बुधवार, 27 जनवरी 2010

29 और 30 जनवरी को आसमान में चमकीले लाल मंगल और पूर्ण चंद्र के साथ साथ का नजारा लें !!

यूं तो प्राचीन काल से ही आसमान में कई प्रकार के दृश्‍यों को देखकर मनुष्‍यों को अजूबा सा लगा होगा, तभी इनके रहस्‍यों को ढूंढने में दिन रात एक किए गए होंगे , खगोलशास्‍त्र के तरह तरह के सूत्रों का विकास भी हुआ होगा। आज भी आम जनों के मन में इन्‍हे देखकर जिज्ञासा जन्‍म लेती है , पर उन्‍हें खगोल शास्‍त्र विषय की पूर्णिमा , अमावस्‍या , चंद्रग्रहण और सूर्यग्रहण के अतिरिक्‍त कोई भी जानकारी नहीं होती, यही कारण है कि न तो उनकी जिज्ञासा का कोई समाधान हो पाता है और न वे ग्रहों के प्रभाव को स्‍पष्‍ट तौर पर देख पाते हैं। मैने समय समय पर आसमान में दिखाई पडनेवाली ग्रहों की खास स्थिति और प्रभाव की चर्चा करते हुए एक दो पोस्‍ट लिखे हैं। उसी शृंखला में इसे अगले पोस्‍ट के रूप में देखा जा सकता है।

अपने ही परिभ्रमण पथ पर चलते हुए मंगल ग्रह कभी पृथ्‍वी से काफी निकट तो कभी काफी दूर चला जाता है, जिसे इस चित्र के माध्‍यम से समझा जा सकता है। जब मंगल पृथ्‍वी से दूरी पर होता है , तो इसे पृथ्‍वी से नहीं देखा जा सकता , पर जब वह पृथ्‍वी के नजदीक आने की दिशा में प्रवृत्‍त होता है , तो हम इसे आसमान में चमकते देख पाते हैं। पिछले कई महीनों से यह आसमान में दिखाई पड रहा है , पर 29 और 30 जनवरी को मंगल ग्रह पृथ्‍वी से सर्वाधिक निकट होगा, इस कारण भारत के भिन्‍न भागों में इन दोनो दिन इसे अपनी तेज लाल चमक के साथ शाम 4 बजे से 6 बजे के मध्‍य पूर्वी क्षितिज पर उदित होते देखा जा सकता है , विश्‍व के अन्‍य देशों में भी इसके उदय का समय सायंकाल का ही होगा। इन दोनो ही दिन उसके साथ पूर्ण चंद्र की स्थिति के कारण पूरी रात्रि आसमान की शोभा बनेगी। सूर्योदय के कुछ समय पहले ये दोनो ही साथ साथ अस्‍त हो जाएंगे।

पृथ्‍वी की मंगल से इतनी निकट होने की स्थिति उसकी चुम्‍बकीय शक्ति में वृद्धि लाती है , 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' के अनुसार उसका पृथ्‍वी पर अच्‍छा प्रभाव नहीं देखा जाता है। खासकर लाल रंग का यह  ग्रह मंगल रक्‍त पर खासा प्रभाव डालता है। इस समय होने वाली बीमारियों में रक्‍त का बनना कम हो जाता है। इसके अलावे इस समय युवाओं में हिम्‍मत और उत्‍साह की थोडी कमी होती है। मंगल की इस प्रकार की स्थिति कई प्रकार की दुर्घटनाओं और युद्ध की विभिषिका की भी जिम्‍मेदार होती है। आम जीवन में भी कोई न कोई ऐसी समस्‍या उपस्थित होती है कि दिनभर का रूटीन चिडचिडाहट वाला होता है। हालांकि इस बार इसके साथ पूर्ण चंद्र का होना बहुत बढिया संकेत है और बडी त्रासदी को टालने वाला है, इसलिए अधिक गडबडी नहीं दिखाई पडती, फिर भी थोडी बहुत संभावना से तो इंकार नहीं किया जा सकता।

पृथ्‍वी की मंगल से इतनी निकट होने की स्थिति के कारण उसकी चुम्‍बकीय शक्ति का प्रभाव पृथ्‍वी पर अधिक पडता है , जिसके कारण इस दिन जन्‍म लेनेवाले युवा स्‍वभाव से हिम्‍मत और साहस की कमी रखते हैं। मंगल कमजोर होने से युवावस्‍था का उनका समय कठिनाइयों से घिरा होता है। न तो कैरियर में ही बडी सफलता प्राप्‍त कर पाते हैं और न ही दाम्‍पत्‍य जीवन सुखमय हो पाता है। 30 वर्ष के उम्र के आसपास इनकी कठिनाइयां चरम सीमा पर होती है, वैसे बाद में समय काफी अच्‍छा हो जाता है। 29 और 30 जनवरी 2010 को जन्‍म लेनेवाले बच्‍चों के साथ भी ऐसे हालात बन सकते हैं , पर पूर्ण चंद्र की स्थिति यहां भी भयावहता को बनने से रोकने वाली है। जन्‍मकुंडली मे ऐसे मंगल के प्रभाव को समझना तो सबके वश की बात नहीं , पर आसमान में इस खूबसूरत दृश्‍य का नजारा तो आप उठा ही सकते हैं !!




13 टिप्‍पणियां:

अन्तर सोहिल ने कहा…

कोशिश करेंगें जी 29-30 को 4 बजे से 6 बजे के बीच शायद दिल्ली में हम भी देख पायें यह नजारा (अगर नंगी आंखों से देखा जा सका तो)
इस जानकारी के लिये धन्यवाद

प्रणाम स्वीकार करें

वन्दना ने कहा…

bahut hi badhiya jankari di sath hi gyan bhi badha........shukriya.

राज भाटिय़ा ने कहा…

अरे दो तीन दिन बाद होता तो हम भी देख लेते, हमारे यहां तो बर्फ़ गिर रही है ओर पिछले तीन महीनो मे सुर्य देवता के दर्शन भी एक दो बार ही हुये है तो इस नजारे को कहा देख पायेगे?लेकिन बहुत अच्छी जानकारी, बहुत से लोग जिन्हे नही पता था अब उन्हे भी पता चल गया.
धन्यवाद

vinay ने कहा…

अच्छी जानकारी दी,इस नजारे को देखने का प्रयत्न करेगें ।

Murari Pareek ने कहा…

कोशिश ये भी करेंगे की कोई बच्चा मंगल गृह कमजोर तब ना जन्मे !! हा..हा.. मजाक कर रहा हूँ लेख सचमुच ज्ञान वर्धक है !!!

प्रवीण शुक्ल (प्रार्थी) ने कहा…

प्रणाम संगीता जी हम भी इस नजारे को देखने का प्रयाश करेगे
सादर
प्रवीण पथिक
९९७१९६९०८४

ज्ञानदत्त पाण्डेय Gyandutt Pandey ने कहा…

अच्छा बताया आपने। कोहरा या बादल न रहे तो देखने का यत्न करेंगे।

डॉ टी एस दराल ने कहा…

अच्छी जानकारी दी संगीता जी।
देखते हैं दिखता है की नहीं।
लेकिन मंगल गृह का खून पर प्रभाव समझ नहीं आया , कैसे पड़ता है।

संगीता पुरी ने कहा…

डॉ टी एस दराल जी,

मुझे भी अबतक पता नहीं कि ग्रह कैसे प्रभाव डालते हैं ??

समझ में नहीं आता पर प्रतिदिन महसूस कर रही हूं .. मंगल मजबूत हो तो शरीर में रक्‍त और मांसपेशियों की कमजोरी नहीं आती .. इसके अभाव में यह समस्‍या दिखाई पडती है। मानव जीवन में हमलोगों ने मंगल का प्रभाव 24 वर्ष
से 36 वर्ष की उम्र तक और 30 वें वर्ष में अपनी चरम सीमा पर देखा है। एक डॉक्‍टर के रूप में आपने अवश्‍य महसूस किया होगा कि इस समय शरीर से सीमा के अंदर खून निकाला जाए तो खून बनने में देर नहीं लगती , पर इसके बावजूद
कुछ लोगों में एनीमया की सामान्‍य शिकायत पायी जाती है। मंगल कमजोर होने पर ही ऐसा देखा गया है। इस दृष्टि से 29 और 30 जनवरी को अस्‍पतालों में सामान्‍य से अधिक मरीजों को खून चढाने की आवश्‍यकता पड सकती है, वैसे इस क्षेत्र में नियमित रिसर्च कभी किया नहीं , इसमें बहुत रिसर्च की आवश्‍यकता है।

मनोज कुमार ने कहा…

अच्छी जानकारी। धन्यवाद।

डॉ. मनोज मिश्र ने कहा…

अच्छी जानकारी,देखते हैं.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी पोस्ट पढ़कर तो आनन्द आ गया!
इसे चर्चा मंच में भी स्थान मिला है!
http://charchamanch.blogspot.com/2010/01/blog-post_28.html

भारतीय नागरिक - Indian Citizen ने कहा…

अवश्य देखेंगे.