सोमवार, 29 मार्च 2010

दिन ब दिन पारा चढता ही जा रहा है .. अप्रैल , मई और जून में मौसम का क्‍या हाल रहेगा ??

एक सप्‍ताह से इस ब्‍लॉग को अपडेट नहीं कर पा रही थी , कल फुर्सत निकालकर दूसरे जगहों के लिए चार चार पोस्‍ट लिखा , पर इसके बावजूद अपने ब्‍लॉग को अपडेट न कर सकी। बढती हुई गर्मी से परेशान होकर राहत की उम्‍मीद में पंचांग में मौजूद ग्रहों की स्थिति को देखते हुए कुछ आकलन किया । जो भी समझ आया , उसे आप पाठकों के साथ शेयर करते हुए सबसे पहले मौसम का पूर्वानुमान करना आवश्‍यक समझते हुए ये पोस्‍ट लिख रही हूं। मार्च महीने की समाप्ति से पहले ही गर्मी ने अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। पिछले दस दिनों से अधिकतम तापमान ४० डिग्री के इर्द-गिर्द घूमता रहा है । दोपहरी लू की लपटों से भरी रहती हैं और आसमान से धूप आग की तरह बरस रही हैं । मौसम विभाग की मानें तो हर साल मार्च के औसतन तापमान से अभी का तापमान पांच डिग्री सेल्सियस ज्यादा रह रहा है। दिन में तीन किलोमीटर की रफ्तार से चली हवा भी गर्मी से राहत नहीं दिला पा रही है। ऐसी स्थिति में आप सबों का ध्‍यान इस बात पर अवश्‍य होगा कि इस वर्ष अप्रैल , मई और जून में मौसम का क्‍या हाल रहेगा ??


आसमान के ग्रहों के आधार पर 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' द्वारा विकसित किए गए मौसम के सिद्धांतों की माने , तो लगभग 5 या 6 अप्रैल तक गरमी अपनी चरम सीमा पर रहेगी। वैसे इस मध्‍य आसमान में कभी कभार बादल दिखाई दे सकते हैं , वातावरण में आर्द्रता भी रह सकती है , समय समय पर तेज हवाएं भी चल सकती है , तापमान में भी कमी बेशी दिखाई पड सकती है , पर इससे आम जनों को गर्मी से कोई राहत नहीं मिलती दिखेगी। ठीक 6 और 7 अप्रैल को आसमान में एक विशेष ग्रह स्थिति बननवाली है , जिसकी चर्चा मैं दो महीने पहले 5 फरवरी को ही एक पोस्‍ट 'हाथ कंगन को आरसी क्‍या .. फिर 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' के मौसम के सिद्धांत की सत्‍यता की बारी आएगी !!में कर चुकी हूं । इस ग्रहयोग के असर से उसी दिन मध्‍य भारत में कहीं पर मैदानी चक्रवात बनेगा और उसका असर व्‍यापक पैमाने पर दिखाई पडेगा। चारो ओर तेज हवाएं चलेंगी , आसमान के बादल एकत्रित होते जाएंगे और आनेवाले चार दिनों तक यानि 12 अप्रैल तक यत्र तत्र आंधी के साथ ही साथ ओले गिरने और बारिश होने के कारण पारा लुढकेगा । इसी समय पहाडी क्षेत्रों में भी बडे रूप में बर्फ बारी होगी और इसका असर भी मैदानी भागों में पडेगा। इसके कारण उत्‍तर भारत में रहनेवालों को कुछ दिनों तक गर्मी से छुटकारा मिलने की उम्‍मीद बनेगी। 


12 अप्रैल तक के मौसमीय परिवर्तन के बाद भी लगभग 18 अप्रैल तक मौसम कुछ सामान्‍य बना रह सकता है , पर उसके बाद पुन: तेज गर्मी से लोगों का जीना दूभर हो सकता है। 29 अप्रैल के आसपास उत्‍तर भारत के अधिकांश भागों में गर्मी अपनी चरम सीमा पर रहेगी। उसके बाद क्रमश: कुछ सुधार होते हुए 12 मई के बाद स्थिति थोडे नियंत्रण में आ सकती है, क्‍यूंकि 18 मई के आसपास का समय पुन: हल्‍की फुल्‍की बारिश लानेवाला होगा , जो आमजनों को थोडी राहत दे सकता है। उसके बाद मई का बाकी समय भी सामान्‍य गर्मी का ही होगा। 24 जून तक लगातार बढते हुए क्रम में नहीं , वरन् कमोबेश होती हुई गर्मी बनी रहनी चाहिए , पर उसके तुरंत बाद शुभ ग्रहों का प्रभाव आरंभ होगा , जिसके कारण बादल बनने और बारिश होने की शुरूआत हो सकती है , यदि नहीं तो कम से कम मौसम खुशनुमा बना रह सकता है। इस वर्ष यानि 2010 में मौसम की सबसे अधिक बारिश 4 अगस्‍त के आसपास से शुरू होकर 19 सितम्‍बर के आसपास तक होगी। यह समय पूर्ण तौर पर खेती का है , इसलिए इस वर्ष किसानों को अवश्‍य राहत मिलनी चाहिए। बेहतर होगा , किसान पहले से इस भविष्‍यवाणी पर ध्‍यान देते हुए खेती बारी के अपने कार्यक्रम बनाएं !!

16 टिप्‍पणियां:

आशुतोष दुबे ने कहा…

aap sahi kah rahi hai. mausam ki haalat bahut kharab hai.
हिन्दीकुंज

भारतीय नागरिक - Indian Citizen ने कहा…

इस बार तो सामने अनुभूत हो ही जायेगा..

पी.सी.गोदियाल ने कहा…

इस पूर्वानुमान के लिए शुक्रिया संगीता जी !

डॉ. मनोज मिश्र ने कहा…

आपकी यह पोस्ट राहत देने वाली है.

महेन्द्र मिश्र ने कहा…

पूर्वानुमान के लिए शुक्रिया...

राज भाटिय़ा ने कहा…

बहुत सुंदर, लोगो को कुछ समय तो गर्मी से राहत मिलेगी, कुछ दिन पहले आप के ब्लांग पर आया तो कुछ अलग तरह की चेतावनी मिली थी....तो मै बिना पढे ही चला गया था.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

बढ़िया आलेख!
मुझे तो इसका कारण
जनसंख्या का बढ़ना लग रहा है!

ऐसे नही है कि जनसंख्या केवल
मानवों की ही बढ़ी है!

वानर जैसे अन्य जीव जन्तु भी
तेजी के साथ बढ़े हैं!

डॉ टी एस दराल ने कहा…

शुक्र है की भीषण गर्मी के बाद कुछ तो राहत मिलेगी ।
आभार इस जानकारी के लिए ।

विष्णु बैरागी ने कहा…

आपने गर्मी से राहत का पूर्वानुमान प्रकट किया तो हमें तो इसी से इण्‍डक अनुभव होने लगी है।
आपके पूर्वानुमानों को सच होता देखना अच्‍छा लगेगा।

अन्तर सोहिल ने कहा…

आशा है कि पहले की तरह मौसम के बारे में आपके अनुमान सच होंगें।

प्रणाम स्वीकार करें

अन्तर सोहिल ने कहा…

आदरणीया संगीता जी
एक प्रार्थना है कि अगर हो सके तो कृप्या ब्लाग की सैटिंग में साईट फीड में अलाऊ ब्लाग फीड को फुल कर दें, बडी मेहरबानी होगी जी

प्रणाम

Dr. Smt. ajit gupta ने कहा…

आपकी पोस्‍ट से एकबार तो छीटे पड़ ही गए राहत के। अब देखो असर क्‍या होता है?

रंजना [रंजू भाटिया] ने कहा…

चलिए पढ़ कर कुछ तो राहत महसूस हुई ..शुक्रिया इस जानकारी के लिए

vinay ने कहा…

राहत देने वाली जानकारी आम जन और किसानो को।

ज्ञानदत्त पाण्डेय Gyandutt Pandey ने कहा…

बढ़िया खबर किसान के लिये!

बी एस पाबला ने कहा…

चारो ओर तेज हवाएं चलेंगी , आसमान के बादल एकत्रित होते जाएंगे और आनेवाले चार दिनों तक यानि 12 अप्रैल तक यत्र तत्र आंधी के साथ ही साथ ओले गिरने और बारिश होने के कारण पारा लुढकेगा ।

आपकी गणना सही हुई है

13 अप्रैल को भारत के पश्चिम बंगाल, बिहार और असम राज्यों में तूफ़ान ने भारी तबाही मचाई. कम से कम 110 लोगों की मौत, 200 से ज़्यादा लोग घायल. तूफ़ान प्रभावित इलाक़ों में 125 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से हवा चली

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