गुरुवार, 24 सितंबर 2009

आज एक बार फिर इस लेख को पोस्‍ट करने की आवश्‍यकता पड गयी है !!

लोगों के मन में ज्‍योतिष के प्रति गलत धारणाएं होती हैं। अक्‍सर लोग एक प्रश्‍न किया करते हैं कि आखिर जब ग्रह ही सब कुछ निर्धारित करते हैं , तो फिर कर्म का क्‍या महत्‍व है ? उन्‍हें मैं समझाना चाहूंगी कि मानव जीवन में ग्रहों का प्रभाव तो है , क्‍योंकि आपके सामने जो भी परिस्थितियां उत्‍पन्‍न होती हैं , वह इन्‍हीं ग्रहों के परिणामस्‍वरूप ,इसलिए उसे आपकी जन्‍मकुंडली के अनुसार प्राप्‍त फल कह सकते हें , पर इनसे लडकर खुद की या समाज के अन्‍य लोगों के मेहनत से जो उपलब्धियां आप हासिल करते हैं , वह आपकी कर्मकुंडली के अनुसार होता है। जन्‍मकुंडली और कर्मकुंडली के मुख्‍य अंतर को आपके समक्ष इस प्रकार रखा जा सकता है।


जहां जन्मकुंडली को निश्चित करने में जातक के जन्म के समय भचक्र के विभिन्न कोणों पर स्थित ग्रहों की भूमिका होती है , वहीं कर्मकुंडली को निश्चित करने में जातक के भौगोलिक परिवेश के साथ.साथ युग के परिवर्तन का भी प्रभाव होता है। जन्मकुंडली सांकेतिक तौर पर ही सही , पूरे जीवन की परिस्थितियों का विश्लेषण करती है , जबकि कर्मकुंडली वास्तविक तौर पर , लेकिन सिर्फ भूत और वर्तमान तक का। जातक के लिए जन्मकुंडली निश्चित् होती है , जबकि कर्मकुंडली अनिश्चित। जहां जन्मकुंडली को निश्चित करने में जातक की परिस्थितियां जिम्मेदार होता है , वहीं कर्मकुंडली को निश्चित करने में सामाजिक ,पारिवारिक , राजनीतिक , धार्मिक और आर्थिक वातावरण के साथ.साथ व्यक्ति खुद भी जिम्मेदार होता है। जन्मकुंडली के अनुसार जातक की रूचि होती है , जबकि कर्मकुंडली के अनुसार जातक का खान.पान और रहन.सहन। जन्मकुंडली से व्यक्ति के स्वभाव का पता चलता है , जबकि कर्मकुंडली से व्यवहार का।

जन्मकुंडली से स्वास्थ्य का पता चलता है , जबकि कर्मकुंडली से शरीर के वजन का। जन्मकुंडली से धन के प्रति दृष्टिकोण का पता चलता है , जबकि कर्मकुंडली से धन की मात्रा का। जन्मकुंडली से भाई.बहन ,बंधु.बांधव से संबंध का पता चलता है , जबकि कर्मकुंडली से भाई.बहन ,बंधु.बांधव की संख्या का। जन्मकुंडली से माता के सुख और उनसे मिलनेवाले सहयोग का पता चलता है , जबकि कर्मकुंडली से माता के पद और उनकी स्थिति का। जन्मकुंडली से हर प्रकार की संपत्ति से मिलनेवाले सुख या दुख का पता चलता है , जबकि कर्मकुंडली से हर प्रकार की संपत्ति के स्तर का। जन्मकुंडली से दिमाग की क्रियाशीलता और एकाग्रता का पता चलता है , जबकि कर्मकुंडली से दिमाग की मजबूती और विविध प्रकार की डिग्रियों का। जन्मकुंडली से विविध प्रकार के रोगों से लड़ने की शक्ति या रोगग्रस्तता का पता चलता है , जबकि कर्मकुंडली से बीमारियों के नाम का। जन्मकुंडली से ऋणग्रस्तता के होने या न होने का पता चलता है , जबकि कर्मकुंडली से ऋण की मात्रा का।

जन्मकुंडली से दाम्पत्य जीवन के सुखमय या दुखमय होने का पता चलता है , जबकि कर्मकुंडली से विवाह की उम्र या पार्टनर के कद.काठी और पद का। जन्मकुंडली से जीवनशैली के सुखमय या दुखमय होने या जीवनी शक्ति का पता चलता है , जबकि कर्मकुंडली से जीवन जीने के स्तर या जातक की उम्र का। जन्मकुंडली से भाग्य या धर्म के प्रति सोंच या नजरिए का पता चलता है , जबकि कर्मकुंडली से किसी धर्म को अपनाने का । जन्मकुंडली से रूचि और स्तर के अनुरूप कैरियर के होने या न होने का पता चलता है , जबकि कर्मकुंडली से कैरियर की शाखा या पद का । जन्मकुंडली से अपने लक्ष्य के प्रति एकाग्र रहने या न रहने का पता चलता है , जबकि कर्मकुंडली से लक्ष्य के स्तर का। जन्मकुंडली से अपने खर्च के प्रति दृष्टिकोण का पता चलता है , जबकि कर्मकुंडली से खर्च कर पाने की मात्रा का। जन्मकुंडली से बाहरी स्थान में सफलता मिलने या न मिलने का पता चलता है , जबकि कर्मकुंडली से बाहरी स्थान में जा पाने या न जा पाने का।

जन्मकुंडली से भविष्य के छोटे से छोटे समयांतराल के बारे में सांकेतिक ही सही ,जानकारी प्राप्त की जा सकती है , किन्तु कर्मकुंडली में भविष्य बिल्कुल अनिश्चित होता है , कहा जाए कि सामने अंधेरा सा छाया होता है , तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। जन्मकुंडली देखकर हम ज्योतिषी जन्मकुंडली पर आधारित प्रश्नों के सांकेतिक ही सही , पर भूत , वर्तमान और भविष्य के हर प्रश्न का उत्तर दे सकते हैं , कर्मकुंडली पर आधारित प्रश्न पूछकर एक ज्योतिषी की योग्यता या ज्योतिष-शास्त्र पर प्रश्नचिन्ह लगाना उचित नहीं है।

इस आलेख कों मैने 24 फरवरी 2009 को इस वेब पते परप्रकाशित किया था , जिसमें एक भी शब्‍द का फेरबदल न करते हुए आज पुन: प्रकाशित किया गया है , यहां चटका लगाकर इसमें आयी टिप्‍पणियों को भी देख ससकते हैं  !!

20 टिप्‍पणियां:

प्रवीण जाखड़ ने कहा…

अगर आपकी भविष्यवाणी बारिश को लेकर हो सकती है, तो दिल्ली का न्यूनतम और अधिकतम तामपान भी आप 31 दिसंबर को क्या होगा, बता सकती हैं। आप ही ने कहा था शेयर बाजार के लिए आप लिखती रही हैं, तो इस बार भी एक टिप ही देनी है। जन्मकुंडली और कर्मकुंडली का अपना महत्त्व, अपना स्थान, अपना भाव है। स्वीकार। लेकिन सवाल खड़े हुए हैं, तो जवाब मांगेगे ही। यूं पुरानी पोस्ट का हवाला देकर, हार मत मानिएगा। अब तो सही समय आया है। सही सवालों के सही जवाब का।

संगीता पुरी ने कहा…

प्रवीण जाखड जी ,
ज्‍योतिष से संबंधित प्रश्‍न करने से पहले मेरे इन आलेखों को पढ लें ..
http://sangeetapuri.blogspot.com/2008/10/blog-post_19.html

http://sangeetapuri.blogspot.com/2008/10/blog-post_17.html

http://sangeetapuri.blogspot.com/2009/07/blog-post_16.html

शायद आपको प्रश्‍न पूछने में सहायता मिल जाए !!

Arvind Mishra ने कहा…

एक बात तो तय है -फलित ज्योतिषी वाक्पटु और अदम्य जिजीविषा के धनी होते हैं ! उनकी वक्तृता और दुर्जेय बहस क्षमता अनुकरणीय है ! ब्लागजगत इससे कुछ सीखो -सार सार को गहि रहो थोथा देव उडाय !

Popular India ने कहा…

जन्मकुंडली व कर्म कुंडली में अंतर को अच्छी तरह से समझाया. इसके लिए धन्यवाद.
एक प्रश्न :
कितने ज्योतिषी लोग जन्मकुंडली के आधार पर भाई-बहन की संख्या बताते हैं व कितने जन्मकुंडली के आधार पर आयु भी बताते है. इस प्रकार के फलकथन में कितनी सच्चाई है? मुझे तो वैसे भी ज्योतिषी से face-to-face बात हुयी है जो ज्योतिष शास्त्र के आधार पर आयु का एकदम सही निर्णय करने का दावा करते हैं. उनका कहना रहता है कि ज्योतिष शास्त्र के आधार पर जो आयु निकाला जायेगा व पूर्ण रूप से सही होगा. उससे पहले उसकी मृत्यु हो ही नहीं सकती है. कोई मारने जायेगा तो वह असफल रहेगा उसी प्रकार यदि वह खुद आत्म-हत्या करने की कोशिश करेगा तो तब भी वह असफल रहेगा. संगीता जी, कृपया इस संबंध में सच्चाई की जानकारी दें कि इस प्रकार के फलकथन में ज्योतिषशास्त्र कितना सही व सटीक है. मेरा तो मानना है कि भाग्य में जो भी है वह मुझे कर्म नहीं करने से प्राप्त नहीं होगा यानि भाग्य में जो लिखा है उसे भी प्राप्त करने के लिए हमें कर्म करना ही पड़ेगा. यदि भाग्य में ७० वर्ष जीने को लिखा है तो उस ७० वर्ष जीने के लिए भी कर्म करना ही पड़ेगा. ............. अगर यह बात सही है तो संगीता जी आप यह भी स्पष्ट करें कि ज्योतिषी लोग इस प्रकार के दावा क्यों करते हैं ?

आशा है आप जवाब जरुर देंगी.

आपका
महेश

Nirmla Kapila ने कहा…

बहुत बडिया आलेख है संगीता जी । मुझे तो लगता है कि कर्म कुन्डली भी हमारे ग्रहों के हिसाब से ही बनती है कई भाआऋ हम चाहते हुये भी कोई कर्म नहीं कर पाते ये क्या सिद्ध करता है? आभार्

संगीता पुरी ने कहा…

अरविंद मिश्रा जी ,
वाक्पटु और अदम्य जिजीविषा के धनी सिर्फ फलित ज्‍योतिषी ही नहीं .. हर क्षेत्र के लोग बन सकते हैं .. पर इसके लिए उन्‍हें बहुत तपना पडता है .. किसी भी क्षेत्र के ठेकेदारों के द्वारा 20-25 वर्षों तक निरंतर किए गए अन्‍याय के फलस्‍वरूप जब उनका खून खौल रहा होता है .. तभी इस तरह की भावना आ सकती है .. इसका अनुकरण तबतक नहीं किया जा सकता .. जबतक वैसी परिस्थितियों से कोई स्‍वयं न गुजरे !!

संगीता पुरी ने कहा…

निर्मला जी ,
आपका कहना भी गलत नहीं .. कर्मकुंडली के बारे में जो बातें लिखी गयी हैं .. उसमें से भी कभी कभी कुछ ग्रहों के हाथ में होती हैं .. पर सारी नहीं .. कुछ तो मनुष्‍य के अपने हाथों में है ही !!

हेमन्त कुमार ने कहा…

धन्यवाद । पुनः जागरूकता के लिये । आभार ।

Murari Pareek ने कहा…

संगीताजी मेरी तो जन्म तिथि ही किसी को पता नहीं जन्म का नाम भी नहीं है !! मेरे लिए कोंसी राशिः और से गृह दशा होंगे??

Ashish ने कहा…

क्या इसे अन्य शब्दों में ऐसे कहा जा सकता है?

"हमारे जन्म के वक़्त जो ग्रहों की स्थिति होती है, हमारा जन्म हिस घर में समाज में देश में और अन्य हालातों में होता है वह हमारे पिछले सभी जन्मों के संचित कर्मों के प्रभाव से होता है|

ये संचित कर्म हमारे लिए एक सेविंग्स अकाउंट की तरह है जिसमे हमारा पिछला कमाया और पूर्वजों से मिला जमा है| समय समय पर हमें इससे मिलता रहता है जिसे कुछ लोग कर्मों का फल और कुछ ग्रहों की दशा (जो मेरे निजी विचार में एक ही है) कहते हैं |

इसी के साथ हमारे पास एक करंट अकाउंट(इस जन्म के कर्म) भी होता जिसकी शुरुआत हमारे सेविंग्स अकाउंट के बैलेंस पे निर्भर होती है| और इस करंट अकाउंट में वर्तमान में बैलेंस कम है की ज्यादा है यह इस बात पर निर्भर करता है की हमारे ये दोनों अकाउंट कैसे संचालित होते आ रहे हैं|

और जब ये करंट अकाउंट क्लोस हो जाएगा तो जो भी बचा होगा वह हमारे पुराने सेविंग्स अकाउंट में चला जाएगा|"

संगीता पुरी ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
संगीता पुरी ने कहा…

आशीष जी ,
आध्‍यात्‍म के क्षेत्र में इतना चिंतन करने के लिए बहुत बहुत धन्‍यवाद .. कर्मों का फल और ग्रहों की दशा दोनो एक नहीं अलग अलग हैं .. एक ही ग्रह की दशा में यानि बिल्‍कुल एक ही समय में अस्‍पताल में एक ओर मंत्री के बच्‍चे का भी जन्‍म हो सकता है .. तो दूसरी ओर भिखारी के बच्‍चे का .. उसी वक्‍त अमेरिका जैसे संपन्‍न देश में भी बच्‍चा जन्‍म ले सकता है और आफ्रिका जैसे पिछडे देश में .. पिछले जन्‍म का कर्मफल यहां काम करता हो .. पर चूंकि दोनो के ग्रह एक जैसे हैं .. तो विभिन्‍न संदर्भों में दोनो एक जैसा सुख दुख महसूस करेंगे .. गरीबी और अमीरी इसमें कोई मायने नहीं रखेंगा .. जिन संदर्भों का सुख मिलना होगा दोनो को मिलेगा .. जिस संदर्भों का कष्‍ट मिलना होगा दोनो को मिलेगा .. भले ही एक महंगी गाडी में घूमे और दूसरा बैलगाडी में ही .. टिप्‍पणी में जिन आलेखों का लिंक दिया गया है .. उसे पढ ले तो अधिक स्‍पष्‍ट रहेगा !!

Amogh Foundation ने कहा…

अरविंद मिश्रा जी ऎसा नहीं है की वाकपटु और अदम्य जिजीविषा के धनी सिर्फ फलित ज्योतिषी होते हैं.

हर एक व्यक्ति जो अपने विचारो और कर्मो में गहरी आस्था रखता है, वह अपने आप इन गुणो से परिपुर्ण हो जाता है, फिर चाहे वो संगीता पुरी जी हो या फिर प्रवीण जाखड जी.

पर जब व्यक्ति इस के भी पार हो जाता है और यह सोचने लगता है कि सिर्फ वही सत्य की ओर है एवं बाकि सब गलत है, तब वह अपनी उर्जा अपने विकास में लगाने के बजाय दुसरो को गलत सिद्ध करने, नीचा दिखाने और टिकाटिप्पणी करने मे जाया करने लगता है.

आश्चर्य की बात यह है की ऎसा करते समय भी उनकी सोच यही होती है की ऎसा करना सत्य के प्रति उनका कर्तव्य है.

एक बात का मै यहाँ और उल्लेख करना चाहुगा, जो की एक अनुसन्धान का परिणाम है, वह यह कि हम भारतिय व्यक्तिगत स्तर पर कार्य करने मे, विश्व्स्तर पर विलक्षण है, पर जहाँ बात समूह में कार्य करने की आती है, हम फिसड्डी हो जाते है. शायद ऎसा इसलिए है की हम अपने अपने अहंकार से उपर उठ ही नहीं पाते है.

राज भाटिय़ा ने कहा…

सम्गीता जी बहुत सुंदर लिखा आप ने, अब मजा लेने वाले ओर सही मओ प्रशन करने वालो मै फ़र्क है. आप अपने लेख लिखती रहे, इन लोगो की परवाह ना करे.
धन्यवाद

pankaj vyas ने कहा…

प्रवीण जाखड़ जी और संगीतापुरी जी तो बहाना है, मुझे तो कुछ कर गुजरना है...1

vinay ने कहा…

बहुत अच्छा विशलेषण जन्म कुन्डली और कर्म कुन्डली का।

Mumukshh Ki Rachanain ने कहा…

पुनः पढ़वाने का आभार.
लेख काफी ज्ञानवर्धक और रोचक है. तमाम गलतफहमियों को भी दूर करता है.

हार्दिक आभार

चन्द्र मोहन गुप्त
जयपुर
www.cmgupta.blogspot.com

Anil Pusadkar ने कहा…

कर्मकुण्डली पर विश्वास करे यानी सिर्फ़ कर्म करे बाकी बातो पर ध्यान न दें,जैसा कि परम आदरणीय भाटिया जी ने कहा है।

Ashish ने कहा…

संगीता जी उसी लाइन के पहले मैंने पूर्वजों से प्राप्त फल की बात भी की है जो की मेरे विचार में एक ही समय और एक ही स्थान में जन्म लेने वाले बच्चों की अलग अलग जिंदगी, और जुड़वां बच्चों जिन्होंने ने जन्म के बाद अलग अलग स्थानों में जिंदगी गुजारी फिर भी एक जैसी नौकरी और पत्नी और बच्चे प्राप्त किये; का एक कारण है | अगर ऐसा ना होता तो पित्र दोष जैसी चीजें ना होतीं |

हाँ शब्दों के संयोजन में मुझे और सावधानी रखने की जरूरत है यह जरूर मानता हूँ |

अंत में क्षमा के साथ कहना चाहूंगा पर अगर हम आपके पुराने लेख पढ़ कर उन्ही बातों को मानें , तथा और किसी और स्रोत से जानी गयी बातें ना कहें क्या यह वाकई में जरूरी है?

एक और बात की क्षमा चाहूँगा और वोह बात एक ही दिन में समाप्त ना करने की है, जिसके व्यक्तिगत कारण हैं| पर आपका ये लेख था ही ऐसा की टिप्पणी किये बिना रहा नहीं गया |

Popular India ने कहा…

संगीता जी, आपने मेरे द्वारा उठाये गए शंका का समाधान नहीं किया. ..........

mahesh

http://popularindia.blogspot.com/