सोमवार, 9 नवंबर 2009

धन, कर्म और प्रयोग से हमें 'विज्ञान' मिल सकता है, 'ज्ञान' प्राप्‍त करने के लिए ग्रहों का साथ होना आवश्‍यक है!!

कल प्रवीण शाह जी नेटाईम ट्रैवल और टाईम मशीन के बहाने ज्योतिष शास्त्र के विज्ञान होने या न होने का विश्लेषण...........नामक एक आलेख पोस्‍ट किया , जिसमें भूत या भविष्‍य में झांकनेवाली टाइम मशीन और ज्‍योतिष दोनो की ही वैज्ञानिकता पर शक किया गया था। उनके विश्‍लेषण के अनुसार कल्पना के घोड़े जितने भी दौड़ा लिये जायें पर हकीकत में टाईम ट्रेवल करना और टाईम मशीन बनना असंभव है। इसी तरह ज्योतिष हो या टैरो या क्रिस्टल बॉल गेजिंग... भविष्य का पूर्ण निश्चितता के साथ कथन असंभव है।

उस लेख में मैने निम्‍न टिप्‍पणी की ....
ऐसी भविष्‍यवाणियां हम करें ही क्‍यूं .. जिसका काट मनुष्‍य के वश में हो .. हम ऐसी भविष्‍यवाणियां क्‍यूं न करें .. जिसका काट मनुष्‍य के पास हो ही नहीं !!

दिनेशराय द्विवेदी जी को मेरी टिप्‍पणी नहीं जंची , आगे उनकी टिप्‍पणी देखें ...
है कोई जवाब? आप के पास पहली टिप्पणी का।

अब प्रवीण शाह जी को मुझे जबाब तो देना ही था , उन्‍होने प्रश्‍न के रूप में ही एक जबाब लिखा .
क्या यह सत्य नहीं है संगीता जी, कि अधिकांश भविष्यवाणियां ऐसी ही होती हैं जिसकी काट मनुष्य के हाथ में हो?

टिप्‍पणी के रूप में इस छोटे से प्रश्‍न का उत्‍तर बडा होता , जिसे टिप्‍पणी के रूप में देना संभव नहीं था , इसलिए मैने उनके जबाब में एक आलेख लिखने का वादा किया , जो मैं प्रस्‍तुत कर रही हूं...

मेरा मानना है कि इतने वैज्ञानिक युग में होने के बावजूद धन , कर्म और प्रयोग से  'सबकुछ' हासिल करने के बाद भी उसे हासिल करने के मुख्‍य उद्देश्‍य को पूरा करने का सभी दावा नहीं कर सकते। जैसे आज शरीर की कद, काठी और वजन तक को नियंत्रित करने के साधन उपलब्‍ध है ... पर वे दावे के साथ अच्‍छा स्‍वास्‍थ्‍य नहीं दे सकते , अथाह धन को प्राप्‍त करने के कितने कार्यक्रम बनाए जा सकते हैं .. पर वे धन का संतोष नहीं दे सकते , मनचाहे जीन को एकत्रित करके मनचाहे संतान पा सकते हैं ... पर उन्‍हें सुपात्र नहीं बना सकते , आज अपनी पसंद के अनुसार पात्र चुनकर विवाह करने की आजादी है .. पर सभी सुखी दाम्‍पत्‍य जीवन नहीं पाते , पैसों के बल पर लोग नौकर इकट्ठे कर सकते हैं .. पर सच्‍चा सेवक मिलना सबको मुमकिन नहीं , पलंग पर गद्दों का अंबार लगा सकते हैं .. पर नींद लाना सबके वश की बात नहीं , नाना व्‍यंजन जुटा सकते हैं .. पर भूख नहीं लगे तो कैसे खाएंगे , हर क्षेत्र के विशेषज्ञों की औषधि मिल सकती है .. पर चैन कैसे मिले , विष ढूंढना बहुत ही आसान है .. पर अमृत ढूंढकर दिखाए कोई , मास्‍टर क्‍या पूरा स्‍कूल ही बनवा सकते हैं .. पर किसी को अकल नहीं दे सकते आप,  पैसों के बल पर बडे से बडे गुरू आपके सम्‍मुख खडे हो जाएंगे .. पर ज्ञान पाना सबके लिए संभव नहीं , किताबें क्‍या , पूरी लाइब्रेरी मिल सकती हैं .. पर विद्या प्राप्‍त करना इतना आसान नहीं , पिस्‍तौल या अत्‍याधुनिक हथियार मिल सकते हैं आपको .. पर कुछ करने के लिए साहस जुटाना बहुत मुश्किल है , जीवन के विभिन्‍न मोडों पर अनगिनत साथी मिल सकते हैं  ..  पर सभी असली मित्र नहीं हो सकते , आप हर प्रकार की छोटी बडी संपत्ति प्राप्‍त कर सकते हैं .. पर शांति नहीं पा सकते , सैकडों भाई बंधु प्राप्‍त कर सकते हैं .. पर उनमें से कोई भी सहयोगी नहीं हो सकता , भ्रमण के लिए टिकट खरीद सकते हैं आप .. पर भ्रमण का आनंद ले पाना सबके वश में नहीं , कुर्सी मिल सकती है .. पर प्रतिष्‍ठा नहीं , और इसी तरह विज्ञान प्राप्‍त कर सकते हैं पर ज्ञान नहीं !!

इसका कारण यह है कि स्‍वास्‍थ्‍य, संतोष, दाम्‍पत्‍य जीवन, नींद, सुपुत्र, भूख, चैन, अमृत,अकल, विद्या, साहस, मित्र, शांति, सहयोगी, प्रतिष्‍ठा, भ्रमण का आनंद और ज्ञान प्राप्ति आपके वश में नहीं होती। इनको हासिल करने के लिए आपको अपने जन्‍मकालीन ग्रहों पर निर्भर रहना पडता है। किसी भी व्‍यक्ति के जीवन में ये सभी मुद्दे समय सापेक्ष होते हैं और कभी कमजोर तो कभी मजबूत दिखाई देते रहते हैं। यदि ऐसा नहीं होता तो अपने मजबूत समय में तरक्‍की करनेवाले दुनिया के एक से एक दिग्‍गज अपने कमजोर समय में लाचार होते क्‍यूं देखे जाते ? और एक से एक कमजोर व्‍यक्ति मजबूत समय में दुनिया के लिए आदर्श कैसे बन जाते हैं ? इसलिए ज्‍योतिष की चर्चा इन्‍हीं संदर्भों में की जानी चाहिए। जन्‍मकुंडली के निर्माण से लेकर भृगुसंहिता तक के भविष्‍य कथन में हमारे पूज्‍य ऋषि , महर्षियों ने इसी तरह सांकेतिक तौर पर ही ज्‍योतिष की विवेचना करने की कोशिश की थी , पर कालांतर में पंडितों ने अधिक ज्ञानी बनने के चक्‍कर में उन बातों की भविष्‍यवाणी करने का दावा किया , जो मनुष्‍य के अपने हाथ में है। इसलिए मैने कहा कि ऐसी भविष्‍यवाणियां हम करें ही क्‍यूं , जिसका काट मनुष्‍य के वश में हो। हम ऐसी भविष्‍यवाणियां क्‍यूं न करें , जिसका काट मनुष्‍य के पास हो ही नहीं !!
अपनी प्रतिक्रिया अवश्‍य दें ......



12 टिप्‍पणियां:

Geeta Pal ने कहा…

sach kaha aapne.. hum dhan juta sakte hain per shanti khareed nahi sakte|

parantu is baat se jyotish ka kya lena dena hai. jahan tak me samajhtee hoon to jyotish kee taraf insaan sukh, shanti khareedne hee aate hain.

to kya ye maan liya jaye ki jyotish aapko sukh shanti nahi de sakti? ya phir aisa bhi ho sakta hai ki jyotish ka kuch aur hi prayog ho jo mere samajh me na aaya ho. krypa batayein

संगीता पुरी ने कहा…

गीता पाल जी,
मेरे आलेख को पढने और टिप्‍पणी करने के लिए बहुत बहुत धन्‍यवाद .. इस आलेख को लिखने का मेरा मकसद ये है कि मनुष्‍य सबकुछ खरीद सकता है .. पर उसके जीवन में स्‍वास्‍थ्‍य, संतोष, दाम्‍पत्‍य जीवन, नींद, सुपुत्र, भूख, चैन, अमृत,अकल, विद्या, साहस, मित्र, शांति, सहयोगी, प्रतिष्‍ठा, भ्रमण का आनंद और ज्ञान प्राप्ति समय सापेक्ष होता है .. हर वक्‍त ये सब वश में नहीं होते .. ज्‍योतिष के सटीक अध्‍ययन के बाद हम जान सकते हैं कि विभिन्‍न ग्रहों के प्रभाव से समस्‍याएं कितने दिनो तक रहेगी और इस समय हमें किस प्रकार की मानसिकता रखने की आवश्‍यकता है .. यदि भविष्‍य में भी ग्रहों का प्रभाव अच्‍छा हो .. तो हमें धैर्य रखने में आसानी हो जाती है !!

इष्ट देव सांकृत्यायन ने कहा…

वैसे तो ओशो ने ज्योतिष को अद्वैत का विज्ञान कहा है. इसे वहीं तक लेना ठीक है. लेकिन एक बात और है, ऐसी भविष्यवाणियां करें ही क्यों जिनकी काट मौजूद हो...? यह सवाल मुझे जंच नहीं रहा है. क्योंकि इसका अर्थ यह भी निकलता है कि सिर्फ गोलमोल भविष्यवाणियां ही की जाएं. फिर ज्योतिष का क्या मतलब? दूसरी बात जो समुद्र और 14वीं मंजिल के फ्लैट वाला उदाहरण उन्होंने दिया है: उसका जवाब श्रीमदभागवत कथा में है. राजा सांप से बचने के लिए समुद्र में चले गए थे और वहां वह फूल में आ गया. इस बात की क्या गारंटी है कि सुनामी जैसी कोई आपदा 17वीं मंजिल तक नहीं पहुच जाएगी?

संगीता पुरी ने कहा…

इष्‍टदेव जी,
बहुत बहुत धन्‍यवाद .. जिन भविष्‍यवाणियों के बारे में आप या अन्‍य लोग बातें कर रहे हैं .. वे सिर्फ ज्‍योतिष की सामान्‍य गणना से नहीं की जा सकती .. उसमें आध्‍यात्‍म का भी पुट होता है .. उसके लिए बहुत तपस्‍या की आवश्‍यकता होती है .. पर ज्‍योतिष की बिल्‍कुल सामान्‍य बातें तो लोगों को गणित सीखलाने जितना आसान होता है .. सामान्‍य विषयों की तरह हर व्‍यक्ति इसे सीख सकता है .. पारिवारिक जबाबदेहियों को निभाती हुई एकाग्रता की कमी से मैं अभी ऋषि मुनियों के स्‍तर तक तो नहीं पहुंच सकती !!

MANOJ KUMAR ने कहा…

यह रचना अपनी एक अलग विषिष्ट पहचान बनाने में सक्षम है।

राज भाटिय़ा ने कहा…

आप के तर्क बहुत सुंदर लगे, धन्यवाद इस सुंदर लेख के लिये

रामकुमार अंकुश ने कहा…

संगीता जी, कृपया यह बताएं क्या ज्योतिष सिर्फ साधारण लोगों के लिए है? दूसरी बात यदि किसी व्यक्ति का रुझान विज्ञान की ओर है, और यदि वह वैज्ञानिक द्रष्टिकोण से सोचता विचारता है तो उसे ज्ञान की जरुरत ही क्या है? वैसे आज हर व्यक्ति को विशेष ज्ञान की ही जरुरत है...केवल ज्ञान की नहीं....

प्रवीण शाह ने कहा…

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आदरणीय संगीता जी,

आप ज्योतिष या गत्यात्मक ज्योतिष के समर्थन की बजाय भाग्यवाद के पक्ष में बोलती प्रतीत होती हैं इस आलेख में...

अब आपके ही तर्क को थोड़ा विस्तार देता हूँ:-

"जैसे आज शरीर की कद, काठी और वजन तक को नियंत्रित करने के साधन उपलब्‍ध है ... पर वे दावे के साथ अच्‍छा स्‍वास्‍थ्‍य नहीं दे सकते , अथाह धन को प्राप्‍त करने के कितने कार्यक्रम बनाए जा सकते हैं .. पर वे धन का संतोष नहीं दे सकते , मनचाहे जीन को एकत्रित करके मनचाहे संतान पा सकते हैं ... पर उन्‍हें सुपात्र नहीं बना सकते , आज अपनी पसंद के अनुसार पात्र चुनकर विवाह करने की आजादी है .. पर सभी सुखी दाम्‍पत्‍य जीवन नहीं पाते , पैसों के बल पर लोग नौकर इकट्ठे कर सकते हैं .. पर सच्‍चा सेवक मिलना सबको मुमकिन नहीं , पलंग पर गद्दों का अंबार लगा सकते हैं .. पर नींद लाना सबके वश की बात नहीं , नाना व्‍यंजन जुटा सकते हैं .. पर भूख नहीं लगे तो कैसे खाएंगे , हर क्षेत्र के विशेषज्ञों की औषधि मिल सकती है .. पर चैन कैसे मिले..."

इसी तरह आप दिन रात प्रैक्टिस कर ,मैदान में पसीना बहा ,ढेरो् रन और विकेट लेकर देश की टीम में यो आ सकते हैं... पर जीत पाना सबके बस की बात नहीं...

मेरा सवाल है कि यदि टीम चयन में खिलाड़ियों के जन्म लग्न को देख कर यदि उन्ही खिलाड़ियों की टीम बनाई जाये जिनका मजबूत समय (आपके कहे अनुसार) चल रहा है, तो कंया वह टीम जीत ही जायेगी ?

संगीता पुरी ने कहा…

रामकुमार अंकुश जी ,
मैने 'विज्ञान' शब्‍द का प्रयोग उसकी सुविधा लेने के लिए किया है .. पैसे के बल पर आप वैज्ञानिक साधनों की सुविधा प्राप्‍त कर सकने है .. विज्ञान जानना तो ज्ञान से भी बडा है .. यदि आप उस विज्ञान के समर्थक हैं जो धरती को बर्वाद कर चांद और अब मंगल का अध्‍ययन करना चाहता है .. सबके पेट में दाना नहीं और सबके हाथ में मोबाइल देने के सपने देखता है .. हर प्रकार के सुख सुविधा के साधन जुटाने के अतिरिक्‍त लोगों मे और किसी इच्‍छा को समाप्‍त कर देता है .. उन्‍हे इकट्ठा करना के लिए समाज के हर वर्ग में मानवीय मूल्‍यों को समाप्‍त करता जा रहा है तो उस 'विज्ञान' रूपी ज्ञान को मेरा दूर से ही प्रणाम !!

संगीता पुरी ने कहा…

प्रवीण शाह जी,
आपका प्रश्‍न .. मेरा सवाल है कि यदि टीम चयन में खिलाड़ियों के जन्म लग्न को देख कर यदि उन्ही खिलाड़ियों की टीम बनाई जाये जिनका मजबूत समय (आपके कहे अनुसार) चल रहा है, तो कंया वह टीम जीत ही जायेगी ?
मेरा जबाब .. इस बात के लिए सॉरी .. कि मैने आपके प्रश्‍न के मूल को समझकर इस आलेख में जबाब नहीं दिया .. मैने क्रिकेट मैच की भविष्‍यवाणी करने के लिए क्रिकेट टीम में से एक एक व्‍यक्ति की जन्‍मकुंडली का अध्‍ययन किया ही नहीं है .. और आप तो मेरे हर दिन की भविष्‍यवाणी को देखते आ रहे हैं .. जिस तरह की भविष्‍यवाणी इस क्रिकेट मैच के लिए मैने की है .. उस तरह की भविष्‍यवाणी मैं हमेशा कर सकती हूं .. इसे भारत के सापेक्ष ग्रह स्थिति से जोडती हूं .. जब भारत का समय बुरा रहेगा .. तो आप टीम में खुद वैसे व्‍यक्ति को चुनकर आ जाएंगे .. जिनके ग्रह खराब रहेंगे .. यदि वैसे व्‍यक्ति आ जाएं .. जिनके ग्रह अच्‍छे हो तो वह मैच फिक्सिंग करके हारकर भी जीतेंगे .. पर इससे भारत की जीत तो नहीं होगी न .. ऐसा ही भारत के समय के अच्‍छे रहने पर भी होगा .. प्रकृति की व्‍यवस्‍था के आगे हम कितना भी जुगाड कर लें कामयाब नहीं हो सकते हैं।

Geeta Pal ने कहा…

आपका कहना यह है की कर्म भाग्य की गति को नहीं बदल सकता?

परन्तु मैंने तो सुना है की विक्रमादित्य को किसी सामुद्रिक ज्योतिष ने बताया था की वो बड़े ही दुर्भाग्यशाली व्यक्ति हैं, जबकि आज तक सायद ही उनसे ज्यादा कीर्ति किसी और राजा को मिली है| जिसका कारण बाद में खुद उस ज्योतिष ने कर्म में प्रवीण होना बताया था|

http://www.learnbywatch.com
http://learnywatch.blogspot.com

vinay ने कहा…

मेरे अनुसार ज्योतिष हमारे हर क्रिया कलाप पर प्रभाव तो डालता ही है ।