी आये थे.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

बहुत बढ़िया जानकारी लगी।
अगली पोस्ट की प्रतीक्षा है।

योगेश स्वप्न ने कहा…

behad tochak jaankaari, agli post men aur vistaar se batayen.

योगेन्द्र मौदगिल ने कहा…

प्रतीक्षा है माननीया....

प्रवीण शाह ने कहा…

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संगीता जी,
विश्वास तो नहीं होता इस तरह की संहिताओं में क्योंकि आप पहले ही कह रही हैं कि इस में हर काल में जन्म लेने वालों का भविष्य पहले ही से लिखा है, जब सब कुछ पूर्व निर्धारित है तो कर्म का क्या योगदान रहा?
फिर भी इंतजार करूंगा आपकी अगली पोस्ट का...

महफूज़ अली ने कहा…

jeee haan........ bhrigu sanhita ka naam suna hai......

aapne bahut hi achcha visleshan kiya hai,,,,,,,

jaankari pradaan karne ke liye shukriya........

आशीष खण्डेलवाल (Ashish Khandelwal) ने कहा…

अच्छी जानकारी, अगली पोस्ट का इंतजार है.. हैपी ब्लॉगिंग

डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर ने कहा…

aapse Blog PAHLA EHSAS ke liye sahyog kii apeksha rahegi.

Popular India ने कहा…

बहुत अच्छी जानकारी दिए है. अगले पोस्ट का इंतजार रहेगा. धन्यवाद.

महेश
http://popularindia.blogspot.com/

नारायण प्रसाद ने कहा…

भृगु संहिता की अपेक्षा नाडी ज्योतिष ज्यादा प्रचार में है । इन दोनों के बारे में विस्तृत सूचना एवं विश्लेषण शांताराम आठवले कृत "नाडीग्रंथः एक अभ्यास" (मराठी में) नामक पुस्तक में मिलता है ।
ऑनलाइन विस्तृत सूचना के लिए देखें -
http://bhavapuri.com/rayudu/NadiAstrology.html#Some%20Examples%20Of%20Actual%20Nadi%20Rea

इसमें भी विशेष रूप से -"Some Examples Of Actual Nadi Readings" देखें -
http://bhavapuri.com/rayudu/NadiAstrology.html#Some%20Examples%20Of%20Actual%20Nadi%20Rea

मुझे भी इसका कुछ अनुभव है । आश्चर्य तो इस बात का है कि जातक के नाम के साथ-साथ माता-पिता का नाम भी स्पष्ट रूप से नाड़ी ग्रन्थ में लिखा मिलता है (अत्यन्त प्राचीन तमिल लिपि में) ।

आठवले जी ने एक ऐसे उत्साही युवक के अनुभव का विवरण दिया है जिसमें उसने एक ही जातक के जितने भी उपलब्ध नाड़ी ग्रन्थ मिले सभी में भविष्यवाणी देखी और तुलनात्मक सूचना दी है ।

Shashikant Oak ने कहा…

नमस्कार, भृगु संहितापर नारायण प्रसादजी ने सही कहा। मराठी में कै.शांताराम आठवले कि पुस्तक में भृगु संहिता की अनेक जानकारीयाँ दी गई है। बाद में सन २००६ में विंग कमांडर शशिकांत ओक याने प्रस्तूत लेखक ने भी "नाडीग्रंथ भविष्य - चौंका देने वाला चमत्कार" नाम की पुस्तक में अनेक उदाहरण देकर भारतभर के १८०से जादा नाडी तथा भृगुसंहिता केंद्रों के पते दिए है। इसके कुछ अंश आप गूगल बुक्सपर पढ सकेंगे।

nutan ने कहा…

sangita ji aapkey blog ko padkar aap se milney ka man kar raha hai lekin mil pana asan nahi so aap mere email id par mail karey taki main apko email dwara apney ek prashan ka javab jan saku agar aap karsakey to plz aap meri maa samn hai reportkanpur@gmail.com

Harivansh sharma ने कहा…

त्रिकाल दर्शी भृगु द्वारा रचित भृगु संहिता पूर्व जन्म वर्तमान तथा भविष्य में आप के जन्म के बारे में बताती है।या इसी जन्म का भुत वर्तमान और भविष्य बताती है। भृगु संहिता मानती है पुनर्जन्म होता है। और हम इस संसार में बार बार जन्म लेते है-किसी को भी मोक्ष की प्राप्ति नहीं होती। मेरा प्रश्न यह है,हमारी इस जन्म की कुंडली अगले जन्म में इसी क्रम से होगी या सर्वदा भिन्न होगी। ग्रहो की दशा विभिन्न हो भी जाये परंतु हैम इसी लग्न में जन्म लेंगे जो हमारा इस जन्म के समय था।