शनिवार, 24 जनवरी 2009

क्‍या मेरी भविष्‍यवाणियों का सही होते जाना महज संयोग है ? ( Astrology )

मेरे इस शीर्षक को देखकर आप यह न समझ बैठे कि यह hagiography – प्रशंसात्मक बायोग्राफी से भरा एक आलेख है , जिसके बारे में आज ही ज्ञानदत्‍त पांडेय जी के आलेख में पढने को मिला। मेरे आलेख का मुख्‍य उददेश्‍य अपनी प्रशंसा न कर ज्‍योतिष जैसे वैदिक कालीन विषय को विज्ञान के रूप में पदस्‍थापित करना है। ज्‍योतिष को विज्ञान साबित करने के लिए एक एक व्‍यक्ति को पकडकर और उनके लिए सटीक भविष्‍यवाणी की गणना कर पूरे विश्‍व के लोगों तक ज्‍योतिष की वैज्ञानिकता का प्रमाण देने में तो हमें कई जन्‍म लेने होंगे , यही सोंच हमें व्‍यक्तिगत भविष्‍यवाणी के इतर कुछ अन्‍य बातों के अध्‍ययन में भी ले आयी। क्रिकेट मैच , मौसम , राजनीति और शेयर के कुछ दिनों के अध्‍ययन के बाद हमने इससे संबंधित भविष्‍यवाणियां करनी आरंभ की , जिसके सही होने पर मुझे विश्‍वास हो गया कि अब लोग अवश्‍य ज्‍योतिष के पक्ष में आते जा रहे हैं ।
सबसे पहले 8 नवम्‍बर को प्रकाशित मौसम की भविष्‍यवाणी इस आलेख में देखें , जिसमें मैने भविष्‍यवाणी कर रखी थी कि इस वर्ष शुभ ग्रहों का प्रभाव अधिक होने से 25 दिसम्‍बर तक ठंड कम पडेगी और वही हुआ।
मौसम से संबंधित दूसरी भविष्‍यवाणी 16 दिसम्‍बर को इस आलेख में की गयी थी , जिसमें अशुभ ग्रहों की वजह से 2 और 3 जनवरी 2009 को मौसम के प्रतिकूल होने की बात कही गयी थी , शायद उस दिन का कुहरा पाठक नहीं भूले हों , जिसकी वजह से एक सप्‍ताह तक न जाने कितनी उडाने और ट्रेने रदद कर दी गयी थी और कितनी दस दस घंटो तक लेट चल रही थी।
इसी प्रकार 3 नवम्‍बर को जब शेयर बाजार से जुडे सारे लोग हैरान परेशान थे सेंसेक्‍स और निफटी अपने न्‍यूनतम स्‍तर पर था , मेरा यह आलेख पढें , जिसमें स्‍पष्‍ट कहा गया था कि गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष के अनुसार छोटे उतार और बडे़ चढा़व को दिखाते हुए सेंसेक्‍स और निफटी की स्थिति 20 दिसंबर तक बढ़त का ही क्रम बनाए दिखाई दे रहे हैं। इसलिए निवेशकों को अभी धैर्य बनाए रखने की आवश्‍यकता है। 20 दिसम्‍बर के पूर्व के सप्‍ताह में ही सेंसेक्‍स ने कई बार 10 हजार को पार किया ही, 18 और 19 को ही अपने सर्वाधिक स्‍तर पर भी पहुंचा।
20 दिसम्‍बर के तुरंत बाद के सप्‍ताह में ही शेयर बाजार की गिरावट आरंभ हो गयी। 3 जनवरी को सरकार और रिजर्व बैंक के मंदी दूर करने के कार्यक्रमों के बावजूद 5 जनवरी को प्रकाशित मेरे आलेख में स्‍पष्‍ट है कि सेंसेक्‍स में गिरावट आएगी और वही हुआ। उसी सप्‍ताह सत्‍यम घोटाले से बाजार बुरी तरह प्रभावित हुआ।
अभी पिछले सप्‍ताह अर्थव्‍यवस्‍था के जानकार तक अमेरिका के राष्‍ट्रपति ओबामा के शपथ ग्रहण के बाद शेयर बाजार में बढोत्‍तरी की उम्‍मीद कर रहे थे , पर 18 जनवरी को प्रकाशित मेरे आलेख में स्‍प्‍ष्‍ट है कि 19 जनवरी को बाजार सामान्‍य भी रह सकता है , पर 20 और 21 जनवरी को बाजार में जो गिरावट आएगी , उसके प्रभाव से 22 और 23 जनवरी को भी बाजार कमजोर ही बना रहेगा। एक एक दिन की सटीक गणना बिना किसी आधार के कह पाना किसी के लिए संभव है क्‍या ?
अब आपको राजनीति में लिए चलती हूं। जुलाई के मध्‍य में जब केन्‍द्र में मनमोहन जी की सरकार ने बहुमत हासिल कर लिया , रांची से प्रकाशित होनेवाले अखबार ‘प्रभात खबर’ के कुछ पत्रकार मुझसे मिले और शिबू सोरेन के भविष्‍य के बारे में जानना चाहा। मैने उन्‍हें न सिर्फ यह बताया कि वे मुख्‍यमंत्री बनेंगे , बल्कि यह भी कि जनवरी 2009 से ही उनके सामने संकट आएगा। इस बात को उन्‍होने अखबार में दो दो बार प्रकाशित किया , जिसकी कतरन आप नीचे देख सकते हैं।

अब आपको 2004 में लिए चलती हूं , जब अटल बिहारी वाजपेयी जी के नेतृत्‍व को पूरे भारतवर्ष में खासी प्रतिष्‍ठा मिल रही थी , तीन तीन राज्‍यों में विधान परिषद में मिलनेवाली सफलता और ‘शाइन इंडिया’ और ‘फील गुड’ के प्रचार प्रसार के बाद उनकी हार के बारे में कोई सोच भी नहीं सकता था। वातावरण को देखते हुए ही मौके का फायदा उठाने के लिए ही इन्‍होने लोकसभा भी भंग कर दी थी। पर इस समय गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष की गणना के आधार पर मेरे पिताजी ने अदिति फीचर्स को यह आलेख भेजा था , जो उसके माध्‍यम से दिल्‍ली के दस अखबारों में प्रकाशित हुआ। इस समय राजग का हार जाना ग्रहों के प्रभाव की ही पुष्टि करता है।

एक बात और, जो मै बतलाना आवश्‍यक समझती हूं , वह यह कि हमारे आलेखों में आप परंपरागत ज्‍योतिषियों की तरह की बातें , जैसे इस ग्रह की राशि में वे ग्रह है या इसकी दशा चल रही है , यह सब नहीं पाएंगे ,पाएंगे कि आकाश में यह ग्रह उस ग्रह से इतनी दूरी पर स्थित है या इस प्रकार का कोण बना रहा है, क्‍योकि गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष खगोल शास्‍त्र पर पूर्ण तौर पर अधारित है और खगोलीय स्थिति का पृथ्‍वी पर पडनेवाले प्रभाव की विवेचना करता है। यदि खगोल वैज्ञानिको की टीम हमसे संपर्क करे , तो ज्‍योतिष के मानव जड चेतन पर पडनेवाले प्रभाव को प्रमाणित किया जा सकता है।

गुरुवार, 22 जनवरी 2009

आइए, हम सब मिलकर ईश्‍वर से प्रार्थना करें ( Astrology )

ज्‍योतिष में रूचि रखनेवाले पाठकों के लिए ‘ढैया’ शब्‍द कोई नया नहीं है। समस्‍याओं से जूझ रहे व्‍यक्ति के लिए ज्‍योतिषी अक्‍सर ढैया और साढेसाती शब्‍द कर उपयोग करते हें। परम्‍परागत ज्‍योतिष का मानना है कि जब जन्‍मकुंडली और दशापद्धति के अनुसार फल नहीं घटित हो रहा हो , तो गोचर यानि आसमान में चल रहे ग्रहों को देखते हुए भविष्‍यवाणी की जाए। यूं तो ज्‍योतिष की पुस्‍तकों में शनि के कारण उपस्थित होनेवाली बडे ढैया की ही चर्चा हुई है , जिसके कारण ढाई वर्षों तक लोगों को बडी बडी मुसीबतों का सामना करना पडता है , पर गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष की माने , जिसकी छोटी सी प्रयोगशाला में 40 वर्षों से आसमान में चल रहे ग्रह और उनका पृथ्‍वी पर स्थित जडचेतन पर पडनेवाले प्रभाव के आपसी संबंध का निरंतर अध्‍ययन चल रहा है , तो समय समय पर एक छोटे ढैया का प्रभाव भी जनसामान्‍य पर पडता है। इसके कारण ढाई दिनों तक लोगों को एक जैसी परिस्थितियों , चाहे वह अच्‍छी हो या बुरी , से जूझना पडता है। बडे और छोटे ढैया के बारे में अधिक जानकारी आप इस आलेख में प्राप्‍त कर सकते हैं।

गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष के अनुसार पिछले वर्ष 27 नवम्‍बर 2008 से लेकर 29 नवम्‍बर 2008 तक 4 ग्रहों की एक ही राशि में स्थिति एक छोटे ढैया का फल प्रदान करनेवाली थी। 27 से 29 नवम्‍बर के ग्रहों की इस विशेष स्थिति को देखकर मुझे कुछ खटका तो हुआ था , पर ऐसा योग हर समय बुरा परिणाम ही नहीं देता , किसी न किसी प्रकार की छोटी मोटी समस्‍याओं में भी लोगों को उलझाकर रखता है , यही सोंचते हुए मैने इस तिथि के बारे में थोडे तनाव से भरा यह पोस्‍ट लिखा था , पर उस दिन कोई छोटी मोटी घटना न घटकर मुंबई के ताज होटल में आतंकवादी हमले के रूप में पूरे विश्‍व तक का ध्‍यानाकृष्‍ट करानेवाली भयावह घटना घट गयी । वैसे तो उस वक्‍त इतनी बुरी घटना के बारे में कल्‍पना भी कर पाना हमारे लिए मुश्किल था , पर ढाई दिनों तक आतंकवादियों को खदेडने के लिए सेना द्वारा आपरेशन का चलते रहना इसी ग्रह योग की भयावहता की पुष्टि कर देता है। पूरे ढाई दिन तक सारे भारतवर्ष में लोग टी वी खोलकर बडी बेचैनी से इस आपरेशन को देखने में ही उलझे रहें। इस दिन इतनी बडी घटना घटने के पीछे एक कारण यह भी हो सकता है कि 29 नवम्‍बर को ये चारो ग्रह आसमान में मात्र 4 डिग्री की दूरी पर ही थे , जबकि बाकी समय जब भी यह योग बनता है , तो ये एक राशि में दूर तक यानि 30 डिग्री तक फैले होते हैं , एक महीने बाद दिसम्‍बर के अंत में भी जब यह योग बना , तो ये चारो ग्रह 26 डिग्री तक फैले हुए थे , इसलिए इस दिन कोई बुरी घटना नहीं घटी। ग्रहों की इस स्थिति को सिर्फ हमारी ज्‍योतिष की पुस्‍तकों में ही नहीं देखा जा सकता , इस बात की गणना खगोलशास्‍त्र से जुडे भी कोई वैज्ञानिक कर सकते हैं।


2009 में भी 25 जनवरी से 27 जनवरी तक छोटे ढैया का एक ऐसा ही योग बन रहा है, पर यहां मंगल न होकर दूसरे चार ग्रह सूर्य , चंद्र , बुध और बृहस्‍पति होंगे। वैसे मंगल भी अधिक दूरी पर स्थित न होकर उससे सटी राशि की सीमा पर ही स्थित होगा। इस तरह मात्र 13.14 डिग्री के फैलाव में पांच ग्रहों का आ जाना भी भारत के साथ ही साथ संपूर्ण विश्‍व के लिए बहुत शुभ संकेत तो नहीं है। पूरे विश्‍व में दोनो तीनो ही दिन सुबह के 5 बजे से 8 बजे तक तथा दोपहर के 1 बजे से 5 बजे दिन तक इन ग्रहों के विशेष प्रभाव को महसूस किया जा सकता है। आइए , हम सब मिलकर ईश्‍वर से प्रार्थना करें कि आनेवाली इस छोटे ढैया में कोई बुरी घटना न हो और जनसामान्‍य निम्‍न प्रकार की छोटी मोटी समस्‍या में ही उलझे रहें , जैसे.........



काम में बेवजह देरी होने से झुंझलाहट।
किसी वाहन का अचानक खराब हो जाना।
किसी वाहन के लिए लम्बा इंतजार करना।
महत्वपूर्ण कार्य के समय बिजली का चले जाना।
किसी कार्य में अनिश्चितता की स्थिति बन जाना।
किसी काम के लिए लंबे क्यू में लगने की बाध्यता।
अचानक कार्य की भीड़ से अस्तव्यस्तता महसूस करना।
बच्चों की छोटी गल्ती में भी बात का बतंगड़ बन जाना।
बाजार करने या किसी प्रकार के निर्णय लेने के बाद पश्चाताप।
सामनेवाले से विचार के तालमेल के अभाव से निष्कर्ष पर न पहुंच पाना।

सोमवार, 19 जनवरी 2009

किशोरावस्‍था में आप संतुलित व्‍यक्तित्‍व वाले थे या नहीं ? ( Astrology )

मेरे पिछले आलेख ( इस और इस ) में आपने पढा कि ग्रहों के प्रभाव से किस प्रकार कुछ खास तिथियों और उसके आसपास जन्‍म लेनेवाले बच्‍चे बहिर्मुखी और अंतर्मुखी स्‍वभाव के हो जाते हैं। पर इसके अलावे कभी कभी कुछ ग्रहों की खास स्थिति ऐसी बन जाती है कि उस दिन जन्‍म लेनेवाले सभी बच्‍चों की जन्‍मकुडली में उनके संतुलित होने का योग उत्‍पन्‍न हो जाता है। इस योग के कारण ही कुछ किशोरों के समक्ष किशोरावस्‍था में यानि 12 वर्ष की उम्र से 24 वर्ष की उम्र तक , खासकर 12 वर्ष से 18 वर्ष की उम्र तक की पूरी परिस्थितियां महत्‍वपूर्ण बनी होती हैं । विद्यार्थी जीवन में ये बड़ा स्तर प्राप्त करते हैं। ये 12 वर्ष से 24 वर्ष की उम्र में अपने बौद्धिक विकास , सूझ-बूझ , शिक्षा-दीक्षा के प्रति तथा अन्‍य उत्तरदायित्व को गंभीरतापूर्वक लेते हैं। नियमित रुप से बौद्धिक विकास के कार्यक्रम को अंजाम देने तथा संबंधित चुनौतियों को हल करने में इनकी दिलचस्पी होती है। ये अपनी महत्वाकांक्षा , कार्यक्षमता , स्तर और मौलिकता को बनाए रखने में काफी जागरुक होते हैं। किशोरावस्था में बालकों के बीच आकर्षक व्यक्तित्व और आदर्श के रुप में चर्चित होते हैं। ये विद्याध्ययन काल में इस ढंग से विद्या अर्जित करने के पक्ष में होते हैं , ताकि संबंधित विषय पर उसका पूर्ण नियंत्रण बना रहे। परंतु महत्‍वपूर्ण होने के बावजूद इनमें से 50 प्रतिशत ही सफल और बाकी 50 प्रतिशत असफल रहते हैं। 18 वर्ष की उम्र तक यह स्‍वभाव चरम सीमा तक देखा जा सकता है , पर उसके बाद धीरे धीरे अधिकांश किशोरों में यह स्‍वभाव परिवर्तित होने लगता है , जबकि कुछ किशोरों में यह प्रवृत्ति बढ भी जाती है ।


गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष द्वारा विकसित किए गए एक विशेष सिद्धांत के आधार पर 1950 से 1994 तक की खास खास तिथियों को पाठको के लिए प्रस्‍तुत किया जा रहा है ,जिस दिन जन्‍म लेने वाले न सिर्फ सारे लोगों में किशोरावस्‍था में ही संतुलित व्‍यक्तित्‍व शत प्रतिशत दिखाई पडा रहा होगा , बल्कि उसके दस दिन पहले से लेकर दस दिन बाद तक जन्‍म लेनेवालों में भी ये गुण बडे प्रतिशत में अवश्‍य देखने को मिलेगा। इन तिथियों से जितने ही दूर लोगों का जन्‍म हुआ होगा , उनमें संतुलित होने का स्‍वभाव क्रमश: कम होता चला जाएगा। ये तिथियां निम्‍न हैं………


1950 में 12 फरवरी , 27 अप्रैल , 12 जून , 20 अगस्‍त और 11 दिसम्‍बर ,
1951 में 25 जनवरी , 2 अप्रैल , 23 मई , 31 जुलाई , 20 सितम्‍बर और 28 नवम्‍बर,
1952 में 8 जनवरी , 17 मार्च , 2 मई , 13 जुलाई , 3 सितम्‍बर , 7 नवम्‍बर और 30 दिसम्‍बर,
1953 में 25 फरवरी , 17 अप्रैल , 26 जून , 17 अगस्‍त , 19 अक्‍तूबर , 5 दिसम्‍बर,
1954 में 10 फरवरी , 28 मार्च , 11 जून , 29 जुलाई , 7 अक्‍तूबर , 17 नवम्‍बर ,
1955 में 27 जनवरी , 11 मार्च 21 मई , 9 जुलाई , 16 सितम्‍बर , 29 अक्‍तूबर,
1956 में 10 जनवरी , 22 फरवरी , 1 मई , 21 जून , 29 अगस्‍त , 15 अक्‍तूबर , 24 दिसम्‍बर ,
1958 में 28 मार्च , 16 मई , 25 जुलाई , 10 सितम्‍बर , 18 नवम्‍बर , 31 दिसम्‍बर ,
1959 में 9 मार्च , 28 अप्रैल , 6 जुलाई , 28 अगस्‍त , 3 नवम्‍बर , 16 दिसम्‍बर ,
1960 में 23 फरवरी , 8 अप्रैल , 18 जून , 8 अगसत , 13 अक्‍तूबर , 26 नवम्‍बर,
1961 में 6 फरवरी , 22 मार्च , 31 मई , 20 जुलाई , 25 सितम्‍बर , 11 नवम्‍बर ,
1962 में 19 जनवरी , 12 मई , 2 जुलाई , 7 सितम्‍बर , 26 अक्‍तूबर ,
1963 में 2 जनवरी , 18 फरवरी , 25 अप्रैल , 15 जून , 21 अगस्‍त , 7 अक्‍तूबर , 18 दिसम्‍बर,
1964 में 27 जनवरी , 6 अप्रैल , 26 मई , 5 अगस्‍त , 18 सितम्‍बर , 27 नवम्‍बर,
1965 में 16 जुलाई , 3 सितम्‍बर , 11 नवम्‍बर , 25 दिसम्‍बर ,
1966 में 1 मार्च 20 अप्रैल , 30 जून , 18 अगस्‍त , 23 अक्‍तूबर , 6 दिसम्‍बर,
1967 में 16 फरवरी , 3 अप्रैल , 12 जून , 31 जुलाई , 7 अक्‍तूबर , 20 नवम्‍बर,
1968 में 30 जनवरी , 12 मार्च , 21 मई , 14 जुलाई , 17 सितम्‍बर , 4 नवम्‍बर ,
1969 में 11 जनवरी , 25 फरवरी , 24 जून , 31 अगस्‍त , 17 अक्‍तूबर ,
1970 में 8 फरवरी , 17 अप्रैल , 5 जून , 15 अगस्‍त , 25 सितम्‍बर , 11 दिसम्‍बर,
1971 में 19 जनवरी , 31 मार्च , 18 मई , 26 जुलाई 13 सितम्‍बर , 23 नवम्‍बर ,
1972 में 5 जनवरी , 13 मार्च , 30 अप्रैल , 9 जुलाई , 29 अगस्‍त , 4 नवम्‍बर , 16 दिसम्‍बर ,
1973 में 24 फरवरी , 10 अप्रैल , 21 जून , 11 अगस्‍त , 14 अक्‍तूबर , 29 नवम्‍बर ,
1974 में 6 फरवरी , 24 मार्च , 2 जून , 26 जुलाई , 29 सितम्‍बर , 12 नवम्‍बर ,
1975 में 22 जनवरी , 7 मार्च , 16 मई , 6 जुलाई , 11 सितम्‍बर , 25 अक्‍तूबर ,
1976 में 3 जनवरी , 19 फरवरी , 26 अप्रैल , 17 जून , 23 अगस्‍त , 9 अक्‍तूबर,
1977 में 1 फरवरी , 8 अप्रैल , 30 मई , 5 अगस्‍त , 24 सितम्‍बर , 3 दिसम्‍बर
1978 में 23 मार्च , 11 मई , 20 जुलाई , 6 सितम्‍बर , 13 नवम्‍बर , 24 दिसम्‍बर ,
1979 में 5 मार्च , 23 अप्रैल , 1 जुलाई , 21 अगस्‍त , 29 अक्‍तूबर , 8 दिसम्‍बर ,
1980 में 16 फरवरी , 2 अप्रैल , 13 जून , 3 अगस्‍त , 8 अक्‍तूबर , 23 नवम्‍बर
1981 में 1 फरवरी , 16 मार्च , 25 मई , 15 जुलाई , 22 सितम्‍बर , 5 नवम्‍बर ,
1982 में 15 जनवरी , 26 फरवरी , 7 मई , 26 जून , 4 सितम्‍बर , 19 अक्‍तूबर,
1983 में 1 जनवरी , 12 फरवरी , 20 अप्रैल , 10 जून , 18 अगस्‍त , 5 अक्‍तूबर , 13 दिसम्‍बर,
1984 में 23 जनवरी , 30 मार्च , 23 मई , 30 जुलाई , 15 सितम्‍बर , 25 नवम्‍बर,
1985 में 4 जनवरी , 15 मार्च , 3 मई , 11 जुलाई , 29 अगस्‍त , 6 नवम्‍बर , 18 दिसम्‍बर,
1986 में 28 फरवरी , 15 अप्रैल , 22 जून , 15 अगस्‍त , 22 अकतूबर , 2 दिसम्‍बर,
1987 में 10 फरवरी , 28 मार्च , 6 जून , 26 जुलाई , 2 अक्‍तूबर , 13 नवम्‍बर,
1988 में 25 जनवरी , 6 मार्च , 17 मई , 7 जुलाई , 14 सितम्‍बर , 30 अक्‍तूबर,
1989 में 7 जनवरी , 18 फरवरी , 30 अप्रैल , 19 जून , 28 अगस्‍त , 13 अक्‍तूबर , 23 दिसम्‍बर,
1990 में 2 फरवरी , 12 अप्रैल , 2 जून , 10 अगस्‍त , 25 सितम्‍बर , 5 दिसम्‍बर , 15 जनवरी ,
1991 में 26 मार्च , 14 मई , 23 जुलाई , 11 सितम्‍बर , 18 नवम्‍बर , 28 दिसम्‍बर,
1992 में 8 मार्च , 24 अप्रैल , 3 जुलाई , 22 अगस्‍त , 29 अक्‍तूबर , 13 दिसम्‍बर,
1993 में 13 फरवरी , 7 अप्रैल , 16 जून , 6 अगस्‍त , 12 अक्‍तूबर, 24 नवम्‍बर,
1994 में 1 फरवरी , 18 मार्च , 28 मई , 22 जुलाई , 25 सितम्‍बर , 8 नवम्‍बर,


उपरोक्‍त लोगों में से जहां 1984 से पहले जन्‍म लेनेवालों में अब ऐसा स्‍वभाव बहुत कम (क्‍योंकि ये 24 वर्ष की उम्र व्‍यतीत कर चुके) और 1990 के पहले जन्‍म लेनेवालों में धीरे धीरे कम हो रहा होगा (क्‍योंकि ये 18 वर्ष की उम्र व्‍यतीत कर चुके) , वहीं 1990 में जन्‍म लेनेवाले सभी‍ किशोरों में अभी ये स्‍वभाव अपनी चरम सीमा पर दिखाई देगा(क्‍योंकि ये 18 वर्ष की उम्र के हैं)। 1991 से लेकर 1994 तक वालों में उपरोक्‍त स्‍वभाव धीरे धीरे बढता हुआ दिखाई पडेगा (क्‍योंकि ये 18 वर्ष से कम उम्र के हैं)।


पाठको से निवेदन है कि वे इस लेख को मात्र एक आलेख के रूप में न लेकर गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष के द्वारा किए जानेवाले सर्वे के रूप में लेंगे और अपने अपने मित्रों और परिवार के अन्‍य सदस्‍यों की जन्‍मतिथि को देखते हुए हमारे परिणामों के साथ मिलाकर हमें सूचना अवश्‍य देंगे। इसके लिए ‘गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिषीय अनुसंधान केन्‍द्र’ उनका आभारी रहेगा।