मंगलवार, 21 अप्रैल 2009

भारतीय अंतरिक्ष के इस कार्यक्रम की वजह शुक्र चंद्र युति ही तो नहीं

25 फरवरी 2009 को मैने एक पोस्‍ट ’27 और 28 फरवरी को आसमान में एक अनोखे दृश्‍य का नजारा लें’ किया था , जिसमें शुक्र और चंद्र की युति को एक चित्र के साथ समझाया गया था। जिन्‍होने भी आसमान में उस दृश्‍य को देखा , उन्‍हें अच्‍छा लगा तथा जिन्‍होने नहीं देखा , वे अफसोस करते रह गए थे। उनके लिए एक खुशखबरी है कि वे चाहे तो अब फिर से वैसे ही दृश्‍य को देख सकते हैं। 23 और 24 अप्रैल को पुन: शुक्र और चंद्र की ऐसी ही स्थिति बननेवाली है , हालांकि इसे दोनो ही दिन शाम में नही , सुबह 4 – 5 बजे ही देखा जा सकता है । पिछली बार जैसा दृश्‍य पश्चिमी क्षितिज पर दिखाई पडा था , ठीक वैसा ही दृश्‍य इसबार पूर्वी क्षितिज पर दिखाई देगा। बिल्‍कुल वैसा ही चांद और वैसा ही शुक्र। हालांकि दो दिन पहले चंद्र और बृहस्‍पति की युति से उतना सुंदर दृश्‍य नहीं दिखाई पडा। मेरे ख्‍याल से शाम की तुलना में भोर को दिखाई पडनेवाला चंद्र शुक्र युति कुछ हल्‍की चमक ही दिखाएगा , पर लोग फिर भी इसका आनंद ले सकते हैं।


पिछली बार के शुक्र चंद्र युति के जनसामान्‍य पर पडनेवाले प्रभाव के बारे में मैने लिखा था कि ‘जनसामान्‍य तन मन या धन से किसी न किसी प्रकार के खास सुखदायक या दुखदायक कार्यों में उलझे रहेंगे , पर सबसे अधिक प्रभाव सरकारी कर्मचारियों पर पड सकता है यानि उनके लिए खुशी की कोई खबर आ सकती है। दूसरा अंतरिक्ष से संबंधित कोई विशेष कार्यक्रम की संभावना बनती दिखाई दे सकती है।‘ और इसे संयोग भी माना जा सकता है कि 26 फरवरी के शाम को ही सरकारी कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्‍ते की घोषणा हो गयी थी। इस बार भी इसके ठीक दो दिन पहले भारतीय अंतरिक्ष के एक महत्‍वपूर्ण कार्यक्रम को अंजाम दिया गया और अनुसंधान संगठन (इसरो) के रॉकेट पीएसएलवी-सी12 ने देश के पहले जासूसी उपग्रह राडार इमेजिंग सैटेलाइट (रिसैट-2) को धरती की कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया। अंतरिक्ष से संबंधित इस कार्यक्रम से मेरी भविष्‍यवाणी के सही होने को क्‍या इस बार भी आप संयोग ही मानेंगे ?