शुक्रवार, 6 नवंबर 2009

क्या ज्योतिष को विकासशील नहीं होना चाहिए ??

ज्योतिष विज्ञान है या अंधविश्वास , एक बड़ा प्रश्न , वो भी अनुत्तरित , क्योंकि इसके सही आधार की नासमझी के कारण जहां कुछ लोग इसका तिरस्कार करते हैं , वहीं दूसरी ओर अतिशय भाग्यवादिता से ग्रसित लोग किंकर्तब्यविमूढ़ावस्था को प्राप्त कर इसका अंधानुसरण करते हैं। दोनो ही स्थितियों में फलित ज्योतिष रहस्यमय और विचित्र हो जाता है। पहले वर्ग के लोगों का कहना है कि भला करोड़ों मील दूर स्थित ग्रह हमें किस प्रकार प्रभावित कर सकते हैं , वहीं दूसरे वर्ग के लोगों को आकाशीय पिंड की जानकारी से कोई मतलब ही नहीं , मतलब अपने भाग्य की जानकारी से है। इस तरह मूल तथ्य की परिचर्चा के अभाव में फलित ज्योतिष को जाने अनजाने काफी नुकसान है रहा है। एक भारतीय प्राचीन विद्या को हमारे देश में उचित स्थान नहीं मिल रहा है। ज्योतिष के पक्ष और विपक्ष में बहुत सारी बातें हो चुकी हैं , सबके अपने.अपने तर्क हैं , इसलिए किसी की जीत या हार हो ही नहीं सकती। बेहतर होगा कि बुद्धिजीवी वर्ग हर प्रकार के पूर्वाग्रह से मुक्त होकर ज्योतिषियों की बात सुनें , उनपर विचार करें।


प्रकृति के नियम के अनुसार प्रत्येक निर्माण--चाहे वह कला का हो , विज्ञान का या फिर धर्म का हो या संस्कृति का---------- अविकसित , विकासशील और विकसीत तीनों ही दौर से गुजरते हैं। न सिर्फ वैयक्तिक और सामाजिक संदर्भों में ही , वरन् प्राकृतिक वस्तुओं का निर्माण भी इन तीनों ही दौर से गुजरकर ही परिपक्वता प्राप्त करता है। इस सामान्य से नियम के तहत् ज्योतिष को भी इन तीनों ही दौर से गुजरना आवश्यक था। यदि वैदिक काल में ज्योतिष के गणित पक्ष की तुलना में फलित पक्ष कुछ कमजोर रह गया था तो क्या आनेवाले दौर में इसे विकसित बनाने की चेष्टा नहीं की जानी चाहिए थी। परंतु किसी भी युग में ऐसा नहीं किया गया। ज्योतिष को अंधविश्वास समझते हुए लगभग हर युग में इसे उपेक्षित किया गया। यह कारण मेरी समझ में आजतक नहीं आया कि क्यों हमेशा से ही भूत पढ़नेवालों को विद्वान और भविष्य पढ़नेवाले को उपहास का पात्र समझा जाता रहा।

आज भले ही कुछ ज्योतिषी इसे विकसीत बनाने की चेष्टा में जी.जान से लगे हों , सरकारी , अर्द्धसरकारी या गैर सरकारी ---. किसी भी संस्था का कोई सहयोग न प्राप्त कर पाते हुए लाख बाधाओं का सामना करते हुए ज्योतिष को विकासशील बनाए बिना विकसीत विज्ञान की श्रेणी में रख पाना संभव नहीं है। मै मानती हूं कि ज्योतिष विज्ञान के प्रति कुछ लोगों की न सिर्फ आस्था , वरण् भ्रांतियों को देखते हुए इसमें लाभ कमाने के इच्छुक लोगों का बहुतायत में प्रवेश अवश्य हुआ है , जिनका फलित ज्योतिष के विकास से कुछ लेना.देना नहीं है , पर उनके कारण कुछ समर्पित ज्योतिषियों के कार्य में बाधाओं का आना तो अच्छी बात नहीं है , जो कई सामाजिक भ्रांतियों को समाज से दूर करने के इच्छुक हैं।

जब कुछ ज्योतिषी आस्था की बात करते हुए ज्योतिष को विज्ञान के ऊपर मान लेते हैं , यह मान लेते हें कि जहां से विज्ञान का अंत होता है , वहां से ज्योतिष आरंभ होता है , तो यह बात बुद्धिजीवियों के गले से नहीं उतरती।वे कार्य.कारण में स्पष्ट संबंध दिखानेवाले विज्ञान की तरह ही ज्योतिष को देखना चाहते हैं। पर जब उन्हें एक विज्ञान के रूप में ज्योतिषीय तथ्यों से परिचित करवाया जाता है , तॅ वे यहां चमत्कार की उम्मीद लगा बैठते हैं। उन्हें शत्.प्रतिशत् सही भविष्यवाणी चाहिए। क्या एक डाक्टर हर मरीज का इलाज करना सिर्फ इसलिए छोड़ दे , क्योंकि वह कैंसर और एड्स के मरीजों का इलाज नहीं कर सकता ?

जब हम ज्योतिषी स्वयं यह मान रहे हैं कि ग्रह.नक्षत्रों का प्रभाव पृथ्वी के जड़.चेतन के साथ.साथ मानवजीवन पर अवश्य पड़ता है और इस प्रकार मानवजीवन को प्रभावित करने में एक बड़ा अंश विज्ञान के नियम का ही होता है , परंतु साथ ही साथ मानवजीवन को प्रभावित करनें में छोटा अंश तो सामाजिक , आर्थिक , राजनीतिक और देश काल परिस्थिति का भी होता है। फिर ज्योतिष की भाविष्यवाणियों के शत.प्रतिशत सही होने की बात आ ही नहीं सकती। इसी कारण आजतक ज्योतिष को अविकसित विज्ञान की श्रेणी में ही छोड़ दिया जाता रहा है , विकासशील विज्ञान की श्रेणी में भी नहीं आने दिया जाता , फिर भला यह विकसित विज्ञान किस प्रकार बन पाए ?

एक अविकसित प्रदेश के विद्यार्थी की योग्यता को जांचने के लिए आप शत्.प्रतिशत् परीक्षा परिणाम की उम्मीद करें , तो यह आपकी भूल होगी। सामान्य परीक्षा परिणाम के बावजूद वह योग्य हो सकता है , क्योंकि उसने उस परिवार और विद्यालय में अपना समय काटा है , जो साधनविहीन है। विकासशील क्षेत्र के अग्रणी विद्यालय या विकासशील परिवार के विद्यार्थी की योग्यता को आंकने के लिए आप शत.प्रतिशत परिणाम की उम्मीद कर सकते हैं , क्योंकि हर साधन की मौजूदगी में उसने विद्याध्ययन किया है।



9 टिप्‍पणियां:

Mahfooz Ali ने कहा…

ज्योतिष विज्ञान है या अंधविश्वास , एक बड़ा प्रश्न ?

bahut achcha laga yeh lekh......

Jyotish andhvishwaas nahi hai..... yeh ek poora science hai..... hamare Lucknow University mein Jtotish ka ek poora Department hai thik mere dept. ke bagal mein...... to main jyotish ko bahut achche se janta hoon......... aur bahut paas se dekha hoon....... aap ke saare articles mujhe bahut achche lagte hain.... aur bahut hi informative... yeh kaise scientific hai...yeh main aapko sirf us dept. mein le jaa kar hi bata sakta hoon....

Aur mera maximum time jyotish dept. mein hi beet ta hai.... maine bahut kareeb se jyotish vigyan ko dekha hai...

Popular India ने कहा…

ज्योतिष विज्ञान हैं या अंधविश्वाश? इस प्रश्न को लेकर क्यों दिमाग ख़राब करना है. हमें यह देखना चाहिए कि जो कहा गया वह सही हुआ या गलत. इस बात में दो राय नहीं कि ज्योतिष-शास्त्र के द्वारा किया गया फलकथन पुर्णतः गलत तो नहीं होता है. फिर हमें यह भी जानना चाहिए कि हमारे देश में अभी भी वैसे लोग हैं जो बिना जन्मकुंडली व बिना विज्ञान के गणना के अपने अंदर के शक्ति के आधार पर सही-सही भूत-भविष्य बताते हैं. (याद रखें मनुष्य के अंदर काफी सकती है.) ज्योतिष में तो किसी नियम के तहत गणना करके फलकथन किया जाता है. इसे गलत कहने का भी तो कोई आधार नहीं है. जहां तक प्रश्न हैं कि इतने दूर के गृह का प्रभाव कैसे पड़ेगा? तो इस संबंध में जरा सोचें कि हम यहाँ कुछ कहते है और उसे उपग्रह के माध्यम से मोबाइल या टेलीविजन से करोडों मील दूर दुसरे लोग सुन लेते हैं. जब इस प्रकार से मेरी आवाज शुक्ष्म रूप से एक स्थान से दुसरे स्थान तक पहुँच सकता है तो उस दूर के ग्रह का प्रभाव हम तक क्यों नहीं पड़ेगा. क्यों? पाठक जरा इस पर विचारेंगे.

आपका
महेश

जी.के. अवधिया ने कहा…

"करोड़ों मील दूर स्थित ग्रह हमें किस प्रकार प्रभावित कर सकते हैं"

हम पर तो क्या समुद्र के जल को भी प्रभावित करते हैं। ज्वार भाटा इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है।

ज्योतिष को अवश्य ही विकासित होना चाहिये।

पी.सी.गोदियाल ने कहा…

बहुत जरूरी है, वक्त के साथ साथ इस पर भी शोध होने चाहिए और सरकार को इसके लिए धन उपलब्ध करवाने चाहिए !

vinay ने कहा…

संगीता जी विडम्बना यही है,बहुत से लोग विना ज्योतिष के बारे में जाने इस को अन्धविशवास कह देते हैं,इस को जानने का प्रयत्न करते ही नहीं और अपना तर्क दे देते हैं,मेरे अनुसार ज्योतिष ग्रहो के प्रभाव की गणणा के कारण एक प्राचीन विज्ञान है,और इस पर शोध की बहुत आवशयक्ता है,शोध ना होने के कारण हम ज्योतिष के अतिरिअक्त और भी अपनी प्राचीन विद्याओं को खोते जा रहे है।

cmpershad ने कहा…

किसी भी ज्ञान का विकास ही तो उसे विज्ञान की ओर ले जाता है। आज ज्यॊतिष शास्त्र को शक की नज़र से देखा जाता है। यदि विकसित हो तो शायद वह भी एक विज्ञान बन जाए।

विनोद कुमार पांडेय ने कहा…

आज जिस तरह ज्योतिष् का महत्व बढ़ता जा रहा है..उसे देख कर तो यही कहना पड़ेगा की ज्योतिष् का विकास हो रहा है और होता भी रहेंगा..

पं.डी.के.शर्मा"वत्स" ने कहा…

आपका यह कथन बिल्कुल सही है कि "ये तथाकथित बुद्धिजीवी कार्य,कारण में स्पष्ट संबंध दिखानेवाले विज्ञान की भान्ती ही ज्योतिष को देखना चाहते हैं। परन्तु जब उन्हें एक विज्ञान के रूप में ज्योतिषीय तथ्यों से परिचित करवाया जाता है , तो वे यहां चमत्कार की उम्मीद लगा बैठते हैं।"

खुशदीप सहगल ने कहा…

मानो तो मैं गंगा मां हूं...
न मानो तो बहता पानी...

शायद ज्योतिष पर भी यही लागू होता है...

जय हिंद...