मंगलवार, 30 जून 2009

नमस्‍कार जी , दोनो हाथों में लड्डू रखते हो

पिछले पोस्‍ट में की गयी भविष्‍यवाणी के अनुरूप ही ठीक 29 जून को लगभग पूरे भारतवर्ष में आसमान मानसून के बादलों से भर गया और यत्र तत्र बारिश होने से तापमान में बडी गिरावट आयी और मौसम खुशगवार हो गया। इसके लिए मुझे बधाई भरे ईमेल भी प्राप्‍त हुए , किन्‍ही को मेरी भविष्‍यवाणियां बहुत कुछ सोंचने को मजबूर करती हैं , तो कोई मेरी प्रतिभा से आश्‍चर्यित भी हैं। पर देखा जाए तो इतना मान प्राप्‍त करने का मेरा कोई हक नहीं । यह हक उस व्‍यक्ति का है , जिसने इस रहस्‍य को समझने के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया और 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' नाम की एक नई विधा विकसित की।

पर आज का पोस्‍ट लिखने का मेरा उद्देश्‍य एक दूसरे मेल का उत्‍तर देना है , जो मुझे पिछला पोस्‍ट लिखने के दो चार दिन बाद मिली .....


"Namaskar ji
Dono hatho mein laddu rakhte ho.
Ho bhi Sakti h aur nahi bhi
Hogi to khub hogi
nahi hue to bhayankar sathiti hogi
Eska kya matlab lagaya jai
Grah swam badal jayenge ya .............
Ab aapke baat ka kya arth samjha jaye ................
Janab jawab jarur dena "


ऐसे प्रश्‍न सिर्फ इन्‍हीं पाठक के दिमाग में ही आए होंगे , ऐसी बात नहीं है। ऐसे प्रश्‍न बहुत से पाठकों के दिमाग में आते होंगे। इसलिए ही मै जवाब देना आवश्‍यक समझ रही हूं। पाठको के प्रश्‍नों का जवाब देने के कारण मुझे प्रतिक्रियावादी समझने की भूल ना करें। मेरा उदृदेश्‍य मात्र पाठकों की जिज्ञासा को समाप्‍त करना है।


वास्‍तव में पाठकों से निवेदन है कि वे 'परंपरागत ज्‍योतिष' और 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' को एक ही नजरिए से देखने की भूल न करें , क्‍योंकि इनके मध्‍य कुछ सैद्धांतिक मतभेद हैं । भविष्‍यवाणी करने के वक्‍त 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' आसमान के ग्रहों का पृथ्‍वी पर प्रत्‍यक्ष संबंध स्‍थापित करते हुए इसके प्रभाव को महसूस आया हैं , इसलिए हमारी भविष्‍यवाणियां भले ही सांकेतिक , पर तिथियुक्‍त होती हैं । पिछली पोस्‍ट में यह लिखा जाना कि 29 जून से 5 जुलाई के मध्‍य बारिश का महत्‍वपूर्ण योग है , बारिश होनी चाहिए , पर फिर भी यदि बारिश्‍ा नहीं हो तो स्थिति भयावह होगी ही , यह कहना वैसे ही सही है , जैसे दो दिनों तक पैरासेटामोल और एंटीबायटिक खिलाने के बाद पूरी उम्‍मीद के बावजूद भी मरीज का बुखार न उतरे तो स्थिति की भयावहता को समझते हुए डाक्‍टर कई प्रकार के टेस्‍ट लिखते है। इसका यह मतलब नहीं कि पैरासेटामोल और एंटीबायटिक का कोई असर ही नहीं है।