बुधवार, 13 अक्तूबर 2010

हनुमान पचासा और हनुमान कृपाष्‍टक के बाद अब हनुमान जी की आरती भी

मेरे ब्‍लॉग में आप पहले से हमारे मित्र और पडोसी पं श्रद्धानंद पांडेय जी का हनुमान पचासा और हनुमान कृपाष्‍टक पढ चुके हैं। वैसे तो उनकी बहुत सारी अन्‍य रचनाएं भी प्रकाशित हो चुकी है , यहां तक कि भोजपुरी में रामचरित मानस तक भी , पर मेरे पास उनकी जो पुस्‍तक है , उसमें हनुमान जी की आरती भी लिखी है , जो आज प्रस्‍तुत कर रही हूं .... ......

जय महावीर मारूतनंदन ,
आरती नमन स्‍वीकार करो।
संकटमोचन संकट हर लो ,
बबाधाओं का प्रतीकार करो।।

सागर को पार किया तुमने,
अरिपुर को छार किया तुमने ,
सबका उपकार किया तुमने ,
इस जन का भी उद्धार करो।।

जय कपिवर द्राणाचलधारी ,
ररघुनायक तक हैं आभारी ,
शरणागत के दुख भयकारी ,
सुखमय सबका संसार करो।।

बलवान निरोग रहे काया,
व्‍यापे न कभी कलि की माया,
मन हो प्रभुपद में लपटाया,
ऐसा वरदान उदार करो।।

11 टिप्‍पणियां:

डॉ. मोनिका शर्मा ने कहा…

Bajrang bali ki sunder stuti...

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बहुत अच्छी स्तुति

विष्णु बैरागी ने कहा…

हनुमान और गणेश, दोनों ही देवता, लोकउध्‍दारक हैं।

सतीश सक्सेना ने कहा…

आनंद आ गया संगीता जी ! कंठस्थ योग्य आरती है यह ! श्रद्धानंद पाण्डेय जी को को मेरी हार्दिक शुभकामनायें !

निर्मला कपिला ने कहा…

बहुत सुन्दर आर्ती है। धन्यवाद।

ताऊ रामपुरिया ने कहा…

बहुत सुंदर, दुर्गा अष्टमी एवम दशहरा पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं.

रामराम

Mrs. Asha Joglekar ने कहा…

सुंदर आरती । बोल बजरंग बली की जय ।

गिरीश बिल्लोरे ने कहा…


विजयादशमी पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं

आपकी पोस्ट ब्लॉग4वार्ता पर

arganikbhagyoday ने कहा…

बहुत सुंदर.
दशहरा की हार्दिक बधाई ओर शुभकामनाएँ...

वन्दना अवस्थी दुबे ने कहा…

विजयादशमी की अनन्त शुभकामनायें.

ZEAL ने कहा…

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जय महावीर मारूतनंदन ,
आरती नमन स्‍वीकार करो।
संकटमोचन संकट हर लो ,
बबाधाओं का प्रतीकार करो।।

अति उत्तम स्तुति।

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