शनिवार, 8 अगस्त 2009

एक वर्ष में 161 पोस्‍टों के 23068 पृष्‍ठ पढे गए , 1911 टिप्‍पणियां मिली

यूं तो वर्डप्रेस पर मैं दो वर्षों से लिख रही हूं , पर कल मेरे इस ब्‍लाग का एक वर्ष पूरा हूआ । इस ब्‍लाग में इस एक वर्ष के दौरान प्रकाशित किए जानेवाले कुछ चुने हुए आलेखों के लिंक ....

फलित ज्योतिषःसांकेतिक विज्ञान


ज्योतिष का समयानुसार बदलाव आवश्यक


विवाह के लिए जन्‍म कुंडली मिलाना आवश्यक नहीं


सिर्फ नाम से ही गत्‍यात्‍मक नहीं है ‘गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष’


काश !! हमारा सपना दिल्‍ली में एक कोठी लेने का ही होता।


टोर्च , घड़ी , कैलेंडर और गत्‍यात्‍मक ज्योतिष


किशोरावस्‍था में आप बहिर्मुखी व्‍यक्तित्‍व वाले थे या नहीं ?


किशोरावस्‍था में आप अंतर्मुखी व्‍यक्तित्‍व वाले थे या नहीं ?


किशोरावस्‍था में आप संतुलित व्‍यक्तित्‍व वाले थे या नहीं ?


मौसम की भविष्‍यवाणी की एक बडी विधा


ज्‍योतिषियों को चुनौती देने से पहले मेरे सुझावों पर भी ध्‍यान दें

गुरुवार, 6 अगस्त 2009

इस ऐतिहासिक समय के आने में बस पांच सात मिनट बाकी रह गए हैं !!!

कोई क्षण किसी खास दृष्टि से कितना महत्‍वपूर्ण बन जाता है , इसकी जानकारी मुझे तब हुई , जब रात में मेरे मोबाइल पर मुझे बेटे का यह संदेश मिला ।

On the 7th August '09 at 12hr 34min 56sec, Time and Date will be 12:34:56 07/08/09.. ie 123456789..!! This will never happen again in your life.. So Pass it On and Let Everyone know..!!

तो आइए , यादगार बनाएं इस समय को , इसका कोई ज्‍योतिषीय प्रभाव नहीं ही है , अंकविज्ञान के हिसाब से भी कोई प्रभाव नहीं होना चाहिए , सिर्फ अनोखा गणित है यहां पर , हमलोग सभी इस समय के साक्षी है और इस समय ईश्‍वर से सबके भले के लिए प्रार्थना कर सकते हैं !!

आस्‍ट्रेलियाई विश्‍वविद्यालय की वेबसाइट पर किसी ब्‍लाग के होने का क्‍या अर्थ है ?

आशीष जी , अनिल कांत जी , पाबला जी और कासिफ जी चर्चा कर चुके हैं कि उनके ब्‍लाग आस्‍ट्रेलियन विश्‍वविद्यालय की ईलर्निंग स्‍टाफ में शामिल है , इस बात पर सबों ने उनको बधाइयां दी। जब मैने गूगल में 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' सर्च किया , तो यह भी मुझे आस्‍ट्रेलियन विश्‍वविद्यालय की ईलर्निंग स्‍टाफ में शामिल मिला , पर मै इसका अर्थ नहीं समझ पायी। यह किस प्रकार की उपलब्धि है , कृपया मुझे समझाने का कष्‍ट करें ।

मंगलवार, 4 अगस्त 2009

विवाह के लिए जन्‍म कुंडली मिलाना आवश्यक नहीं

आए दिन हमारी भेंट ऐसे अभिभावकों से होती है, जो अपने बेटे या बेटी के विवाह न हो पाने से बहुत परेशान हैं। उनकी विवाह योग्य संतानें पढ़ी-लिखी है ,पर पॉच-सात वर्ष से उपयुक्त वर या वधू की तलाश कर रहें हैं ,कहीं भी सफलता हाथ नहीं आ रही है। इसका सबसे बड़ा कारण किसी संतान का मंगली होना है और मंगली पार्टनर न होने से वे कई जगह बात बढ़ा भी नहीं पाते। अगर पार्टनर मंगली मिल भी जाए तो कई जगहों पर लड़के-लड़कियों के गुण न मिल पाने से भी समस्या बनी ही रह जाती है। ये समस्या समाज में बहुतायत में है और सिर्फ कन्या के ही अभिभावक नहीं , वर के अभिभावक भी ऐसी समस्याओं से समान रुप से जूझ रहे हैं । लड़का-लड़की या परिवार के पूर्ण रुप से जंचने के बावजूद भी मंगला-मंगली और गुण-मिलान के चक्कर में संबंध जोड़ना संभव नहीं हो पाता है।

पुराने युग में शादी-विवाह एक गुड्डे या गुड़िया की खेल की तरह था। सिर्फ पारिवारिक पृश्ठभूमि का ध्यान रखते हुए किसी भी लड़की का हाथ किसी भी लड़के को सौंप दिया जाता था । कम उम्र में शादी होने के कारण लड़के-लड़कियों कें व्यक्तित्व ,आचरण या व्यवहार का कोई महत्व नहीं था। इस कारण बड़े होने के बाद कभी-कभी लड़के-लड़कियों के विचारों में टकराव होने की संभावना बनी रहती थी । इसी कारण अभिभावक शादी करने से पूर्व ज्योतिषियों से सलाह लेना आवश्यक समझने लगें और इस तरह कुंडली मिलाने की प्रथा की शुरुआत हुई। कुंडली मिलाने के अवैज्ञानिक तरीके के कारण समाज में वैवाहिक मतभेदों में कोई कमी नहीं आई ,साथ ही दुर्घटनाओं के कारण भी जातक के वैवाहिक सुख में बाधाएं उपस्थित होती ही रहीं , लेकिन फिर भी कुंडली मिलाना वर्तमान युग में भी एक आवश्यक कार्य समझा जाता है यद्यपि कुंडली मिलाना आज किसी समस्या का समाधान न होकर स्वयं एक समस्या बन गया है।

ज्योतिष की पुस्तकों के अनुसार किसी भी लड़के या लड़की की जन्मकुंडली में लग्न भाव , व्यय भाव , चतुर्थ भाव , सप्तम भाव या अश्टम भाव में मंगल स्थित हो तो उन्हें मांगलीक कहा जाता है। परंपरागत ज्योतिष में ऐसे मंगल का प्रभाव बहुत ही खराब माना जाता है। यदि पति मंगला हो तो पत्नी का नाश तथा पत्नी मंगल हो तो पति का नाश होता है । संभावनावाद की दृष्टि से इस बात में कोई वैज्ञानिकता नहीं है। किसी कुंडली में बारह भाव होते हैं और पॉच भाव में मंगल की स्थिति को अनिष्‍टकर बताया गया है। इस तरह समूह का 5/12 भाग यानि लगभग 41 प्रतिशत लोग मांगलिक होते है ,लेकिन अगर समाज में ऐसे लोगों पर ध्यान दिया जाए जिनके पति या पत्नियां मर गयी हों ,तो हम पाएंगे कि उनकी संख्या हजारों में भी एक नहीं है।

मंगला-मंगली के अतिरिक्त ज्योतिष की पुस्तकों में कुंडली मिलाने के लिए एक कुंडली मेलापक सारणी का उपयोग किया जाता है। इस सारणी से केवल चंद्रमा के नक्षत्र-चरण के आधार पर लड़के और लड़कियों के मिलनेवाले गुण को निकाला जाता है। यह विधि भी पूर्णतया अवैज्ञानिक है। किसी भी लड़के या लड़की के स्वभाव , व्यक्तित्व और भविष्‍य का निर्धारण सिर्फ चंद्रमा ही नहीं ,वरन् अन्य सभी ग्रह भी करतें हैं । इसलिए दो जन्मकुंडलियों के कुंडली-मेलापक द्वारा गुण निकालने की प्रथा बिल्‍कुल गलत है।

इस संबंध में एक उदाहरण का उल्लेख किया जा सकता है। मेरे पिताजी के एक ब्राह्मण मित्र ने , जो स्वयं ज्योतिषी हैं और जिनका जन्म पुनर्वसु नक्षत्र के चतुर्थ चरण में हुआ था , पुष्‍य नक्षत्र में स्थित चंद्रमावाली लड़की को ही अपनी जीवनसंगिनी बनाया , क्योंकि ऐसा करने से कुंडली मेलापक तालिका के अनुसार उन्हें सर्वाधिक 35 अंक प्राप्त हो रहे थें । इतना करने के बावजूद उन्हें अपनी पत्नी से एक दिन भी नहीं बनी । किसी कारणवश वे तलाक तो नहीं ले पाए परंतु उनका मतभेद इतना गहरा बना रहा कि एक ही घर में रहते हुए भी आपस में बातचीत भीं बंद रहा। इसका अर्थ यह नहीं कि ज्‍योतिष विज्ञान ही झूठा है , ग्रहों का प्रभाव मनुष्‍य पर नहीं पड़ता है।दरअसल मेरे पिताजी के उस मित्र की कुंडली में स्‍त्री पक्ष या घर-गृहस्थी के सुख में कुछ कमी थी ,इसलिए विवाह के बावजूद उन्हें सुख नहीं प्राप्त हो सका।

एक सज्जन अपनी पुत्री की तुला लग्‍न की कुंडली लेकर मेरे पास आएं। सप्तम भावाधिपति मंगल अतिवक्र होकर अष्‍टमभाव में स्थित था , ऐसी स्थिति में लड़की पूरी युवावस्था यानि 24 वर्ष से 48 वर्ष तक पति के सुख में कमी और घर-गृहस्‍थी में बाधा महसूस कर सकती थी , यह सोंचकर मैने उस लड़की को नौकरी कर अपने पैरों पर खड़े होने की सलाह दी ,लेकिन अभिभावक तो लड़की की शादी करके ही निश्चिंत होना चाहते हैं ,उन्होनें दूसरे ज्योतिषी से संपर्क किया , जिसने अच्छी तरह कुंडली मिलवाकर अच्‍छे मुहूर्त में उसका विवाह करवा दिया। मात्र दो वर्ष के बाद ही एक एक्सीडेंट में उसके पति की मृत्यु हो गयी और वह लड़की अभी विधवा का जीवन व्यतीत कर रही हैं। मेरे पिताजी एक ज्योतिषी हैं पर उन्होने अपने सारे बच्चों की शादी में कुंडली मेलापक की कोई चर्चा नहीं की । क्या कोई पंडित 10 पुरुष और 10 स्त्रियो की कुंडली में से वर और कन्या की कुंडली को अलग कर सकता है , यदि नही तो वह किसी जोड़े को बनने से भी नहीं रोक सकता।

आज घर-धर में कम्प्यूटर और इंटरनेट के होने से मंगला-मंगली और कुंडली मेलापक की सुविधा घर-बैठे मिल जाने से यह और बड़ी समस्या बन गयी है। किन्ही भी दो बायोडाटा को डालकर उनका मैच देखना काफी आसान हो गया है , पर इसके चक्कर में अच्छे-अच्छे रिश्ते हाथ से निकलते देखे जाते हैं । उन दो बायोडाटा को डालकर देखने से ,जिनकी बिना कुंडली मिलाए शादी हुई है और जिनकी काफी अच्छी निभ रही है या जिनकी कुंडली मिलाकर शादी हुई है और जिनकी नहीं निभ रही है , कम्प्यूटर और उसमें डाले गए इस प्रोग्राम की पोल खोली जा सकती है। एक ज्योतिषी होने के नाते मेरा कर्तब्य है कि मै अभिभावकों को उचित राय दूं। मेरा उनसे अनुरोध हे कि वे पुरानी मान्यताओं पर ध्यान दिए बिना , कुंडली मेलापक की चर्चा किए बिना , अपने बच्चों का विवाह उपयुक्त पार्टनर ढूंढ़कर करें । किसी मंगला और मंगली की शादी भी सामान्य वर या कन्या से निश्चिंत होकर की जा सकती है।

रविवार, 2 अगस्त 2009

आज से 15 अगस्‍त तक बृहस्‍पति का गडबड प्रभाव अधिक

13 मई को ही मैने एक आलेखपोस्‍ट किया था , जिसमें 16 मई से 19 जून 2009 तक बृहस्पति ग्रह की एक खास स्थिति के कारण लोगों के कुछ खास प्रकार के कार्यों में उलझे रहने की बात की गयी थी। चूंकि बहस्पति धनु और मीन राशि का स्वामी है और अभी उसकी स्थिति कुंभ राशि में है , इसलिए धनु , कुंभ और मीन राशि से संबंधित कार्यों के उपस्थित होने की अधिक संभावना थी। इससे उन लोगों के अच्‍छे रूपमें प्रभावित होने की बात कही गयी थी , जिनका जन्‍म निम्‍न समयांतराल में हुआ है....

सितम्‍बर 1945 से फरवरी 1946, जुलाई 1946 से सितम्‍बर 1946, सितम्‍बर 1957 से फरवरी 1958, जुलाई 1958 , अगस्‍त 1958, अगस्‍त 1969 से फरवरी 1970 , जुलाई 1970 , अगस्‍त 1970, नवम्‍बर 1980 से जनवरी 1981, जुलाई 1981 से नवम्‍बर 1981, नवम्‍बर 1992 से जनवरी 1993, जून 1993 से नवम्‍बर 1993। उपरोक्‍त समयांतराल में जन्‍म लेनेवालों के अलावा कन्‍या राशि वालों के लिए भी अच्‍छा प्रभाव रहेगा।

इसके विपरीत, उन लोगों के गडबडरूप में प्रभावित होने की बात कही गयी थी , जिनका जन्‍म निम्‍न समयांतराल में हुआ है....

नवम्‍बर 1931 से मई 1932, दिसम्‍बर 1943 से मई 1944, दिसम्‍बर 1955 से मई 1956, अक्‍तूबर 1966 से दिसम्‍बर 1966, नवम्‍बर 1978 से जनवरी 1979,नवम्‍बर 1990 से अप्रैल 1991,नवम्‍बर 2002 से अप्रैल 2003,उपरोक्‍त समयांतराल में जन्‍म लेनेवालों के अलावा कर्क राशि वालों के लिए भी बुरा प्रभाव रहेगा।

पर चाहे जातकों पर बृहस्‍पति के गोचर की इस स्थिति का अच्‍छा प्रभाव पड रहा हो या बुरा , 15 अगस्‍त 2009 तक कोई खास अच्‍छा प्रभाव नहीं दिख पाएगा , क्‍यूंकि बृहस्‍पति की स्थिति अभी काफी कमजोर चल रही है। इस कारण ही मैने उस आलेख में लिखा है कि पहले ग्रुपवाले जहां 15 अगस्‍त 2009 तक काम को लगभग रुका हुआ सा महसूस करेंगे , वहीं दूसरे ग्रुपवालों की 15 अगस्‍त 2009 तक किकर्तब्‍यविमूढावस्‍था की स्थिति बनी रहेगी। इन दोनो ग्रुप के अलावे भी सारे लोगों के लिए बृहस्‍पति की यह स्थिति अच्‍छी नहीं चल रही , इस कारण दुनियाभर के सभी लोगों के सम्‍मुख किसी न किसी प्रकार की परेशानी या समस्‍या दिखाई पडेगी । आज से 15 अगस्‍त तक बृहस्‍पति का प्रभाव अधिक होने के कारणइस समस्‍या को झेलने को हमें विवश होना पडेगा। इसलिए मई जून 2009 से उपस्थित दिखाई देनेवाली कोई समस्‍या निरंतर बढ रही हो तो उसे टालने की ही कोशिश करें। विभिन्‍न लग्‍नवालों के लिए यह समस्‍या भिन्‍न प्रकार की होंगी ....

• मेष लग्नवाले-भाग्य ,धर्म , खर्च ,बाहरी संबंध!
• वृष लग्नवाले-जीवन-शैली ,रुटीन , हर प्रकार का लाभ , मंजिल !
• मिथुन लग्नवाले-पति-पत्नी , घर-गृहस्थी ,ससुराल , पद , प्रतिष्‍ठा , समाज , राजनीति ।
• कर्क लग्नवाले-रोग , ऋण , शत्रु जैसे झंझट , प्रभाव , भाग्य ,धर्म !
• सिंह लग्नवाले- बुद्धि , ज्ञान , संतान , जीवन-शैली ,रुटीन।
• कन्या लग्नवाले-माता , हर प्रकार की संपत्ति , स्थायित्व , पति-पत्नी , घर-गृहस्थी ,ससुराल ।
• तुला लग्नवाले- भाई-बहन , बंधु-बांधव ,सहयोगी , रोग , ऋण , शत्रु जैसे झंझट , प्रभाव ।
• वृश्चिक लग्नवाले-धन , कोष , कुटुम्ब , परिवार , बुद्धि , ज्ञान , संतान ।
• धनु लग्नवाले-शरीर , व्यक्तित्व , आत्मविश्वास , माता , हर प्रकार की संपत्ति , स्थायित्व ।
• मकर लग्नवाले-खर्च ,बाहरी संबंध , भाई-बहन , बंधु-बांधव ,सहयोगी !
• कुंभ लग्नवाले- हर प्रकार का लाभ , मंजिल , धन , कोश , कुटुम्ब , ।
• मीन लग्नवाले-शरीर , व्यक्तित्व , आत्मविश्वास , पद , प्रतिष्‍ठा ।

यह आलेख पाठकों को भयभीत करने के लिए नहीं , सावधानी बरतने के लिए लिखा गया है । बृहस्‍पति के प्रभाव से सबके समक्ष अलग अलग प्रकार और अलग अलग स्‍तर की समस्‍या आएगी ,यह बस उतनी ही होगी , जितनी उनकी जन्‍मकुंडली के अनुसार उन्‍हें मिलनी चाहिए !