शनिवार, 7 नवंबर 2009

क्‍या कल के मैच में भारत की जीत की संभावना बनती है ??

कल आसमान में मंगल और चंद्र की एक बहुत ही मजबूत स्थिति बन रही है , जिसका कल रात्रि साढे नौ बजे के आसपास उदय होगा और रातभर मंगल और चंद्र को आप एक साथ आकाश में चमकता देख सकते हैं। इसके कारण आज और कल का दिन युवाओं के लिए खासकर 24 वर्ष की उम्र से 36 वर्ष की उम्र तक के युवकों युवतियों के लिए बहुत ही निर्णायक होगा , इसलिए वे आज कल में किसी महत्‍वपूर्ण घटना से संयुक्‍त हो सकते हैं। अधिकांश के लिए यह घटना सुखद हो सकती है , पर कुछ के लिए तो कष्‍टकर होगी ही। जहां सुखद प्रभाव महसूस करनेवाले युवक युवतियों को इसकी बधाई देना चाहूंगी , तो दुखद प्रभाव महसूस करनेवालों के लिए मेरे दिल में संवेदनाएं भी हैं। वे अपने धैर्य की परीक्षा देते रहें , आनेवाला कल उनका भी होगा।  इसके बारे में विस्‍तृत जानकारी कल दे पाउंगी , क्‍यूंकि कल होनेवाले क्रिकेट मैच के दौरान के उतार चढाव की चर्चा करना आज अधिक आवश्‍यक है।

भारत और आस्‍ट्रेलिया के मध्‍य होनेवाले क्रिकेट मैचों की इस श्रृंखला के पहले ही दिन से मैं मैच के दौरान आनेवाले उतार चढाव की चर्चा कर रही हूं। दो मैच और होने को है , उसमें से कल यानि 8 नवम्‍बर 2009 को नेहरू स्‍टेडियम , गुवाहाटी में होने वाले मैच के लिए शायद आज से ही सभी रोमांचित हो रहे हों। इस कारण इस मैच के बारे में किसी प्रकार की भविष्‍यवाणी करके भविष्‍य के लिए होनेवाले इस रोमांच को समाप्‍त करने का मुझे कोई हक नहीं दिखता। पर मुझे लगता है कि मेरे हल्‍के रूप में संकेत देने से शायद आपका रोमांच कम नहीं होगा।

जैसा‍ कि मैने अपने पहले मैच में ही लिखा था कि इस बार की ग्रह स्थिति ही भारतीय टीम के बिल्‍कुल मनोनुकूल नहीं , और हर दिन टॉस आस्‍ट्रेलिया ही जीत रहा है।आज भी हमेशा की तरह ही इस मैच की शुरूआत भारत के पक्ष में नहीं ही होगी , पर इस बार मैच की शुरूआत आस्‍ट्रेलियन टीम के पक्ष में भी नहीं दिखती। इस हिसाब से मैच के प्रारंभिक दो घंटे दोनो टीम के सम्‍मुख चिडचिडाहट की ही स्थिति रहेगी । इसका अर्थ यह माना जा सकता है कि जहां बल्‍लेबाजी करनेवाली टीम अधिक रन न बना पाने के कारण अपनी स्थिति के मजबूत नहीं होने का अहसास करेगी , वहीं शायद गेंदबाजी करनेवाली टीम भी विकेट न ले सकने से परेशान रहे। पर 11 बजे के आस पास से ही मैच की स्थिति में सुधार दिखेगा और मैच के समाप्‍त होने तक शायद भारत का ही पलडा मजबूत दिखे।

पर दूसरी पारी में बिल्‍कुल शुरूआत को छोड दिया जाए , तो थोडी ही देर में यानि दो सवा दो बजे के बाद से ही भारतीय टीम पर दबाब की शुरूआत होगी और पूरे मैच के दौरान किसी न किसी रूप में बनीं ही रहेगी। साढे तीन के बाद ही भारतीय टीम पर दबाब कुछ कम दिखाई दे रहा है , पर उसके बाद के इतने कम समय में वह कामयाब हो पाएगी , इसमें थोडा संदेह तो रह ही जाता है। खासकर ऐसी स्थिति में जब सवा चार बजे के बाद फिर मैच आस्‍ट्रेलिया के पक्ष में जाता दिख रहा हो। पर इस पौन घंटे के अंदर ही भारतीय टीम लक्ष्‍य को प्राप्‍त कर लें , तो संभावना बन सकती है , वैसे ईश्‍वर से ऐसी प्रार्थना तो हम सब मिलकर ही सकते हैं !!

शुक्रवार, 6 नवंबर 2009

क्या ज्योतिष को विकासशील नहीं होना चाहिए ??

ज्योतिष विज्ञान है या अंधविश्वास , एक बड़ा प्रश्न , वो भी अनुत्तरित , क्योंकि इसके सही आधार की नासमझी के कारण जहां कुछ लोग इसका तिरस्कार करते हैं , वहीं दूसरी ओर अतिशय भाग्यवादिता से ग्रसित लोग किंकर्तब्यविमूढ़ावस्था को प्राप्त कर इसका अंधानुसरण करते हैं। दोनो ही स्थितियों में फलित ज्योतिष रहस्यमय और विचित्र हो जाता है। पहले वर्ग के लोगों का कहना है कि भला करोड़ों मील दूर स्थित ग्रह हमें किस प्रकार प्रभावित कर सकते हैं , वहीं दूसरे वर्ग के लोगों को आकाशीय पिंड की जानकारी से कोई मतलब ही नहीं , मतलब अपने भाग्य की जानकारी से है। इस तरह मूल तथ्य की परिचर्चा के अभाव में फलित ज्योतिष को जाने अनजाने काफी नुकसान है रहा है। एक भारतीय प्राचीन विद्या को हमारे देश में उचित स्थान नहीं मिल रहा है। ज्योतिष के पक्ष और विपक्ष में बहुत सारी बातें हो चुकी हैं , सबके अपने.अपने तर्क हैं , इसलिए किसी की जीत या हार हो ही नहीं सकती। बेहतर होगा कि बुद्धिजीवी वर्ग हर प्रकार के पूर्वाग्रह से मुक्त होकर ज्योतिषियों की बात सुनें , उनपर विचार करें।


प्रकृति के नियम के अनुसार प्रत्येक निर्माण--चाहे वह कला का हो , विज्ञान का या फिर धर्म का हो या संस्कृति का---------- अविकसित , विकासशील और विकसीत तीनों ही दौर से गुजरते हैं। न सिर्फ वैयक्तिक और सामाजिक संदर्भों में ही , वरन् प्राकृतिक वस्तुओं का निर्माण भी इन तीनों ही दौर से गुजरकर ही परिपक्वता प्राप्त करता है। इस सामान्य से नियम के तहत् ज्योतिष को भी इन तीनों ही दौर से गुजरना आवश्यक था। यदि वैदिक काल में ज्योतिष के गणित पक्ष की तुलना में फलित पक्ष कुछ कमजोर रह गया था तो क्या आनेवाले दौर में इसे विकसित बनाने की चेष्टा नहीं की जानी चाहिए थी। परंतु किसी भी युग में ऐसा नहीं किया गया। ज्योतिष को अंधविश्वास समझते हुए लगभग हर युग में इसे उपेक्षित किया गया। यह कारण मेरी समझ में आजतक नहीं आया कि क्यों हमेशा से ही भूत पढ़नेवालों को विद्वान और भविष्य पढ़नेवाले को उपहास का पात्र समझा जाता रहा।

आज भले ही कुछ ज्योतिषी इसे विकसीत बनाने की चेष्टा में जी.जान से लगे हों , सरकारी , अर्द्धसरकारी या गैर सरकारी ---. किसी भी संस्था का कोई सहयोग न प्राप्त कर पाते हुए लाख बाधाओं का सामना करते हुए ज्योतिष को विकासशील बनाए बिना विकसीत विज्ञान की श्रेणी में रख पाना संभव नहीं है। मै मानती हूं कि ज्योतिष विज्ञान के प्रति कुछ लोगों की न सिर्फ आस्था , वरण् भ्रांतियों को देखते हुए इसमें लाभ कमाने के इच्छुक लोगों का बहुतायत में प्रवेश अवश्य हुआ है , जिनका फलित ज्योतिष के विकास से कुछ लेना.देना नहीं है , पर उनके कारण कुछ समर्पित ज्योतिषियों के कार्य में बाधाओं का आना तो अच्छी बात नहीं है , जो कई सामाजिक भ्रांतियों को समाज से दूर करने के इच्छुक हैं।

जब कुछ ज्योतिषी आस्था की बात करते हुए ज्योतिष को विज्ञान के ऊपर मान लेते हैं , यह मान लेते हें कि जहां से विज्ञान का अंत होता है , वहां से ज्योतिष आरंभ होता है , तो यह बात बुद्धिजीवियों के गले से नहीं उतरती।वे कार्य.कारण में स्पष्ट संबंध दिखानेवाले विज्ञान की तरह ही ज्योतिष को देखना चाहते हैं। पर जब उन्हें एक विज्ञान के रूप में ज्योतिषीय तथ्यों से परिचित करवाया जाता है , तॅ वे यहां चमत्कार की उम्मीद लगा बैठते हैं। उन्हें शत्.प्रतिशत् सही भविष्यवाणी चाहिए। क्या एक डाक्टर हर मरीज का इलाज करना सिर्फ इसलिए छोड़ दे , क्योंकि वह कैंसर और एड्स के मरीजों का इलाज नहीं कर सकता ?

जब हम ज्योतिषी स्वयं यह मान रहे हैं कि ग्रह.नक्षत्रों का प्रभाव पृथ्वी के जड़.चेतन के साथ.साथ मानवजीवन पर अवश्य पड़ता है और इस प्रकार मानवजीवन को प्रभावित करने में एक बड़ा अंश विज्ञान के नियम का ही होता है , परंतु साथ ही साथ मानवजीवन को प्रभावित करनें में छोटा अंश तो सामाजिक , आर्थिक , राजनीतिक और देश काल परिस्थिति का भी होता है। फिर ज्योतिष की भाविष्यवाणियों के शत.प्रतिशत सही होने की बात आ ही नहीं सकती। इसी कारण आजतक ज्योतिष को अविकसित विज्ञान की श्रेणी में ही छोड़ दिया जाता रहा है , विकासशील विज्ञान की श्रेणी में भी नहीं आने दिया जाता , फिर भला यह विकसित विज्ञान किस प्रकार बन पाए ?

एक अविकसित प्रदेश के विद्यार्थी की योग्यता को जांचने के लिए आप शत्.प्रतिशत् परीक्षा परिणाम की उम्मीद करें , तो यह आपकी भूल होगी। सामान्य परीक्षा परिणाम के बावजूद वह योग्य हो सकता है , क्योंकि उसने उस परिवार और विद्यालय में अपना समय काटा है , जो साधनविहीन है। विकासशील क्षेत्र के अग्रणी विद्यालय या विकासशील परिवार के विद्यार्थी की योग्यता को आंकने के लिए आप शत.प्रतिशत परिणाम की उम्मीद कर सकते हैं , क्योंकि हर साधन की मौजूदगी में उसने विद्याध्ययन किया है।



गुरुवार, 5 नवंबर 2009

पुन: 'गत्‍यात्‍मक भृगुसंहिता' तैयार करने में इतनी देरी होने का कारण ??

पिछले कई आलेखोंमें मैने भृगुसंहिता ग्रंथ के बारे में आपको जानकारी देने का प्रयास किया है , पिछली कडीमें मैने बताया था कि किस प्रकार मेरे द्वारा तैयार की गयी 'गत्‍यात्‍मक भृगुसंहिता' नष्‍ट हो गयी। पर 144 शीटोंवाले एक्‍सेल प्रोग्राम का बच जाना मेरे लिए काफी राहत भरा था , जिसके द्वारा किसी भी 'गत्‍यात्‍मक समय भृगुसंहिता' तैयार की जा सकती थी। पर पहले की तुलना में कुछ अच्‍छा तैयार करने की सोंच के कारण ही चार पांच वर्ष व्‍यतीत हो जाने पर भी मैं उस दिशा में काम न कर सकी।

एक्‍सेल में बने प्रोग्राम से मेरे मनोनुकूल काम होते न देख मैने प्रोग्रामिंग सीखने का निश्‍चय किया। सी++ सीखने के लिए मुझे जितना समय देना पडता या जितना ध्‍यान लगाना पडता , शायद मैं नहीं दे सकती थी। उसकी तुलना में विज्‍युअल बेसिक काफी आसान था , इसलिए मैने विज्‍युअल बेसिक सीखने के लिए इंस्‍टीच्‍यूट में एडमिशन ले लिया। इसे सीखते सीखते ही घर पर ज्‍योतिष के 'गत्‍यात्‍मक सिद्धांतों' के आधार पर एक साफ्टवेयर भी तैयार करने लगी , ताकि इसे बनाने में कोई समस्‍या हो , तो कंप्‍यूटर के जानकारों से पूछा जा सके। पर ज्‍योतिष के सिद्धांत इतने आसान भी नहीं कि वे समस्‍याओं को तुरंत हल कर पाते , मुझे ही स्‍वयं दिन रात जगकर इस काम को अंजाम देना पडा और कामभर प्रोग्रामिंग किया हुआ मेरा साफ्टवेयर कुछ ही दिनों में तैयार हो गया , जो अभी भी सिर्फ जन्‍मतिथि , जन्‍मसमय और जन्‍मस्‍थान के आधार पर जातक के जीवनभर के उतार चढाव का ग्राफ के साथ ही साथ कई तरह की भविष्‍यवाणी करने में भी समर्थ है।

विज्‍युअल बेसिक सीखने के बाद मुझे महसूस हुआ कि एम एस वर्ड के मेल मर्ज की तुलना में विज्‍युअल बेसिक द्वारा और अच्‍छे ढंग से 'गत्‍यात्‍मक भृगु संहिता' को तैयार किया जा सकता है। इस कारण मेल मर्ज द्वारा फिर से बनाए जानेवाले भृगुसंहिता के काम में रूकावट आ गयी और नए तरह की भृगुसंहिता को बनाने की दिशा में सोंच बनीं। पर कोई काम अनायास जितनी तेजी से हो जाता है , अधिक तैयारी के क्रम में उतनी ही देर लगती है। पहले से बने हुए उस एक्‍सेल शीट को भी पापाजी के द्वारा संपादित कराने की इच्‍छा थी , पर न तो उनका मेरे यहां लम्‍बी अवधि के लिए आना हो पा रहा है और न ही मैं उनके यहां जा पा रही हूं, जो कि देर होने का मुख्‍य कारण है।

पुस्‍तक के रूप में जो 'गत्‍यात्‍मक भृगुसंहिता' तैयार हुई थी , उसमें व्‍यक्ति के ग्राफ के अनुसार किसी एक ग्रह के हिसाब से उसकी उम्र के आधार पर भविष्‍यवाणी की जाती थी। पर मेरे मनोनुकूल अब जो भृगुसंहिता बनेगी , उसे साफ्टवेयर ही समझा जाए और इसमें अपना जन्‍मविवरण डालने के बाद यह उम्र के साथ नहीं , वरन् ईस्‍वी के साथ भविष्‍यवाणी कर सकेगी। वैसे मेरे अभी बने प्रोग्राम में भी इसकी सुविधा है , पर वह विस्‍तृत में न होकर संक्षेप में है और भाषा थोडी कठिन है। आगे मेरा जो कार्यक्रम है , उसमें भाषा ऐसी सरल रहेगी कि लोगों का अपनी जीवनयात्रा के बारे में , आनेवाली परिस्थितियों के बारे में पहले से ही सबकुछ समझ में आ जाएगा और इस आधार पर अपने समय से तालमेल बिठाते हुए वे अपनी आगे की योजना बना पाएंगे। ईश्‍वर का आशीर्वाद रहा तो 2010 के अंत अंत तक मैं इसे तैयार कर लूंगी !!

बुधवार, 4 नवंबर 2009

हमारे रणबांकुरे कल क्‍या करेंगे ??

देखते ही देखते भारत और ऑस्‍टेलिया के मध्‍य पांचवा मैच भी कल होना है, जिसके लिए भी कुछ तुक्‍का लगा ही दूं। इसे तुक्‍का ही मानें क्‍यूंकि मैं गोलमोल बातें कहा करती हूं और हार और जीत के बारे में साफ साफ नहीं बताती हूं। कौन कितना रन बनाएगा , ये भी नहीं कह पाती। वास्‍तव में 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' ग्रहों के प्रभाव को एक सीमा तक ही मानता है और किसी की मेहनत और क्षमता को भी काफी महत्‍व देता है।

इस कारण जन्‍मकुंडली के ग्रहों के प्रभाव के आधार पर भविष्‍यवाणी करते हुए हम व्‍यक्ति के पूरे जीवन के उतार चढाव का लेखाचित्र खींच देते हैं , पर उतार में व्‍यक्ति कितना नीचे चला जाएगा और चढाव में कितना उपर , इसे बताना संभव नहीं, क्‍यूंकि हम व्‍यक्ति की क्षमता को , उसके जीन को , उसके पारिवारिक वातावरण को , उसके भौगोलिक वातावरण को ग्रहों से नहीं समझ सकते। इसके अलावे भी कुछ अन्‍य बातों को प्रभाव मनुष्‍य के जीवन में पडता है , जबकि हम सिर्फ ग्रहों के प्रभाव को दखते हैं , अन्‍यान्‍य प्रभाव को नही।

इसी प्रकार किसी मैच के विश्‍लेषण करने में हम भारत के पक्ष और विपक्ष तथा आस्‍ट्रेलिया के पक्ष और विपक्ष के समय का खाका खींच सकते हैं , पर पक्ष के समय का देश कितना उपयोग करेगा या विपक्ष के समय कितने चुनौतीपूर्ण ढंग से निबटेगा , यह दोनो देश के टीम की तैयारी पर निर्भर करता है। कल दूसरी पारी के पहले दो घंटे खराब होने की बात तो मैने की थी , पर भारत की टीम के सारे विकेट धडाधड गिर जाएंगे , यह निश्चित तौर पर हमारे खिलाडियों का गलत निर्णय है , पहले से ऐसी कल्‍पना कौन कर सकता था ?

कल उप्‍पल , हैदराबाद राजीव गांधी इंटरनेशनल स्‍टेडियम में भारत आस्‍ट्रेलिया के मध्‍य होनेवाले पांचवे क्रिकेट मैच में शुरूआत भारत के पक्ष में न होने से कुछ देर तक भारत दबाब महसूस कर सकता है पर थोडी ही देर में सबकुछ सामान्‍य नजर आएगा और बिल्‍कुल अंत अंत में मैच भारत के पक्ष में हो जाएगा, जिसके कारण ब्रेक का समय भारतवासियों को काफी राहत देनेवाला होगा।

दूसरी पारी में भी मैच की शुरूआत बहुत ही अच्‍छे ढंग से होगी , एक घंटे तक भारत के बहुत मजबूत स्थिति में खेलने के बाद आस्‍ट्रेलियन टीम भी काफी गंभीर हो जाएगी , जिसके कारण भारत पर दबाब बहुत बढता जाएगा। रात साढे नौ बजे के बाद ही ग्रहों के अच्‍छे प्रभाव से भारत को थोडी राहत मिलने की उम्‍मीद बनती है। पर इसका फायदा उठाने के लिए उन्‍हें अपने बुरे समयंतराल को धैर्य से खेलकर पार करना पडेगा। इस देश के वासी होने के नाते ऐसा ही हो , अन्‍य दिनों की तरह ही हम इसकी कामना तो करेंगे ही।

सोमवार, 2 नवंबर 2009

ज्‍योतिष हकीकत का नहीं ... सिर्फ संभावनाओं का विज्ञान है !!

ग्रहों के क्रिकेट मैच पर पडनेवाले प्रभाव को दिखाने के लिए मैं कई दिनों से मैच के एक दिन पहले ही ग्रहीय आधार पर मैच का विश्‍लेषण करती आ रही हूं। कुछ लोगों के लिए ज्‍योतिष तो मजाक का विषय है ही , मेरे पोस्‍ट पर प्रकाश गोविंद जी की टिप्‍पणी देखिए ...
ज्योतिष का एक ही सफल मन्त्र है :

भविष्य वाणी इस तरह से गोल-मोल करो कि जो भी परिणाम आये वो ऐसा लगे कि अरे मैंने यही तो कहा था न :)


प्रवीण शाह जी वैसे तो अक्‍सर मुझे प्रोत्‍साहित किया करते हैं , पर मेरा कल का आलेख इन्‍हें भी मजाक लगा , तभी इन्‍होने भी ऐसी टिप्‍पणी की ...
मेरी भविष्यवाणी है कि पहले आस्ट्रेलिया खेलेगा, दूसरी पारी भारत की होगी, सामान्य मुकाबला होगा और जीत भारत के हाथ नहीं लगती दिखती है...

इस भविष्यवाणी के सच होने की संभावना ५०% है...

अब मेरे आलेख का यह अंश देखें .....
कल मोहाली के पंजाब क्रिकेट एशोसिएशन स्‍टेडियम में भारत और आस्‍ट्रेलिया के मध्‍य होनेवाले चौथे एकदिवसीय मैच में शुरूआत के दो घंटे बिल्‍कुल सामान्‍य रहेंगे , पर लगभग चार बजे के बाद भारतीय टीम बहुत ही अच्‍छा खेलेगी।

लगभग 20 ओवर तक एक विकेट के नुकसान पर लगभग 5 के औसत रनरेट से आराम से खेलते हुए आस्‍ट्रेलिया 4 बजे के बाद अचानक ही दो और विकेट खो बैठता है और कुछ ही देर में रनरेट गिरकर साढे चार पर पहुंच जाता है। काफी कोशिश कर वे थोडी देर में रनरेट को बढा अवश्‍य ही लें , पर उनपर दबाब पडने की बात से इंकार तो नहीं किया जा सकता। पहले डेढ घंटे में एक विकेट और दूसरे डेढ घंटे में चार विकेट का नुकसान आस्‍ट्रेलिया के लिए सिर्फ संयोग नहीं माना जा सकता। 6 बजे तक भी धडाधड विकेट्स का गिरना जारी रहा और चार बॉल खेले बिना ही आस्‍ट्रेलिया का मैच समाप्‍त हो गया।
अब पहले मैच के दिन प्रकाशित मेरे आलेख का अंश देखें ....
वैसे इस दिन बिल्‍कुल शुरूआत का समय यानि 3 बजे के बाद के दो घंटे भारत के पक्ष में दिखते हैं

और उस दिन ठीक तीन बजे के बाद धडाधड रन बनाकर भारत अपनी बडी हार से खुद को बचा लेता है।

उसके दूसरे दिन मेरे आलेख का अंश देखें ....
भारत की शुरूआत बहुत ही अच्‍छी रहेगी और लगभग दो घंटे तक भारत काफी अच्‍छा खेलेगा , जिसके कारण अंत अंत तक सामान्‍य खेलते हुए भी पहली पारी में इसकी स्थिति बहुत ही मजबूत बन जाएगी।
दूसरी पारी में भी भारत की मजबूत स्थिति के कारण आस्‍ट्रेलिया किसी समय भारत पर दबाब बनाता नहीं दिखेगा । पर बिल्‍कुल आराम से खेलते हुए भी कछुए की चाल की तरह उसकी स्थिति भी मजबूत हो जाएगी और अंतिम एक घंटे में भारत पर दबाब पडने की शुरूआत होगी।


सचमुच भारत बडा स्‍कोर खडा करता है और आस्‍ट्रेलिया कछुए की चाल में खेलता है।

तीसरे दिन के मैच में मेरे आलेख का अंश देखें ....
दूसरी पारी के आरंभ में भी भारतीय टीम की गंभीरता काफी बनी रहेगी और इस कारण आस्‍ट्रेलियन टीम का शुरूआती अनुभव अच्‍छा नहीं रहेगा और दो घंटे उनसे अधिक की उम्‍मीद नहीं की जा सकती! पर उसके बाद के दो घंटे में ग्रहीय बाधा के गुजर जाने से खेल में अवश्‍य सुधार आना चाहिए! उसमें इतनी कामयाब हो जाए कि भारतीय टीम को हरा सके , ऐसा मुझे तो नहीं दिखता।


और इस दिन भी आस्‍ट्रेलिया की टीम भारतीय टीम को नहीं हरा पाती।

यदि ये सब गोल मोल बातें हैं , तो साफ सुथरी बातें किसे कहते है , यह मैं प्रकाश गोविन्‍द जी से जानना चाहती हूं।

वैसे यह बात सही है कि ज्‍योतिष सिर्फ संभावनाओं की चर्चा करता है , हकीकत का नहीं। हकीकत यह है कि इसी सप्‍ताह शेयर बाजार से संबंधित मेरी भविष्‍यवाणी बिल्‍कुल उलट हुई है , पर इसका दोष मैं ग्रहों को नहीं , खुदको दिया करती हूं। मैं पिछले एक वर्ष से शेयर बाजार से संबंधित साप्‍ताहिक भविष्‍यवाणी कर रही हूं और मात्र दो बार बडे स्‍तर पर चूक हुई है , इस लिंकमें इसे आप देख सकते हैं।



रविवार, 1 नवंबर 2009

कल के मैच में किसकी होगी बल्ले-बल्ले ??

कल के मैच में भारत की जीत के लिए आप सभी पाठकों को बहुत बधाई ! मेरे द्वारा तीन दिनों से क्रिकेट मैच के बारे में की जाने वाली संभावनाओं की अच्‍छी खासी सटीकताको देखकर आपलोग ग्रहों के क्रिकेट मैच पर पडनेवाले प्रभाव के प्रति अवश्‍य आश्‍वस्‍त हो गए होंगे। इस कारण कल के मैच के बारे में भी मेरे द्वारा की जानेवाली विवेचना का आप अवश्‍य इंतजार कर रहे होंगे। क्रिकेट मैच में ग्रहों के प्रभाव को देखते हुए आठ दस वर्षों से ही मैच के एक दिन पहले से ही पंचांग देखकर ग्रहों की स्थिति को जानने और उससे क्रिकेट मैच का तालमेल बनाने से मैं खुद भी अपने को नहीं रोक पाती हूं। पर खुशी की बात है कि अब मैं इसे आपलोगों से भी शेयर कर पा रही हूं , ये रहा मेरा विश्‍लेषण।

कल मोहाली के पंजाब क्रिकेट एशोसिएशन स्‍टेडियम में भारत और आस्‍ट्रेलिया के मध्‍य होनेवाले चौथे एकदिवसीय मैच में शुरूआत के दो घंटे बिल्‍कुल सामान्‍य रहेंगे , पर लगभग चार बजे के बाद भारतीय टीम बहुत ही अच्‍छा खेलेगी। यदि इस दौरान उसे बल्‍लेबाजी का मौका मिला, तो अंत तक यह बहुत बडा स्‍कोर खडा कर देगी , जबकि गेंदबाजी कर रही हो तो आस्‍ट्रेलियन टीम के सामने जबरदस्‍त दबाब उपस्थित करेगी और कुल मिलाकर पहली पारी के अंत अंत में भारत की स्थिति बहुत मजबूत दिखाई पडेगी।

पर पहली पारी में भारत के पक्ष में भाग्‍य जितना साथ देगा , उतना दूसरी पारी में साथ देता नहीं दिखाई पड रहा है , जिससे स्‍पष्‍ट है कि आस्‍ट्रेलियन टीम भी अच्‍छा ही खेलेगी। इस कारण दूसरी पारी के दौरान भारतीय टीम बिल्‍कुल सामान्‍य स्थिति में ही रहेगी , जीत के पूरे आसार स्‍पष्‍ट नहीं दिखाई पडेंगे , पर अंत के एक घंटे पुन: भारतीय टीम के पक्ष में होने से भारतीय टीम के जीत की संभावना बहुत बढ जाएगी। इसलिए इस मैच में भी भारतीय टीम के जीत की ही संभावना लगती है , बशर्ते कि दूसरी पारी के शुरूआत में , जब ग्रह थोडे कमजोर हों , इसकी स्थिति काफी कमजोर न हो जाए। पर इसकी संभावना कम है और ऐसा न ही हो , हम इसकी कामना करते हैं !!