रविवार, 6 दिसंबर 2009

क्‍या जन्‍मकुंडली के विभिन्‍न ग्रहयोगों की पुष्टि गणित के संभाब्‍यता के नियम से हो जाती है ??

पुस्‍तकें पढने की परंपरा कितनी भी कम होती क्‍यूं न दिखाई पडे , पढनेवाले लोगों के हाथ में कभी कभी फुर्सत के क्षणों में पुस्‍तकें आ ही जाती हैं। बहुत दिनों बाद इधर काफी दिनों पहले खरीदी गयी एक पुस्‍तक 'ज्‍योतिष के विभिन्‍न योग' को पढने का मौका मिला। कुंडली में दिखाई देनेवाले कुल 125 योगों की इसमें चर्चा है। गजकेशरी योग से लेकर दरिद्र योग तक , दत्‍तक पुत्र योग से लेकर मातृत्‍यक्‍त योग तक , पूर्णायु या शताधिक आयुर्योग से लेकर अमितमायु योग तक , सर्पदंशयोग से दुर्मरण योग तक , महालक्ष्‍मी और सरस्‍वती योग से लेकर दरिद्र योग तक तथा सुरपति योग से लेकर भिक्षुक योग तक। एक नजर देखने पर पुस्‍तक बडी ही रोचक लगी , मुझे लगा कि इसके अध्‍ययन कर लेने से मेरी भविष्‍यवाणियों में एक नया आयाम जुड जाएगा, पर ज्‍यों ज्‍यों मैं गंभीरता से आगे बढती गयी, निराशा ही हाथ आयी।

तब मुझे उन दिनों की याद आ गयी , जब पिताजी के द्वारा ज्‍योतिष की जानकारी के बाद इसमें मेरी रूचि इतनी बढ गयी थी कि इस विषय पर दिन रात कुछ न कुछ पढने का मन होता , लेकिन मेरे लिए घर पर ज्‍योतिष के ढेर सारी पुस्‍तकों में से एक का चयन कर पाना कठिन होता। इस विषय में पिताजी से राय लेना चाहती , तो वे कहते कि ज्‍योतिष की किसी भी पुस्‍तक में कुछ बातें तो ज्ञानवर्द्धक होती है , पर कुछ बातें बिल्‍कुल गुमराह करनेवाली होती हैं। उनका कहना था कि ज्‍योतिष की पुस्‍तकों में वर्णित योगों को ढूंढने के लिए मैने बडे बडे महापुरूषों की कितनी कुंडलियों को देखने में दिन रात एक कर डाला , पर वे योग वहां नहीं मिले , जबकि हमारे मुहल्‍ले में जीवन भर एक छोटी सी दुकान चलाने वाले हिसाब किताब भर पढाई करने वाले व्‍यक्ति की कुंडली में एक बडा राजयोग दिखाई पड गया। उनका कहना था कि उन्‍होने पंद्रह वर्षों तक मेहनत करके किसी फसलवाले खेत से एक एक घास को चुनकर अलग कर दिया है और वे ज्‍योतिष की बिल्‍कुल स्‍वच्‍छ फसल मुझे प्रदान कर रहे हैं , फिर मुझे पुन: फसल और घास के मध्‍य भटकने की क्‍या आवश्‍यकता ?

योग वाली जिस पुस्‍तक की आज मैं बात कर रही हूं , उसमें पहले ही स्‍थान पर गजकेशरी योग के बारे में लिखा है। चंद्रमा से केन्‍द्र में बृहस्‍पति स्थित हो , तो गजकेशरी योग होता है। वैसे यह ज्‍योतिष का एक बहुत ही महत्‍वपूर्ण येग माना जाता है , पर हम जैसे गणित को जाननेवालों की यही दिक्‍कत है , किसी बात को ज्‍यों का त्‍यों स्‍वीकार नहीं कर पाते। किसी भी कुंडली में किसी भी ग्रह को बैठने के लिए चंद्रमा से आगे ग्‍यारह भाव होते हैं , ऐसा ही बृहस्‍पति के लिए भी है। केन्‍द्र में होने का मतलब है कि उसमें से चार स्‍थानों में बैठकर यह जातक के लिए गजकेशरी योग उपस्थित कर सकता है। संभाब्‍यता के नियम के अनुसार किसी कुडली में इस योग के बनने की संभावना 4/11 हो जाती है। अब इस योग पर मेरा विश्‍वास करना नामुमकिन है , क्‍यूंकि कुल जनसंख्‍या का 4/11 भाग इस योग में कैसे आ सकता है , जैसा कि इस पुस्‍तक में इस योग के फल के बारे में लिखा है ......

इस योग में जन्‍म लेनेवाला जातक अनेक मित्रों , प्रशंसकों और संबंधियों से घिरा रहता है और उनके द्वारा सराहा जाता है। स्‍वभाव से नम्र , विवेकवाण और सद्गुणी होता है। कृषि कार्यों से इसे विशेष लाभ होता है तथा वह नगरपालिकाध्‍यक्ष या मेयर बन जाता है। तेजस्‍वी, मेधावी, गुणज्ञ तथा राज्‍य पक्ष में यह प्रबल उन्‍नति करने वाला होता है। स्‍पष्‍टत: गजकेशरी योग में जन्‍म लेनेवाला जातक जीवन में उच्‍च स्थिति प्राप्‍त कर पूर्ण सुख भोगता है तथा मृत्‍यु के बाद भी उसकी यशगाथा अक्षुण्‍ण रहती है।




13 टिप्‍पणियां:

Mahfooz Ali ने कहा…

बहुत अच्छी लगी यह पोस्ट.....

शुभकामनाएं........

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www.lekhnee.blogspot.com

योगेन्द्र मौदगिल ने कहा…

बहुत अच्छी जानकारी...

वन्दना ने कहा…

sahi kaha aapke pitaji ne......kabhi to sab sach lagta hai aur kabhi sab jhooth kyunki ganitiya ganna karnaaur wo bhi bilkul sahi har kisi ke baski nhi hota aur isi vajah se adhikansh bhavishyavani galat sabit ho jati hain jabki jyotish apne aap mein kahin bhi galat nhi hota .

vinay ने कहा…

एक नया ज्ञान मिला ।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

जबकि हमारे मुहल्‍ले में जीवन भर एक छोटी सी दुकान चलाने वाले हिसाब किताब भर पढाई करने वाले व्‍यक्ति की कुंडली में एक बडा राजयोग दिखाई पड गया। उनका कहना था कि उन्‍होने पंद्रह वर्षों तक मेहनत करके किसी फसलवाले खेत से एक एक घास को चुनकर अलग कर दिया है और वे ज्‍योतिष की बिल्‍कुल स्‍वच्‍छ फसल मुझे प्रदान कर रहे हैं , फिर मुझे पुन: फसल और घास के मध्‍य भटकने की क्‍या आवश्‍यकता ?

संगीता जी!
यह तो बताएँ कि उपरोक्त व्यक्ति को राज-योग का फल मिला?
पोस्ट बहुत ही रोचक और ज्ञनवर्धक है!

प्रवीण शाह ने कहा…

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आदरणीय संगीता जी,

"संभाब्‍यता के नियम के अनुसार किसी कुडली में इस योग के बनने की संभावना 4/11 हो जाती है। अब इस योग पर मेरा विश्‍वास करना नामुमकिन है , क्‍यूंकि कुल जनसंख्‍या का 4/11 भाग इस योग में कैसे आ सकता है? "

बिल्कुल सही दिशा में जा रही हैं आप, लगे रहिये... सत्य की खोज की इस यात्रा के लिये शुभकामनायें !

Ashish ने कहा…

संगीता जी

ज्योतिष रत्नाकर में पेज ६५८ par इस योग के बारे में लिखा है

"परन्तु स्मरण रहे यदि चन्द्र और ब्रहस्पति यदि पाप गृह हों या पाप दृष्ट गृह तो फल में न्यूनता आती है"

योग ग्रहों से बनता है और यदि गृह ही बलवान / शुभ ना हों तो योग कैसे फलित हो सकता है

संगीता पुरी ने कहा…

आशीष जी,
बहुत बहुत धन्‍यवाद .. 1970 से पिताजी के पास और 1991 से मेरे पास जितने भी लोग परामर्श के लिए आते हैं , सबकी जन्‍मकुंडलियां हमारे पास दर्ज होती रही है। कम से कम 10,000 कुंडलियां हैं हमारे पास .. ज्‍योतिष के पुराने ग्रंथों में वर्णित योगों को हमने पूर्ण तौर पर जांचकर देखा है .. और तभी इस बात को कहने की हिम्‍मत जुटा रही हूं .. अन्‍यथा पुराने ग्रंथों का मैं बहुत सम्‍मान करती हूं .. मेरे पिताजी का मानना है कि वैदिक काल में हमारे ऋषि , महर्षियों ने गणित ज्‍योतिष के क्षेत्र में बहुत सटीक काम किया था .. इसलिए इसके सूत्र बिल्‍कुल सटीक हैं .. पर फलित के क्षेत्र में काम अच्‍छी तरह नहीं हो सका था .. सभी अपने अपने ढंग से समझने की कोशिश कर ही रहे थे कि .. कोई बडी अडचन आ गयी थी .. तभी तो इसमें ग्रहों की शक्ति और प्रतिफलन काल के लिए अलग अलग विद्वानों के अलग अलग मत दिखते हैं !!

Ashish ने कहा…

"...तभी तो इसमें ग्रहों की शक्ति और प्रतिफलन काल के लिए अलग अलग विद्वानों के अलग अलग मत दिखते हैं"

यह ही कारण हो सकता है की योग तो बहुतों की कुंडली में बनते हैं पर फलित नहीं होते

राज भाटिय़ा ने कहा…

ज्‍योतिष तो बहुत मिलते है संगीता जी लेकिन सही रुप मै समझाने वाले बहुत कम मिलते है, लोगो का विशवास इसी लिये इस से ऊठ गया, वरना ज्‍योतिष भी एक विग्याण ही है, ओर आप ने इसे बहुत बारीकी से पढा ओर जाना है, आज का लेख बहुत सुंदर लगा, धन्यवद

tulsibhai ने कहा…

" bahut hi sunder post gyanvardhak post ...aapko badhai "

------ eksacchai { AAWAZ }

http://eksacchai.blogspot.com

Vani ने कहा…

बहुत अच्छी पोस्ट गजकेसरी योग के बारे में ।

रंजना [रंजू भाटिया] ने कहा…

नयी जानकारी मिली शुक्रिया