शुक्रवार, 19 मार्च 2010

क्‍या कहता है आपकी जन्‍मकुंडली का केमद्रुम योग ??

काफी दिनों तक ज्‍योतिष के अध्‍ययन और मनन में रत होने के बाद भी सटीक भविष्‍यवाणियां करने में विफल रहे कुछ लोगों से अक्‍सर हमारी मुलाकात हो जाती है , जो अपनी तरह हमें भी ज्‍योतिष का अध्‍ययन छोडने की सलाह देते हैं। उनका मानना है कि ज्‍योतिष के परीक्षित माने जाने वाले सिद्धांत भी बिल्‍कुल गलत है और तर्क के  साथ ही साथ भविष्‍यवाणी करने के लिए भी खरे नहीं उतरते। इसलिए इस विषय पर समय जाया करना बिल्‍कुल व्‍यर्थ है। हालांकि उनका कहना भी पूरी तरह गलत नहीं , जिस तरह एक हाथी के अलग अलग भागों को छूकर कह रहे सभी अंधे लोगों के विचार में से किसी को भी झूठा नहीं ठहराया जा सकता , पर सही दृष्टिवाला व्‍यक्ति ही बता सकता है कि अंधे गलत नहीं कह रहे हैं। ज्‍योतिष के विराट स्‍वरूप को पूरी तरह समझ पाने में कोई सफल नहीं हो सकते हैं , सो ये धारणा तो स्‍वाभाविक है। ज्‍योतिष के हर अंश को अलग अलग विद्वानों द्वारा विभिन्‍न प्रकार से व्‍याख्‍यायित किया गया है , इसमें भी सच्‍चाई ही है , इसे भी नहीं माना जा सकता। जिस तरह समय के साथ धर्म के क्षेत्र में अनेक ऋषि मुनियों के उत्‍तराधिकारियों द्वारा उनके कहे को गलत ढंग से प्रचारित किया गया है , वैसा ही ज्‍योतिष के क्षेत्र में भी हुआ है और सारे नियमों को सही मान लेने से हमारे निष्‍कर्ष भ्रमोत्‍पादक हो जाते हैं।


इसी सिलसिले में कुछ दिन पूर्व ज्‍योतिषीय योग के बारे में चर्चा करते हुए मैने गजकेशरी योग की प्रामाणिकता पर सवाल खडे किए थे। इसी प्रकार योग के रूप में खास चर्चित अमला योग में भी 80 प्रतिशत से अधिक जातक जन्‍म ले सकते हैं। इस प्रकार अनेक योगों की चर्चा ज्‍योतिष में ढंग से नहीं की जा सकी है , जिससं लोग गुमराह होते रहते हैं। इसी प्रकार का एक योग केमद्रुम योग भी है , माना जाता है कि चंद्रमा के दोनो ओर कोई भी ग्रह न हो , तो केमद्रुम योग बन जाता है, मैं इतने दिनों से लोगों की जन्‍मकुंडलियां देख रही हूं , यह योग बिल्‍कुल सामान्‍य तौर पर मिल जाया करता है , बिल्‍कुल अपवाद के तौर पर एक दो जगहों पर ही  कोई अनिष्‍ट होता मुझे दिखा है  , पर ज्‍योतिष में इसके फल के बारे में लिखा गया है .....

केमद्रुम योग में जन्‍म लेनेवाला व्‍यक्ति गंदा और हमेशा दु:खी होता है। अपने गलत कार्यों के कारण ही वह जीवनभर परेशान रहता है। आर्थिक दृष्टि से वह गरीब होता है और आजिविका के लिए दर दर भटकता रहता है। ऐसा व्‍यक्ति हमेशा दूसरों पर ही निर्भर रहता है। पारिवारिक सुख की दृष्टि से भी यह सामान्‍य होता है और संतान द्वारा कष्‍ट प्राप्‍त करता है , उसे स्‍त्री भी चिडचिडे स्‍वभाव की मिली है , पर ऐसे व्‍यक्ति दीर्घायु होते हैं। चाहे धनाढ्य कुल में जातक का जन्‍म हुआ हो या सामान्‍य कुल में , मूर्खतापूर्ण कार्यों के कारण दरिद्र जीवन बिताने को मजबूर होता है।


केमद्रुम योग बडा घातक माना जाता है .......
योगे केमद्रुमे प्राप्‍ते यस्मिन् कस्मिश्‍च जातके।
राजयोगा विनश्‍यंति हरि दृष्‍टवा यथा द्विया:।।


अर्थात् किसी के जन्‍म समय में यदि केमद्रुम योग हो तथा उसकी जन्‍मकुंडली में राजयोग भी हो तो वह विफल हो जाता है। लेकिन समय के साथ साथ इस योग में किसी अनिष्‍ट के न होते देख ज्‍योतिषी इसमें अपवाद जोडते चले गए हैं, जिससे केमद्रुम भंग योग माना जाता है......


जब चंद्रमा सभी ग्रहों से देखा जाता हो।
यदि चंद्रमा शुभ स्‍थान में हो।
यदि चंद्रमा शुभ ग्रहों से युक्‍त हो।
यदि पूर्ण चंद्रमा लग्‍न में हो।
यदि चंद्रमा दसवें भाव में उच्‍च का हो।
केन्‍द्र में चंद्रमा पूर्ण बली हो।


पर राजयोग को समाप्‍त करने में समर्थ केमद्रुम योग के इतने सामान्‍य ढंग के अपवाद हों , यह मेरे बुद्धि को संतुष्ट नहीं करता। सच तो यह है कि केमद्रुम योग कोई योग ही नहीं , जिससे कोई अनिष्‍ट होता है। ज्‍योतिष के इन्‍हीं कपोल कल्पित सिद्धांतों या हमारे पूर्वजों द्वारा ग्रंथों की सही व्‍याख्‍या न किए जाने से से ज्‍योतिष के अध्‍येताओं को ज्ञान की प्राप्ति नहीं हो पाती है और वे ज्‍योतिष को मानने तक से इंकार करते हैं। आज भी सभी ज्‍योतिषियों को परंपरागत सिद्धांतों को गंभीर प्रयोग और परीक्षण के दौर से गुजारकर सटीक ढंग से व्‍याख्‍या किए जाने हेतु एकजुट होने की आवश्‍यकता है , ताकि ज्‍योतिष की विवादास्‍पदता समाप्‍त की जा सके और हम सटीक भविष्‍यवाणियां करने में सफल हो पाएं !!

19 टिप्‍पणियां:

भारतीय नागरिक - Indian Citizen ने कहा…

आप बहुत मेहनत करती हैं, इसलिये भी मुझे आपके लेख अच्छे लगते हैं.

मनोज कुमार ने कहा…

बहुत अच्छी प्रस्तुति।

vinay ने कहा…

ज्योतिश और भी पारमपरिक ज्ञान धुमिल होते जा रहे हैं,इन विषयो पर शोध की नितान्त आवश्यकता है ।

डॉ. मनोज मिश्र ने कहा…

अच्छा विवेचन किया है आपनें,धन्यवाद.

राज भाटिय़ा ने कहा…

आज तो आप पुरी गुस्से मै लगती है जी, वेसे हम तो हमेशा ही सहमत होते है आप से

AlbelaKhatri.com ने कहा…

बहुत दिनों बाद आपको पढने का अवसर मिला

सच.........बहुत ही उम्दा पोस्ट !

Udan Tashtari ने कहा…

बढ़िया जानकारी!

विष्णु बैरागी ने कहा…

आप ज्‍योतिषियों के एकजुट होने की बात कर रही हैं। याद रखिए - विद्वान कभी एक मत नहीं होते।

केमद्रुम योग को लेकर आपने अच्‍छी जानकारी दी है।

YT ने कहा…

आपने सही लिखा है मेरे भाई की कुंडली देख कर ज्योतिषी लोग भी यही कहते हैं यह सभी बुराईया मेरे भाई में है जबकि वह मेरे साथ ही काम करता है घर से आफिस से घर ज्यादा दोस्त भी नहीं है जो है सभी अपने क्षेत्र में मास्टर हैं आवारा नहीं परवरिश और वातावरण भी ऐसा नहीं था या है कि जो इस योग के फल बताए हैं फिर भी एक ग्राहक के कुकर्म की सजा मेरे भाई को जेल जाकर बदनाम होकर भुगतनी पड़ी जिसे हम न जानते थे न पहचानते थे। पुलिस ने जानबुझ कर उलटा केस बना दिया।

योग का असर होता होगा पर जैसा परिभाषित किया गया है उससे मै भी सहमत नहीं हूँ
न जाने कितने अधपके ज्योतिष लियो गोल्ड लेकर बहुत से मासुम बेगुनाह लोगों के बारे में अनर्गल बातें कह कर उनके जीवन में सचमुच केमद्रुम योग साकार कर देते है। यह चिंता जनक है।

Vinod Agrawal ने कहा…

nischit roop se ye mere liye bahut opyogi jankaari rahi

abhiasha11 ने कहा…

कुछ दि‍नों पूर्व मुझे एक ज्‍योति‍षी ने बताया कि मास अप्रैल 2010 से मेरे उपर केमद्रुम योग चल रहा है और इस योग में व्‍यक्ति‍ अर्श से फर्श पर चला जाता है । उन्‍होंने मुझे इसका उपाय तथा पुखराज एवं मोती धारण करने के लि‍ए कहा । ये दोनों रत्‍न मैने पूर्व से ही धारण कि‍या हुआ है । अप्रैल 2010 से अब तक लगभग डेढ़ वर्ष होने को है कोई भी ऐसी घटना मेरे साथ नहीं हुई जि‍ससे यह कहा जा सके कि‍ मैं अर्श से फर्श पर चला गया ।
मैं यह कह सकता हूँ कि‍ मैं गंदा नहीं रहता । हां वि‍भि‍न्न कारणों से दु:खी अवश्‍य रहता हूँ जो कि मेरा ख्‍याल है हर व्‍यक्ति‍, थेाड़ा या अधि‍क, होता ही है। कोई गलत कार्यों में लि‍प्त नहीं रहता ।मेरी आर्थिक स्‍थि‍ति‍ संतोषजनक है । मैं एक प्रति‍ष्‍ठि‍त संस्थान में सेवारत हूँ और मैं अपने कार्यों के लि‍ए दूसरों पर कभी निर्भर नहीं रहता। मुझे अपने संतानों से कोई कष्‍ट प्राप्‍त नहीं होता, मेरी स्‍त्री चिडचिडे स्‍वभाव की नहीं है । हो सकता है कि‍ मैं मूर्खतापूर्ण कार्य करता होउं पर मैं इस कारण दरिद्र जीवन बिताने को मजबूर नहीं हूँ । हां पारिवारिक सुख की दृष्टि से मेरा जीवन सामान्‍य है पर मैं इससे संतुष्‍ट हूँ ।
मैं अपना वि‍वरण दे रहा हूँ मेरी जन्‍मति‍थि 13.9.1970 समय दोपहर 12.35 जन्‍मस्‍थान रांची है । कृपया वि‍स्‍तृत जानकारी दें ।

google ने कहा…

mera dob 15 dec73,time;7;12:30am,madhubani[bihar]

google ने कहा…

mera dob 15 dec73,time;7;12:30am,madhubani[bihar]

astrodeepak ने कहा…

jo aapne likha bilkul thik hai par dukh tab hota hai jab science aade aati hai,bus aage bhi aap aese hi likhti rhe to aage new Genaration ke ye baatain upyogi sabit hongi thanks Astrodeepak

astrodeepak ने कहा…

jo aapne likha bilkul thik hai par dukh tab hota hai jab science aade aati hai,bus aage bhi aap aese hi likhti rhe to aage new Genaration ke ye baatain upyogi sabit hongi thanks Astrodeepak

पंडित दयानन्द शास्त्री ने कहा…

मेरा अनुरोध/निवेदन हें सभी विद्वान् एवं अनुभवी ज्योतिषाचार्यों से की अब समय आ गया हें की हम सभी मिलकर इस प्रकार के योगों के बारें में नयी सोच-खोजबीन करें..ताकि हम समय/ज़माने के साथ चल सकें...
इन योगों को विज्ञानं/समय की कसोटी पर खरा/सच्चा उतरने/ठहराने के लिए हम सभी को सामूहिक प्रयास /प्रयत्न करने होंगे ..

अशोक सोनाणा ने कहा…

आप सभी ने अपना अपना अनुभव बताया है लेकिन मेरे मेरी कुंडली में केंद्रुम योग है और मैं पिछले १३ वर्षो से व्यापार के मामले में दुखी हूँ. चन्द्रमा नितांत अकेला है और पूरी मेहनत के बावजूद व्यापार १२ महीने के अन्दर एकदम से गिर जाता है.. बहुत परेशान हूँ.
ashoksonana@gmail.com, cell 9660170900

Ashwani Tyagi ने कहा…

मैं पिछले लगभग बारह वर्षों से आपके द्वारा विवेचित गत्यात्मक पद्धति पर अनुसन्धान कर रहा हूँ जो लगभग संतोषजनक है| जहाँ तक ज्योतिषीय योगों की बातें हैं, पिछले पच्चीस वर्ष के अनुसंधान और अध्यन में मैंने पाया कि बहुत से योग अधूरे हैं अथवा किसी अन्य योग से लिए गए एक अंश मात्र हैं| केमद्रुम योग भी उनमें से एक है| इस योग का प्रभाव मैंने अलग-अलग कुंडलियों में चंद्रमा पर अन्य ग्रहों के असर और भावों में स्थिति अनुसार भिन्न-भिन्न होते देखा है|

Ramakant Sharma Astrologer & Healer ने कहा…

केमुदृम योग के असर होते हैं.

व्यक्ति जिस आर्थिक स्तर का होता है उससे काफी नीचे का जीवन व्यतीत करता है.

चन्द्रमा मन का कारक होने से मन भी अशांत देखे गए है.