गुरुवार, 7 अक्तूबर 2010

आप पाठकों के लिए प्रतिदिन का उपयोगी राशिफल लेकर आए हैं हम !!

जहां एक ओर ज्‍योतिष को बहुत ही सूक्ष्‍म तौर पर गणना करने वाला शास्‍त्र माना जाता है , वहीं दूसरी ओर पूरी जनसंख्‍या को 12 भागों में बांटकर उनकी राशि के आधार पर राशिफल के रूप में भविष्‍यवाणी करने का प्रचलन भी है। राशिफल के द्वारा दुनियाभर के लोगों को 12 भागों में बांटकर उनके बारे में भविष्‍यवाणी करने का प्रयास आमजनों को भले ही नहीं जंचे , पर इसके वैज्ञानिक आधार की उपेक्षा नहीं की जा सकती। ज्‍योतिष के अनुसार राशि के हिसाब से दुनियाभर के लोगों को 12 भागों में बांटा जा सकता है और उनके बारे में बहुत सारी बाते कही जा सकती हैं ,  भले ही उसमें स्तर , वातावरण , परिस्थिति और उसके जन्मकालीन ग्रहों के सापेक्ष कुछ अंतर हो। जैसे किसी विशेष समय में किसी राशि  के लिए लाभ एक मजदूर को 25-50 रुपए का और एक व्यवसायी को लाखों का लाभ दे सकता है। 

मेरे हिसाब से राशिफल की शुरूआत उस वक्‍त की मानी जा सकती है , जब आम लोगों के पास उनके जन्‍म विवरण न हुआ करते हों पर अपने भविष्‍य के बारे में जानने की कुछ इच्‍छा रहती हो। पंडितो द्वारा रखे गए नाम में से उनकी राशि को समझ पाना आसान था, इसलिए ज्‍योतिषियों ने उनकी राशि के आधार पर गोचर के ग्रहों को देखते हुए भविष्‍यवाणी करने की परंपरा शुरू की हो। चूकि प्राचीन काल में अधिकांश लोगों की जन्‍मकुंडलियां नहीं हुआ करती थी , इसलिए राशिफल की लोकप्रियता निरंतर बढती गयी। गोचर के आधार पर भविष्‍यवाणियां कर पाना बहुत ही कठिन होता है , पर लोकप्रियता प्राप्‍त करने के लिए राशिफल के रूप में कुछ पंक्तियों को इकट्ठा करने का प्रचलन चल पडा , जिसने ज्‍योतिष के पतन में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभायी।

भले ही किसी मुकदमें का हल होते एक पक्ष की हार और एक पक्ष की जीत हमें यह महसूस कराती है कि मुहूर्त्‍त का कोई महत्‍व नहीं , एक ही दिन या घंटा किसी को सुखमय या कष्‍टमय वातावरण दे सकता है , ऐसा नही है। गोचर के ग्रहों के आधार पर किसी किसी दिन सुखमय और किसी किसी दिन कष्‍टमय वातावरण तैयार होता है। गोचर में कभी कभी आसमान में ग्रहों की अत्‍यंत सुखद स्थिति होती है , जिस दिन अधिकांश लग्‍वाले सुखद फल ही महसूस करते हैं , जबकि कभी कभी आसमान में ग्रहों की स्थिति कष्‍टकर होती है , उस दिन अधिकांश लोग कष्‍ट में देखे जाते हैं। इसलिए विभिन्‍न ग्रहों की गत्‍यात्‍मक शक्ति के आधार पर सामान्‍य लोगों के लिए उससे संबंधित कई सामान्‍य पंक्तियां कही जा सकती हैं , भले ही उसमें से कोई पंक्ति किसी के लिए अधिक प्रभावी तथा कोई पंक्ति किसी के लिए कम प्रभावी हो सकती है। पर इसका महत्‍व नहीं है , ऐसा भी नहीं कहा जा सकता।
बहुत पाठक को लग्‍न और राशि में अंतर न समझने के कारण कुछ कन्‍फ्यूजन में पड जाते हैं। लग्‍न और राशि अलग अलग होते हैं , 'गत्‍यात्‍मक ज्‍यातिष' के हिसाब से राशि के आधार पर शुभ या अशुभ दिनों की चर्चा भले ही की जा सकती है , पर संदर्भों को तय करने में लग्‍न की भूमिका महत्‍वपूर्ण होती है , इसलिए विभिन्‍न संदर्भों की स्थिति को जानने के लिए अपना लग्‍न जानना आवश्‍यक होता है। आज तो किसी जातक का लग्‍न राशि निकालने के लिए बहुत सुविधा हो गयी है। इंटरनेट में भी आप अपने लग्‍न और अपनी राशि की जानकारी के लिए कई लिंकों पर जा सकते हैं , यहां और यहां । जन्‍म के शहर के लांगिच्‍यूड और लैटिच्‍यूड की जानकारी के लिए आप इस लिंक पर भी जा सकते हैं। अपने एक पुराने आलेख में मैं राशिफल की वैज्ञानिकता पर कुछ बातें लिख चुकी हूं , उसमें यह भी बताया है कि चंद्र राशि या सूर्य राशि की तुलना में लग्‍न राशि के आधार पर की गयी मासिक , साप्‍ताहिक या दैनिक भविष्‍यवाणियां अधिक उपयोगी हो सकती है। एक नए ब्‍लॉग में लगभग गोचर के चंद्र की स्थिति के आधार पर दो या तीन दिनों का भविष्‍यफल एक पोस्‍ट में समेटते हुए पाठकों के लिए आनेवाले दो तीन दिनों की परिस्थिति का अनुमान लगा पाने की दिशा में कार्य आरंभ किया है , आप सभी लाभ प्राप्‍त करने की कोशिश करे, यह आपके लिए बहुत उपयोगी हो सकता है।

जिन्‍हें लग्‍न की जानकारी न हो , वे अपना जन्‍म विवरण 09835192280 पर एसएमएस करके अपने लग्‍न की जानकारी प्राप्‍त कर सकते हैं ... लग्‍न की जानकारी नि:शुल्‍क दी जाएगी।

14 टिप्‍पणियां:

महेन्द्र मिश्र ने कहा…

लग्‍न और राशि में अंतर जताने के लिए शुक्रिया .....

निर्मला कपिला ने कहा…

संगीता जी बहुत खुशी की बात है बेताबी से इन्तजार रहेगा। धन्यवाद।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

आपका बहुत बहुत आभार!

AlbelaKhatri.com ने कहा…

आज का आलेख मेरे लिए ही नहीं, प्रत्येक पाठक के लिए आकर्षण का केंद्र रहेगा ...उपयोगी है और रोचक भी...

धन्यवाद !

cmpershad ने कहा…

उधर ज़ील जी की न्यूमरोलोजी और इधर आप की ज्योतिष .......... इधर जाऊं या उधर जाऊं :)

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बढ़िया शुरुआत ...इंतज़ार है

मनोज कुमार ने कहा…

बहुत अच्छी और उपयोगी प्रस्तुति।
मध्यकालीन भारत-धार्मिक सहनशीलता का काल (भाग-२), राजभाषा हिन्दी पर मनोज कुमार की प्रस्तुति, पधारें

डॉ. मोनिका शर्मा ने कहा…

अच्छी पहल... इंतज़ार रहेगा....

डॉ टी एस दराल ने कहा…

इस अच्छे प्रयास के लिए शुभकामनायें ।

विष्णु बैरागी ने कहा…

मैं भी देखना चाहूँगा।

ZEAL ने कहा…

सुन्दर जानकारी ....आभार ।

'उदय' ने कहा…

... प्रभावशाली जानकारी, आभार!

shikha varshney ने कहा…

रोचक लगता है ..इंतज़ार रहेगा.

arganikbhagyoday ने कहा…

अच्छी जानकारी दी.

या देवी सर्व भूतेषु सर्व रूपेण संस्थिता |
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ||

-नव-रात्रि पर्व की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं-
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