गुरुवार, 26 नवंबर 2009

ज्‍योतिष का सहारा लेकर क्या भवितब्यता टाली भी जा सकती है - 6 ??

ग्रहों के बुरे प्रभाव को दूर करने के उपायों की जो श्रृंखला चल रही है , पहले के पांच भागों को पढने के लिए यहां क्लिककरें , अब उसका आगे का यानि छठा भाग पढे ... ..

यह तथ्‍य सर्वविदित ही है कि विभिन्न पदार्थों में रंगों की विभिन्नता का कारण किरणों को अवशोषित और उत्सर्जित करने की शक्ति है। जिन रंगों को वे अवशोषित करती हैं , वे हमें दिखाई नहीं देती , परंतु जिन रंगों को वे परावर्तित करती हैं , वे हमें दिखाई देती हैं। यदि ये नियम सही हैं तो चंद्र के द्वारा दूधिया सफेद , बुध के द्वारा हरे , मंगल के द्वारा लाल , शुक्र के द्वारा चमकीले सफेद , सूर्य के द्वारा तप्‍त लाल , बृहस्पति के द्वारा पीले और शनि के द्वारा काले रंग का परावर्तन भी एक सच्‍चाई होनी चाहिए।


पृथ्‍वी में हर वस्‍तु का अलग अलग रंग है , यानि ये भी अलग अलग रंगों को परावर्तित करती है । इस आधार पर सफेद रंग की वस्‍तुओं का चंद्र , हरे रंग की वस्‍तुओं का बुध , लाल रंग की वस्‍तुओं का मंगल , चमकीले सफेद रंग की वस्‍तुओं का शुक्र , तप्‍त लाल रंग की वस्‍तुओं का सूर्य , पीले रंग की वस्‍तुओं का बृहस्‍पति और काले रंग की वस्‍तुओं का श‍नि के साथ संबंध होने से इंकार नहीं किया जा सकता। शायद यही कारण है कि नवविवाहिता स्त्रियों को मंगल ग्रह के दुष्‍प्रभावों से बचाने के लिए लाल रंग को परावर्तित करने के लिए प्राय: लाल वस्त्र से सुशोभित करने तथा मॉग में लाल सिंदूर लगे की प्रथा है।

इसी कारण चंद्रमा के बुरे प्रभाव से बचने के लिए मोती , बुध के लिए पन्ना , मंगल के लिए मूंगा , शुक्र के लिए हीरा , सूर्य के लिए माणिक , बृहस्पति के लिए पुखराज और शनि के लिए नीलम पहनने की परंपरा समाज में बनायी गयी है। ये रत्न संबंधित ग्रहों की किरणों को उत्सर्जित कर देते हैं , जिसके कारण ये किरणें इन रत्नों के लिए तो प्रभावहीन होती ही हैं , साथ ही साथ इसको धारण करनेवालों के लिए भी प्रभावहीन बन जाती हैं। इसलिए रत्नों का प्रयोग सिर्फ बुरे ग्रहों के लिए ही किया जाना चाहिए , अच्छे ग्रहों के लिए नहीं। कभी-कभी पंडितों की समुचित जानकारी के अभाव के कारण ये रत्न जातक को अच्छे फल से भी वंचित कर देती है।

रंगों में अद्भूत प्रभाव होने का सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि विभिन्न रंगों की बोतलों में रखा पानी सूर्य के प्रकाश में औषधि बन जाता है , जिसका उपयोग विभिन्न रोगों की चिकित्सा में किया जाता है। 'गत्यात्मक ज्योतिष' भी कमजोर ग्रहों के बुरे प्रभाव से बचने के लिए उससे संबंधित रंगों का अधिकाधिक प्रयोग करने की सलाह देता है। रत्न धारण के साथ साथ आप उसी रंग की प्रधानता के वस्त्र धारण कर सकते हैं । मकान के बाहरी दीवारों की पुताई करवा सकते हैं।

यदि व्यक्ति का जन्मकालीनचंद्र कमजोर हो, तो उन्हें सफेद , बुध कमजोर हो , तो उसे हरे , मंगल कमजोर हो , तो उसे लाल , शुक्र कमजोर हो , तो उसे हल्के नीले , सूर्य कमजोर हो , तो उसे ईंट के रंग , बृहस्पति कमजोर हो , तो उसे पीले , तथा शनि कमजोर हो , तो काले रंग का अधिक प्रयोग कर उन ग्रहों के प्रभाव को परावर्तित किया जा सकता है। लेकिन ध्यान रहे , मजबूत ग्रहों की किरणों का अधिकाधिक प्रभाव आपपर पड़े , इसके लिए उससे संबंधित रंगों का कम से कम प्रयोग होना चाहिए। इन रंगों की वस्तुओं का प्रयोग न कर आप दान करें , तो काफी फायदा हो सकता है। अगले लेख में पुन: इसके आगे का भाग पढें !!





12 टिप्‍पणियां:

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ ने कहा…

संगीता जी आपकी पिछली पोस्ट के सम्बंध में मेरा एक सवाल है कि क्या धरती की सारी कन्याएँ शुक्र की एजेंट हैं, जो उनका विवाह कराने से शुक्र प्रसन्न हो जाएगा?

रंजना [रंजू भाटिया] ने कहा…

बढ़िया रोचक जानकारी दी है आपने ..इस तरह से अब तक पता नहीं था शुक्रिया

Ashish Shrivastava ने कहा…

बुध ग्रह का रंग भूरा है , हरा नहीं ! बुध ग्रह मुख्यत लोहे का बना हुआ है !
शुक्र ग्रह का रंग पीला सफेद है ! सफेद चमक सल्फ्युरीका अम्ल के बादलो के कारण है !
सूर्य का रंग पिला है क्योंकि उसकी उम्र अभी आधी हुयी है, धीरे धीरे वहा लाल होते जाएगा शायाद करोडो वर्षो बाद !
मंगल का रंग संतरे और लाल के मिश्रण का है !
गुरू का रंग सफेद और लाल है (दोनों रंगों की आड़ी धारी है)
शनी का रंग हल्का पीला है (पीला पन अमोनिया के कारण है )

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

यदि व्यक्ति का जन्मकालीनचंद्र कमजोर हो, तो उन्हें सफेद , बुध कमजोर हो , तो उसे हरे , मंगल कमजोर हो , तो उसे लाल , शुक्र कमजोर हो , तो उसे हल्के नीले , सूर्य कमजोर हो , तो उसे ईंट के रंग , बृहस्पति कमजोर हो , तो उसे पीले , तथा शनि कमजोर हो , तो काले रंग का अधिक प्रयोग कर उन ग्रहों के प्रभाव को परावर्तित किया जा सकता है।

बढ़िया पोस्ट है!
बधाई हो!

Einstein ने कहा…

बिलकुल सही कह रही हैं आप...बेहतरीन विश्लेषण रत्न ,रंग और ग्रहों का सम्बन्ध...

Udan Tashtari ने कहा…

जारी रहिये-पढ़ रहे हैं.

vinay ने कहा…

हमेशा की तरह ज्ञानबर्धक लेख,रत्नो के प्रभाव के बारे में,अच्छी जानकारी ।

ज्ञानदत्त G.D. Pandey ने कहा…

बहुत अलग और बहुत जानकारी पूर्ण!

राज भाटिय़ा ने कहा…

संगीता जी बहुत अच्छी जानकारी दी आप ने, धन्यवाद

अन्तर सोहिल ने कहा…

संगीता जी नमस्कार
आपने ब्लाग सेटिंग की साईट फीड में अलाऊ ब्लाग फीड को शार्ट क्यूं कर दिया है जी।

प्रणाम

वन्दना ने कहा…

sangeeta ji
kai dino se padh nhi pa rahi thi aaj post padhi hai.
jahan tak aapne rangon ka swaal kiya hai to is bare mein main apna ek experience share karti hun aapse
abhi maine apne makan mein upar ka floor banwaya hai to sare ghar mein aur front mein bhi colour change kiya.abhi kuch din kisi karanvash pandit ji ko bulana pada to unhone bataya ki meri aur mere husband ki shani ki mahadasha shuru ho gayi hai . jab wo jaane lage to jaate jaate unhone mujhse pucha ki ye jo colour aapne ghar mein karwaya hai kisi pandit se pooch kar karwaya ya apne man se to maine kaha ki apne man se hi karwaya hai tab unhone bataya ki grahon ke prabhav ke karan aapne ye colour karwaya hai mangal aur budh ka rang green aur red aapne yun hi nhi karwaya. tab jakar laga shayad grahon ka bhi kahin na kahin kuch na kuch to role hota hi hai .

संगीता पुरी ने कहा…

वंदना जी ,
जिस तरह गर्मियों में पानी की कमी से बार बार स्‍वयं प्‍यास लगती है .. और शरीर में पसीने बहने से खट्टा खाने का जी करता है .. या किसी बीमारी से बचने के लिए पशु खुद ही उससे संबंधित दवा वाले पत्‍ते ख लेते हैं .. उसी प्रकार हमें जिस रंग की आवश्‍यकता होती है .. वो हमारा पसंद बन जाता है !!