सोमवार, 21 सितंबर 2009

19 सितम्‍बर के विशेष ग्रहयोग से हिन्‍दी चिट्ठा जगत अछूता नहीं रह सका !!

कई दिन पहले मैने 19 सितम्‍बर को 5 बजे से 9 बजे सुबह तक आसमान में एक खास ग्रह स्थिति के होने और उसके फलस्‍वरूप कुल आबादी के कम से कम 40 प्रतिशत लोगों के प्रभावित होने की भविष्‍यवाणी करते हुए सबको सावधान रहने के लिएएक आलेखलिखा था। इसकी वजह से विश्‍व , देश और राज्‍य में राजनीतिक और अन्‍य स्‍तर पर थोडी हलचल तो दिखाई पडी , पर एक मुख्‍य घटना इण्डोनेशिया के बाली द्वीप में भूकम्‍प का आना रहा। 19 सितम्‍बर को सुबह 6.04 बजे भूकम्प के तेज झटके महसूस किए गए। रिक्टर पैमाने पर 6.4 की तीव्रता वाले इस भूकम्प में बहुत नुकसान तो नहीं हुआ , पर इस घटना केतिथि और समयपर ध्‍यान दिया जाए, तो ग्रहों के उस योग के प्रभाव की पुष्टि हो जाती है। वैसे जानते हुए भी ग्रहों के प्रभाव को पहले से अच्‍छी तरह स्‍पष्‍ट न कर पाने से अक्‍सर हमलोगों को खीझ हो जाती है ,पर विश्‍वास है कि अध्‍ययन यूं ही चलता रहा तो निकट भविष्‍य में ही हम अपनी बात और अधिक स्‍पष्‍टत: कह पाएंगे।

बाली द्वीप में हुए इस भूकम्‍प के अलावे इस ग्रह स्थिति का एक बडा प्रभाव हिन्‍दी चिट्ठा जगत पर भी देखने को मिला। ठीक एक महीने पूर्व 10 अगस्‍त को बुझे दिल से समीर लाल जी के द्वारा लिखे गए ‘हारा हुआ योद्धा’ और 17 अगस्‍त को मेरे द्वारा टेंशन में लिखे गएआलेखपर समूचा चिट्ठा जगत जिस तरह एक होकर सामने आया , वह काबिले तारीफ है। फिर एक महीने में ऐसी कोई बात भी नहीं हुई , जिसके कारण दो दिनों में इतना तनावपूर्ण वातावरण तैयार हो जाए। वैसे तो किसी विवाद में पूरी जानकारी के बिना मैं पक्ष और विपक्ष में एक शब्‍द भी बोलना पसंद नहीं करती , पर संयोगवश कुछ दिनों से चिट्ठाजगत में अधिक समय व्‍यतीत करने के कारण लगभग सभी बातों की जानकारी मुझे है। नीचे लिखी बातों के अतिरिक्‍त और कोई मुद्दा हो , तो अवश्‍य बताने का कष्‍ट करेंगे।

जहां तकनीकी जानकारी देनेवाले आशीष खंडेलवाल जी काअपने पोस्‍टमें सामूहिक ईमेल भेजने वाले को सचेत करनेवाला लेख आपत्तिजनक नहीं माना जा सकता , वहीं लोकेन्‍द्र जी केप्रतिरोध को भी हम बिल्‍कुल सामान्‍य ही कह सकते हैं। जहां इस आलेख में सुमन जी के बारे में विवेक जी काप्रश्‍नबिल्‍कुल स्‍वाभाविक है , वहीं रचना जी की उत्‍तराधिकारी सुमन जी का भी उनके अधिकार पर प्रश्‍न करनानाजायजनहीं। यहां तक कि न तो शुक्‍ला जी के पहलेवाले चिट्ठा चर्चा में कोईगडबड झालाहै , न ही बबली जी की गलती को दिखाने के लिए किए गएस्टिंग आपरेशनमें और न सबों के द्वारा किए जानेवाले टिप्‍पणियों में । मै तो सारे आलेखों और टिप्‍पणियों को पढती आ रही हूं , यदि साफ दिल से पढा जाए तो उसमें आपत्तिजनक कुछ भी नहीं दिखाई पडा था। यह संसार ही विविधता से भरा है और अपनी अपनी विशेषताओं के अनुरूप हमारी कार्यशैली होती है पर ‘जहां काम आवै सुई क्‍या करै तलवारि’ की तर्ज पर दुनिया में सबका अपना अपना महत्‍व है। एक परिवार में विभिन्‍न दृष्टिकोणों के लोग हंसी खुशी गुजर करते हैं।

मैं तो 19 सितम्‍बर की ग्रह स्थिति का ही दोष मानती हूं ,  जिसके कारण न तो अनूप शुक्‍ला जी चिट्ठा चर्चा में की गयी समीर लालजी की टिप्‍पणी को सामान्‍य तौर पर ले सके और न हीं अनूप शुक्‍लाजी कीपोस्‍टको समीर लाल जी भी हमेशा की तरह मजाक में । फिर समीर लाल जी का क्षमा मांगने वाला स्‍टाइल अनूप शुक्‍ला जी को कैसे जंच सकता था ? यह छोटी सी बात उन दोनो के बीच की होती , तो शायद संभल भी जाती , पर अन्‍य पाठकों की टिप्‍पणी प्रतिटिप्‍पणियों ने 18 सितम्‍बर का दिन भर का माहौल तनावपूर्ण बना ही दिया।

वैसे ग्रहों का असली लक्ष्‍य तो 19 सितम्‍बर को तनाव को और बढाना था , इसलिए मेरी पोस्‍ट पर टिप्‍पणी दर्ज कर आए खुशदीप सहगल जी अपने कहे अनुरूप चद्दर तानकर न सो सके और इतने संवेदनशील समय में बबली जी कावकीलबनकर सामने आ गए , जबकि बबली जी चार दिनों से दूसरे ब्‍लोगों पर टिप्‍पणियां दर्ज कर रही है , पर अपनी चर्चावाले ब्‍लोगों पर कोई सफाई नहीं दे रही। आशीष खंडेलवाल प्रशंसा के पात्र हो सकते हैं , उनकी कोई रचना पढने से रह न जाए , इसके कारण मैं इसे ईमेल में मंगाया करती हूं , पर उनकी प्रशंसा करने का प्रवीण जाखड जी के लिए यह मौकाउचित नहीं था। आशीष खंडेलवाल जी ने तो धोखाधडी करने और लोगों को बदनाम करने का एकअलग गुरही सिखा दिया , ताकि आनेवाले समय में गलत ढंग से किसी को भी शिकार बनाया जा सके। डा अरविंद मिश्राजी ने भले ही स्‍वस्‍थ मानसिकता से ही यहआलेखलिखा हो , पर वह भी स्‍वस्‍थ टिप्‍पणियों और प्रतिटिप्‍पणियों से सजा न रह सका और सबने मिलकर आग में घी डाल डाल डाल डालकर पूरे चिट्ठा जगत की गरिमा को धूमिल करने में बडी भूमिका निभायी।पर यह विवाद आज के बाद और निराशा पैदा नहीं करेगा , इसका मुझे विश्‍वास है, क्‍यूंकि मैं रहीम के इस दोहे से सहमत नहीं ...
रहीमन धागा प्रेम का , मत तोरो चटकाय ।
टूटे पर भी ना जुडे जुडे गांठ लगी जाए ।।
मैं मानती हूं कि संबंधों के कमजोर हो रहे धागे को तोडकर गांठ लगा ही देनी चाहिए , ताकि संबंध और मजबूत बना रह सके। मुझे विश्‍वास है कि खुलकर बहस होने के बाद दोनो पक्ष एक दूसरे की समस्‍याओं को समझ पाते हैं और इससे  संबंधों में और मजबूती आती है। उम्‍मीद रखती हूं , ब्‍लाग जगत के सभी सदस्‍य पुरानी बातों को भूल जाएंगे।

इन दोनो दिनों में जहां सभी ब्‍लागर भाई टिप्‍पणियों और प्रतिटिप्‍पणियों पढने लिखने में व्‍यस्‍त थे , वही मेरा ध्‍यान इस ग्रहों की इस खास स्थिति पर था , जिसे 1988 में पडोसियों और गांव के अधिकांश घरो मुहल्‍लों में छोटे मोटे विवाद के उभरने और तनावयुक्‍त सफर को देखते हुए ही ढूंढा जा सका था। तब से अब तक इस ग्रह स्थिति के फलस्‍वरूप तनावपूर्ण वातावरण का आना हमने निश्चित मान लिया था , हालांकि कुछ लोग इसके प्रभाव से अवश्‍य अछूते भी हो जाते हैं।मेरी उक्‍त पोस्‍ट पर टिप्‍पणी लिखते हुए नारायण प्रसाद जी ने भूतकाल की घटनाओं या दुर्घटनाओं का कुछ उल्लेख करते हुए इसे समझने की इच्‍छा व्‍यक्‍त की है , पर मैं ऐसे उदाहरण नहीं दे सकती , बस इतना ही जानती हूं कि अधिकांश लोग इससे परेशान रहते हैं। इसी पोस्‍ट पर प्रवीण जी ने कहा है “सभी टिप्पणी कारों से ये जरूर आग्रह करूंगा कि २१ को बतायें कि १९-२० कैसे गुजरे”।

वैसे तो हिन्‍दी के चिट्ठाकारों का हिन्‍दी चिट्ठा जगत से इतना जुडाव है कि उन्‍हें तनाव देने के लिए यह विवाद भी कम नहीं , इसकी अपवाद मैं भी नहीं , पर इसके अलावे पूछा जाए तो 24 घंटे बिजली सप्‍लाई रहनेवाले हमारे शहर में 18 तारीख को ही 5 बजे से 9 बजे तक सुबह हमारे यहां बिजली की कटौती हुई और उसके बाद के 48 घंटों में 12 घंटे भी बिजली रही हो तो यह मैं अधिक बोल रही। मेरे बेटे के अर्द्धवार्षिक परीक्षा के प्रश्‍न पत्र भी दोनो ही दिन जरूरत से अधिक लंबे रहे। इन दोनो दिनों में छोटी बहन को सर्दी खांसी बुखार रहा। पोते को मारते हुए मेरी कामवाली के पति का चांटा उसके कानों पर पड गया , जिससे दो दिनों से कान में तेज दर्द रहा। इसके अतिरिक्‍त मेरे पास जितने भी लोगों के फोन आए , दो दिनों में किसी न किसी प्रकार के तनाव या चिडचिडाहट होने की बहुतों ने पुष्टि की , खासकर तीनो ही दिन 4 बजे से 7 बजे शाम तक यह अधिक प्रभावी रहा।

वैसे ये सब बिल्‍कुल सामान्‍य घटनाएं हैं , पर एक ही दिन सभी घरों में तो एक साथ संयोग नहीं हो सकता न। अब प्रवीण शाह जी के कहे अनुसार आप सब भी यह स्‍पष्‍ट करने का कष्‍ट करें कि पिछले दो दिनों में आप बिल्‍कुल सामान्‍य रह पाए या छोटी मोटी ही सही , कोई वैसी समस्‍या आयी , जो भले ही अक्‍सर आती हो , पर प्रतिदिन नहीं आती और इसलिए इसे सामान्‍य नहीं माना जा सकता। ग्रहों के प्रभाव की परीक्षा हो ही जाए , ताकि आगे भी ऐसी तिथियां रहे,  तो आपको खबर की जा सके।

31 टिप्‍पणियां:

निशांत मिश्र - Nishant Mishra ने कहा…

बहुत खूब! अनूठी सोच! नायाब विश्लेषण!

निशांत मिश्र - Nishant Mishra ने कहा…

और अपनी खबर तो आपको देना इस मौके पर मौजूं रहेगा! दस दिन पहले वायरल फीवर से झटक गया और पांच दिन पहले कोलाइटिस का दर्द पाल बैठा जो अभी भी अहसास करा रहा है.
जिंदगी है. होता है. चलता है. :)

वाणी गीत ने कहा…

ग्रह नक्षत्रों के प्रभाव के वर्णन के साथ चिटठा चर्चा का यह अंक लाजवाब है ...ग्रह नक्षत्र दिशा बदलते हुए आपके पक्ष में आते दिख रहे हैं ..!!
बधाई और शुभकामनायें ..!!

Arvind Mishra ने कहा…

निश्चित ही चिट्ठाचर्चा और चिट्ठाजगत का प्रभाव उस विशेष ग्रह योग पर भी पडा होगा ,उसका विश्लेषण कौन करेगा!

Udan Tashtari ने कहा…

क्या योग बने...


वैसे 'गांठ लगी '.....ये कहाँ हुआ..हमारे और किसके बीच?? सब सामान्य ही लगता है. बात चीत तो जरुरी है न जी!!! :)

Vivek Rastogi ने कहा…

बातचीत ही सभी समस्या का समाधान है। और एक बेहतरीन विश्लेषण, हम नहीं कर पा रहे हैं क्योंकि हम यहाँ पर ज्यादा लोगों के संपर्क में नहीं है। आपको साधुवाद।

Einstein ने कहा…

हाँ मै इस समय के दौरान बेबजह परेशान हुआ...

खुशदीप सहगल ने कहा…

संगीताजी, बड़े ही वैज्ञानिक और व्यावहारिक ढंग से लिखी गई चिट्ठा चर्चा के लिए साधुवाद...निर्मल हास्य की दृष्टि से चुटकी लेने और जानबूझ कर व्यंग्य की आड़ में किसी के दिल को चोट पहुंचाने में बड़ा फर्क होता है...बस हम सब को यही समझना है...

Mired Mirage ने कहा…

९ सितम्बर से ही तबीयत खराब चल रही है। पिछले दो तीन दिन भी हैरान परेशान व डॉक्टर की खोज में ही बीते। वैसे मैं इस मामले में आत्मनिर्भर हूँ। ग्रह नक्षत्रों के गड़बड़ाने की प्रतीक्षा किए बिना ही बीमार पड़ सकती हूँ।
पिछले कुछ दिनों में ब्लॉगजगत में क्या हुआ बताने के लिए आभार।
घुघूती बासूती

रंजना [रंजू भाटिया] ने कहा…

न चाहते हुए भी घर में कुछ अच्छा नहीं रहा बेवजह कई बाते विवाद का विषय बनती गयी .ध्यान तो रखा था आपके कहे अनुसार पर ..

Pankaj Mishra ने कहा…

बहुत ही बारीकी से आपने परखा था इस योग को और वैसे ही यह अपना प्रदर्शन भी किया ब्लागजगत में .

प्रवीण शाह ने कहा…

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संगीता जी,

सबसे पहले तो अपनी रिपोर्ट:-
१९ तारीख सुबह सुबह धर्मपत्नी अपनी उंगली कटा बैठी, मुझे ब्लॉगिंग करते देख भड़की और फिर पूरा दिन लड़ाई में ही बिताया हमने, वो तो यह कहें कि मैं सतर्क था नहीं तो बात बात में बात बढ़ जाती बहुत आगे तक...
२० तारीख मेरे लिये सब कुछ सामान्य हो चुका था क्योंकि आश्विन शुक्ल द्वितिया मेरा जन्म दिन होता है अत: श्रीमती की ओर से कोई रोकटोक नहीं हुई...

आप ने सही कहा, हिन्दी ब्लॉग जगत में बड़ी अशान्ति रही दोनों दिन...कारण चाहे जो भी रहें हों...

सतीश सक्सेना ने कहा…

कुछ लोगों ने लेखन में भी ग्रुप और गैंग बना रखे हैं, उघडे हुए मुखौटों के नीचे छिपे चेहरों की झलक पाकर मैं कई बार अचंभित रह जाता हूँ संगीता जी ! मेरे मन में बसी उनकी पूर्व सौम्य आकृति और यह नया वीभत्स रूप देख कर मेरा खुद का लिखने का दिल नहीं करता ! लेखन चाहे कुछ भी क्यों न हो मगर लोक व्यापक होता है , मगर उस पर अपना मह्त्व बताने के लिए, अपने कमेंट्स देने ये गैंगस्टर अवश्य पंहुचते हैं ! इनका एक ही मकसद है की आप इनको इज्ज़त बख्शें तभी आप ब्लाग जगत में शांति पूर्वक रह पाएंगे !

आशीष खण्डेलवाल (Ashish Khandelwal) ने कहा…

उम्मीद है अब ग्रहों की ऐसी विचित्र स्थिति फिर नहीं बनेगी.. हैपी ब्लॉगिंग

ताऊ रामपुरिया ने कहा…

उम्मीद है आगे इसके फ़ेवर मे भी ग्रह चाल आयेगी ही कभी. उसका इंतजार रहेगा.पर शनि महाराज ने तुरंत ही प्रभाव दिखा दिया.:)

रामराम.

अरविन्द चतुर्वेदी Arvind Chaturvedi ने कहा…

कहीं कुछ हुआ ज़रूर है
एक खटका सा है मन में,
कहीं कोई ग्रह बगल से अनछुए ही निकल गया,
या किसी की परछाई से ही मेरा दिल दहल गया.
सारे खड़े हैं मौन,
उत्तर देगा कौन ?

राज भाटिय़ा ने कहा…

संगीता जी १९ सितमबर का दिन हमारे लिये भगति मय रहा, बस हमारे हेरी (कुत्ते) को छोड कर , क्योकि उसे पहली बार एक कमरे मै बन्द करना पडा, ओर उस कमरे का उस ने क्या हाल किया होगा अब यह सोच से भी परे है, क्योकि यह भी चाहता है कि हम सब के संग रहे, लेकिन आप की बाते सही लगी

tulsibhai ने कहा…

" bahut hi khub aur accha vishleshan "


----- eksacchai {AAWAZ }

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Shefali Pande ने कहा…

kuchh na kuchh to nzaroor hua hai....

वन्दना अवस्थी दुबे ने कहा…

बढिया विश्लेषण.

mukesh ने कहा…

संगीता जी आपके बताये समय में मैं भी कुछ परेशां सा रहा था . कुछ अनचाहे दोस्तों के साथ मनमुटाव और नोकझोक हुई. उस दिन मैं बाकि दिनों की तुलना में परेशां भी रहा .

प्रकाश पाखी ने कहा…

sahi kaha!
bahoot khoob!
badhaai aur shubkaamnaae.

hem pandey ने कहा…

मैं पिछले कुछ दिनों से एक समस्या को लेकर तनाव में था,लेकिन १८ तारीख की शाम से तनाव का कारण दूर न होते हुए भी रिलेक्स हूँ.ऐसा क्यों-यह मैं नहीं जानता.

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी ने कहा…

मेरे साथ कुछ उल्टा ही हुआ है, यानि ब्लॉगिंग के लिहाज से मेरे लिए यह समय बहुत अच्छा रहा। लम्बे समय से निजी व्यस्तता के कारण इस ओर आना मुश्किल हो रहा था। लेकिन इन छुट्टियों की वजह से ऑफ़िस के काम से फुर्सत मिली रही और मैने ब्लॉग पढ़ने और टिप्पणियाँ करने का आनन्द उठाया।

जहाँ तक अनूपजी, समीरजी, विवेकजी और अरविन्दजी की पोस्टों और टिप्पणियों से उपजे तथाकथित विवाद का प्रश्न है तो मैं उसमें बहुत सी सकारात्मक बातें देखता हूँ। यह बातें लम्बे समय की ऊमस और गर्मी के बाद अचानक उठी तेज हवाओं के बीच पड़ने वाली बौछार और उससे पहुँचने वाली ठण्डक के रूप में देखी जा सकती हैं। मन के भीतर उमड़-घुमड़ रहे नकारात्मक खयालों के बादल यदि बारिश बनकर जमीन पर आ गिरें तो आसमान फिर से स्वच्छ और वातावरण मनोरम हो जाता है। इस दौरान यही सब हुआ।

आज हम सभी खुश हैं और एक मंच पर एक दूसरे से गले मिल रहे हैं। हैप्पी बड्डे बोल रहे हैं:) जलजला फर्जी साबित हुआ और चट्टानें आभासी। यह सब तो अच्छॆ संकेत हैं।

ऐसी व्याख्या जिस ग्रह-स्थिति के आधार पर हो सके उसे भी इस व्यापक व्योम में खोजने की कोशिश करिए। मुझे विश्वास है मिलेगा जरूर।:)

लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` ने कहा…

GOOD -- Jai Mata di --

संगीता पुरी ने कहा…

सिद्धार्थ शंकर जी ,
मैने जिस ग्रह स्थिति से हिन्‍दी ब्‍लाग जगत को जोडा था .. वह 21 सितम्‍बर से ठीक हो ही रहा था और ठीक उसी दिन अनूप शुक्‍ला जी के पोस्‍ट में बिल्‍कुल सही दिखाई पडा .. मैने सकारात्‍मक ढंग से 18 ,19 और 20 सितम्‍बर के ग्रहयोग से इसे जोडकर अब सबकुछ सही होने की उम्‍मीद लगायी है , मैने खुद लिखा है ...
मैं मानती हूं कि संबंधों के कमजोर हो रहे धागे को तोडकर गांठ लगा ही देनी चाहिए , ताकि संबंध और मजबूत बना रह सके। मुझे विश्‍वास है कि खुलकर बहस होने के बाद दोनो पक्ष एक दूसरे की समस्‍याओं को समझ पाते हैं और इससे संबंधों में और मजबूती आती है। उम्‍मीद रखती हूं , ब्‍लाग जगत के सभी सदस्‍य पुरानी बातों को भूल जाएंगे।
मैने विवाद को समाप्‍त करने के लिए इस आलेख को लिखा .. पर यदि आपलोगों को मेरी इस बात का बुरा लग गया .. वह भी इसलिए कि मैं ज्‍योतिष का अध्‍ययन करती हूं .. तो इसके लिए मैं क्‍या कर सकती हूं ?

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी ने कहा…

@यदि आपलोगों को मेरी इस बात का बुरा लग गया .. वह भी इसलिए कि मैं ज्‍योतिष का अध्‍ययन करती हूं .. तो इसके लिए मैं क्‍या कर सकती हूं ?

आदरणीया, आपने यह कैसे निष्कर्ष निकाल लिया कि हमें कुछ बुरा लगा? कृपया इस पर मेरा सख्त एतराज दर्ज करें।

आपने अपनी पोस्ट बेशक बहुत मेहनत से अध्ययन करके लिखी। पढ़ने वालों ने पसन्द किया। आपने सबसे उनके अनुभव आमन्त्रित किए। मैने भी अपना अनुभव और उस प्रकरण पर अपनी राय व्यक्त कर दी। लेकिन कहीं से यह नहीं कहा कि मुझे कुछ बुरा लगा। फिरभी आपने तपाक से यह जुमला ठेल दिया, साथ में कारण भी बता दिया कि आप ज्योतिष का अध्ययन करती हैं इसलिए ।

माफ़ कीजिएगा, मैं आवाक्‌ हूँ आपकी इस प्रतिक्रिया से। इतना शंकालु होने की आवश्यकता नहीं है। ज्योतिष में विश्वास होना न होना अपनी जगह है, लेकिन इसमें बुरा मानने जैसी तो कोई बात ही नहीं है। बल्कि आपने तो बड़ी रोचकता पैदा कर दी थी इस सारे मुद्दे पर।

संगीता पुरी ने कहा…

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी जी ,
पता नहीं क्‍यूं मैं आपके कमेंट को समझ नहीं सकी .. शायद कुछ परेशान रही होउंगी .. उस समय तक आज भी मुझपर दो दो पोस्‍ट लिखे गए थे .. शंकालु बन जाना स्‍वाभाविक है .. हां मुझे तुरंत जबाब नहीं देना चाहिए था .. मैं तो बहुत स्‍वस्‍थ दिमाग लेकर यहां काम करना चाहती हूं .. पर बारंबार ऐसी ऐसी बातें होती है .. चाहे नए ब्‍लागरों का स्‍वागत हो या अन्‍य कोई मुद्दा .. बार बार निशाने पर मैं ही रहती हूं !!

R S ने कहा…

जहां इस आलेख में सुमन जी के बारे में विवेक जी काप्रश्‍नबिल्‍कुल स्‍वाभाविक है , वहीं रचना जी की उत्‍तराधिकारी सुमन जी का भी उनके अधिकार पर प्रश्‍न करनानाजायजनहीं।

aap apni baat jyotish tak hi simit rakhae logo kae vyvhaar mae kyaa swaabhavik haen kyaa aswaabhvik haen yae manovyganik hotaa haen aur is sae jyotish vidya kaa koi laena daena nahin haen
suman maeri utraadhikari nahin haen . wo naari blog ki miderator aur memebr haen

संगीता पुरी ने कहा…

रचना जी ,
क्षमा करें .. मै नारी ब्‍लाग की माडरेटर के रूप में रचना जी की उत्‍तराधिकारी लिखना चाह रही थी .. उसे क्‍या लिखा जाए आप बताएं .. सुधार दूंगी !!

R S ने कहा…

aap ne vivek kae kament ko swaabhavik kehaa haen aur suman ki aapti ko jyaaj yae manivigyaan haen jyotish nahin