बुधवार, 21 अप्रैल 2010

पूरे दिनभर का 24 घंटा एक सा नहीं हुआ करता है !!

दो चार दिन पूर्व मैने अपने आलेख में लिखा था कि गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष के अनुसार बहुत दूर की घटनाओं के आकलन में दो चार महीनों , कुछ दूर की घटनाओं के आकलन में दो चार दिनों और प्रतिदिन की घटनाओं के आकलन में पंद्रह से बीस मिनट की गल्‍ती ही होनी चाहिए। कुछ पाठक प्रतिदिन की घटनाओं के आकलन का अर्थ नहीं समझ सकें , जिनकी जिज्ञासा को देखते हुए मैं यह पोस्‍ट लिखना आवश्‍यक समझ रही हूं।

जिस प्रकार पूरे जीवन का हर वर्ष लोगों के लिए एक सा नहीं होता , वर्ष का 365 दिनों में से हर दिन एक सा नहीं होता , उसी प्रकार दिनभर का 24 घंटा एक सा नहीं हुआ करता है। गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष के अनुसार एक ही दिन के विभिन्‍न घंटों में आप भिन्‍न भिन्‍न मन:स्थिति से गुजरते हैं , जिसका अनुमान लगाया जा सकता है। किसी खास घंटे में ही आप मजे ले रहे होते हैं , तो किसी खास घंटे में महत्‍वपूर्ण कार्यों में व्‍यस्‍तता भी होती है , किसी खास घंटे में आप तनाव भी झेल रहे होते हैं। भयंकर तनाव झेल रहे परिचित अक्‍सर ऐसे समयांतराल में फोन कर बैठते हैं , तब मैं उन्‍हें तात्‍कालिक राहत के लिए दो चार घंटे बाद का समय बताती हूं और सचमुच उनका तनाव उसी वक्‍त काफी कम हो जाया करता है।

अभी आसमान में दो दिनों तक एक खास ग्रहस्थिति चल रही है , जो बहुतों को किसी महत्‍वपूर्ण कार्य से संयुक्‍त कर सकती है, पर इस खास ग्रहस्थिति का प्रभाव अलग अलग घंटों में भिन्‍न भिन्‍न होता है। इसी के कारण आप आनेवाले 24 घंटों में से कुछ घंटों के बारे में अनुमान लगा सकते हैं। आप संसार के किसी भी शहर में क्‍यूं न हो, उस शहर में सूर्योदय के समय से 5 घंटे 25 मिनट जोड दें। वहां से लेकर सवा दो घंटे तक आप काफी महत्‍वपूर्ण संदर्भों में उलझे रह सकते हैं।

अभी जो योग चल रहा है , वो आपके तनाव को भी बढा सकता है , पर इसका समयांतराल अलग होगा। अपने शहर में सूर्यास्‍त के समय में 4 घंटे जोड दें , उसके बाद के ढाई घंटे में आप किसी तनाव से गुजर सकते हैं , छोटी मोटी चिडचिडाहट पैदा करनेवाली भी कोई बात हो सकती है। जैसे ही ढाई घंटे बीत जाएंगे आप थोडी राहत महसूस करने लगेंगे। हां पूर्ण तौर पर राहत देनेवाला या किसी प्रकार की खुशखबरी सुनानेवाला समय के लिए सूर्यास्‍त के समय में आपको पौने सात घंटे जोडने पडेंगे। इस आलेख में लिखे गए तथ्‍य को आप जांच सकते हैं , पर यह बीते 12 घंटों के साथ ही साथ आनेवाले 24 या 36 घंटों के लिए ही सार्थक होगा , क्‍यूंकि उसके बाद इस ग्रहयोग का असर कम हो जाएगा और आकलन में भिन्‍नता आएगी। पर मैं इसी तरह की गणना से लोगों के तनाव में राहत के लिए घंटे और मिनट तक की चर्चा किया करती हूं।

16 टिप्‍पणियां:

भारतीय नागरिक - Indian Citizen ने कहा…

आपकी बात सही है...

कुमार राधारमण ने कहा…

उचित स्पष्टीकरण। कई पाठकों का भ्रम दूर होगा।

ललित शर्मा ने कहा…

सटीक कहा आपने
पूरा दिन एक सा नहीं हुआ करता।

आभार

sangeeta swarup ने कहा…

सटीक जानकारी....

ar.blogspot.com ने कहा…

वाह,बहुत बढ़िया जानकारी / इससे कई लोगों को फायदा हो सकता है / इस परोपकार के कार्य के लिए धन्यवाद /

मनोज कुमार ने कहा…

बहुत अच्छी प्रस्तुति।

डॉ. मनोज मिश्र ने कहा…

फिर एक नई बात,गणना कैसे करें.

वन्दना ने कहा…

achchi jankari..........aabhar.

राज भाटिय़ा ने कहा…

संगीता जी बिलकुल सही कहा आप ने, धन्यवाद

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

बात तो आपकी सोलह आने सच है!

Gourav Agrawal ने कहा…

अच्छी जानकारी के लिए धन्यवाद ......

Udan Tashtari ने कहा…

धन्यवाद इस जानकारी का.

रंजना [रंजू भाटिया] ने कहा…

अच्छी लगी यह जानकारी शुक्रिया

विष्णु बैरागी ने कहा…

पोस्‍ट से सहमति-असहमति अपनी जगह किन्‍तु है रोचक।

महफूज़ अली ने कहा…

एक बात और है.... कई लोग लोगों में दूर-दृष्टि नहीं होती.... इसलिए बाल की खाल निकालते हैं.... नॉलेज वाले हमेशा कन्फ्यूज़ रहते हैं.... और जिनको नॉलेज नहीं होती वो बहुत ज्यादा उछलते हैं.... आप हमेशा वैज्ञानिक रूप से बातें कहतीं हैं.... और आपका आंकलन हमेशा सही होता है... भले ही देरी से ही सही...

बहुत अच्छा लगा यह जानकारीपूर्ण पोस्ट....

सतीश सक्सेना ने कहा…

मैं इस विषय पर अज्ञानी हूँ संगीता जी ! हाँ समझाने की इच्छा अवश्य है !शुभकामनायें !