सोमवार, 30 नवंबर 2009

ज्‍योतिष का सहारा लेकर क्या भवितब्यता टाली भी जा सकती है ?? (दसवीं और अंतिम कडी)

आज इसकी अंतिम कडी पढे , इसके पूर्व की सारी कडियों को पढने के लिए यहां चटका लगाएं।


ग्रहों के बुरे प्रभाव को दूर करने के उपायों की चर्चा के क्रम में विभिन्‍न रंगो के द्वारा इसे समायोजित करने की चर्चा की गयी है। इन रंगो का उपयोग आप विभिन्‍न रंग के रत्‍न के साथ ही साथ वस्‍त्र धारण से लेकर अपने सामानों और घरों की पुताई तक और विभिन्‍न प्रकार की वनस्‍पतियों को लगाकर प्राप्‍त कर सकते हैं। सुनने में यह बडा अजीब सा लग सकता है , पर इस ब्रह्मांड की हर वस्‍तु एक खास रंग का प्रतिनिधित्‍व करती है और इस कारण एक जैसे रंगों को परिवर्तित करनेवाली सभी वस्‍तुओं का आपस में एक दूसरे से संबंध हो जाता है। और यही ग्रहों के दुष्‍प्रभाव को रोकने में हमारी मदद करता है।


किसी भी पद्धति के द्वारा उपचार किए जाने से पहले उसके आधार पर विश्‍वास करना आवश्‍यक होता है। ‘गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष’ का मानना है कि किसी भी प्रकार की शारीरिक , मानसिक या अन्‍य परिस्थितियों की गडबडी में उस व्‍यक्ति के जन्‍त्‍मकालीन ग्रहों की ‘गत्‍यात्‍मक शक्ति’ की कमी भी एक बडा कारण होती हैं , इसलिए उन्‍हें दूर करने के लिए हमें ग्रहों के इस दुष्‍प्रभाव को समाप्‍त करना ही पडेगा , जो कि असंभव है। हमलोग सिर्फ उसके प्रभाव को कुछ कम या अधिक कर सकते हैं। जिस ग्रह से हम प्रभावित हो रहे होते हैं , उससे संबंधित रंगों का प्रयोग हमें समस्‍याओं से मात्र आसानी से लडने की शक्ति प्रदान करता है।

रंग हमारे मन और मस्तिष्‍क को काफी प्रभावित करते हैं। कोई खास रंग हमारी खुशी को बढा देता है तो कोई हमें कष्‍ट देने वाला भी होता है। यदि हम प्रकृति के अत्‍यधिक निकट हों , तो ग्रहों के अनुसार जिस रंग का हमें सर्वाधिक उपयोग करना चाहिए , उस रंग को हम खुद पसंद करने लगते हैं और उस रंग का अधिकाधिक उपयोग करते हैं। पर प्रकृति से दूर कंप्‍यूटर में विभिन्‍न रंगों के संयोजन से तैयार किए गए नाना प्रकार के रंगों में से एक को चुनना आज हमारा फैशन है और वह हमें ग्रहों के दुष्‍प्रभाव से लडने की शक्ति नहीं दे पाता। यही कारण है कि हमें कृत्रिम तौर पर रंगों की ऐसी व्‍यवस्‍था करनी होती है , ताकि हम विपरीत परिस्थितियों में भी खुश रह सके। अब इस टॉपिक पर बहुत कुछ कह दिया , कहने को शायद कुछ नहीं , अनुभव की वृद्धि होने पर बाद में फिर कभी !!





10 टिप्‍पणियां:

Pandit Kishore Ji ने कहा…

gyaanvardhak jaankari dene ke liye aapka bahut bahut dhanyavad

निर्मला कपिला ने कहा…

dदस की दस कडियाँ बहुत ही सुरुचीपूर्ण और ग्यानवर्द्धक रही। धन्यवाद और शुभकामनायें

ज्ञानदत्त G.D. Pandey ने कहा…

अच्छा है जी, हमारा भी अनुभव/ज्ञान बढ़ रहा है!

Udan Tashtari ने कहा…

बहुत बढ़िया रही श्रृंखला.

अनुभव की वृद्धि होने पर बाद फिर इन्तजार करेंगे. :)

राज भाटिय़ा ने कहा…

बहुत अच्छी रही आप की यह श्रृंखला.
धन्यवाद

Einstein ने कहा…

बहुत बेहतरीन रही ये दस कड़ी....और कड़ी जुड़ते रहे ...इंतजार में ...

डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर ने कहा…

ज्योतिष को लेकर फैले भ्रम के सन्दर्भों में आपका प्रयास सराहनीय ही नहीं स्तुत्य है, विभ्रमों को आप फ़ैलाने से रोकने के साथ-साथ लोगों को नै दिशा दिखा रहीं हैं,बधाई.

वन्दना ने कहा…

aapne bahut hi achchi aur sarthak jankari di hai.........ye to sach hai ki rangon ka hamare jeevan par prabhav to avashya hi padta hai.

Rector Kathuria ने कहा…

ज्योतिष के गहरे विज्ञानं को आप बहुत ही सटीक और सही सन्दर्भ में प्रस्तुत कर रही हैं....काफी खोजपूरण और मेहनत वाला काम है लेकिन इसे आप जैसे लगन वाले विद्वान ही कर सकेंगे...इतनी अच्छी पोस्ट के लिए बधाई....लगे रहिये....

Shastri JC Philip ने कहा…

आज पहली बार कडी 10 दिखी. पूरा पढ कर देखते हैं.

आपके विवरणात्मक लेखन के लिये आभार!

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