शुक्रवार, 20 अगस्त 2010

ज्‍योतिष का सही ज्ञान हमें आध्‍यात्‍म की ओर भी ले जाता है !!

किसी खास युग में हर क्षेत्र में किसी प्रकार की सफलता प्राप्‍त करने के लिए चाहे जिन गुणों और ज्ञान का महत्‍व हो , वे किसी एक व्‍यक्ति को शीर्ष तक क्‍यूं न पहुंचा देते हो , उनकी देखा देखी वैसे गुणों को आत्‍मसात कर स्‍वयं भी ऊंचाई पर पहुंचने के लिए चाहे हमारे जैसे कितने भी लोग प्रयत्‍नशील क्‍यूं न हों , सफल होकर हम सांसारिक सफलताओं से लैस ही क्‍यूं न हो जाएं , पर वह चिरंतन और स्‍थायी सुख नहीं दे पाते। स्‍थायी मा‍नसिक सुख प्राप्‍त करने के लिए कुछ ऐसे नियमों की जानकारी आवश्‍यक होती है , जिसे हमारे महापुरूषों द्वारा हर धर्म के सिद्धांतों के रूप में जोड दिया गया। ये सिद्धांत किसी भी व्‍यक्ति से 'अहं' को दूर करते हैं और इनके पालन से हमारे क्रियाकलाप सर्वजनहिताय होते हैं। सिर्फ अपने बारे में ही नहीं , सारे प्राणियों के साथ साथ दुनिया के एक एक कण से प्‍यार और उनकी सुरक्षा के लिए चिंतन ही आध्‍यात्‍म की ओर जाने की सीढी है । आज के दौर में गलत हाथों में जाकर धर्म का स्‍वरूप भले ही विकृत हो गया हो , पर दुनिया के प्रत्‍येक धर्म की खासियत यही थी , इससे इंकार नहीं किया जा सकता। 

आज का युग पूरे स्‍वार्थ का हो गया है , हर व्‍यक्ति को सिर्फ अपने से मतलब है।  अपना शरीर , अपने परिवार , अपने बच्‍चे , अपना व्‍यवसाय और अपना ही विकास , इसके लिए हम कोई भी तरीका अपनाने को तैयार हैं। गलत धरातल पर खडे होने के बाद भी हम अपनी उपलब्धियों पर गुमान करते हैं , बच्‍चों को भी सांसारिक रूप से ही सफल होने के हर गुर सिखाते हैं। एक व्‍यक्ति नहीं , आज सारे ही आगे बढने के लिए एक दूसरे को धक्‍का दे रहे हैं। आज ताकतवर की ही चल रही है , अपनी अपनी ताकत का हम सब दुरूपयोग कर रहे हैं , ऐसे में समस्‍त चर अचर मुसीबत में हैं। जबतक खुद के साथ विपत्ति नहीं आ जाती , दूसरे की समस्‍या पर हंसना आज हमारा खेल बना होता है। पर जब हमारे ऊपर मुसीबत आती है और हम लाचार होते हैं , तब समझ में आता है कि हमने जीवन में क्‍या क्‍या गल्तियां की हैं और हमारी जीवनशैली क्‍या होनी चाहिए। पर तब पछताने के सिवा कुछ भी नहीं होता।

ज्‍योतिष की सहायता से हम ग्रहों के पृथ्‍वी के जड चेतन पर पडनेवाले प्रभाव का अध्‍ययन करते हैं। जिस प्रकार प्रकृति में मौजूद हर जड चेतन की तरह में कुछ न कुछ विशेषताएं होती हैं , इसी प्रकार प्रत्‍येक मनुष्‍य भी भिन्‍न भिन्‍न बनावट के होते हैं , प्रत्‍येक में अलग अलग क्षमता होती है , इसलिए सबके पास सबकुछ नहीं हो सकता। भले ही सभी जड चेतन एक जैसे जीवन चक्र से गुजरते हों , पर चूंकि मनुष्‍य सबसे अधिक विकसित प्राणी है , और इसके जीवन के बहुत सारे आयाम हैं , इस कारण एक जैसे दिखने के बाद भी मनुष्‍य की जीवनशैली एक जैसी नहीं। दुनियाभर में समान उम्र के लोग भी भिन्‍न भिन्‍न परिस्थितियों से गुजरने को बाध्‍य होते हैं , प्रकृति के खास नियम के हिसाब से एक का समय अनुकूल होता है तो दूसरे का प्रतिकूल ।

ज्‍योतिष विषय की सहायता से हमें ग्रहों की मदद से अनुकूल और प्रतिकूल परिथितियों को जानने में मदद मिलती है। जब अनुकूल समय होता है , तो हमारा आत्‍मविश्‍वास बढाने के लिए हमारे मनोनुकूल वातावरण होता है , जबकि प्रतिकूल समय में हमारे साथ ऐसी ऐसी घटनाएं होती हैं , जिनसे हमारे आत्‍मविश्‍वास पर असर पडता है। जब हम अपने मनोनुकूल समय में अपने अधिकार के साथ साथ कर्तब्‍यों का पालन भी करें , तो प्रतिकूल समय में हमें काफी राहत मिल सकती है। पर यदि मनोनुकूल समय में अधिकारों का दुरूपयोग करेंगे , तो उसका बुरा फल प्रतिकूल समय में हमें या हमारे संतान को अवश्‍य झेलने को मजबूर होना होगा। प्रत्‍येक बुरा कार्य करने से पहले हमारी अंतरात्‍मा बारंबार झकझोरती है , पर हम उसे अनसुना करते हैं , पर उस गल्‍ती को करने के बाद एक दिन भी चैन से नहीं रह पाते। जिस सांसारिक सफलता को देखकर हम प्रभावित होते हैं , उसका मनुष्‍य के सुख और चैन से कोई संबंध नहीं होता। प्रकृति से जुडा व्‍यक्ति ही सर्वाधिक सुख और चैन से रह सकता है।

इसके अलावे ज्‍योतिष से हमें इस बात के संकेत मिल जाते हैं कि जातक के आनेवाले समय में किसी खास पक्ष का वातावरण सुखद रहेगा या कष्‍टप्रद ..  इस बात का अहसास होते ही प्रकृति के नियमों के प्रति हमारा विश्‍वास गहराने लगता है। चूंकि सुख और कष्‍ट की सीमा को जान पाना मुश्किल है , इसलिए हमलोग किसी भी परिस्थिति में हार नहीं मानते , अंत अंत तक जीतने की कोशिश करते है , पर न जीत का घमंड होता है , न हार का गम । हम यह मान लेते हैं कि जो भी परिणाम हमारे सामने है , वो प्रकृति के किसी नियम के अनुसार हैं। हमने किसी समय कोई गल्‍ती की , जिसका फल हमें भुगतना पड रहा है। ऐसी स्थिति में हम दूसरों पर व्‍यर्थ का दोषारोपण नहीं करते , प्रकृति को जिम्‍मेदार मानकर अपने मन को कलुषित होने से बचा लेते हैं। हमें विश्‍वास हो जाता है कि यदि जानबूझकर दूसरा हमें कष्‍ट दे रहा है , तो प्रकृति उसका हिसाब किताब अवश्‍य रखती है और आनेवाले दिनों में उसका फल उसे स्‍वयं मिलेगा। इस प्रकार प्रकृति के नियमों के सहारे आध्‍यात्‍म का ज्ञान हमें ज्‍योतिष के माध्‍यम से मिल जाता है।

20 टिप्‍पणियां:

ललित शर्मा-للت شرما ने कहा…

अध्य+आत्म=अध्यात्म
ज्योतिष स्वयं को जानने में मदद करता है
इसलिए अध्यात्म की ओर भी नि:संदेह ले जाता है।

अच्छी पोस्ट
आभार

'उदय' ने कहा…

...बेहद प्रभावशाली अभिव्यक्ति !!!

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

पोस्ट बहुत ही सार्थक है!
--

वाणी गीत ने कहा…

ज्योतिष का सही ज्ञान और उस असीम शक्ति में विश्वास हमें अध्यात्म की सही राह दिखाता है ...
प्रेरक पोस्ट यदि लोंग प्रेरणा लेना चाहे तो ....:):)

vinay ने कहा…

बहुत कुछ कह गयी आपकी यह पोस्ट,निसन्देह ज्योतिष आध्यत्म की ओर ले जाता है,अन्तरचेतना की आवाज एक प्रकार से इश्वर की आवाज है,अगर इसको बार,बार स्वार्थवश अनसुना किया जाये तो यह आवाज आना बन्द हो जाती है, निशचित ही आध्यात्म सर्वजन हिताय की भावना रखता है ।
बहुत अच्छी प्रेरक पोस्ट ।

nirmal gupt ने कहा…

ज्योतिष निश्चित ही विज्ञानं है ,इसमे अब कोई संदेह नहीं है .सही मार्गदर्शन मददगार होता है .गत्यात्मक ज्योतिष के लिए आप जो कर रही हैं -सरहानीय है.

डॉ महेश सिन्हा ने कहा…

बिना आध्यात्म(अंतर्दृष्टि) के ज्योतिष जैसे विषय का अध्ययन संभव नहीं है । अच्छी पोस्ट।

महेन्द्र मिश्र ने कहा…

बेहद उम्दा प्रस्तुति... आपके विचारों से सहमत हूँ ...आभार

Arvind Mishra ने कहा…

संगीता जी ,बिना ज्योतिष के अध्यात्मी नहीं बना जा सकता क्या ?

संगीता पुरी ने कहा…

अरविंद मिश्र जी .. बिना ज्‍योतिष के आध्‍यात्‍मी तो बहुत लोग बन चुके हैं .. पर ज्‍योतिष का सटीक ज्ञान आध्‍यात्‍म कर ओर जाने के लिए एक नया मार्ग खोलता है !!

वन्दना ने कहा…

बेहद ज्ञानवर्धक और सार्थक आलेख्।

मनोज कुमार ने कहा…

बेहद प्रभावशाली!

nitin ने कहा…

jyotish pahle se likhe hue bhagya ko batata hai ya ek marg darshak hai jo batata hai ki aage kya karaa hai?

agar pahle se hi sabhi kuch likha hai to fir in sabhi baato ka koi matlab nahi rah jata hai.

P S Bhakuni (Paanu) ने कहा…

निसन्देह ज्योतिष आध्यत्म की ओर ले जाता है,
nisandeh ek sarthk post hetu dhanyvad...

cmpershad ने कहा…

ज्योतिष ...... अध्यात्म !!! क्या दखियानुसी बातें हैं !!! यही तो लोग कहेंगे :) पर इन्हें जो ना समझे वो अनाडी है॥

दिव्यांशु भारद्वाज ने कहा…

ज्योतिष में रूचि रखता हूं,इसलिए आपका ब्लॉग सहज आकर्षित करता है। समय के अभाव में ज्यादा अध्ययन नहीं कर पाता हूं। ज्योतिष की वर्तमान स्थिति देखकर दुख होता है। ज्योतिष के क्षेत्र में जहां अधिक वैज्ञानिक अध्ययन होने चाहिए थें वहीं ज्योतिष पर बाजार का प्रभाव कुछ ज्यादा ही पड़ रहा है। ब्लॉग के माध्यम से ज्योतिष संबंधी जानकारी देने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद।

khushi ने कहा…

thnx for explaining the jyothish and its reality....ese hi saath bane rahain.....!!!!! thnx to visit me,

khushi ने कहा…

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