शुक्रवार, 31 जुलाई 2009

आश्‍चर्यजनक है न .... एक हिन्‍दी पोस्‍ट पर 173 टिप्‍पणियां !!!!!!!!!

क्‍या आप विश्‍वास कर सकते हैं कि एक हिन्‍दी पोस्‍ट पर 173 टिप्‍पणियां आ सकती हैं । वैसे तो विश्‍वास ही नहीं होगा , यदि कर भी लें तो आप सभी यही सोचेंगे कि जरूर वह पोस्‍ट किसी स्‍टार या बहुत विशिष्‍ट ब्‍लागर द्वारा ही लिखी गयी होगी । इधर उधर के कुछ पोस्‍टों को देखते वक्‍त अचानक यह पोस्‍ट मुझे कल शाम देखने को मिली और जब इसकी टिप्‍पणी पर नजर पडी तो आंखे फटी की फटी रह गयी । वैसे ब्‍लागर तो विशिष्‍ट नहीं , पर ब्‍लाग का विषय अवश्‍य विशिष्‍ट है । महत्‍व के ख्‍याल से न भी हो , उत्‍सुकता के ख्‍याल से इस विषय को तो विशिष्‍ट की श्रेणी मिल जाती है। अब आप भीइस पोस्‍टपर नजर डाल ही लें।

अचानक कल शाम को इस पोस्‍ट की इतनी टिप्‍पणियों पर मेरा ध्‍यान गया। रातभर गहन चिंतन के बाद भी मैं किसी एक पोस्‍ट पर अन्‍य पोस्‍टों की तुलना में इतने कमेंट्स आने का कोई कारण नहीं समझ सकी थी । पर सुबह होते ही काजल कुमार जी नेअपनी पोस्‍टके द्वारा मुझे इसका कारण समझा दिया । इस पोस्‍ट और मेरे पोस्‍ट की टिप्‍प्‍णियों के आंकडे की समानता ने मुझे और अधिक अचरज में डाल दिया ,क्‍यूंकि मुझे नहीं लगता कि काजल कुमार जी ने मेरी उस पोस्‍ट को विजिट किया होगा। वैसे आज ही तस्‍लीम की ओर से दो टिप्‍पणियां आ जाने से यह आंकडा बढकर 175 हो गया है । मुझे तो बिल्‍कुल भी याद नहीं कि मैने उस पहलवान को कब भविष्‍यवाणी दी थी , पर शायद चुपके चुपके काजल जी ने न सिर्फ सुन ही लिया था , वरन् पहलवान द्वारा मुझे दौडाए जाते भी देख लिया था । मुझे तो आज मालूम हुआ कि मैं जो भविष्‍यवाणियां दूसरों के लिए करूंगी , वे मुझतक पहुंच जाएंगी। यदि इस बात की पहले से जानकारी होती तो दूसरों के लिए इतनी अच्‍छी अच्‍छी भविष्‍यवाणियां करती कि पूछिए मत। सब भविष्‍यवाणियां मेरे लिए सही होती और आज मै हर सुख सुविधा से लैस होती।

उपरोक्‍त पोस्‍ट के बहुत दिन हो गए। मेरा वह पोस्‍ट अंधविश्‍वास को बढावा देनेवाला नहीं , उसमें साफ तौर पर जन्‍मकुंडली से अधिक महत्‍व कर्मकुंडली को दिया गया है। फिर भी प्रतिदिन उस पोस्‍ट पर अपने भविष्‍य को पूछते हुए पाठकों की दो चार टिप्‍पणियां दर्ज हो जाया करती हैं। इतने सारे पाठक अपने भविष्‍य को जानने के उत्‍सुक रहते हैं , पर दुख की बात है कि मैं मुश्किल से कुछ पाठकों को ही जवाब दे पाती हूं । लोगों का मानना है कि ज्‍योतिष जैसे विष्‍ाय पर या ग्रह नक्षत्रों पर विश्‍वास करनेवाले आलसी , निकम्‍मे और निठल्‍ले हुआ करते हैं। पर मैं नहीं मानती , मैं मानती हूं कि एक जिम्‍मेदार व्‍यक्ति को ही भविष्‍य की चिंता होती है। हमारी कामवाली का युवा बेटा अपनी मां से जिद करके मोबाइल खरीदवाता है , अपने पिता के द्वारा खरीदे गए सेकंड हैंड मोटरसाइकिल पर बैठकर घूमता फिरता है। उसे भविष्‍य की कोई चिंता नहीं , क्‍यूंकि न सिर्फ तीन वक्‍त का खाना ही , वरन् भविष्‍य की छोटी मोटी हर जरूरत को वह दस बारह घरों में चौका बरतन करनेवाली अपनी मां या बीबी को दो तमाचे जडकर पूरा कर सकता है।

सफलता के लिहाज से इस दुनिया के लोगों को कई भागों में विभक्‍त किया जा सकता है। कुछ वैसे हैं , जिन्‍हें अपने जीवन में माहौल भी अच्‍छा नहीं मिला , वे काम भी नहीं करते या करना चाहते , इस‍िलए उन्‍हें भविष्‍य की कोई चिंता नहीं होती , वे अपने इर्द गिर्द के माहौल के अनुसार अपने और अपने परिवार के भविष्‍य को एक सीमा के अंदर ही देख पाने से निश्चिंत रहते हैं। दूसरे वैसे , जिन्‍हे अपने जीवन में माहौल भी मिला , काम भी कर पा रहे हैं और उसके अनुसार सफलता के पथ पर अग्रसर भी हैं , जीवन में भाग्‍य की किसी भूमिका को वे भी स्‍वीकार नहीं कर पाते , उन्‍हें अपना और अपने परिवार का भविष्‍य बहुत ही उज्‍जवल नजर आता है। पर तीसरे वैसे लोग हैं , जो महत्‍वाकांक्षी बने होने और अपने साधन और मेहनत का भरपूर उपयोग करने के बावजूद भी कई कई वर्षों से असफल हैं ,चाहे समस्‍या कोई एक ही क्‍यूं न हो उसके समाधान का कोई रास्‍ता उन्‍हें नजर नहीं आता । वैसी स्थिति में किसी अज्ञात शक्ति की ओर उनका रूझान स्‍वाभाविक है और ऐसे लोगों को परामर्श देना हमारा पहला कर्तब्‍य है। पर मेरे पास जितना समय होता है , उससे कहीं अधिक लोग अपने बारे में जानने को उत्‍सुक हैं , इसलिए जवाब दे पाने में दिक्‍कत होती आयी है। प्रकृति के किसी नियम को बदल पाना तो मेरे लिए संभव नहीं , पर उसकी जानकारी से पाठकों को कुछ सलाह तो दी ही जा सकती है। इस मामले पर थोडी भी गंभीर रहूं , तो चाहे कितनी भी व्‍यस्‍तता रहे , पाठकों को जवाब तो दी ही जा सकती है , दो तीन जन्‍मकुंडली का भी अध्‍ययन कर प्रतिदिन उतने पाठकों को भी जवाब दे दिया करूं तो कुछ बात तो बन ही जाएगी । तो फिर आज से शुरू कर ही देती हूं , देर किस बात की ?

बुधवार, 29 जुलाई 2009

उडनतश्‍तरी जी .. ईश्‍वर करे , आप जीनियसों के भी जीनियस बनें , पर ....

समीर लालजी का ब्‍लाग खोलिए और बगलपट्टी में लगे सम्‍मानों को देखते जाइए। बेस्‍ट इंडीब्‍लाग सम्‍मान , तरकश स्‍वर्णकलम सम्‍मान और विश्‍व के प्रथम ब्‍लागिया सम्‍मेलन का प्रशस्ति पत्र तो मौजूद है ही , ताउ शनीचरी पहेली के साथ ही साथ ताउजी द्वारा प्रथम मेगा सम्‍मान भी इन्‍हें दिया गया है। इसके अलावे ताउजी द्वारा इन्‍हें मि जीनियस भी घोषित किया जा चुका है। फिर भी इनकी महत्‍वाकांक्षा तो देखिए , कोई पहेली ब्‍लागवाणी में पहुंचने में देर कर सकती है , समीरलाल जी द्वारा जवाब पाने में उसे देर नहीं होती। जबतक दूसरे लोग उस पोस्‍ट को खोलेंगे , पहेली का जवाब सोचेंगे , पहेली पूछनेवालों को उनका जवाब मिल जाता है।


मुझे लगता है , इस दुनिया में ही ये हमें नहीं पछाड रहे , यह क्रम तो बहुत पहले से ही बना हुआ है। इस दुनिया में आने से पहले ही ईश्‍वर जब स्‍वास्‍थ्‍य, गुण , ज्ञान , दाम्‍पत्‍य , पुत्र , माता , पिता , यार , दोस्‍त , वाहन .. जिस वस्‍तु का भी बंटवारा कर रहे होंगे , इन्‍होने सबसे पहले पहुंचकर सर्वोत्‍कृष्‍ट चुन लिया होगा । पर यह भी बडे ताज्‍जुब की बात है, क्‍यूंकि इतनी तेजी से ये हर जगह पर मौजूद कैसे रहे होंगे। जहां तक मै अनुमान लगा पा रही हूं , सबसे पहले जहां अन्‍य लोग साइकिल , बैलगाडी , स्‍कूटर , मोटरगाडी , हेलीकाप्‍टर तक ले रहे होंगे , इन्‍होने अपने वाहन के रूप में उडनतश्‍तरी ही मांग ली होगी । फिर हर जगह के लिए इनकी यात्रा आसान हो गयी होगी। जहां ईश्‍वर कुछ बांटना शुरू करते , ये सबसे पहले पहुंच जाते। तभी तो भाग्‍य में ही हर प्रकार का सुख लेकर इस दुनिया में आ गए।


इस दुनिया में आने के बाद भी इनकी महत्‍वाकांक्षा देखिए। ये उडनतश्‍तरी जैसे वाहन का ही कमाल है कि ये तन , मन और बुद्धि से इतनी फुर्ती दिखाकर अपनी महत्‍वाकांक्षा को पूरी भी कर पाते हैं । इसी से इन्‍होने हर जगह अपनी बुद्धि का लोहा मनवाया , अच्‍छे रिजल्‍ट किए , मनपसंद नौकरी पायी , विदेश जाकर बसे। घर गृहस्‍थी की जिम्‍मेदारियों को बखूबी संभाला । फिर अपने लेखन से हिन्‍दी ब्‍लाग जगत में भी छा गए , इतनी सफलताएं इसकी गवाह है। यहां टिप्‍पणी-सम्राट से नवाजे जाने के बाद अब इन्‍हें पहेली-सम्राट भी घोषित किया जाने लगा है।


बहुत दिनो से मैने विभिन्‍न ब्‍लागरों द्वारा पहेलियां पूछते हुए देखा , पर इसे बूझने और उसके क्रम में आए टिप्‍पणियों को पढना इतना मजेदार होगा , यह मुझे काफी देर से समझ में आया। पहेली बूझने में पूरी ताकत झोंक देने की शुरूआत मैने राज भाटिया जी के ब्‍लाग की पहेलियों से की और उसके बाद पहेली बूझने में मेरा ध्‍यान अभी भी बना रहता है। लेकिन अधिकांश पहेलियां तो मैं बूझ ही नहीं पाती और जो बूझ पाती हूं , उसका जवाब देने के बाद भी पीछे रह जाती हूं। मैं समझती हूं , शायद सबका यही हाल होगा। औरों से तो प्रतियोगिता में जीत संभव भी है , पर उडन तश्‍तरी जी से जीत पाना संभव नहीं हो पाता। इनकी उडनतश्‍तरी हमेशा तैयार रहती है , जैसे ही ब्‍लागवाणी में पहेली आयी नहीं कि वहां पहुंचकर तुरंत एक टिप्‍पणी छोड देती है। अब हमारे पास न तो उडनतश्‍तरी जैसा वाहन है और न ही उन की तरह जीनियस दिमाग । तो हम जैसे अल्‍पज्ञानियों का हारना निश्चित ही समझिए ।


ब्‍लागवाणी में आए पोस्‍टों के माध्‍यम से पता चला कि आज समीरलालजी का जन्‍मदिन है। मेरी ओर से उन्‍हें जन्‍मदिन की बहुत बहुत बधाई और शुभकामनाएं । इस जन्‍मदिन तक तो वे मि जीनियस घोषित किए ही जा चुके हैं । ईश्‍वर करे , अगले जन्‍मदिन तक वे जीनियसों के जीनियस घोषित कर दिए जाएं। पर इसके लिए एक काम तो उन्‍हें करना ही होगा , वह यह कि अन्‍य ब्‍लागर बंधुओं को भी जीनियस बनने का मौका दें । क्‍यूंकि वे मौका नहीं देंगे , तो उनकी फुर्ती के आगे शायद ही कोई जीनियस बन पाए। वैसे आज ही चिट्ठा चर्चा में यह भी पढने को मिला कि कुछ लोगों ने इस पर मांग की है कि हर प्रतियोगिता में दो पहले इनाम रखे जाने चाहिये। एक समीरलाल जी के लिये और दूसरा किसी (और)जेनुइन कंडीडेट के लिये। यह भी हो जाए तो अच्‍छी बात होगी , अगले वर्ष तक कुछ जीनियस बन जाएंगे , तो उनकी जीनियसों के भी जीनियस बनने की पूरी संभावना बन जाएगी। एक बार फिर से उनको जन्‍मदिन की हार्दिक बधाई !!

सोमवार, 27 जुलाई 2009

5-6 वर्ष की उम्र के बच्‍चों पर चंद्रमा की शक्ति का सर्वाधिक मनोवैज्ञानिक प्रभाव

पिछले आलेख में आपने चंद्रमा के मनुष्‍य पर मनोवैज्ञानिक प्रभाव के बारे में पढा , अगले छह महीने तक आप सब उसपर नजर रखेंगे , तो स्‍पष्‍ट तौर पर उसके प्रभाव को महसूस कर सकेंगे। वैसे चंद्रमा का प्रभाव 12 वर्ष तक के बच्‍चों पर , खासकर दो से पांच छह वर्ष की उम्र तक के बच्‍चों पर सर्वाधिक पडता है ,क्‍यूंकि चंद्रमा मन का प्रतीक ग्रह है और छोटे बच्‍चों के जीवन में मन के सिवा और किसी बात का कोई महत्‍व नहीं है।

आप अपने घर में , अडोस पडोस में या रिश्‍तेदारी में इन तिथियों के आसपास जन्‍म लेनेवाले बच्‍चों पर गौर करे .....


1. 2004 में 8 जनवरी , 6 फरवरी , 7 मार्च , 5 अप्रैल , 5 मई , 3 जून , 2 जुलाई , 31 जुलाई , 30 अगस्‍त , 28 सितम्‍बर , 28 अक्‍तूबर , 27 नवम्‍बर , 26 दिसम्‍बर।
2. 2005 में 25 जनवरी , 24 फरवरी , 26 मार्च , 24 अप्रैल , 24 मई , 22 जून , 21 जुलाई , 20 अगस्‍त , 18 सितम्‍बर , 17 अक्‍तूबर , 16 नवम्‍बर , 16 दिसम्‍बर।
3. 2006 में 14 जनवरी , 13 फरवरी , 14 मार्च , 13 अप्रैल , 13 मई , 11 जून , 11 जुलाई , 9 अगस्‍त , 7 सितम्‍बर , 7 अक्‍तूबर , 5 नवम्‍बर , 5 दिसम्‍बर ।
4. 2007 में 3 जनवरी , 2 फरवरी , 4 मार्च , 2 अप्रैल , 2 मई , 1 जून , 30 जून ,, 30 जुलाई , 28 अगस्‍त , 26 सितम्‍बर , 26 अक्‍तूबर , 24 नवम्‍बर , 24 दिसम्‍बर।

उपरोक्‍त तिथियां पूर्णिमा की हैं , इसलिए इसके आसपास जन्‍म लेनेवाले बच्‍चों को पालन पोषण के लिए बहुत ही स्‍वच्‍छंद वातावरण मिल रहा है , प्रचुर प्‍यार मिलने से और इनकी सभी मांग को पूरा कर दिए जाने से ये काफी हद तक जिद्दी स्‍वभाव के हो गए हैं। ये बहुत चंचल हैं , जिसके कारण इन्‍हें हमेशा चोट लगती है। इनके मन में कोई बात आ गयी तो उसे सुनाए बिना सामनेवाले को चैन लेने नहीं दे सकते। डांट मार की तो इन्‍हें कोई चिंता नहीं होती। मनोवैज्ञानिक रूप से बहुत ही मजबूत होते हैं और इस शक्ति का प्रयोग अपनी मांगे पूरी करने में करते हैं । ये बेवजह रोकर भी सामनेवालों को परेशान कर अपनी जिद पूरी कर लेते हैं।


अब आप अपने घर में , अडोस पडोस में या रिश्‍तेदारी में इन तिथियों के आसपास जन्‍म लेनेवाले बच्‍चों पर गौर करे .....


1. 2004 में 22 जनवरी , 20 फरवरी , 21 मार्च , 19 अप्रैल , 19 मई , 18 जून , 17 जुलाई , 16 अगस्‍त , 14 सितम्‍बर , 14 अक्‍तूबर , 13 नवम्‍बर , 12 दिसम्‍बर ।
2. 2005 में 10 जनवरी , 9 फरवरी , 10 मार्च , 8 अप्रैल , 8 मई , 7 जून , 6 जुलाई , 5 अगस्‍त , 4 सितम्‍बर , 3 अक्‍तूबर , 2 नवम्‍बर , 2 दिसम्‍बर।
3. 2006 में 1 जनवरी , 29 जनवरी , 28 फरवरी , 29 मार्च , 27 अप्रैल , 27 मई , 25 जून , 25 जुलाई , 24 अगस्‍त , 22 सितम्‍बर , 22 अक्‍तूबर , 21 नवम्‍बर , 20 दिसम्‍बर।
4. 2007 में 17जनवरी , 18 फरवरी , 17 मार्च , 18 अप्रैल , 16 मई , 15 जून , 14 जुलाई , 13 अगस्‍त , 11 सितम्‍बर , 11 अक्‍तूबर , 10 नवम्‍बर , 9 दिसम्‍बर।


उपरोक्‍त तिथियां अमावस्‍या की हैं , इस कारण इसके आसपास जन्‍म लेनेवाले बच्‍चे अपने स्‍वास्‍थ्‍य या अन्‍य किसी कमजोरी के कारण शांत शांत रहते हैं , इस कारण इन्‍हें अधिक चोट भी नहीं लगती है। दूसरों की गल्‍ती के कारण कभी कभी इन्‍हें डांट मार पड जाती है। इनके मन के आवेग में ठहराव होता है और अपनी इच्‍छा को भी मार लेते हैं। संकोच के कारण किसी के सामने अपनी बात नहीं रख पाते । कभी कभी ये रूठकर अपना विरोध प्रदर्शित करते हैं। मनोवैज्ञानिक रूप से कमजोर होने के कारण्‍ा डांट या मार के भय से गल्‍ती होने के साथ ही रोना शुरू कर देते है।

अब इन दोनो ही व्‍यवहार वाले बच्‍चों से अलग आप अपने घर में , अडोस पडोस में या रिश्‍तेदारी में इन तिथियों के आसपास जन्‍म लेनेवाले बच्‍चों पर गौर करे .....


1. 2004 में 15 जनवरी , 29 जनवरी , 13 फरवरी , 28 फरवरी , 14 मार्च , 29 मार्च , 12 अप्रैल , 28 अप्रैल , 11 मई , 27 मई , 10 जून , 26 जून , 9 जुलाई 25 जुलाई , 8 अगस्‍त , 23 अगस्‍त , 6 सितम्‍बर , 22 सितम्‍बर , 6 अक्‍तूबर , 21 अक्‍तूबर , 5 नवम्‍बर , 19 नवम्‍बर , 5 दिसम्‍बर , 19 दिसम्‍बर।
2. 2005 में 4 जनवरी , 17 जनवरी , 2 फरवरी , 16 फरवरी , 4 मार्च , 18 मार्च , 2 अप्रैल , 17 अप्रैल , 1 मई , 16 मई , 15 जून , 29 जून , 14 जुलाई , 28 जुलाई , 13 अगस्‍त , 27 अगस्‍त , 11 सितम्‍बर , 25 सितम्‍बर , 11 अक्‍तूबर , 25 अक्‍तूबर , 9 नवम्‍बर , 24 नवम्‍बर , 8 दिसम्‍बर , 24 दिसम्‍बर ।
3. 2006 में 7 जनवरी , 23 जनवरी , 5 फरवरी , 21 फरवरी , 7 मार्च , 23 मार्च , 6 अप्रैल , 21 अप्रैल , 5 मई , 20 मई , 4 जून , 19 जून , 4 जुलाई , 18 जुलाई , 2 अगस्‍त , 16 अगस्‍त , 1 सितम्‍बर , 14 सितम्‍बर , 30 सितम्‍बर , 14 अक्‍तूबर , 30 अक्‍तूबर , 13 नवम्‍बर , 28 नवम्‍बर , 12 दिसम्‍बर , 27 दिसम्‍बर।
4. 2007 में 11 जनवरी , 26 जनवरी , 10 फरवरी , 24 फरवरी , 12 मार्च , 26 मार्च , 10 अप्रैल , 24 अप्रैल , 10 मई , 24 मई , 8 जून , 22 जून , 8 जुलाई , 22 जुलाई , 6 अगस्‍त , 21 अगस्‍त , 4 सितम्‍बर , 19 सितम्‍बर , 3 अक्‍तूबर , 19 अक्‍तूबर , 2 नवम्‍बर , 18 नवम्‍बर , 17 दिसम्‍बर , 31 दिसम्‍बर।


उपरोक्‍त तिथियां अष्‍टमी की हैं , इसलिए इन तिथियों के आसपास जन्‍म लेनेवाले बच्‍चे मनोवैज्ञानिक रूप से काफी संतुलित होते हें। इनका ध्‍यान संकेन्‍द्रण हर जगह बना होता है। कुछ जानने सीखने के लिए भी ये अपने मन को बहुत देर तक एक जगह टिका पाते हैं। सामनेवालों के मूड को समझने की मनोवैज्ञानिक शक्ति भी इनके पास होती है। वातावरण के बदलते ही ये अपनी मन:स्थिति को बदल लेते हैं , इसलिए इन्‍हें जल्‍दी डांट मार नहीं पडती। इनकी बाल लीला सर्वाधिक मनोहारी होती है। कृष्‍ण जी और रामचंद्रजी ने क्रमश: अष्‍टमी और नवमी को जन्‍म लिया था , और यह भी एक कारण हो सकता है कि इनकी अद्भुत बाल लीला का वर्णन हमें पढने को मिलता है।

हमारे अध्‍ययन के अनुसार लगभग 80 प्रतिशत मामलों में बच्‍चों पर चंद्रमा का प्रभाव देखा गया है। 20 प्रतिशत अपवाद अन्‍य ग्रहों के कारण आता है , क्‍यूंकि अन्‍य ग्रह भी लोगों को प्रभावित करते हैं। पर आप अपने अनुभव से हमें अवश्‍य अवगत कराएं , इसे एक तरह का सर्वे ही समझें।