शनिवार, 31 अक्तूबर 2009

क्षमा मांग पाना हर किसी के लिए आसान नहीं होता !!

गल्‍ती करना मानव का स्‍वभाव है कभी न कभी हर किसी से गल्‍ती हो ही जाती है। यदि गल्‍ती का फल स्‍वयं को भुगतना पडे , तो कोई बात नहीं होती , पर आपकी गल्‍ती से किसी और को धन या मान की हानि हो रही हो, तो ऐसे समय नि:संकोच हमें क्षमा मांग लेना चाहिए। कुछ लोगों को अपनी गल्‍ती मानते हुए दूसरों से क्षमा मांग लेने में कोई दिक्‍कत नहीं होती , पर 'अहं' वाले लोग आसानी से ऐसा नहीं कर पाते। यह स्‍वभाव व्‍यक्तिगत होता है और इसके गुण बचपन से ही दिखाई देते हैं। अपनी गल्‍ती को न स्‍वीकारने के कारण कई बार सामनेवालों से उनका संबंध बिगड जाता है , पर बिना क्षमा मांगे ही अपना संबंध सुधारने की भी कोशिश करते हैं।

ऐसी स्थिति आने पर मेरे छोटे भाई ने मात्र छह वर्ष की उम्र में कितना दिमाग लगाया था, इसे इस कहानी को पढकर समझा जा सकता है। उसने दादी जी को एक ऐसा जबाब दे दिया था , जो अक्‍सर दादा जी से सुना करता था और उसका मतलब तक नहीं जानता था। इसलिए हम सभी लोगों को उसकी बात पर हंसी आ रही थी , पर घर के बडे लोगों ने उसकी हिम्‍मत न बढते देने के लिए उसे दादी जी से माफी मांगने को कहा। काफी देर तक उसने टाल मटोल की , पर बात खाना नहीं मिलने तक आ गयी तो उसे बडी दिक्‍कत हो गयी , क्‍यूंकि वह जानता था कि इतने बडे बडे लोगों के बीच उसकी तो नहीं ही चलेगी , मम्‍मी , चाची , दीदी या भैया की भी नहीं चलनेवाली , जो लोग उसे किसी मुसीबत से बचाते आ रहे हैं।  हंसकर या रोकर जैसे भी हो माफी मांगने में ही उसकी भलाई है , फिर उसने अपना दिमाग लगाते हुए एक कहानी सुनाने लगा।

एक गांव में एक छोटा सा बच्‍चा रहा करता था। एक दिन उससे गल्‍ती हो गयी , उसने अपनी दादी जी को भला बुरा कह दिया। फिर क्‍या था , सभी ने उससे अपनी दादी जी से माफी मांगने को कहा। वह दादी जी से कुछ दूरी पर बैठा था , जमीन को बित्‍ते(हाथ के अंगूठे से छोटी अंगुली तक को फैलाने से बनीं दूरी) से नापते हुए दादी जी की ओर आगे बढता जा रहा था । मुश्किल से दो तीन बित्‍ते बचे रह गए होंगे कि दादी जी ने उसे अपनी ओर खींच लिया और गले लगाते हुए कहा कि बेटे तुझे माफी मांगने की कोई जरूरत नहीं , बच्‍चे तो गल्‍ती करते ही हैं। इसके साथ ही वह खुद भी जमीन को अपने बित्‍ते से नापते हुए आगे बढने लगा । इस तरह वह माफी मांगने से बच गया , इस कहानी को सुनने के बाद दो तीन बित्‍ते दूरी से ही भला मेरी दादी जी उसे गले से कैसे न लगाती ?




क्षमा मांग पाना हर किसी के लिए आसान नहीं होता !!

गल्‍ती करना मानव का स्‍वभाव है कभी न कभी हर किसी से गल्‍ती हो ही जाती है। यदि गल्‍ती का फल स्‍वयं को भुगतना पडे , तो कोई बात नहीं होती , पर आपकी गल्‍ती से किसी और को धन या मान की हानि हो रही हो, तो ऐसे समय नि:संकोच हमें क्षमा मांग लेना चाहिए। कुछ लोगों को अपनी गल्‍ती मानते हुए दूसरों से क्षमा मांग लेने में कोई दिक्‍कत नहीं होती , पर 'अहं' वाले लोग आसानी से ऐसा नहीं कर पाते। यह स्‍वभाव व्‍यक्तिगत होता है और इसके गुण बचपन से ही दिखाई देते हैं। अपनी गल्‍ती को न स्‍वीकारने के कारण कई बार सामनेवालों से उनका संबंध बिगड जाता है , पर बिना क्षमा मांगे ही अपना संबंध सुधारने की भी कोशिश करते हैं।

ऐसी स्थिति आने पर मेरे छोटे भाई ने मात्र छह वर्ष की उम्र में कितना दिमाग लगाया था, इसे इस कहानी को पढकर समझा जा सकता है। उसने दादी जी को एक ऐसा जबाब दे दिया था , जो अक्‍सर दादा जी से सुना करता था और उसका मतलब तक नहीं जानता था। इसलिए हम सभी लोगों को उसकी बात पर हंसी आ रही थी , पर घर के बडे लोगों ने उसकी हिम्‍मत न बढते देने के लिए उसे दादी जी से माफी मांगने को कहा। काफी देर तक उसने टाल मटोल की , पर बात खाना नहीं मिलने तक आ गयी तो उसे बडी दिक्‍कत हो गयी , क्‍यूंकि वह जानता था कि इतने बडे बडे लोगों के बीच उसकी तो नहीं ही चलेगी , मम्‍मी , चाची , दीदी या भैया की भी नहीं चलनेवाली , जो लोग उसे किसी मुसीबत से बचाते आ रहे हैं।  हंसकर या रोकर जैसे भी हो माफी मांगने में ही उसकी भलाई है , फिर उसने अपना दिमाग लगाते हुए एक कहानी सुनाने लगा।

एक गांव में एक छोटा सा बच्‍चा रहा करता था। एक दिन उससे गल्‍ती हो गयी , उसने अपनी दादी जी को भला बुरा कह दिया। फिर क्‍या था , सभी ने उससे अपनी दादी जी से माफी मांगने को कहा। वह दादी जी से कुछ दूरी पर बैठा था , जमीन को बित्‍ते(हाथ के अंगूठे से छोटी अंगुली तक को फैलाने से बनीं दूरी) से नापते हुए दादी जी की ओर आगे बढता जा रहा था । मुश्किल से दो तीन बित्‍ते बचे रह गए होंगे कि दादी जी ने उसे अपनी ओर खींच लिया और गले लगाते हुए कहा कि बेटे तुझे माफी मांगने की कोई जरूरत नहीं , बच्‍चे तो गल्‍ती करते ही हैं। इसके साथ ही वह खुद भी जमीन को अपने बित्‍ते से नापते हुए आगे बढने लगा । इस तरह वह माफी मांगने से बच गया , इस कहानी को सुनने के बाद दो तीन बित्‍ते दूरी से ही भला मेरी दादी जी उसे गले से कैसे न लगाती ?




शुक्रवार, 30 अक्तूबर 2009

हम तो अपनी भारतीय टीम के जीत और आस्‍ट्रेलिया के हार की ही कामना करेंगे !!

यह समयचक्र ही है, जिसने न जाने कितने सामर्थ्‍यवान को सामर्थ्‍यहीन और सामर्थ्‍यहीन को सामर्थ्‍यवान बना डाला। परंतु कुछ लोग अपनी लगन, मेहनत और अध्यवसाय के बल पर अपनी स्थिति को इतना मजबूत बना लेते हैं कि वे समय के कमजोर प्रभाव में आ ही नहीं सकते। विश्व के लगभग सभी देशों में राष्‍ट्रीय स्‍तर पर खेल रहे क्रिकेटरों की स्थिति आज इतनी मजबूत है कि समय उनसे पैसा या प्रतिष्ठा छीनकर भी उन्हें सामर्थ्‍यहीन नहीं बना सकता। लेकिन उनके लिए भी तो समय-चक्र प्रभावहीन नहीं हो सकता। भले ही क्रिकेटर अपने ही समकक्ष शक्तिवाले खिलाडियों के साथ मैच खेल रहें हों, शुभ समय में अनुकूल वातावरण प्रदान कर सफलताओं का नया इतिहास रचाता है, वहीं दूसरी ओर गड़बड़ समय में प्रतिकूल वातावरण प्रदान कर असफलताओं से शारीरिक और मानसिक कष्ट प्रदान करने की कोशिश में लगा होता है।

पिछले दोनो मैचों के लिए ज्‍योतिषीय आधार पर किया गया मेरा विश्‍लेषणतो आपने पढा ही होगा। पहले दिन के मैच में मैने बडी हार की भविष्‍यवाणी की थी , समय के परिवर्तन होने से भारतीय टीम उस बडी हार से बच गया , पर चार रन से ही सही ग्रह ने अपना प्रभाव दिखा ही दिया। दूसरे दिन पहली पारी में भारतीय टीम की मजबूत स्थिति और आस्‍ट्रेलिया के कछुए की चाल से अपने मजबूत होने के अहसास के बाद मुझे भारतीय टीम की ओर से कुछ लापरवाही के बन जाने का भय मुझे हुआ , पर ईश्‍वर की कृपा रही और भारतीय टीम ने मैच जीत ही ली और मात्र 'रोमांचक'  शब्‍द को छोडकर मेरी एक एक स्‍टेप भविष्‍यवाणी सही रही।

31 अक्‍तूबर 2009 को दिल्‍ली के फिरोज शाह कोटला में भारत आस्‍ट्रेलिया के मध्‍य होनेवाले तीसरे एक‍ दिवसीय मैच में भी भारतीय टीम के द्वारा मैच की धमाकेदार शुरूआत की जाएगी और ऐसा लगभग दो घंटे तक चलेगा। लेकिन उसके बाद क्रमश: आस्‍ट्रेलियन टीम गंभीर होती चली जाएगी और भारत की स्थिति अपेक्षाकृत कमजोर, जिसके कारण पहली पारी के अंत में भारतीय टीम की स्थिति काफी मजबूत नहीं रह पाएगी।

दूसरी पारी के आरंभ में भी भारतीय टीम की गंभीरता काफी बनी रहेगी और इस कारण आस्‍ट्रेलियन टीम का शुरूआती अनुभव अच्‍छा नहीं रहेगा और दो घंटे उनसे अधिक की उम्‍मीद नहीं की जा सकती! पर उसके बाद के दो घंटे में ग्रहीय बाधा के गुजर जाने से खेल में अवश्‍य सुधार आना चाहिए! उसमें इतनी कामयाब हो जाए कि भारतीय टीम को हरा सके , ऐसा मुझे तो नहीं दिखता। पर मेहनत , हिम्‍मत और लगन से वे इसमें कामयाब भी हो सकते है , क्‍यूंकि भारतीय टीम भी बहुत मजबूत हालत में नहीं होगा। पर एक भारतीय होने के नाते हम तो भई , अपनी भारतीय टीम के जीत और आस्‍ट्रेलिया के हार की ही कामना करेंगे !!

गुरुवार, 29 अक्तूबर 2009

आनेवाले दो महीने महत्‍वाकांक्षी युवाओं के लिए बडे खास रहने चाहिए !!

हाल में ही मंगल ग्रह के पृथ्‍वी के जड चेतन पर पडने वाले प्रभाव को लेकर मैं कई आलेखपोस्‍ट कर चुकी हूं । ज्‍योतिष के अनुसार यह लाल ग्रह शक्ति साहस का प्रतीक माना जाता है और 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' के अनुसार रक्‍त की अधिकता की वजह से या किसी अन्‍य कारण से , पर युवा वर्ग पर यह सर्वाधिक प्रभाव डालता है। पिछले आलेख में मैने इस चित्रके माध्‍यम से समझाया था कि किस प्रकार मंगल अपने ही पथ पर घूमता हुआ पृथ्‍वी के नजदीक और दूर होता रहता है। 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' पृथ्‍वी पर उसकी शक्ति के घटने बढने की यही मुख्‍य वजह मानता है , जिसके कारण अलग अलग युवाओं पर इसका अलग प्रकार का प्रभाव पडते देखा जाता है।

आज 29 अक्‍तूबर 2009 को मंगल ग्रह सूर्य से 90 डिग्री की कोणिक दूरी पर है यानि दिखाए गए चित्र के अनुसार इसकी स्थिति 'V' विन्‍दु पर है। इस स्थिति में ग्रह बिल्‍कुल सामान्‍य होते हैं , पर यहीं से वे 'W' विंदु पर आने की दिशा में प्रवृत्‍त होते हैं। इस स्थिति में उसकी गत्‍यात्‍मक शक्ति कम होने लगता है और युवा वर्ग किसी न किसी प्रकार की अतिरिक्‍त सुख सुविधा , अतिरिक्‍त दायित्‍व या अतिरिक्‍त तनाव के बोझ में पडने लगते हैं। इस वर्ष 21 दिसम्‍बर तक मंगल की गत्‍यात्‍मक शक्ति लगातार कमजोर होती जाएगी , जिसके कारण युवा वर्ग पर किसी न किसी प्रकार के कार्यक्रम का दबाब बढता चला जाएगा। 2 , 3 , 8 , 9 , 10 , 17 , 18 , 19 , 29 , 30 नवम्‍बर तथा 1 , 6 , 7 दिसम्‍बर को यानि इन खास तिथियों को मंगल ग्रह अधिक प्रभावी रहेगा।

मंगल की इस स्थिति का प्रभाव युवा वर्ग पर उनके जन्‍मकालीन मंगल के अनुसार पडेगा। जिनका जन्‍मकालीन मंगल अच्‍छा होगा , वे 24 वर्ष की उम्र के बाद से अपने कैरियर में बहुत सफल दिखाई पड रहे होंगे , इस समय एक और बडी सफलता प्राप्‍त करेंगे। जिनका जन्‍मकालीन मंगल सामान्‍य होगा , वे 24 वर्ष की उम्र के बाद अपने कैरियर में बडी जबाबदेही पा रहे होंगे , वे इस समय एक और बडी जबाबदेही निभाने को बाध्‍य होंगे। जबकि जिनका जन्‍मकालीन मंगल कमजोर होगा , वे 24 वर्ष की उम्र के बाद कुछ न कुछ कठिनाइयां प्राप्‍त कर रहे हैं , वे इस समय एक और दिक्‍कत झेलने को बाध्‍य होंगे। खासकर इस आलेखमें दिए गए जन्‍मतिथियों में जन्‍म लेनेवाले लोग आज से आनेवाले दो तीन महीनों में किसी खास प्रकार की दिक्‍कत प्राप्‍त करेंगे।

युवा वर्ग के अतिरिक्‍त अन्‍य लोग भी मंगल से हल्‍के रूप में प्रभावित होंगे, इस ग्रह के कारण आनेवाले दो महीने मेष लग्‍नवालों के लिए स्‍वास्‍थ्‍य और जीवनशैली , वृष लग्‍नवालों के लिए घर गृहस्‍थी और खर्च , मिथुन लग्‍नवालों के लिए लाभ और प्रभाव , कर्क लग्‍नवालों के लिए अपनी या संतान पक्ष की पढाई लिखाई या जॉब , सिंह लग्‍नवालों के लिए भाग्‍य या किसी प्रकार की छोटी बडी संपत्ति , कन्‍या लग्‍नवालों के लिए भाई बहन या जीवनशैली , तुला लग्‍नवालों के लिए धन कोष और घर गृहस्‍थी , वृश्चिक लग्‍नवालों के लिए स्‍वास्‍थ्‍य या प्रभाव , धनु लग्‍नवालों के लिए अपने या संतान की पढाई लिखाई या खर्च , मकर लग्‍नवालों के लिए किसी प्रकार की संपत्ति और लाभ , कुंभ लग्‍नवालों के लिए भाई, पिता , कैरियर या राजनीति तथा मीन लग्‍नवालों के लिए भाग्‍य और धन की स्थिति को मजबूत बनाने के कार्यक्रम में ध्‍यान संकेन्‍द्रण और व्‍यस्‍तता बनीं रहेगी !!





बुधवार, 28 अक्तूबर 2009

कुछ दूर से लौटकर दरवाजे का लॉक क्‍या आप भी चेक करते हैं ??

जब आप अपने घर का ताला लगाकर कहीं बाहर जाते हैं , थोडी ही देर में आपको इस बात का संशय होता है कि आपने दरवाजे का ताला अच्‍छी तरह बंद नहीं किया है। थोडी दूर जाने के बाद भी आप इस बात के प्रति आश्‍वस्‍त होने के लिए घर लौटते हैं और जब चेक करते हैं , तो पता चलता है कि यह बेवजह का संशय था। कभी भी आपसे गलती नहीं हुई होती है , फिर भी आप कभी निश्चिंत नहीं रह पाते हैं , बार बार इसी तरह का मौका आता रहता है। मनोचिकित्‍सक बताते हैं कि यहीं से आपका मानसिक तौर पर अस्‍वस्‍थ होने की शुरूआत हो जाती है। पर क्‍या यह सच है ?

 वैसे तो हमारे शरीर के सारे अंग मस्तिष्‍क के निर्देशानुसार काम करते हैं , पर मैने अपने अनुभव में पाया है कि यदि शरीर का कोई अंग लगातार एक काम के बाद दूसरा काम करते जाए तो उसका अंग वैसा करने को अभ्‍यस्‍त हो जाता है। ऐसी हालत में कुछ दिनों में बिना दिमाग की सहायता के स्‍वयमेव वह एक काम के बाद दूसरा काम करने लगता है , जब मस्तिष्‍क की जरूरत हो तभी उसे पुकारता है , जिस प्रकार एक नौकर मेहनत का हर काम क्रम से कर सकता है , पर जहां दिमाग लगाने की बारी आती है , तो मालिक को पुकार लिया करता है।

इस बात को मैं एक उदाहरण की सहायता से स्‍पष्‍ट कर रही हूं। मैं अक्‍सर रसोई घर में काम करते करते अपने चिंतन में खो जाया करती हूं। पर इसके कारण आजतक कभी दिक्‍कत आते मैने नहीं महसूस किया जैसे कि चाय में नमक हल्‍दी पड गयी या सब्‍जी में चीनी पत्‍ती। सब्‍जी , दाल या चाय बनाने के वक्‍त मैं कहीं भी खोयी रहूं , हाथ में अपने आप तद्नुसार नमक , हल्‍दी , चीनी या चायपत्‍ती का डब्‍बा आ जाता है , पर इन्‍हें डालने के वक्‍त मेरा मस्तिष्‍क वापस आता है , क्‍यूंकि सबकुछ अंदाज से डालना आवश्‍यक है। यहां तक कि जिस बर्तन में मैं अक्‍सर चाय बनाती हूं , उसमें यदि किसी दूसरे उद्देश्‍य के लिए पानी गरम करने का विचार आ जाए तो उसे गैस पर रखने के बाद चाय बनाने के क्रम में पानी मापने के लिए रखा एक गिलास स्‍वयं हाथ में आ जाता है। तब ध्‍यान जाता है कि आज पानी मापना थोडे ही है , अंदाज से डालना है।

मैने एक अविकसित मस्तिष्‍क की लडकी को भी देखा है , जो घर का सारा काम कर लेती है। चूंकि वह स्‍कूल नहीं जाती थी , उसकी मम्‍मी उससे एक के बाद दूसरा काम करवाती रहीं और वह बिना दिमाग के भी उन कामों को करने की अभ्‍यस्‍त हो गयी है। झाडू लगाने , पोछा करने , बरतन धोने और कपडे धोने में उसे कोई दिक्‍कत नहीं , लेकिन जब किसी चीज का अंदाज करना हो तो वह नहीं कर पाती और उसके लिए अपनी मम्‍मी पर आश्रित रहती है। मुझे उसके काम को देखकर अक्‍सर ताज्‍जुब होता रहता है ।

जब हमलोग बाहर निकलते हैं , तो हमारा मुख्‍य ध्‍यान हमारे बाहर के कार्यक्रम पर होता है । कमरे का ताला बंद करते करते हमारा हाथ उसका अभ्‍यस्‍त हो चुका है , इसलिए बिना मस्तिष्‍क की सहायता से वह ताला बंद कर लेता है और हम आगे बढ जाते हैं। थोडी दूर जाने के बाद जब हम अपने चिंतन से बाहर निकलते हैं तो हम घर के दरवाजे पर ताले के बंद होने के प्रति आश्‍वस्‍त नहीं रह पाते , क्‍यूंकि हमारे मस्तिष्‍क को यह बात बिल्‍कुल याद नहीं। हम पुन: लौटकर आश्‍वस्‍त होना चाहते हैं कि ताला अच्‍छी तरह बंद है या नहीं ? इसलिए मेरे ख्‍याल से एक बार ऐसा करना एक मानसिक बीमारी नहीं , बिल्‍कुल सामान्‍य बात है। अब बार बार भी लोग ऐसा करते हों तो इसके बारे में मनोवैज्ञानिकों का कहना माना जा सकता है ।





कुछ दूर से लौटकर दरवाजे का लॉक क्‍या आप भी चेक करते हैं ??

जब आप अपने घर का ताला लगाकर कहीं बाहर जाते हैं , थोडी ही देर में आपको इस बात का संशय होता है कि आपने दरवाजे का ताला अच्‍छी तरह बंद नहीं किया है। थोडी दूर जाने के बाद भी आप इस बात के प्रति आश्‍वस्‍त होने के लिए घर लौटते हैं और जब चेक करते हैं , तो पता चलता है कि यह बेवजह का संशय था। कभी भी आपसे गलती नहीं हुई होती है , फिर भी आप कभी निश्चिंत नहीं रह पाते हैं , बार बार इसी तरह का मौका आता रहता है। मनोचिकित्‍सक बताते हैं कि यहीं से आपका मानसिक तौर पर अस्‍वस्‍थ होने की शुरूआत हो जाती है। पर क्‍या यह सच है ?

 वैसे तो हमारे शरीर के सारे अंग मस्तिष्‍क के निर्देशानुसार काम करते हैं , पर मैने अपने अनुभव में पाया है कि यदि शरीर का कोई अंग लगातार एक काम के बाद दूसरा काम करते जाए तो उसका अंग वैसा करने को अभ्‍यस्‍त हो जाता है। ऐसी हालत में कुछ दिनों में बिना दिमाग की सहायता के स्‍वयमेव वह एक काम के बाद दूसरा काम करने लगता है , जब मस्तिष्‍क की जरूरत हो तभी उसे पुकारता है , जिस प्रकार एक नौकर मेहनत का हर काम क्रम से कर सकता है , पर जहां दिमाग लगाने की बारी आती है , तो मालिक को पुकार लिया करता है।

इस बात को मैं एक उदाहरण की सहायता से स्‍पष्‍ट कर रही हूं। मैं अक्‍सर रसोई घर में काम करते करते अपने चिंतन में खो जाया करती हूं। पर इसके कारण आजतक कभी दिक्‍कत आते मैने नहीं महसूस किया जैसे कि चाय में नमक हल्‍दी पड गयी या सब्‍जी में चीनी पत्‍ती। सब्‍जी , दाल या चाय बनाने के वक्‍त मैं कहीं भी खोयी रहूं , हाथ में अपने आप तद्नुसार नमक , हल्‍दी , चीनी या चायपत्‍ती का डब्‍बा आ जाता है , पर इन्‍हें डालने के वक्‍त मेरा मस्तिष्‍क वापस आता है , क्‍यूंकि सबकुछ अंदाज से डालना आवश्‍यक है। यहां तक कि जिस बर्तन में मैं अक्‍सर चाय बनाती हूं , उसमें यदि किसी दूसरे उद्देश्‍य के लिए पानी गरम करने का विचार आ जाए तो उसे गैस पर रखने के बाद चाय बनाने के क्रम में पानी मापने के लिए रखा एक गिलास स्‍वयं हाथ में आ जाता है। तब ध्‍यान जाता है कि आज पानी मापना थोडे ही है , अंदाज से डालना है।

मैने एक अविकसित मस्तिष्‍क की लडकी को भी देखा है , जो घर का सारा काम कर लेती है। चूंकि वह स्‍कूल नहीं जाती थी , उसकी मम्‍मी उससे एक के बाद दूसरा काम करवाती रहीं और वह बिना दिमाग के भी उन कामों को करने की अभ्‍यस्‍त हो गयी है। झाडू लगाने , पोछा करने , बरतन धोने और कपडे धोने में उसे कोई दिक्‍कत नहीं , लेकिन जब किसी चीज का अंदाज करना हो तो वह नहीं कर पाती और उसके लिए अपनी मम्‍मी पर आश्रित रहती है। मुझे उसके काम को देखकर अक्‍सर ताज्‍जुब होता रहता है ।

जब हमलोग बाहर निकलते हैं , तो हमारा मुख्‍य ध्‍यान हमारे बाहर के कार्यक्रम पर होता है । कमरे का ताला बंद करते करते हमारा हाथ उसका अभ्‍यस्‍त हो चुका है , इसलिए बिना मस्तिष्‍क की सहायता से वह ताला बंद कर लेता है और हम आगे बढ जाते हैं। थोडी दूर जाने के बाद जब हम अपने चिंतन से बाहर निकलते हैं तो हम घर के दरवाजे पर ताले के बंद होने के प्रति आश्‍वस्‍त नहीं रह पाते , क्‍यूंकि हमारे मस्तिष्‍क को यह बात बिल्‍कुल याद नहीं। हम पुन: लौटकर आश्‍वस्‍त होना चाहते हैं कि ताला अच्‍छी तरह बंद है या नहीं ? इसलिए मेरे ख्‍याल से एक बार ऐसा करना एक मानसिक बीमारी नहीं , बिल्‍कुल सामान्‍य बात है। अब बार बार भी लोग ऐसा करते हों तो इसके बारे में मनोवैज्ञानिकों का कहना माना जा सकता है ।





मंगलवार, 27 अक्तूबर 2009

ग्रहीय प्रभाव से बहुत रोमांचक होगा कल का मैच !!

कहते हैं , समय बड़ा बलवान होता है। किसी खास समयांतराल में हमारी खास चिंतन-शैली होती है। खास समय में हम सफलताओं से संतुष्ट और खास समय में ही असफलताओं से दुखी होते हैं।इसी समय को प्रभावित करनेवाले कारकों को जानने के क्रम में ही हमारे ऋषि-मुनियों को यह दृष्टिगोचर हुआ था कि आकाश के विभिन्न ग्रहों की खास कोणों में स्थिति से ही पृथ्वीवासी अलग-अलग तरीके से प्रभावित होते हैं।

25 अक्‍तूबर 2009 को भारत आस्‍ट्रेलिया के मध्‍य हुए एकदिवसीय क्रिकेट मैच के लिए किया गया मेरा ग्रहीय विश्‍लेषणबिल्‍कुल सटीक रहा। हालांकि पहले से उद्घोषित किए गए समय में परिवर्तन होने से मैच बहुत हद तक भारत के पक्ष में हो गया और भारत बडी हार से अवश्‍य बच गया। जैसा कि पूरे मैच में मैने 3 बजे के बाद के दो घंटे भारतीय टीम के लिए सर्वाधिक अच्‍छे बताए थे , उस दिन ठीक उसी समय अंत होने से भारत ने ताबडतोड रन बनाकर अपनी स्थिति मजबूत कर ली।

कल जमथा नागपुर के विदर्भ क्रिकेट एशोसिएशन स्‍टेडियम में भारत और आस्‍ट्रेलिया के मध्‍य होने वाले दूसरे क्रिकेट मैच में ग्रह की स्थिति बिल्‍कुल सामान्‍य होने से दोनो टीमों की स्थिति मजबूत होनी चाहिए। भारत की शुरूआत बहुत ही अच्‍छी रहेगी और लगभग दो घंटे तक भारत काफी अच्‍छा खेलेगा , जिसके कारण अंत अंत तक सामान्‍य खेलते हुए भी पहली पारी में इसकी स्थिति बहुत ही मजबूत बन जाएगी।

दूसरी पारी में भी भारत की मजबूत स्थिति के कारण आस्‍ट्रेलिया किसी समय भारत पर दबाब बनाता नहीं दिखेगा । पर बिल्‍कुल आराम से खेलते हुए भी कछुए की चाल की तरह उसकी स्थिति भी मजबूत हो जाएगी और अंतिम एक घंटे में भारत पर दबाब पडने की शुरूआत होगी। इस बढते दबाब को भारतीय टीम जल्‍द समझ ले , तो जीत की थोडी संभावना बनेगी, अन्‍यथा थोडी भी लापरवाही हार का कारण बन सकती है , जिसकी मुझे अधिक संभावना दिखती है। आइए, ईश्‍वर से प्रार्थना करें कि भारतीय टीम जितनी एकाग्रता से मैच की शुरूआत करे , अंतिम क्षणों तक उतनी ही एकाग्र रह सके !!

सोमवार, 26 अक्तूबर 2009

क्‍या रेमिंगटन कीबोर्ड पर टाइपिंग करने में आपको परेशानी होती है ??

अपने कंप्‍यूटर में Baraha IMEया Hindi Indic IME.को लोड करने और हिन्‍दी सक्रियकरने के बाद मुख्‍य समस्‍या हिन्‍दी में टाइपकरने की आती है। इस समस्‍या का कोई समाधान न दिखने से अधिकांश लोगों को फोनेटिक कीबोर्ड का सहारा लेना पडता है , जिसके द्वारा रोमण में ही लिखने से उसे हिन्‍दी में कन्‍वर्ट किया जा सकता है। लेकिन आप यदि डायरेक्‍ट हिन्‍दी में ही लिखना चाहते हों , तो आपको रेमिंगटन कीबोर्ड पर टाइपिंग कर सकते हैं। अंग्रेजी कैरेक्‍टरों को देखकर हिन्‍दी में टाइपिंग करना बहुत ही आसान है। चाहे जो भी कारण हो , एक महीने के अंदर मैं जितनी आसानी से हिन्‍दी टाइपिंग करने लगी , शायद अंग्रेजी में संभव नहीं थी।

कीबोर्ड की पहली पंक्ति में सामान्‍य तौर पर ये सारे टाइप होते हैं ......
`  1  2  3  4  5  6  7  8  9  0  -  =    (NORMAL)

यदि कीबोर्ड की इस पहली पंक्ति की हिन्‍दी में टाइपिंग की जाए तो ये सारे टाइप होते हैं
़  1  2  3  4  5  6  7  8  9  0  ;  ृ   (NORMAL)

 शिफ्ट के साथ कीबोर्ड की पहली पंक्ति में सामान्‍य तौर पर ये सारे टाइप होते हैं ......
~  !  @  #  $  %  ^  &  *  (  )  _  + (WITH SHIFT)

यदि शिफ्ट के साथ कीबोर्ड की इस पहली पंक्ति की हिन्‍दी में टाइपिंग की जाए तो ये सारे टाइप होते हैं .....
द्य  ।  /  :  *   -  ‘  ‘  द्ध  त्र  ऋ  .  ् (WITH SHIFT)

उसके नीचे यानि दूसरी पंक्ति में सामान्‍य तौर पर ये सारे टाइप  किए जाते हैं ......
q  w  e  r  t  y  u  I  o  p  [  ]  \   (NORMAL)

जबकि दूसरी पंक्ति में हिन्‍दी में टाइपिंग की जाए तो ये सारे टाइप होते हैं .....
ु  ू   म  त  ज  ल  न  प  व  च  ख्‍  ,  (NORMAL)

पर यदि  उसी दूसरी लाइन की शिफ्ट के साथ टाइपिंग की जाए तो ये सारे टाइप होते हैं ....
Q  W  E  R  T  Y  U  I  O  P  {  }   (WITH SHIFT) 

पर उसी दूसरी लाइन की शिफ्ट के साथ हिन्‍दी में टाइपिंग की जाए तो ये सारे टाइप होते हैं .....
फ   ॅ   म्‍    त्‍   ज्‍   ल्‍   न्‍   प्‍   व्‍   च्‍   क्ष्‍   द्व   )     (WITH SHIFT)

तीसरी पंक्ति में सामान्‍य तौर पर ये सारे टाइप होते हैं ......
a    s    d    f    g    h    j    k    l    ;     ‘           (NORMAL)

जबकि उस तीसरी पंक्ति में हिन्‍दी में टाइपिंग की जाए तो ये सारे टाइप होते हैं .....
ं   े    क    ि‍   ह   ी     र ा     स   य    श्‍                (NORMAL)

अब यदि इसी तीसरी पंक्ति को शिफ्ट के साथ टाइपिंग की जाए तो ये सारे टाइप होते हैं .....
 A    S    D    F    G    H    J    K    L    :    “      (WITH SHIFT)

पर उसी तीसरी पंक्ति को शिफ्ट के साथ हिन्‍दी में टाइपिंग की जाए तो ये सारे टाइप होते हैं .....
 ा  ै  क्‍    थ्‍    ळ    भ्‍    श्र   ज्ञ   स्‍    रू     ष्‍              (WITH SHIFT)

अंतिम पंक्ति में सामान्‍य तौर पर ये सारे टाइप होते हैं .....
z      x     c     v     b     n     m     ,     .     /    (NORMAL)

यदि कीबोर्ड की इस अंतिम पंक्ति की हिन्‍दी में टाइपिंग की जाए तो ये सारे टाइप होते हैं .....
्र  ग    ब    अ     इ    द      उ    ए    ण्‍    ध्‍          (NORMAL)

शिफ्ट के साथ कीबोर्ड की पहली पंक्ति में सामान्‍य तौर पर ये सारे टाइप होते हैं ......
 Z    X    C    V    B    N    M    <    >    ?     (WITH SHIFT)

पर उसी तीसरी पंक्ति को शिफ्ट के साथ हिन्‍दी में टाइपिंग की जाए तो ये सारे टाइप होते हैं .....
 र्    ग्‍     ब्‍     ट     ठ   छ     ड     ढ   झ    घ्‍         (WITH SHIFT)

हिन्‍दी में मुख्‍य शब्‍दों की टाइपिंग के लिए मैने ये कई शब्‍दों को याद रखा ....
मई , तर , जट , लवाई , न्‍यू , पाई , वओ ,चप , फक्‍यू , कडी , हजी ,रजे ,सएल , गक्‍स ,बसी , अटवी , इठबी ,दछन , डउम

इन शब्‍दों को याद कर लेने से शुरूआती दौर में बार बार कागज देखने से बचा जा सकता है। आधा या पूरा जो भी 'म' टाइप करना हो, मई मतलब 'E' बटन, इसी तरह पूरा या आधा 'त' के लिए 'R' बटन पूरा या आधा 'ज' के लिए 'T' बटन। इसी तरह 'अ' या 'ट' टाइप करना हो , तो 'V' तथा 'इ' और 'ठ' टाइप करना हो , तो 'B' बटन का सहारा लिया जा सकता है। ऐसा करने से बहुत आसानी हो जाती है। ा का बटन , ु और ू , ि‍ और ी  तथा े और ै के बटन की स्थिति इतनी अच्‍छी जगह पर है कि इन्‍हें याद रख लेना तो बहुत आसान है ही। अब इतने बटनों को जानने के बाद टाइपिंग के दौरान कभी कभार ही नए शब्‍द आएंगे , जिसके लिए आप उपरोक्‍त कागज की एक प्रिंट बनाकर रखें रहें। दो चार दिनों के प्रैक्टिस से सारे बटन का आइडिया होना ही है। देखा रेमिंगटन में टाइपिंग कितनी आसान हो गयी ।




क्‍या रेमिंगटन कीबोर्ड पर टाइपिंग करने में आपको परेशानी होती है ??

अपने कंप्‍यूटर में Baraha IMEया Hindi Indic IME.को लोड करने और हिन्‍दी सक्रियकरने के बाद मुख्‍य समस्‍या हिन्‍दी में टाइपकरने की आती है। इस समस्‍या का कोई समाधान न दिखने से अधिकांश लोगों को फोनेटिक कीबोर्ड का सहारा लेना पडता है , जिसके द्वारा रोमण में ही लिखने से उसे हिन्‍दी में कन्‍वर्ट किया जा सकता है। लेकिन आप यदि डायरेक्‍ट हिन्‍दी में ही लिखना चाहते हों , तो आपको रेमिंगटन कीबोर्ड पर टाइपिंग कर सकते हैं। अंग्रेजी कैरेक्‍टरों को देखकर हिन्‍दी में टाइपिंग करना बहुत ही आसान है। चाहे जो भी कारण हो , एक महीने के अंदर मैं जितनी आसानी से हिन्‍दी टाइपिंग करने लगी , शायद अंग्रेजी में संभव नहीं थी।

कीबोर्ड की पहली पंक्ति में सामान्‍य तौर पर ये सारे टाइप होते हैं ......
`  1  2  3  4  5  6  7  8  9  0  -  =    (NORMAL)

यदि कीबोर्ड की इस पहली पंक्ति की हिन्‍दी में टाइपिंग की जाए तो ये सारे टाइप होते हैं
़  1  2  3  4  5  6  7  8  9  0  ;  ृ   (NORMAL)

 शिफ्ट के साथ कीबोर्ड की पहली पंक्ति में सामान्‍य तौर पर ये सारे टाइप होते हैं ......
~  !  @  #  $  %  ^  &  *  (  )  _  + (WITH SHIFT)

यदि शिफ्ट के साथ कीबोर्ड की इस पहली पंक्ति की हिन्‍दी में टाइपिंग की जाए तो ये सारे टाइप होते हैं .....
द्य  ।  /  :  *   -  ‘  ‘  द्ध  त्र  ऋ  .  ् (WITH SHIFT)

उसके नीचे यानि दूसरी पंक्ति में सामान्‍य तौर पर ये सारे टाइप  किए जाते हैं ......
q  w  e  r  t  y  u  I  o  p  [  ]  \   (NORMAL)

जबकि दूसरी पंक्ति में हिन्‍दी में टाइपिंग की जाए तो ये सारे टाइप होते हैं .....
ु  ू   म  त  ज  ल  न  प  व  च  ख्‍  ,  (NORMAL)

पर यदि  उसी दूसरी लाइन की शिफ्ट के साथ टाइपिंग की जाए तो ये सारे टाइप होते हैं ....
Q  W  E  R  T  Y  U  I  O  P  {  }   (WITH SHIFT) 

पर उसी दूसरी लाइन की शिफ्ट के साथ हिन्‍दी में टाइपिंग की जाए तो ये सारे टाइप होते हैं .....
फ   ॅ   म्‍    त्‍   ज्‍   ल्‍   न्‍   प्‍   व्‍   च्‍   क्ष्‍   द्व   )     (WITH SHIFT)

तीसरी पंक्ति में सामान्‍य तौर पर ये सारे टाइप होते हैं ......
a    s    d    f    g    h    j    k    l    ;     ‘           (NORMAL)

जबकि उस तीसरी पंक्ति में हिन्‍दी में टाइपिंग की जाए तो ये सारे टाइप होते हैं .....
ं   े    क    ि‍   ह   ी     र ा     स   य    श्‍                (NORMAL)

अब यदि इसी तीसरी पंक्ति को शिफ्ट के साथ टाइपिंग की जाए तो ये सारे टाइप होते हैं .....
 A    S    D    F    G    H    J    K    L    :    “      (WITH SHIFT)

पर उसी तीसरी पंक्ति को शिफ्ट के साथ हिन्‍दी में टाइपिंग की जाए तो ये सारे टाइप होते हैं .....
 ा  ै  क्‍    थ्‍    ळ    भ्‍    श्र   ज्ञ   स्‍    रू     ष्‍              (WITH SHIFT)

अंतिम पंक्ति में सामान्‍य तौर पर ये सारे टाइप होते हैं .....
z      x     c     v     b     n     m     ,     .     /    (NORMAL)

यदि कीबोर्ड की इस अंतिम पंक्ति की हिन्‍दी में टाइपिंग की जाए तो ये सारे टाइप होते हैं .....
्र  ग    ब    अ     इ    द      उ    ए    ण्‍    ध्‍          (NORMAL)

शिफ्ट के साथ कीबोर्ड की पहली पंक्ति में सामान्‍य तौर पर ये सारे टाइप होते हैं ......
 Z    X    C    V    B    N    M    <    >    ?     (WITH SHIFT)

पर उसी तीसरी पंक्ति को शिफ्ट के साथ हिन्‍दी में टाइपिंग की जाए तो ये सारे टाइप होते हैं .....
 र्    ग्‍     ब्‍     ट     ठ   छ     ड     ढ   झ    घ्‍         (WITH SHIFT)

हिन्‍दी में मुख्‍य शब्‍दों की टाइपिंग के लिए मैने ये कई शब्‍दों को याद रखा ....
मई , तर , जट , लवाई , न्‍यू , पाई , वओ ,चप , फक्‍यू , कडी , हजी ,रजे ,सएल , गक्‍स ,बसी , अटवी , इठबी ,दछन , डउम

इन शब्‍दों को याद कर लेने से शुरूआती दौर में बार बार कागज देखने से बचा जा सकता है। आधा या पूरा जो भी 'म' टाइप करना हो, मई मतलब 'E' बटन, इसी तरह पूरा या आधा 'त' के लिए 'R' बटन पूरा या आधा 'ज' के लिए 'T' बटन। इसी तरह 'अ' या 'ट' टाइप करना हो , तो 'V' तथा 'इ' और 'ठ' टाइप करना हो , तो 'B' बटन का सहारा लिया जा सकता है। ऐसा करने से बहुत आसानी हो जाती है। ा का बटन , ु और ू , ि‍ और ी  तथा े और ै के बटन की स्थिति इतनी अच्‍छी जगह पर है कि इन्‍हें याद रख लेना तो बहुत आसान है ही। अब इतने बटनों को जानने के बाद टाइपिंग के दौरान कभी कभार ही नए शब्‍द आएंगे , जिसके लिए आप उपरोक्‍त कागज की एक प्रिंट बनाकर रखें रहें। दो चार दिनों के प्रैक्टिस से सारे बटन का आइडिया होना ही है। देखा रेमिंगटन में टाइपिंग कितनी आसान हो गयी ।