बुधवार, 25 अगस्त 2010

हर क्षेत्र की घुसपैठ से ज्‍योतिष अधिक बदनाम हुआ है !!

आम जनता एक ज्‍योतिषी के बारे में बहुत सारी कल्‍पना करती है , ज्‍योतिषी सर्वज्ञ होता है , वह किसी के चेहरे को देखकर ही सबकुछ समझ सकता है , यदि नहीं तो कम से कम माथे या हाथ की लकीरे देखकर भविष्‍य को बता सकता है। यहां तक कि किसी के नाम से भी बहुत कुछ समझ लेने के लिए हमारे पास लोग आ जाते हैं। एक ज्‍योतिषी खोए हुए वस्‍तु , व्‍यक्ति के बारे में भी बतलाए , शुभ और अशुभ मुहूर्त्‍तों के बारे में भी और हर प्रकार की पूजा की पद्धति के बारे में भी। इतना ही नहीं, एक ज्‍योतिषी आपको कष्‍ट से पूरी तरह उबारे, किसी न किसी प्रकार की पूजा पाठ यंत्र तंत्र मंत्र और पूजा पाठ का सहारा लेकर आपको सफलता के नए नए सोपानों को तय करने में मदद करे। मानो ज्‍योतिषी ज्‍योतिषी न हुए , पूरे भगवान हो गए ।

प्राचीन काल से ही मनुष्‍य बहुत ही महत्‍वाकांक्षी है , वह भूत के अनुभवों  और वर्तमान की वास्‍तविकताओं को लेकर तो काम करता ही आया है , भविष्‍य के बारे में भी अनुमान लगाने की उसकी प्रवृत्ति रही है। प्राचीन काल से ही एक आसमान से उन्‍हें बहुत सारी सूचनाएं मिल जाती थी , सूर्योदय और सूर्यास्‍त की , अमावस्‍या और पूर्णिमा की तथा ऋतु परिवर्तन की भी। आसमान में होनेवाले हवा के रूख और बादलों के जमावडे को देखकर ही बारिश का अनुमान वे लगाते  थे , यहां तक कि आसमान में फैले धूल तूफान का और धुआं आग के फैलने की जानकारी देता था। इस तरह से भविष्‍य को कुछ दूर तक देख पाने में मनुष्‍य आसमान पर निर्भर होता गया और आसमान को देखने की प्रवृत्ति भी विकसित हुई।

कालांतर में ग्रहों नक्षत्रो के पृथ्‍वी पर पडनेवाले प्रभाव को देखते हुए 'ज्‍योतिष' जैसे विषय का विकास किया गया। घटनाओं का ग्रहों से तालमेल होता है , इस दिशा में शोध की अनगिनत संभावनाएं हो सकती है , पर वैदिक ज्ञान ही इस मामले में पर्याप्‍त है , ऐसा नहीं माना जा सकता। क्‍यूंकि सैद्धांतिक ज्ञान भले ही सैकडों वर्ष पुरानी पुस्‍तकों में लिखी हों , पर व्‍यावहारिक ज्ञान हमेशा देश , काल और परिस्थिति के अनुरूप होता है। इसलिए आज के प्रश्‍नों का जबाब हम वैदिक कालीन ग्रंथ में नहीं तलाश सकते। इसके लिए हमें नए सिरे से शोध की आवश्‍यकता है ही , यही कारण है कि जब जब ज्‍योतिष को साबित करने की बारी आती है , तो इसकी कई कमजोरियां उजागर हो जाती हैं , हम सफल नहीं हो पाते। लेकिन इतना तो अवश्‍य तय है कि भविष्‍य को जानने और समझने की एकमात्र विधा ज्‍योतिष ही है , इसलिए किसी भी काल में इसका महत्‍व कम नहीं आंका जा सकता।

इसके महत्‍व को देखते हुए ही हर क्षेत्र के लोगों ने इस विषय में घुसपैठ करने की कोशिश की है , कर्मकांडी , आयुर्वेदाचार्य या गणितज्ञ को तो छोड ही दें , जादूगरों और तांत्रिक ने भी इस क्षेत्र में प्रवेश की पूरी कोशिश की। यज्ञ , हवन , पूजा पाठ आदि के लिए विधि विधान की जो बातें हैं , उनकी जानकारी कर्मकांडी पंडितों को बहुत अच्‍छी तरह होती है , पर वैसे सभी पंडित एक अच्‍छे ज्‍योतिषी नहीं हो सकते। इसी प्रकार गणित जानने वाला का ज्‍योतिष से कोई संबंध नहीं होता। आयुर्वेदाचार्य भले ही कुछ बीमारियों का ज्‍योतिष से संबंध बनाकर ज्‍योतिष में एक पाठ जोड दें , पर उनको एक सफल ज्‍योतिषी मानने में बडी बाधाएं आएंगी। जादूगर और तांत्रिक की कला और माया से भी ज्‍योतिष को कोई मतलब नहीं ।

पर इस दिखावटी दुनिया में कुछ गणितज्ञ अपने गणित की गति से , कुछ जादूगर अपने जादू से , कुछ तांत्रिक अपने तंत्र मंत्र से तो कुछ कर्मकांडी अचूक कर्मकांडों से लोगों को भ्रमित कर ज्‍योतिष के क्षेत्र में भी अपना सिक्‍का चलाना चाहते हैं।  इनके क्रियाकलापों के कारण आम जनता 'ज्‍योतिष' जैसे पवित्र विषय का सटीक मतलब नहीं समझ पाती। इसके साथ साथ सदियों से चले आ रहे जन किंवदंतियों को भी ज्‍योतिष में भी जोड दिया गया है। सबका घालमेल होने से ही ज्‍योतिष के एक सही स्‍वरूप की कल्‍पना कर पाने में लोग असमर्थ है। लोगों को यह ज्ञात नहीं हो पाता कि ज्‍योतिष भविष्‍य के बारे में अनुमान में और समय समय पर निर्णय लेने में उनकी बहुत मदद कर सकता है , और यही समाज में ज्‍योतिष के महत्‍व को कम करने की मूल वजह भी है।

15 टिप्‍पणियां:

Manish ने कहा…

hmmmm... achchha laga.

mujhe toh iski A B C D bhi nahin pata but aapne jo likha vo sahi laga...

Mithilesh dubey ने कहा…

ज्यादा भीड़ से लोगों का भटकाव लाजिमी है ।

अन्तर सोहिल ने कहा…

आपकी बात सही लगती है जी

प्रणाम

शंकर फुलारा ने कहा…

कुछ कुछ सही विश्लेषण, ज्योतिष, दर असल एक दम अलग विषय है | इसे केवल आध्यात्म और भूत- भविष्य से जोड़ कर देखना अल्पज्ञता होगी |

डॉ टी एस दराल ने कहा…

सही कहा ।
इस क्षेत्र में बहुत से पाखंडी लोग भी घुसे हुए हैं ।
ये लोगों को बेवक़ूफ़ बनाकर अपना उल्लू सीधा करते हैं ।

मनोज कुमार ने कहा…

आपसे पूरी तरह सहमत हूं।

Mrs. Asha Joglekar ने कहा…

Aapne bilkul sahee wiwechan kiya hai. har jyotishi kee apni visheshta ho sakti hai jaise kisi bhee specialist kee hoti hai.

Udan Tashtari ने कहा…

सही कहा..शायद यही कारण होगा.

राज भाटिय़ा ने कहा…

सहमत है जी आप की बात से, धन्यवाद

वन्दना अवस्थी दुबे ने कहा…

आपकी पोस्ट में सबसे अच्छी बात मुझे लगती है, अन्धविश्वास को बढावा न देने की, और विज्ञानसम्मत जानकारी देने की. अच्छी पोस्ट. आभार.

cmpershad ने कहा…

जब नाटकबाज़ किसी भी काम में घुस जाते हैं, तो वह काम बदनामी से कैसे बचे???

शिवम् मिश्रा ने कहा…

एक बेहद उम्दा पोस्ट के लिए आपको बहुत बहुत बधाइयाँ और शुभकामनाएं !
आपकी पोस्ट की चर्चा ब्लाग4वार्ता पर है यहां भी आएं !

vinay ने कहा…

पर इस दिखावटी दुनिया में कुछ गणितज्ञ अपने गणित की गति से , कुछ जादूगर अपने जादू से , कुछ तांत्रिक अपने तंत्र मंत्र से तो कुछ कर्मकांडी अचूक कर्मकांडों से लोगों को भ्रमित कर ज्‍योतिष के क्षेत्र में भी अपना सिक्‍का चलाना चाहते हैं। इनके क्रियाकलापों के कारण आम जनता 'ज्‍योतिष' जैसे पवित्र विषय का सटीक मतलब नहीं समझ पाती।
बिलकुल सही कहा,इन्ही लोगों ने आम जनता के मन
में ज्योतिष को भ्रामक बना रक्खा है ।

Babli ने कहा…

आपने बिल्कुल सही फ़रमाया है! मैं आपकी बातों से पूरी तरह सहमत हूँ! बहुत बढ़िया !

Anand Rathore ने कहा…

आपसे बिलकुल सहमत हूँ. इस विषय पर मैंने गहरा अध्यन किया है. और पाया है की ज्योतिष एक खोया हुआ विज्ञान है. सबको बताना चाहता हूँ , कि सत्य है. जरुरत है इस पर शोध की , लेकिन आज कोई भी दो किताब पढ़ लेता है और लकता है भविष्य बताने. यही वजह है , कि ज्योतिष बदनाम है. ये ऐसा विषय है , जिसे जानने के लिए एक जनम भी कम है. और वो भी ऐसे समय में जब इसके विशेषग्य नहीं रहे . कोई बहुत बड़ा और ईमानदारी से इस पर शोष नहीं हुआ. मेरे जीवन का मकसद अलग है, जिन लोगों को इस में रूचि है , उन लोगों से प्रार्थना है , कि इससे रोज़ी-रोटी का माध्यम न बनाये, अभी साधना कि ज़रूरत है. खोज कि जरुरत है. तभी आने वाले वक़्त में ज्योतिष को अपना खोया हुआ गौरव हासिल होगा. धन्यवाद