शुक्रवार, 23 अप्रैल 2010

ग्रहों का प्रभाव सिर्फ मुझे ही नजर क्‍यूं आता है ??


21 अप्रैल के आलेख में  मैने आनेवाले दो दिनों के लिए लिखा था कि आप संसार के किसी भी शहर में क्‍यूं न हो, उस शहर में सूर्योदय के समय में 5 घंटे 25 मिनट जोड दें। वहां से लेकर सवा दो घंटे तक आप काफी महत्‍वपूर्ण संदर्भों में उलझे रह सकते हैं। यह बात भी कुछ लोगों की समझ में नहीं आयी। मैं एक उदाहरण की सहायता से इसे स्‍पष्‍ट करने की कोशिश कर रही हूं। मेरे शहर में सूर्योदय 5 बजकर 45 मिनट में हुआ , इसमें 5 घंटे और 25 मिनट जोडने से 11 बजकर 10 मिनट होते हैं। यहां से सवा दो घंटे तक यानि 1 बजकर 25 मिनट तक 23 और 24 अप्रैल दोनो ही दिनों में मैं महत्‍वपूर्ण संदर्भों में उलझी रही। 


मैने यह भी लिखा था , अपने शहर में सूर्यास्‍त के समय में 4 घंटे जोड दें , उसके बाद के ढाई घंटे में आप किसी तनाव से गुजर सकते हैं , छोटी मोटी चिडचिडाहट पैदा करनेवाली भी कोई बात हो सकती है। कल यानि 22 अप्रैल को मेरे शहर में सूर्यास्‍त 6 बजकर 35 मिनट में हुआ , यहां से 4 घंटे जोड दिया जाए तो 10 बजकर 35 मिनट हो जाते हैं। यहां से ढाई घंटों तक किसी प्रकार के तनाव या छोटी मोटी चिडचिडाहट की बात मैने लिखी थी , ठीक सवा दस बजे से साढे बारह बजे तक हमारे कॉलोनी में यानि बोकारो के कॉपरेटिव कॉलोनी में 22 तारीख की रात के इस सवा दो घंटे में बिजली नहीं रही, लोगों के कार्य में परेशानी या बाधा तो आयी ही होगी। 


वैसे तो व्‍यक्तिगत अनुभवों के लिए ही मैने यह पोस्‍ट लिखा था , पर फिर भी इन दोनो व्‍यक्तिगत घटनाओं को ग्रह नहीं जोडते हुए एक और स्‍थान पर आपका ध्‍यान आकर्षित करना चाहूंगी। 22 अप्रैल को भारत के समयानुसार 5 बजकर 30 मिनट में सूर्योदय हुआ , इसमें 5 घंटे 25 मिनट जोडने से 10 बजकर 55 मिनट होते हैं। यहां से ढाई घंटों तक यानि 11 बजे से डेढ बजे तक शेयर बाजार में बहुत बडी तेजी देखने को मिली। तीन चार दिनों से बिल्‍कुल सामान्‍य या थोडे दबाब में रहने वाला बाजार रिलायंस के अच्छे नतीजों की उम्मीद से 11 बजे के बाद अचानक  चढने लगा था। पर ठीक ढाई घंटे के बाद  ग्रीस के कर्ज संकट की वजह से बाजार में अंतिम घंटे में बिकवाली का दबाब आया और फिर से बाजार सामान्‍य हो गया।




कारोबार के तीसरे घंटे में सेंसेक्स और निफ्टी शुरुआती गिरावट से उबर कर हरे निशान पर आ गये। धीरे-धीरे इन सूचकांकों के तेजी की रफ्तार बढ़ती गयी। दोपहर के कारोबार में काफी अच्छी तेजी आ गयी। बाजार की इस तेजी के पीछे रिलायंस इंडस्ट्रीज की अच्छी भूमिका रही। सेंसेक्स 17,778 और निफ्टी 5,332 तक चढ़ गये। दोपहर के कारोबार में बाजार में तेज उछाल के बारे में सीडी इक्विसर्च के निदेशक राजेश अग्रवाल का कहना है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज के नतीजे कल आने वाले हैं। अच्छे नतीजे आने की उम्मीदों के चलते रिलायंस के शेयर में काफी तेजी आयी, जिससे बाकी बाजार भी तेज हो गया।

कारोबार के अंतिम घंटे में बाजार की दिशा ही बदल गयी। बाजार एकदम से फिसल गया और सेंसेक्स और निफ्टी ऊपरी स्तरो पर टिक नहीं पाये। आज के कारोबार में सेंसेक्स 305 अंक तक चढ़ गया था, लेकिन कारोबार के अंत में यह केवल 101 की मजबूती दर्ज कर सका। एनएसई निफ्टी ने भी आज के कारोबार में 87 अंक तक की उछाल दर्ज की पर आखिरकार यह 24 अंक की बढ़त के साथ बंद हुआ।

हालांकि  19 अप्रैल को ही मैने मोल तोल में अपना कॉलम लिखते वक्‍त स्‍पष्‍ट किया था  कि पूरे सप्‍ताह की अनिश्चितता के बाद ऑयल और गैस सेक्‍टर में बढत शुरू होने से सप्‍ताहांत में शेयर बाजार में रौनक बनेगी तथा सेंसेक्‍स और निफ्टी की स्थिति तेज रहेगी , पर ठीक इन्‍हीं ढाई घंटों में इस घटना के होने से ग्रहों के घंटे मिनट तक के प्रभाव की भी पुष्टि हो जाती है। अस्‍पताल में किसी मरीज की हालत बिगडने या किसी अन्‍य प्रकार के अंदेशे में रह रहे लोगों के फोन आने पर उनकी चिंता को दूर करने में मैं इसी प्रकार की सूक्ष्‍म गणना किया करती हूं , क्‍यूंकि ऐसी गणना कर पाना हर वक्‍त संभव नहीं है । इस पोस्‍ट को लिखने का उद्देश्‍य पाठकों को समुचित जानकारी देना ही है !! 

10 टिप्‍पणियां:

भारतीय नागरिक - Indian Citizen ने कहा…

हमें तो आपके लेख पढ़ने में बहुत आनन्द आता है.

मनोज कुमार ने कहा…

बहुत अच्छी जानकारी।

ललित शर्मा ने कहा…

बहुत ही ज्ञानवर्धक पोस्ट
आभार

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी अध्ययनशीलता इसका प्रमुख कारण है!

डॉ. मनोज मिश्र ने कहा…

इस भयानक गर्मी से कब राहत मिलेगी,मौसम विभाग नें तो अच्छी बारिश की भविष्यवाणी कर दी है ,आपका इस पर क्या विचार है.जरा बताएं.

संगीता पुरी ने कहा…

डॉ मनोज मिश्र जी,
मैने तो मौसम की चर्चा करते हुए पुराने आलेख में लिखा है ही कि लगभग 18 अप्रैल तक मौसम कुछ सामान्‍य बना रह सकता है , पर उसके बाद पुन: तेज गर्मी से लोगों का जीना दूभर हो सकता है। 29 अप्रैल के आसपास उत्‍तर भारत के अधिकांश भागों में गर्मी अपनी चरम सीमा पर रहेगी। उसके बाद क्रमश: कुछ सुधार होते हुए 12 मई के बाद स्थिति थोडे नियंत्रण में आ सकती है, क्‍यूंकि 18 मई के आसपास का समय पुन: हल्‍की फुल्‍की बारिश लानेवाला होगा , जो आमजनों को थोडी राहत दे सकता है। उसके बाद मई का बाकी समय भी सामान्‍य गर्मी का ही होगा। 24 जून तक लगातार बढते हुए क्रम में नहीं , वरन् कमोबेश होती हुई गर्मी बनी रहनी चाहिए , पर उसके तुरंत बाद शुभ ग्रहों का प्रभाव आरंभ होगा , जिसके कारण बादल बनने और बारिश होने की शुरूआत हो सकती है , यदि नहीं तो कम से कम मौसम खुशनुमा बना रह सकता है। इस वर्ष यानि 2010 में मौसम की सबसे अधिक बारिश 4 अगस्‍त के आसपास से शुरू होकर 19 सितम्‍बर के आसपास तक होगी। यह समय पूर्ण तौर पर खेती का है , इसलिए इस वर्ष किसानों को अवश्‍य राहत मिलनी चाहिए।

राज भाटिय़ा ने कहा…

बहुत सुंदर जी, मजे दार. मै भुल गया था.
धन्यवाद

वन्दना अवस्थी दुबे ने कहा…

कमाल का अध्ययन है आपका.

वन्दना ने कहा…

बहुत ही गहन अध्ययन और विस्तृत लेख्………………आभार्।

विष्णु बैरागी ने कहा…

आप अपने विषय पर अपनी सम्‍पूर्ण आत्‍मीयता से केन्द्रित रहती हैं। यही आपको विशेष बनाता है।