शनिवार, 12 सितंबर 2009

हमारे ज्‍योतिषियों के द्वारा की जानेवाली काल गणना अधिक सटीक है !!

प्राचीन काल से ही लोगों को यह समझ में आ गया था कि आसमान के ग्रह नक्षत्रों की चाल एक समान है , इसलिए ‘समय’ की जानकारी के लिए इसे सटीक आधार के रूप में मान्‍यता दी गयी। आसमान में सूर्य की स्थिति के आधार पर ग्रामीण दिन के प्रहर के और नक्षत्रों और तारों की स्थिति के आधार पर रात के प्रहर का आकलन करते थे। इसी प्रकार चंद्रमा के आकार को देखकर महीने के दिनों की गिनती करते थे। इस विषय पर पिछले दिन मैने पोस्‍ट लिखा था और अधिकमास की गणनाका कारण बतलाया था , तो कुछ पाठकों को ऐसा महसूस हुआ कि अंग्रेजी कैलेण्‍डर अधिक वैज्ञानिक हैं और इसी कारण हमें अपने पंचांग को उसके अनुरूप बनाने के लिए 13 महीने का एक कैलेण्‍डर बनाना पडता है।

उन पाठकों को मैं जानकारी देना चाहूंगी कि अंग्रेजी कैलेण्‍डर का यह 2009 वां वर्ष चल रहा है , जबकि हमारे भारतीय विक्रमी संवत् का 2066 वां वर्ष चल रहा है । यानि कैलेण्‍डर के रूप में भी देखा जाए तो हम अंग्रेजी कैलेण्‍डर से 57 वर्ष आगे चल रहे हैं और गणना के ख्‍याल से देखा जाए तो हम और भी कितने आगे रहे होंगे , इसका अनुमान भी करना मुश्किल है । वैसे जो भी हो , सभी ग्रहों की चाल को देखते हुए इस प्रकार के कैलेण्‍डर को भले ही आमजनों के मध्‍य लोकप्रियता न मिल पायी हो , पर हमारे ऋषि महर्षियों के विलक्षण प्रतिभा को तो सिद्ध कर ही देती है । हमारे ऋषि मुनियों को सौर वर्ष और चंद्र वर्ष दोनो की जानकारी थी , तभी तो वे इस प्रकार का समायोजन कर सके थे।

अंग्रेजी कैलेण्‍डरों का सौरवर्ष सूर्य की परिक्रमा करती पृथ्‍वी पर आधारित है , 1 जनवरी को इस पथ पर पृथ्‍वी जहां पर स्थित होती है , वहां से वर्ष की शुरूआत की जाती है , जबकि 31 दिसम्‍बर को अंत। इसके विपरीत, हमारा सौर वर्ष का आकलन पृथ्‍वी को स्थिर मानते हुए आसमान के 360 डिग्री में चलते हुए सूर्य पर आधारित था। इस 360 डिग्री को 12 भागों में यानि 30-30 डिग्री में विभाजित कर उसमें सूर्य की स्थिति के आधार पर एक सौर मास का आकलन होता था। इसका आरंभ सूर्य के मेष राशि में प्रवेश यानि 14 अप्रैल से शुरू होकर 13 अप्रैल को समाप्‍त होता है । हमारे देश में अनेक त्‍यौहार लोहडी , बैशाखी , मकर संक्रांति आदि सूर्य के खास राशि प्रवेश के आधार पर भी मनाए जाते रहे हैं।

इस प्रकार हमारे पंचांग के अनुसार की गयी यह गणना जटिल होने के बावजूद अधिक वैज्ञानिक मानी जा सकती है। यदि किसी व्‍यक्ति का अपना जन्‍म अंग्रेजी तिथि और जन्‍म समय बताए तो उससे आप सिर्फ उसके जन्‍म के समय के ऋतु को जान सकते हैं , पर वह हमारे पंचांगों के अनुसार अपनी जन्‍म तिथि और जन्‍मसमय बतलाए , तो आप न सिर्फ मौसम , वरन रात के अंधेरे-उजाले का भी अनुमान लगा सकते हैं , इसी प्रकार अंग्रेजी त्‍यौहारों की चर्चा हो , तो हमें सिर्फ उस मौसम की ही जानकारी मिल सकती है , पर हिन्‍दी त्‍यौहारों की चर्चा हो रही है तो सूर्य के साथ ही साथ चंद्रमा की भी स्थिति हमारी समझ में आ जाती है।

24 टिप्‍पणियां:

cmpershad ने कहा…

अंग्रेज़ी केलेन्डर के अनुसार और हमारे पंचांग के अनुसार भी लोहडी, मकरसंक्रांति १४ जनवरी को और वैसाखी १४ अप्रेल को ही पड़ती है। तो क्या इसका अर्थ यह है दोनों [अंग्रेज़ी और हिंदी] की तिथियों में कोई अंतर नहीं है?

लेख ज्ञानवर्धक है पर उपरोक्त समाधान की मांग करता है।

विनीता यशस्वी ने कहा…

Apke blog se Jyotish ke baare mai kafi fundamental clear ho jate hai...

aarya ने कहा…

संगीता जी
सादर वन्दे !
विश्व की सबसे बड़ी अन्तरिक्ष संस्था नासा ने भी अपनी गलती सुधारने के लिए भारत से महाभारत की पुस्तक मंगवाई थी, क्योंकि महाभारत में दी गयी गणना के हिसाब से आज के सभी ग्रह अपनी स्थिति में हैं.
रही बात इसे न मानने वालों की तो उनका कुछ नहीं किया जा सकता, क्योंकि ऐसे लोग जानकारी कम रखते हैं और बोलते अधिक हैं,
रत्नेश त्रिपाठी

संगीता पुरी ने कहा…

सी एम प्रसाद जी .. सौर वर्ष तो हर पंचांग में एक सा ही रहेगा .. क्‍यूंकि यह सवा 365 दिन की ही गणना करता है .. पर विभिन्‍न पंचांगों में इसे भिन्‍न भिन्‍न विंदुओं से आरंभ किया जाता है .. जिसके कारण वर्ष के आरंभ और अंत का समय सबमें अलग अलग होता है .. कलकत्‍ते का पंचांग सौर वर्ष के अनुसार बनाया जाता है .. बंगाल के लोग शुभ और अशुभ महीने का आकलन उसी पंचांग के आधार पर करते हैं .. पूर्णिमा अमावस्‍या से उनलोगों के महीने का कोई मतलब नहीं होता .. लोहडी सूर्य की मकर राशि में संक्रांति के एक दिन पहले मनाया जाता है .. पर यह सौर वर्ष पर आधारित होता है और अंग्रेजी कैलेण्‍डर भी सौर वर्ष पर ही आधारित है .. इसलिए यह संयोग हो जाया करता है !!

Dipti ने कहा…

इस जानकारी के साथ-साथ क्या आप ये भी बता सकती हैं कि मकर संक्राति हमेशा 14 जनवरी या इसके आसपास ही क्यों पड़ती हैं।

Nirmla Kapila ने कहा…

संगीता जी बहुत अच्छी जानकारी रहती है आपके बलाग पर धन्य वाद्

रंजना [रंजू भाटिया] ने कहा…

अच्छी लगी आपके द्वारा दी गयी यह जानकारी ..यदि हम अपने हिसाब से इतना आगे चल रहे हैं तो यह समय और अंग्रेजी कलेंडर का समय क्या एक समान है ?

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi ने कहा…

आप ने आज जो कुछ भी कहा उस से पूरी सहमति है। पर जरा इसे खोल कर कहतीं तो आम लोगों को भी समझ आता।

hem pandey ने कहा…

उपयोगी जानकारी.

अल्पना वर्मा ने कहा…

आज तो बहुत ही अच्छी जानकारी मिली.अंग्रेजी और हिन्दू कैलेंडर में अंतर समझा ..
'विक्रमी संवत् का 2066 वां वर्ष '..जानकार यह लगा की कितने अनभिग्य हैं हम भी ..अपने ही हिन्दू कैलेडर से..
मैं पंचांग देखती हूँ सिर्फ त्योहारों की तारिख देखने के लिए..कभी इस बात पर गौर ही नहीं किया..

आप की बात प्रभावी लगी.

संगीता पुरी ने कहा…

आशीष खण्डेलवाल (Ashish Khandelwal) ने आपकी पोस्ट " हमारे ज्‍योतिषियों के द्वारा की जानेवाली काल गणना ... " पर एक टिप्पणी छोड़ी है:

एक और उपयोगी जानकारी.. हैपी ब्लॉगिंग

vinay ने कहा…

अभी तक तो मे समझता था,हिन्दी ज्योतिष केवल चन्द्रमा के अनुसार चलता है,अगरेजी जयोतिष सुर्य के अनुरूप परन्तु आप के इस लेख द्वारा हिन्दी ज्योतिष सुर्य और चन्द्रमा दोनो पर आधारित है,अचछा ग्यान मिला।

anoop ने कहा…

@ दीप्ति
इस जानकारी के साथ-साथ क्या आप ये भी बता सकती हैं कि मकर संक्राति हमेशा 14 जनवरी या इसके आसपास ही क्यों पड़ती हैं?
दीप्ति जी अधिकतर त्योहारों के लिए जिस पंचांग का प्रयोग होता है उसमें सूर्य और चंद्रमा दोनों की गति और पारस्परिक अंतर के आधार पर तिथियों का निर्धारण किया जाता है. उदाहरण के लिए जब सूर्य और चंद्रमा किसी नक्षत्र विशेष में ० अंश के अंतर पर होते है तो अमावस्या होती है. जैसे जैसे १२ अंश का अंतर होता जाता है एक तिथि बढ़ जाती है. २४ अंश का पारस्परिक अंतर होने पर द्वितीय, ३६ पर तृतीया और ऐसे ही तिथि पता चलती है.
मकर सक्रांति का अर्थ संभवतः आपको और अन्य लोगों को नहीं है. मकर संक्रांति का अर्थ है सूर्य का धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश. सूर्य एक राशि से दूसरी राशि में जिस दिन प्रवेश करता है उसे संक्रांति कहते है. इसकी स्थिति अंग्रजी कैलेंडर के अनुसार प्रत्येक माह के मध्य में होती है. इसीलिए सूर्य संक्रांति की तिथि निश्चित होती है. इस पर पाश्चात्य ज्योतिष निर्भर करता है जिस के आधार पर टैरो कार्ड होता है.

प्रवीण शाह ने कहा…

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संगीता जी,
भूगोल का ज्यादा जानकार तो नहीं पर जो स्कूल में पढ़ा था उसके आधार पर इतना जानता हूं कि पृथ्वी अपनी धुरी पर थोड़ा झुकी है और मकर संक्रान्ति के दिन से सूर्य की किरणें उत्तरी गोलार्ध पर ज्यादा सीधी और तेज पड़ने लगती हैं सर्च करने पर भी यही मिला...देखिये..." मकर संक्रांति के अवसर पर गंगास्नान एवं गंगातट पर दान को अत्यंत शुभकारक माना गया है। इस पर्व पर तीर्थराज प्रयाग एवं गंगासागर में स्नान को महास्नान की संज्ञा दी गई है। सामान्यत: सूर्य सभी राशियों को प्रभावित करते हैं, किंतु कर्क व मकर राशियों में सूर्य का प्रवेश धार्मिक दृष्टि से अत्यंत फलदायक है। यह प्रवेश अथवा संक्रमण क्रिया छ:-छ: माह के अंतराल पर होती है। भारत देश उत्तरी गोलार्द्ध में स्थित है। मकर संक्रांति से पहले सूर्य दक्षिणी गोलार्ध में होता है अर्थात भारत से दूर होता है। इसी कारण यहां रातें बड़ी एवं दिन छोटे होते हैं तथा सर्दी का मौसम होता है, किंतु मकर संक्रांति से सूर्य उत्तरी गोलार्द्ध की ओर आना शुरू हो जाता है। अत: इस दिन से रातें छोटी एवं दिन बड़े होने लगते हैं तथा गरमी का मौसम शुरू हो जाता है। दिन बड़ा होने से प्रकाश अधिक होगा तथा रात्रि छोटी होने से अंधकार कम होगा। अत: मकर संक्रांति पर सूर्य की राशि में हुए परिवर्तन को अंधकार से प्रकाश की ओर अग्रसर होना माना जाता है। प्रकाश अधिक होने से प्राणियों की चेतनता एवं कार्यशक्ति में वृद्धि होगी। ऐसा जानकर संपूर्ण भारतवर्ष में लोगों द्वारा विविध रूपों में सूर्यदेव की उपासना, आराधना एवं पूजन कर, उनके प्रति अपनी कृतज्ञता प्रकट की जाती है। सामान्यत: भारतीय पंचांग की समस्त तिथियां चंद्रमा की गति को आधार मानकर निर्धारित की जाती हैं, किंतु मकर संक्रांति को सूर्य की गति से निर्धारित किया जाता है। इसी कारण यह पर्व प्रतिवर्ष 14 जनवरी को ही पड़ता है।"
आशा करता हूं इस से दीप्ति जी और cmpershad जी की जिज्ञासा का समाधान हो जायेगा।


अब आते हैं आप की पोस्ट पर:-

"इस प्रकार हमारे पंचांग के अनुसार की गयी यह गणना जटिल होने के बावजूद अधिक वैज्ञानिक मानी जा सकती है। यदि किसी व्यक्ति का अपना जन्म अंग्रेजी तिथि और जन्म समय बताए तो उससे आप सिर्फ उसके जन्म के समय के ऋतु को जान सकते हैं , पर वह हमारे पंचांगों के अनुसार अपनी जन्म तिथि और जन्मसमय बतलाए , तो आप न सिर्फ मौसम , वरन रात के अंधेरे-उजाले का भी अनुमान लगा सकते हैं , इसी प्रकार अंग्रेजी त्यौहारों की चर्चा हो , तो हमें सिर्फ उस मौसम की ही जानकारी मिल सकती है , पर हिन्दी त्यौहारों की चर्चा हो रही है तो सूर्य के साथ ही साथ चंद्रमा की भी स्थिति हमारी समझ में आ जाती है।"

इस कथन से असहमति जताउंगा क्योंकि आप स्वयं देखिये, अपने ही जन्म दिन का यदि उदाहरण दूं तो मैं पैदा हुआ २४ सितम्बर को या आश्विन शुक्ल द्वितिया को, अब हर साल २४ सितम्बर के मौसम, दिन के घंटे और रात के अंधेरे उजाले के बारे में कोई भी बेहतर जान सकता है जबकि आश्विन शुक्ल द्वितिया हर वर्ष अलग अलग तारीख को आती है केवल इतना निश्चित है कि उस दिन दूज का चांद होगा।

प्राचीन विद्वान पृथ्वी को स्थिर और सूर्य और चंद्रमा को चलायमान मानते थे,वे गलत थे,इसी कारण उनकी काल गणना में प्रति वर्ष संशोधन करने पड़ते हैं परंतु आधुनिक काल गणना सूर्य और धरती के relative motion के आधार पर होती है जो आज की तारीख में उपलब्ध सबसे बेहतर विकल्प माना जाना चाहिये, यही कारण है कि पूरी दुनिया ने इसे अपनाया है।

कुलवंत हैप्पी ने कहा…

एक शानदार...जानकारी भरपूर लेख।
हम भारतीय तो हमेशा ही आगे होते हैं, लेकिन क्या करें..आंखों से चश्मा ही नहीं उतारते..शायद आपका लेख कुछ के आंखों से पिछड़ेपन का चश्मा उतार दे।

Ratan Singh Shekhawat ने कहा…

ज्ञानवर्धक आलेख :) बढ़िया जानकारी मिली !

Mithilesh dubey ने कहा…

ज्ञानवर्धक आलेख बढ़िया जानकारी के लिए आभार।

संगीता पुरी ने कहा…

प्रवीण शाह जी ,
मेरे उस अनुच्‍छेद से असहमति का कोई प्रश्‍न ही नहीं उठता .. आप एक कहानी सुनाना शुरू करें , पहला वाक्‍य है .. 12 जून को बारह बजे रात .. वातावरण की कुछ भी कल्‍पना नहीं कर सकते हैं आप .. पर इस वाक्‍य से कहानी शुरू की जाए .. जेठ महीने की अमावस्‍या को बारह बजे रात में .. वातावरण की पूरी कल्‍पना कर लेते हैं न आप .. बस यही कहना था मेरा .. दिन के किसी समय की कल्‍पना तो हिन्‍दी और अंग्रेजी दोनो तिथियों से की जा सकती है .. पर रात के समय की कल्‍पना आप हिन्‍दी तिथि से ही कर सकते हैं !!

राज भाटिय़ा ने कहा…

वाह संगीता जी आप के इस लेख से बहुत सी जान्कारी मिली, ओर बहुत से मेरे सवालो का जबाब भी,
धन्यवाद

प्रवीण शाह ने कहा…

संगीता जी,
विक्रमी तिथी से उस रात चांद की स्थिति पता चलेगी,यह तो लिखा ही है मैंने...और उसी के आधार पर आप रात की स्थिति की कल्पना कर सकते हैं ।

कुछ और भी पूछना चाहता हूं आपसे, क्या आपका ई-मेल पता मिल सकता है?

Vivek Rastogi ने कहा…

ज्ञानवर्धन हुआ..

'अदा' ने कहा…

bahut hi acchi jaankaari mili.
dhanyawaad..

ताऊ रामपुरिया ने कहा…

बहुत उपयोगी जानकारी मिली. शुभकामनाएं.

रामराम.

सुलभ सतरंगी ने कहा…

हिन्दी काल गणना पूरी तरह वैज्ञानिक है.
वैसे भी हर (अंग्रेजी सहित) पद्धति में स्थितियों को सामान्य रखने के लिए अंको को समायोजित किया गया है.

विशेष जानकारी के लिए आपका धन्यवाद!